आँकड़े (Data) अनेक प्रेक्षणों या तथ्यों का संग्रह होते हैं। जब हम आँकड़ों को एकत्र करके उनका संगठन, निरूपण और विश्लेषण करते हैं, तो उसे आँकड़ों का प्रबंधन कहते हैं। आँकड़ों से हम किसी घटना के बारे में निष्कर्ष निकाल सकते हैं, जैसे कक्षा में सबसे अधिक विद्यार्थियों का पसंदीदा विषय, किसी गाँव की औसत वर्षा आदि। इस अध्याय में हम आँकड़ों का संग्रह, संगठन, दंड आलेख (Bar Graph) द्वारा निरूपण, औसत (माध्य), माध्यिका, बहुलक, परिसर (Range) तथा प्रायिकता की प्रारंभिक अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। दैनिक जीवन में आँकड़ों का उपयोग खेलों के रिकॉर्ड, मौसम की जानकारी और बाजार की कीमतों के विश्लेषण में होता है।
आँकड़े कई तरीकों से एकत्र किए जा सकते हैं, जैसे सर्वेक्षण, प्रयोग या अवलोकन द्वारा। एकत्रित आँकड़े कच्चे (raw) होते हैं, जिन्हें सार्थक बनाने के लिए संगठित करना पड़ता है। संगठन का एक सरल तरीका बारंबारता बंटन सारणी (Frequency Distribution Table) है, जिसमें प्रत्येक मान के साथ उसकी बारंबारता (कितनी बार आया) लिखी जाती है। टैली चिह्न (Tally Marks) का उपयोग बारंबारता गिनने में किया जाता है; चार चिह्न के बाद पाँचवाँ चिह्न तिरछा (काटता हुआ) बनाया जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि 20 विद्यार्थियों के पसंदीदा खेल क्रिकेट (C), कबड्डी (K), फुटबॉल (F) हैं, तो प्रत्येक खेल की बारंबारता गिनकर सारणी बनाई जाती है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कौन सा खेल सबसे अधिक पसंद किया जाता है।
आँकड़ों को चित्रात्मक रूप में दर्शाने का सबसे सामान्य तरीका दंड आलेख है। दंड आलेख में समान चौड़ाई वाले दंड खड़े या क्षैतिज बनाए जाते हैं। दंड की ऊँचाई या लंबाई संगत मान के समानुपाती होती है। दंडों के बीच समान दूरी रखी जाती है। दंड आलेख बनाते समय उपयुक्त स्केल (Scale) चुनना महत्वपूर्ण है, जैसे 1 सेमी = 5 विद्यार्थी। दंड आलेख को देखकर आँकड़ों की तुलना करना बहुत आसान हो जाता है, क्योंकि लंबे दंड का अर्थ अधिक मान है।
सभी प्रेक्षणों का योगफल, प्रेक्षणों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त मान को माध्य कहते हैं। $$\text{माध्य} = \frac{\text{प्रेक्षणों का योगफल}}{\text{प्रेक्षणों की संख्या}}$$ उदाहरण: प्रेक्षण 4, 6, 8, 10, 12 का माध्य = $\frac{4+6+8+10+12}{5} = \frac{40}{5} = 8$। माध्य को औसत भी कहा जाता है।
प्रेक्षणों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने के बाद बीच में आने वाला प्रेक्षण माध्यिका कहलाता है। यदि प्रेक्षणों की संख्या विषम है, तो $\frac{n+1}{2}$वाँ प्रेक्षण; यदि सम है, तो दोनों बीच वाले प्रेक्षणों का औसत माध्यिका होता है। उदाहरण: 5, 2, 9, 4, 7 को आरोही क्रम 2, 4, 5, 7, 9 में लिखने पर माध्यिका = 5।
आँकड़ों में सबसे अधिक बार आने वाला प्रेक्षण बहुलक कहलाता है। उदाहरण: प्रेक्षण 2, 3, 3, 3, 5, 7, 7 में बहुलक 3 है, क्योंकि यह सबसे अधिक बार (3 बार) आया है। यदि किसी आँकड़ों में कोई प्रेक्षण दोहराया नहीं गया हो, तो बहुलक नहीं होता।
