सममिति वह गुण है जिसमें कोई आकृति किसी रेखा, बिंदु या अक्ष के चारों ओर संतुलित दिखाई देती है। जब किसी आकृति को एक रेखा के दोनों ओर मोड़ा जाए और दोनों भाग बिल्कुल एक-दूसरे पर ढक जाएँ, तो वह रेखा आकृति की सममित रेखा (Line of Symmetry) कहलाती है। प्रकृति में तितलियों के पंख, पत्तियाँ, फूल और मानव चेहरे में सममिति पाई जाती है। इस अध्याय में हम सममित रेखाओं की पहचान, विभिन्न आकृतियों की सममित रेखाओं की संख्या, रेखीय सममिति, घूर्णन सममिति और अक्षरों तथा संख्याओं में सममिति का अध्ययन करेंगे। सममिति कला, वास्तुकला और डिजाइन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जब किसी आकृति को एक सीधी रेखा के अनुदिश मोड़ा जाता है और दोनों हिस्से एक-दूसरे पर पूर्णतः ढक जाते हैं, तो उस आकृति में रेखीय सममिति होती है। वह रेखा सममित रेखा या दर्पण रेखा कहलाती है।
कुछ आकृतियों की सममित रेखाएँ: - समद्विबाहु त्रिभुज: 1 सममित रेखा - आयत: 2 सममित रेखाएँ - वर्ग: 4 सममित रेखाएँ - समबाहु त्रिभुज: 3 सममित रेखाएँ - वृत्त: अनंत सममित रेखाएँ (केंद्र से गुजरने वाली प्रत्येक रेखा)
किसी आकृति की सममित रेखाओं की संख्या ज्ञात करने के लिए उस आकृति को विभिन्न दिशाओं से मोड़कर देखा जाता है। एक नियमित बहुभुज की सममित रेखाओं की संख्या उसकी भुजाओं की संख्या के बराबर होती है: - समबाहु त्रिभुज (3 भुजाएँ): 3 सममित रेखाएँ - वर्ग (4 भुजाएँ): 4 सममित रेखाएँ - नियमित पंचभुज (5 भुजाएँ): 5 सममित रेखाएँ - नियमित षट्भुज (6 भुजाएँ): 6 सममित रेखाएँ
एक नियमित बहुभुज की सममित रेखाएँ उसके शीर्षों और भुजाओं के मध्य बिंदुओं से गुजरती हैं। विषम बहुभुजों में सममित रेखाएँ भिन्न हो सकती हैं।
जब किसी आकृति को किसी बिंदु के चारों ओर एक पूर्ण चक्कर (360°) से कम के कोण पर घुमाया जाए और वह अपनी मूल स्थिति में दिखे, तो उसमें घूर्णन सममिति होती है। जिस बिंदु के चारों ओर आकृति घूमती है, उसे घूर्णन केंद्र कहते हैं।
उदाहरण: वर्ग का घूर्णन कोण $90°$ और घूर्णन क्रम 4 है। समबाहु त्रिभुज का घूर्णन कोण $120°$ और घूर्णन क्रम 3 है। पंखे के ब्लेड, गोल चक्र आदि घूर्णन सममिति के उदाहरण हैं।
कुछ आकृतियों में दोनों प्रकार की सममिति होती है, जैसे वर्ग, वृत्त, आयत। वृत्त की अनंत सममित रेखाएँ होती हैं और इसका घूर्णन क्रम भी अनंत होता है, क्योंकि इसे किसी भी कोण पर घुमाने पर यह मूल जैसा दिखता है। कुछ आकृतियों में केवल एक प्रकार की सममिति होती है।
सममिति का उपयोग टाइलों के डिजाइन, रंगोली, कपड़ों की बुनाई, इमारतों की वास्तुकला और प्रतीक चिह्नों (जैसे कुछ राष्ट्रीय प्रतीक) में किया जाता है। भारतीय कला में ताजमहल, मंदिरों की वास्तुकला और रंगोली के डिजाइन में सममिति स्पष्ट रूप से दिखती है। सममिति आकृतियों को आकर्षक और संतुलित बनाती है। डिजाइन में सममिति से सुंदरता और स्थिरता दोनों प्राप्त होती हैं।
सममिति के प्रश्नों में दी गई आकृति की सममित रेखाओं की संख्या बतानी होती है, अक्षरों या संख्याओं में सममिति पहचाननी होती है, और घूर्णन क्रम ज्ञात करना होता है। घूर्णन क्रम के प्रश्न में $\frac{360°}{\text{घूर्णन कोण}}$ सूत्र का उपयोग होता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी आकृति का घूर्णन कोण $60°$ है, तो घूर्णन क्रम $= \frac{360}{60} = 6$ होगा। दैनिक जीवन में पहिये, घड़ी की सुई, पंखे के ब्लेड आदि घूर्णन सममिति के उदाहरण हैं।
| आकृति | सममित रेखाओं की संख्या |
|---|---|
| समद्विबाहु त्रिभुज | 1 |
| आयत | 2 |
| समबाहु त्रिभुज | 3 |
| वर्ग | 4 |
| नियमित पंचभुज | 5 |
| नियमित षट्भुज | 6 |
| वृत्त | अनंत |
| आकृति | घूर्णन कोण | घूर्णन क्रम |
|---|---|---|
| वर्ग | 90° | 4 |
| समबाहु त्रिभुज | 120° | 3 |
| आयत | 180° | 2 |
| समद्विबाहु त्रिभुज | 360° | 1 |
| वृत्त | कोई भी कोण | अनंत |
सममिति ज्यामिति की वह सुंदर अवधारणा है जो प्रकृति, कला और वास्तुकला में संतुलन का प्रतीक है। रेखीय सममिति में आकृति रेखा से मोड़ने पर ढकती है, जबकि घूर्णन सममिति में आकृति घूमने पर मूल स्थिति जैसी दिखती है। सममित रेखाओं की संख्या और घूर्णन क्रम के नियम इस अध्याय की कुंजी हैं। इन अवधारणाओं की समझ ठोस आकृतियों के चित्रण और आगे की कक्षाओं के ज्यामिति के अध्ययन में सहायक होती है।