परिमेय संख्याएँ वे संख्याएँ हैं जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हैं तथा $q \neq 0$ है। यहाँ $p$ को अंश और $q$ को हर कहते हैं। जैसे $\frac{3}{4}, -\frac{5}{6}, \frac{7}{-8}$ परिमेय संख्याएँ हैं। सभी प्राकृत संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक और भिन्न परिमेय संख्याएँ हैं। उदाहरण के लिए, पूर्णांक 5 को $\frac{5}{1}$ के रूप में लिखा जा सकता है। इस अध्याय में हम परिमेय संख्याओं की मानक रूप, समतुल्य परिमेय संख्याएँ, संख्या रेखा पर निरूपण, तुलना और परिमेय संख्याओं का जोड़, घटाव, गुणा, भाग का अध्ययन करेंगे। परिमेय संख्याएँ परिमेय नहीं होने वाली संख्याओं (अपरिमेय संख्याओं) से भिन्न होती हैं।
एक संख्या $r$ परिमेय है यदि इसे $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p, q$ पूर्णांक और $q \neq 0$।
परिमेय संख्या $\frac{0}{q}$ (जहाँ $q \neq 0$) का मान 0 होता है। परंतु $\frac{p}{0}$ परिभाषित नहीं है, क्योंकि शून्य से भाग देना संभव नहीं है।
किसी परिमेय संख्या के अंश और हर को एक ही अशून्य पूर्णांक से गुणा या भाग करने पर समतुल्य परिमेय संख्याएँ प्राप्त होती हैं। जैसे $\frac{2}{3} = \frac{4}{6} = \frac{6}{9}$।
परिमेय संख्या का मानक रूप वह होता है जिसमें हर धनात्मक होता है, अंश और हर के बीच कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड (1 के अतिरिक्त) नहीं होता। जैसे $\frac{3}{4}, \frac{-5}{9}$। $\frac{-6}{8}$ को मानक रूप में $\frac{-3}{4}$ लिखा जाता है।
परिमेय संख्या को संख्या रेखा पर प्रदर्शित किया जा सकता है। $\frac{3}{4}$ को संख्या रेखा पर 0 और 1 के बीच के खंड को 4 बराबर भागों में बाँटकर तीसरा भाग चुनकर दर्शाया जाता है। ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ 0 के बाईं ओर होती हैं। उदाहरण के लिए, $-\frac{5}{6}$ को -1 और 0 के बीच छह भागों में बाँटकर प्रदर्शित किया जाता है।
परिमेय संख्याओं की तुलना करते समय: - धनात्मक परिमेय संख्या: 0 से बड़ी होती है। - ऋणात्मक परिमेय संख्या: 0 से छोटी होती है। - धनात्मक परिमेय संख्या, ऋणात्मक से सदैव बड़ी होती है। - दो परिमेय संख्याओं की तुलना के लिए उन्हें समान हर (हरों का ल.स.) वाली संख्याओं में बदलकर अंशों की तुलना की जाती है।
उदाहरण के लिए, $\frac{3}{4}$ और $\frac{5}{6}$ की तुलना के लिए ल.स. 12 लेने पर $\frac{9}{12}$ और $\frac{10}{12}$ प्राप्त होते हैं, अतः $\frac{5}{6} > \frac{3}{4}$। इसी प्रकार, $-2$ और $-3$ में से $-2 > -3$ होता है।
जब हर समान हों, तो अंशों का जोड़-घटाव करके हर वही रखा जाता है: $$\frac{2}{7} + \frac{3}{7} = \frac{5}{7}, \quad \frac{5}{9} - \frac{2}{9} = \frac{3}{9} = \frac{1}{3}$$
जब हर भिन्न हों, तो हरों का ल.स. निकालकर परिमेय संख्याओं को समान हर में बदला जाता है: $$\frac{1}{2} + \frac{1}{3} = \frac{3}{6} + \frac{2}{6} = \frac{5}{6}$$
ऋणात्मक परिमेय संख्याओं के जोड़-घटाव में पूर्णांकों के चिह्न नियम लागू होते हैं।
$$\frac{a}{b} \times \frac{c}{d} = \frac{a \times c}{b \times d}$$ उदाहरण: $\frac{-2}{3} \times \frac{5}{4} = \frac{-10}{12} = \frac{-5}{6}$। गुणा में चिह्नों के नियम (समान चिह्न = धन, विपरीत = ऋण) लागू होते हैं।
किसी परिमेय संख्या $\frac{p}{q}$ का व्युत्क्रम $\frac{q}{p}$ होता है। भाग के लिए भाजक के व्युत्क्रम से गुणा किया जाता है: $$\frac{a}{b} \div \frac{c}{d} = \frac{a}{b} \times \frac{d}{c}$$ उदाहरण: $\frac{-3}{4} \div \frac{9}{8} = \frac{-3}{4} \times \frac{8}{9} = \frac{-24}{36} = \frac{-2}{3}$।
परिमेय संख्याओं के प्रश्नों में सबसे पहले संख्याओं को मानक रूप में लिखना चाहिए, ताकि गणना सरल हो जाए। जोड़-घटाव में समान हर बनाना, गुणा में चिह्नों का ध्यान रखना और भाग में व्युत्क्रम का प्रयोग करना मुख्य कदम हैं। उदाहरण के लिए, $\frac{2}{3}$ और $\frac{-1}{4}$ का योग = $\frac{8}{12} + \frac{-3}{12} = \frac{5}{12}$। दो परिमेय संख्याओं के बीच की परिमेय संख्याएँ असंख्य होती हैं, जैसे $\frac{1}{3}$ और $\frac{2}{3}$ के बीच $\frac{1}{2}$ स्थित है। दो परिमेय संख्याओं के बीच हमेशा एक और परिमेय संख्या ज्ञात की जा सकती है, इसलिए परिमेय संख्याएँ सघन (Dense) होती हैं।
| गुणधर्म | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| योज्य तत्समक | a + 0 = a | 3/4 + 0 = 3/4 |
| गुणन तत्समक | a × 1 = a | 3/4 × 1 = 3/4 |
| योज्य प्रतिलोम | a + (-a) = 0 | 3/4 + (-3/4) = 0 |
| गुणन प्रतिलोम | a × (1/a) = 1 | 3/4 × 4/3 = 1 |
| संक्रिया | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| समान हर जोड़ | अंश जोड़ें, हर रखें | 2/7 + 3/7 = 5/7 |
| भिन्न हर जोड़ | ल.स. से समान हर बनाएँ | 1/2 + 1/3 = 5/6 |
| गुणा | अंश×अंश, हर×हर | (-2/3)×(5/4) = -5/6 |
| भाग | व्युत्क्रम से गुणा | (-3/4)÷(9/8) = -2/3 |
| मानक रूप | हर धनात्मक, म.स. 1 | -6/8 = -3/4 |
परिमेय संख्याएँ संख्या पद्धति का महत्वपूर्ण विस्तार हैं, जिनमें भिन्न और पूर्णांक दोनों सम्मिलित हैं। इस अध्याय में हमने परिमेय संख्याओं की परिभाषा, मानक रूप, समतुल्यता, संख्या रेखा पर निरूपण, तुलना और सभी संक्रियाओं के साथ उनके गुणधर्मों का अध्ययन किया। परिमेय संख्याओं की सघनता का गुण उन्हें विशेष बनाता है। इन अवधारणाओं की दृढ़ समझ बीजगणित और घातांक जैसे आगे के अध्यायों की नींव रखती है।