Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for रेखा एवं कोण.
ज्यामिति वह शाखा है जो आकृतियों, रेखाओं और कोणों के गुणों का अध्ययन करती है। रेखा और कोण ज्यामिति की मूलभूत अवधारणाएँ हैं। एक रेखा (Line) एक सीधी रेखा है जो दोनों दिशाओं में अनंत तक बढ़ती है। एक रेखाखंड (Line Segment) रेखा का वह भाग है जिसके दो सिरे होते हैं। एक किरण (Ray) वह रेखा है जिसका एक सिरा होता है और दूसरी दिशा में अनंत तक बढ़ती है। जब दो किरणें एक सामान्य बिंदु (शीर्ष) से मिलती हैं, तो कोण बनता है। इस अध्याय में हम रेखाओं के प्रकार, कोणों के प्रकार, संपूरक और कोटिपूरक कोण, आसन्न कोण, रैखिक युग्म, तथा दो समांतर रेखाओं को एक तिर्यक रेखा के काटने से बनने वाले कोणों के संबंधों का अध्ययन करेंगे।
एक रेखाखंड की लंबाई ज्ञात करना और उसे मापना मापन का आधार है। रेखाखंड के मध्य बिंदु से वह दो बराबर भागों में विभाजित हो जाता है।
कोण का मापन डिग्री (°) में किया जाता है। एक पूर्ण चक्कर $360°$ का होता है।
दो कोणों का योग यदि $90°$ हो, तो वे एक-दूसरे के कोटिपूरक होते हैं। उदाहरण: $30°$ और $60°$। यदि एक कोण $x$ है, तो उसका कोटिपूरक $90° - x$ होता है।
दो कोणों का योग यदि $180°$ हो, तो वे एक-दूसरे के संपूरक होते हैं। उदाहरण: $110°$ और $70°$। यदि एक कोण $x$ है, तो उसका संपूरक $180° - x$ होता है।
दो कोणों में से एक कोण दूसरे का $\frac{2}{3}$ हो तथा उनका योग $90°$ हो, तो संख्या ज्ञात करने जैसे प्रश्नों में कोणों को $x$ और $90° - x$ मानकर समीकरण बनाकर हल किया जाता है।
दो कोण आसन्न कहलाते हैं यदि उनका एक उभयनिष्ठ शीर्ष, एक उभयनिष्ठ भुजा हो और वे एक-दूसरे के भीतर न आएं।
यदि दो आसन्न कोणों की अभी उभयनिष्ठ भुजाएँ एक सरल रेखा बनाती हैं, तो वे रैखिक युग्म बनाते हैं। रैखिक युग्म के कोणों का योग सदैव $180°$ होता है।
जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, तो सामने वाले कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं। शीर्षाभिमुख कोण सदैव बराबर होते हैं। यदि दो रेखाएँ $l$ और $m$ बिंदु $O$ पर प्रतिच्छेद करती हैं और एक कोण $60°$ है, तो उसके सामने वाला शीर्षाभिमुख कोण भी $60°$ होगा।
जब एक रेखा (तिर्यक रेखा, Transversal) दो समांतर रेखाओं को काटती है, तो निम्नलिखित कोण बनते हैं:
यदि तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है और एक संगत कोण $x$ है, तो सभी संगत कोण $x$ के बराबर होंगे। संगत कोण, एकांतर कोण और अंत: कोणों के गुणों की सहायता से अज्ञात कोण ज्ञात किए जा सकते हैं।
यदि तिर्यक रेखा द्वारा बनाए गए संगत कोण या एकांतर कोण बराबर हों, तो रेखाएँ समांतर होती हैं।
कोणों की समस्याओं में दिए गए संबंधों के अनुसार समीकरण बनाकर अज्ञात कोण ज्ञात किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि दो कोटिपूरक कोणों में से एक दूसरे का दोगुना है, तो $x + 2x = 90°$ से $x = 30°$ और दूसरा कोण $60°$ प्राप्त होता है। इसी प्रकार, यदि दो कोण रैखिक युग्म में हैं और उनका अनुपात $2:3$ है, तो $2x + 3x = 180°$ से $x = 36°$, अतः कोण $72°$ और $108°$ होंगे। शीर्षाभिमुख कोणों की समानता और संपूरक कोणों के नियमों का उपयोग करके अज्ञात कोण आसानी से ज्ञात किए जाते हैं।
| कोण | माप | उदाहरण |
|---|---|---|
| न्यून कोण | 0° < θ < 90° | 45° |
| समकोण | θ = 90° | 90° |
| अधिक कोण | 90° < θ < 180° | 120° |
| सरल कोण | θ = 180° | 180° |
| प्रतिवर्ती कोण | 180° < θ < 360° | 270° |
| पूर्ण कोण | θ = 360° | 360° |
| संबंध | शर्त | उदाहरण |
|---|---|---|
| कोटिपूरक | योग = 90° | 30° + 60° |
| संपूरक | योग = 180° | 110° + 70° |
| रैखिक युग्म | आसन्न + योग 180° | 120° + 60° |
| शीर्षाभिमुख | बराबर | 45° और 45° |
| संगत कोण | बराबर | 50° और 50° |
| एकांतर कोण | बराबर | 70° और 70° |
| अंत: कोण (एक ही भुजा पर) | संपूरक | 110° + 70° |
graph TD
A["रेखा एवं कोण"] --> B["रेखाएँ"]
B --> B1["समांतर, प्रतिच्छेदी, लंब"]
A --> C["कोणों के प्रकार"]
C --> C1["न्यून, सम, अधिक, सरल, प्रतिवर्ती"]
A --> D["कोण संबंध"]
D --> D1["कोटिपूरक 90°, संपूरक 180°"]
A --> E["तिर्यक रेखा के कोण"]
E --> E1["संगत, एकांतर बराबर; अंत: कोण संपूरक"]
A --> F["शीर्षाभिमुख कोण"]
F --> F1["बराबर होते हैं"]
रेखा और कोण ज्यामिति की आधारशिला हैं। इस अध्याय में हमने रेखाओं के प्रकार, कोणों के प्रकार, कोटिपूरक-संपूरक कोण, रैखिक युग्म, शीर्षाभिमुख कोण तथा समांतर रेखाओं पर तिर्यक रेखा द्वारा बनाए गए कोणों के गुणों का अध्ययन किया। कोणों के बीच के संबंधों की समझ त्रिभुजों के गुण, सर्वांगसमता और प्रायोगिक ज्यामिति जैसे आगे के अध्यायों की नींव रखती है। चित्र बनाकर अभ्यास करने से कोणों की अवधारणा अधिक स्पष्ट होती है।