किसी आँकड़ों के अधिकतम और न्यूनतम प्रेक्षणों का अंतर परिसर कहलाता है। $$\text{परिसर} = \text{अधिकतम प्रेक्षण} - \text{न्यूनतम प्रेक्षण}$$ उदाहरण: प्रेक्षण 15, 22, 8, 35, 12 का परिसर = $35 - 8 = 27$। परिसर यह बताता है कि आँकड़ों का विस्तार कितना है।
किसी घटना के होने की संभावना को प्रायिकता कहते हैं। जब हम सिक्का उछालते हैं, तो दो समान संभावित परिणाम होते हैं: चित (Head) या पट (Tail)। चित आने की प्रायिकता = $\frac{1}{2}$। इसी प्रकार, पासा फेंकने पर 1 से 6 तक के छह समान संभावित परिणाम होते हैं, अतः संख्या 4 आने की प्रायिकता = $\frac{1}{6}$। $$\text{किसी घटना की प्रायिकता} = \frac{\text{अनुकूल परिणामों की संख्या}}{\text{कुल संभावित परिणामों की संख्या}}$$ किसी घटना की प्रायिकता सदैव 0 और 1 के बीच होती है। यदि घटना निश्चित है तो प्रायिकता 1 होती है, और यदि असंभव है तो 0। प्रायिकता में सिक्का उछालना और पासा फेंकना प्रयोग के सबसे सामान्य उदाहरण हैं।
आँकड़ों के प्रबंधन के प्रश्नों में सबसे पहले दी गई सूचना को बारंबारता सारणी में बदलना होता है। उसके बाद माध्य, माध्यिका, बहुलक और परिसर निकाला जाता है। दंड आलेख से पढ़ने वाले प्रश्नों में दंड की ऊँचाई को स्केल से गुणा करके वास्तविक मान प्राप्त किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि 1 सेमी = 5 विद्यार्थी है और दंड की ऊँचाई 6 सेमी है, तो विद्यार्थियों की संख्या = $6 \times 5 = 30$। प्रायिकता के प्रश्नों में अनुकूल और कुल परिणामों को पहचानना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
| माप | परिभाषा | उदाहरण: 2, 3, 3, 5, 7 |
|---|---|---|
| माध्य (Mean) | योगफल ÷ संख्या | (2+3+3+5+7) ÷ 5 = 4 |
| माध्यिका (Median) | आरोही क्रम में बीच का मान | 3 |
| बहुलक (Mode) | सबसे अधिक बार आने वाला मान | 3 |
| परिसर (Range) | अधिकतम - न्यूनतम | 7 - 2 = 5 |
| प्रयोग | कुल परिणाम | अनुकूल परिणाम | प्रायिकता |
|---|---|---|---|
| सिक्का उछालना (चित) | 2 (चित, पट) | 1 | 1/2 |
| पासा फेंकना (विषम संख्या) | 6 | 3 (1,3,5) | 3/6 = 1/2 |
| पासा फेंकना (6 आना) | 6 | 1 | 1/6 |
| पासा फेंकना (3 से बड़ी संख्या) | 6 | 3 (4,5,6) | 3/6 = 1/2 |
| पासा फेंकना (7 आना) | 6 | 0 | 0 |
आँकड़ों का प्रबंधन हमें सूचनाओं को व्यवस्थित करके सार्थक निष्कर्ष निकालना सिखाता है। बारंबारता सारणी और दंड आलेख आँकड़ों के निरूपण के मुख्य साधन हैं, जबकि माध्य, माध्यिका, बहुलक और परिसर आँकड़ों का सार निकालने में सहायक होते हैं। प्रायिकता की अवधारणा हमें घटनाओं की संभावना को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करने की क्षमता देती है। इन अवधारणाओं की गहरी समझ आगे की कक्षाओं में सांख्यिकी के अध्ययन की नींव रखती है। नियमित अभ्यास से आँकड़ों के प्रत्येक प्रश्न को सरलता से हल किया जा सकता है।