पूर्णांक वे संख्याएँ हैं जिनमें धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य शामिल होते हैं। पूर्णांकों का समुच्चय $\mathbb{Z} = { \ldots, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, \ldots }$ द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। कक्षा 6 में हमने प्राकृत संख्याओं, पूर्ण संख्याओं और ऋणात्मक संख्याओं की प्रारंभिक जानकारी प्राप्त की थी। इस अध्याय में हम पूर्णांकों की संख्या रेखा पर स्थिति, उनके जोड़, घटाव, गुणा और भाग के नियमों तथा विभिन्न गुणधर्मों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। पूर्णांकों का ज्ञान दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी है, जैसे बैंक में धन जमा या निकालना, तापमान का उतार-चढ़ाव, समुद्र तल के ऊपर या नीचे की ऊँचाई, मुनाफा और हानि आदि। उदाहरण के लिए, यदि तापमान शून्य से 5 डिग्री नीचे है तो उसे -5 डिग्री सेल्सियस लिखा जाता है।
पूर्णांकों में शून्य के बाईं ओर ऋणात्मक पूर्णांक और दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक होते हैं। संख्या रेखा पर किसी पूर्णांक की स्थिति उसके मान को दर्शाती है। जो संख्या दाईं ओर होती है वह बड़ी होती है और जो बाईं ओर होती है वह छोटी होती है। उदाहरण के लिए, 3, -2 से बड़ा है और -5, -1 से छोटा है।
किन्हीं दो पूर्णांकों $a$ और $b$ के लिए, यदि $a > b$ है तो $a$ संख्या रेखा पर $b$ के दाईं ओर स्थित होगा। ऋणात्मक पूर्णांकों की तुलना करते समय सावधानी रखनी चाहिए, जैसे -10, -3 से छोटा है, क्योंकि संख्या रेखा पर -10, -3 के बाईं ओर स्थित है।
किसी पूर्णांक को घटाने का अर्थ है उसके विपरीत (योज्य प्रतिलोम) को जोड़ना। $$a - b = a + (-b)$$ उदाहरण के लिए, $7 - 4 = 7 + (-4) = 3$ और $7 - (-4) = 7 + 4 = 11$।
किसी धनात्मक पूर्णांक और ऋणात्मक पूर्णांक का गुणनफल ऋणात्मक होता है, जबकि दो ऋणात्मक पूर्णांकों का गुणनफल धनात्मक होता है।
| गुणनफल नियम | परिणाम |
|---|---|
| धन × धन | धन (जैसे $4 \times 3 = 12$) |
| धन × ऋण | ऋण (जैसे $4 \times (-3) = -12$) |
| ऋण × धन | ऋण (जैसे $(-4) \times 3 = -12$) |
| ऋण × ऋण | धन (जैसे $(-4) \times (-3) = 12$) |
दो धनात्मक या दो ऋणात्मक पूर्णांकों का भागफल धनात्मक होता है, जबकि विपरीत चिह्नों वाले पूर्णांकों का भागफल ऋणात्मक होता है। $$12 \div 4 = 3, \quad (-12) \div (-4) = 3, \quad 12 \div (-4) = -3, \quad (-12) \div 4 = -3$$
किसी पूर्णांक को शून्य से भाग देना परिभाषित नहीं है, परंतु शून्य को किसी भी अशून्य पूर्णांक से भाग देने पर भागफल शून्य प्राप्त होता है। साथ ही, पूर्णांकों में भाग क्रमविनिमेय नहीं है, क्योंकि $a \div b \neq b \div a$।
किसी भी पूर्णांक $a$ को पूर्णांक $b$ (जहाँ $b \neq 0$) से भाग देने पर हमें ऐसे पूर्णांक $q$ (भागफल) और $r$ (शेषफल) प्राप्त होते हैं कि: $$a = b \times q + r, \quad \text{जहाँ } 0 \le r < |b|$$ उदाहरण के लिए, -47 को 5 से भाग देने पर $(-47) = 5 \times (-10) + 3$ अर्थात भागफल -10 और शेषफल 3 होता है। ध्यान दें कि शेषफल सदैव धनात्मक या शून्य होता है।
दैनिक जीवन में पूर्णांकों का प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि ऊपर/धन वृद्धि धनात्मक और नीचे/हानि/कमी ऋणात्मक मानी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी स्थान का तापमान दोपहर में 6°C है और रात तक 9°C गिर जाता है, तो रात का तापमान $6 + (-9) = -3°C$ होगा। इसी प्रकार, यदि कोई गोताखोर समुद्र तल से 20 मीटर नीचे है और 7 मीटर ऊपर आता है, तो उसकी नई स्थिति $-20 + 7 = -13$ मीटर (अर्थात समुद्र तल से 13 मीटर नीचे) होगी। ऐसे प्रश्नों में चिह्नों का सही प्रयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।
| संक्रिया | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| समान चिह्नों का जोड़ | निरपेक्ष मान जोड़कर वही चिह्न लगाएँ | $(-6) + (-4) = -10$ |
| विपरीत चिह्नों का जोड़ | बड़े में से छोटा घटाकर बड़े का चिह्न लगाएँ | $6 + (-4) = 2$ |
| ऋण घटाना | ऋण को धन में बदलकर जोड़ें | $6 - (-4) = 10$ |
| समान चिह्नों का गुणा/भाग | धनात्मक परिणाम | $(-6) \times (-4) = 24$ |
| विपरीत चिह्नों का गुणा/भाग | ऋणात्मक परिणाम | $6 \times (-4) = -24$ |
| गुणधर्म | कथन | उदाहरण |
|---|---|---|
| योग की क्रमविनिमेयता | $a + b = b + a$ | $(-5) + 3 = 3 + (-5)$ |
| गुणा की क्रमविनिमेयता | $a \times b = b \times a$ | $(-5) \times 3 = 3 \times (-5)$ |
| योग की साहचर्यता | $(a+b)+c = a+(b+c)$ | $((-2)+3)+4 = (-2)+(3+4)$ |
| वितरण नियम | $a(b+c) = ab+ac$ | $(-2)(3+4) = (-2)(3)+(-2)(4)$ |
| योज्य तत्समक | $a + 0 = a$ | $-7 + 0 = -7$ |
| गुणन तत्समक | $a \times 1 = a$ | $-7 \times 1 = -7$ |
पूर्णांक गणित की नींव हैं। इस अध्याय में हमने पूर्णांकों के जोड़, घटाव, गुणा, भाग और उनके सभी गुणधर्मों का अध्ययन किया। चिह्नों के नियमों को याद रखना और संख्या रेखा की समझ इस अध्याय की कुंजी है। इन नियमों की गहरी समझ आगे की कक्षाओं में परिमेय संख्याओं, बीजीय व्यंजकों और समीकरणों को सरल बना देती है। नियमित अभ्यास से पूर्णांकों पर आधारित प्रत्येक प्रश्न सरलता से हल किया जा सकता है।