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1. परिचय

परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हैं तथा $q \neq 0$ है। यहाँ $p$ को अंश और $q$ को हर कहते हैं। जैसे $\frac{3}{4}, -\frac{5}{6}, \frac{7}{-8}$ परिमेय संख्याएँ हैं। सभी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक और भिन्न परिमेय संख्याएँ हैं। उदाहरण के लिए, पूर्णांक 5 को $\frac{5}{1}$ के रूप में लिखा जा सकता है। इस अध्याय में हम परिमेय संख्याओं की मानक रूप, समतुल्य परिमेय संख्याएँ, संख्या रेखा पर निरूपण, तुलना और परिमेय संख्याओं का जोड़, घटाव, गुणा, भाग का अध्ययन करेंगे। परिमेय संख्याएँ परिमेय नहीं होने वाली संख्याओं (अपरिमेय संख्याओं) से भिन्न होती हैं।

2. परिमेय संख्याएँ क्या हैं (What are Rational Numbers)

एक संख्या $r$ परिमेय है यदि इसे $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p, q$ पूर्णांक और $q \neq 0$।

परिमेय संख्याएँ जिनका मान शून्य है

परिमेय संख्या $\frac{0}{q}$ (जहाँ $q \neq 0$) का मान 0 होता है। परंतु $\frac{p}{0}$ परिभाषित नहीं है, क्योंकि शून्य से भाग देना संभव नहीं है।

समतुल्य परिमेय संख्याएँ (Equivalent Rational Numbers)

किसी परिमेय संख्या के अंश और हर को एक ही अशून्य पूर्णांक से गुणा या भाग करने पर समतुल्य परिमेय संख्याएँ प्राप्त होती हैं। जैसे $\frac{2}{3} = \frac{4}{6} = \frac{6}{9}$।

मानक रूप (Standard Form)

परिमेय संख्या का मानक रूप वह होता है जिसमें हर धनात्मक होता है, अंश और हर के बीच कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड (1 के अतिरिक्त) नहीं होता। जैसे $\frac{3}{4}, \frac{-5}{9}$। $\frac{-6}{8}$ को मानक रूप में $\frac{-3}{4}$ लिखा जाता है।

3. संख्या रेखा पर परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers on the Number Line)

परिमेय संख्या को संख्या रेखा पर प्रदर्शित किया जा सकता है। $\frac{3}{4}$ को संख्या रेखा पर 0 और 1 के बीच के खंड को 4 बराबर भागों में बाँटकर तीसरा भाग चुनकर दर्शाया जाता है। ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ 0 के बाईं ओर होती हैं। उदाहरण के लिए, $-\frac{5}{6}$ को -1 और 0 के बीच छह भागों में बाँटकर प्रदर्शित किया जाता है।

4. परिमेय संख्याओं की तुलना (Comparison of Rational Numbers)

परिमेय संख्याओं की तुलना करते समय: - धनात्मक परिमेय संख्या: 0 से बड़ी होती है। - ऋणात्मक परिमेय संख्या: 0 से छोटी होती है। - धनात्मक परिमेय संख्या, ऋणात्मक से सदैव बड़ी होती है। - दो परिमेय संख्याओं की तुलना के लिए उन्हें समान हर (हरों का ल.स.) वाली संख्याओं में बदलकर अंशों की तुलना की जाती है।

उदाहरण के लिए, $\frac{3}{4}$ और $\frac{5}{6}$ की तुलना के लिए ल.स. 12 लेने पर $\frac{9}{12}$ और $\frac{10}{12}$ प्राप्त होते हैं, अतः $\frac{5}{6} > \frac{3}{4}$। इसी प्रकार, $-2$ और $-3$ में से $-2 > -3$ होता है।

5. परिमेय संख्याओं का जोड़ और घटाव (Addition and Subtraction of Rational Numbers)

समान हरों का जोड़-घटाव

जब हर समान हों, तो अंशों का जोड़-घटाव करके हर वही रखा जाता है: $$\frac{2}{7} + \frac{3}{7} = \frac{5}{7}, \quad \frac{5}{9} - \frac{2}{9} = \frac{3}{9} = \frac{1}{3}$$

भिन्न हरों का जोड़-घटाव

जब हर भिन्न हों, तो हरों का ल.स. निकालकर परिमेय संख्याओं को समान हर में बदला जाता है: $$\frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{3}{6} + \frac{2}{6} = \frac{5}{6}$$

ऋणात्मक परिमेय संख्याओं के जोड़-घटाव में पूर्णांकों के चिह्न नियम लागू होते हैं।

6. परिमेय संख्याओं का गुणा और भाग (Multiplication and Division of Rational Numbers)

गुणा

$$\frac{a}{b} \times \frac{c}{d} = \frac{a \times c}{b \times d}$$ उदाहरण: $\frac{-2}{3} \times \frac{5}{4} = \frac{-10}{12} = \frac{-5}{6}$। गुणा में चिह्नों के नियम (समान चिह्न = धन, विपरीत = ऋण) लागू होते हैं।

व्युत्क्रम और भाग

किसी परिमेय संख्या $\frac{p}{q}$ का व्युत्क्रम $\frac{q}{p}$ होता है। भाग के लिए भाजक के व्युत्क्रम से गुणा किया जाता है: $$\frac{a}{b} \div \frac{c}{d} = \frac{a}{b} \times \frac{d}{c}$$ उदाहरण: $\frac{-3}{4} \div \frac{9}{8} = \frac{-3}{4} \times \frac{8}{9} = \frac{-24}{36} = \frac{-2}{3}$।

परिमेय संख्याओं के गुणधर्म (Properties)

7. परिमेय संख्याओं की समस्याएँ (Problems on Rational Numbers)

परिमेय संख्याओं के प्रश्नों में सबसे पहले संख्याओं को मानक रूप में लिखना चाहिए, ताकि गणना सरल हो जाए। जोड़-घटाव में समान हर बनाना, गुणा में चिह्नों का ध्यान रखना और भाग में व्युत्क्रम का प्रयोग करना मुख्य कदम हैं। उदाहरण के लिए, $\frac{2}{3}$ और $\frac{-1}{4}$ का योग = $\frac{8}{12} + \frac{-3}{12} = \frac{5}{12}$। दो परिमेय संख्याओं के बीच की परिमेय संख्याएँ असंख्य होती हैं, जैसे $\frac{1}{3}$ और $\frac{2}{3}$ के बीच $\frac{1}{2}$ स्थित है। दो परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा एक और परिमेय संख्या ज्ञात की जा सकती है, इसलिए परिमेय संख्याएँ सघन (Dense) होती हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: तत्समक और प्रतिलोम

गुणधर्म परिभाषा उदाहरण
योज्य तत्समक a + 0 = a 3/4 + 0 = 3/4
गुणन तत्समक a × 1 = a 3/4 × 1 = 3/4
योज्य प्रतिलोम a + (-a) = 0 3/4 + (-3/4) = 0
गुणन प्रतिलोम a × (1/a) = 1 3/4 × 4/3 = 1

तालिका 2: संक्रियाएँ सारांश

संक्रिया नियम उदाहरण
समान हर जोड़ अंश जोड़ें, हर रखें 2/7 + 3/7 = 5/7
भिन्न हर जोड़ ल.स. से समान हर बनाएँ 1/2 + 1/3 = 5/6
गुणा अंश×अंश, हर×हर (-2/3)×(5/4) = -5/6
भाग व्युत्क्रम से गुणा (-3/4)÷(9/8) = -2/3
मानक रूप हर धनात्मक, म.स. 1 -6/8 = -3/4

माइंड मैप

graph TD A["परिमेय संख्याएँ"] --> B["परिभाषा p/q"] B --> B1["p, q पूर्णांक, q ≠ 0"] A --> C["मानक रूप और समतुल्य"] A --> D["संख्या रेखा पर निरूपण"] A --> E["तुलना"] E --> E1["समान हर बनाकर अंश तुलना"] A --> F["संक्रियाएँ"] F --> F1["जोड़, घटाव, गुणा, भाग"] A --> G["गुणधर्म"] G --> G1["तत्समक, प्रतिलोम, वितरण"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

परिमेय संख्या का संख्या रेखा पर निरूपण

परिमेय संख्या 3/4 का निरूपण 0 1 3/4 0 से 1 के बीच 4 बराबर भाग, तीसरा भाग 3/4 है स्वर्ण नियम: परिमेय संख्याएँ सघन हैं दो परिमेय संख्याओं के बीच अनंत परिमेय संख्याएँ होती हैं

परिमेय संख्या का मानक रूप

मानक रूप में लिखना −6/8 हर में ऋण नहीं, म.स. 2 −3/4 अंश-हर म.स. 2 से भाग, हर धनात्मक −6 ÷ 2 = −3, 8 ÷ 2 = 4, अतः −6/8 = −3/4 स्वर्ण नियम: मानक रूप में हर हमेशा धनात्मक अंश और हर का म.स. 1 होना चाहिए

स्वर्ण नियम बॉक्स

Golden Rule (स्वर्ण नियम) किसी परिमेय संख्या का योज्य प्रतिलोम −a है और गुणन प्रतिलोम 1/a है (a ≠ 0)। योज्य प्रतिलोम से योग 0, गुणन प्रतिलोम से गुणनफल 1

सामान्य गलतियाँ

  1. $\frac{p}{0}$ को परिमेय संख्या मान लेना गलत है; हर कभी शून्य नहीं हो सकता ($q \neq 0$)।
  2. परिमेय संख्या के मानक रूप में हर को ऋणात्मक रखना गलत है; हर सदैव धनात्मक होना चाहिए।
  3. जोड़-घटाव में अंशों और हरों दोनों को जोड़ देना गलत है, जैसे $\frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{2}{5}$ लिखना गलत है; पहले समान हर बनाएँ।
  4. गुणन प्रतिलोम को योज्य प्रतिलोम के साथ भ्रमित करना; गुणन प्रतिलोम से गुणनफल 1 आता है, योज्य से योग 0।
  5. परिमेय संख्याओं की तुलना में हरों को समान किए बिना अंशों की तुलना करना गलत है।
  6. $\frac{-2}{3}$ के गुणन प्रतिलोम को $\frac{-3}{2}$ की जगह $\frac{2}{3}$ लिखना गलत है; चिह्न भी उल्टा होता है।
  7. यह मानना गलत है कि दो परिमेय संख्याओं के बीच केवल सीमित परिमेय संख्याएँ होती हैं; वे अनंत होती हैं।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. हर को पहले धनात्मक बनाएँ, फिर संक्रियाएँ करें।
  2. जोड़-घटाव में हरों का ल.स. निकालें और समान हर बनाएँ।
  3. गुणा में चिह्नों के नियम पहले लगाएँ, फिर मानों का गुणा करें।
  4. भाग के प्रश्न में भाजक का व्युत्क्रम लिखकर गुणा करें।
  5. तुलना के प्रश्नों में संख्याओं को समान हर में बदलकर अंशों की तुलना करें।
  6. मानक रूप के प्रश्न में अंश-हर का म.स. निकालकर भाग दें और हर को धनात्मक रखें।
  7. प्रश्न पढ़कर यह पहचानें कि योज्य प्रतिलोम (-a) पूछा गया है या गुणन प्रतिलोम (1/a)।

निष्कर्ष

परिमेय संख्याएँ संख्या पद्धति का महत्वपूर्ण विस्तार हैं, जिनमें भिन्न और पूर्णांक दोनों सम्मिलित हैं। इस अध्याय में हमने परिमेय संख्याओं की परिभाषा, मानक रूप, समतुल्यता, संख्या रेखा पर निरूपण, तुलना और सभी संक्रियाओं के साथ उनके गुणधर्मों का अध्ययन किया। परिमेय संख्याओं की सघनता का गुण उन्हें विशेष बनाता है। इन अवधारणाओं की दृढ़ समझ बीजगणित और घातांक जैसे आगे के अध्यायों की नींव रखती है।