त्रिभुज वह सरल बंद आकृति है जो तीन रेखाखंडों से बनती है। त्रिभुज के तीन शीर्ष, तीन भुजाएँ और तीन कोण होते हैं। त्रिभुज की आंतरिक आकृति के गुणों का अध्ययन ज्यामिति की एक महत्वपूर्ण शाखा है। इस अध्याय में हम त्रिभुज के प्रकार, त्रिभुज के कोणों का योग, त्रिभुज की भुजाओं के गुण (त्रिभुज असमिका), पाइथागोरस प्रमेय और समकोण त्रिभुज के गुणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। त्रिभुज दैनिक जीवन में पुलों, इमारतों और विभिन्न संरचनाओं की मजबूती के लिए सर्वत्र प्रयुक्त होते हैं, क्योंकि त्रिभुज आकार में विकृति नहीं आने देते।
एक समकोण त्रिभुज में $90°$ के सामने वाली सबसे लंबी भुजा कर्ण (Hypotenuse) कहलाती है, और अन्य दो भुजाएँ समकोण की भुजाएँ (Legs) कहलाती हैं।
किसी भी त्रिभुज के तीनों कोणों का योग सदैव $180°$ होता है। $$\angle A + \angle B + \angle C = 180°$$ उदाहरण के लिए, यदि त्रिभुज के दो कोण $50°$ और $70°$ हैं, तो तीसरा कोण $= 180° - (50° + 70°) = 60°$ होगा। यह गुण किसी भी त्रिभुज के लिए सत्य है, चाहे वह समबाहु, समद्विबाहु या विषमबाहु हो। इस गुण के आधार पर यह भी सिद्ध होता है कि एक त्रिभुज में एक से अधिक समकोण या अधिक कोण नहीं हो सकते, क्योंकि तब तीनों कोणों का योग $180°$ से अधिक हो जाएगा।
यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा को बढ़ाया जाए, तो बनने वाला बाह्य कोण अपने सन्निकट अंत: कोण का संपूरक होता है, अर्थात उनका योग $180°$ होता है। साथ ही, बाह्य कोण का मान उसके दो विपरीत (आंतरिक) कोणों के योग के बराबर होता है। $$\text{बाह्य कोण} = \text{दो विपरीत अंत: कोणों का योग}$$ उदाहरण के लिए, यदि दो विपरीत अंत: कोण $60°$ और $70°$ हैं, तो बाह्य कोण $= 130°$ होगा।
किसी भी त्रिभुज में दो भुजाओं की लंबाई का योग तीसरी भुजा की लंबाई से सदैव बड़ा होता है। इसके साथ ही, किसी भी दो भुजाओं की लंबाई का अंतर तीसरी भुजा की लंबाई से सदैव छोटा होता है। $$a + b > c, \quad b + c > a, \quad c + a > b$$
उदाहरण के लिए, 3 सेमी, 4 सेमी और 5 सेमी वाली भुजाओं से त्रिभुज बनेगा क्योंकि $3 + 4 > 5$ सत्य है। परंतु 2 सेमी, 3 सेमी और 6 सेमी वाली भुजाओं से त्रिभुज नहीं बनेगा, क्योंकि $2 + 3 = 5 < 6$ है। त्रिभुज बनाने से पहले यह जाँचना आवश्यक है कि दो सबसे छोटी भुजाओं का योग सबसे बड़ी भुजा से अधिक है या नहीं।
समकोण त्रिभुज में कर्ण का वर्ग, समकोण बनाने वाली दोनों भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है। $$\text{कर्ण}^2 = \text{लंब}^2 + \text{आधार}^2$$ अर्थात $c^2 = a^2 + b^2$, जहाँ $c$ कर्ण है। इस प्रमेय का प्रयोग करके किसी समकोण त्रिभुज की अज्ञात भुजा ज्ञात की जा सकती है।
तीन धनात्मक पूर्णांक $a, b, c$ जो $a^2 + b^2 = c^2$ को संतुष्ट करते हैं, पाइथागोरस त्रिक कहलाते हैं। उदाहरण: (3, 4, 5), (6, 8, 10), (5, 12, 13)।
उदाहरण: यदि समकोण त्रिभुज की दो भुजाएँ 3 सेमी और 4 सेमी हैं, तो कर्ण $= \sqrt{3^2 + 4^2} = \sqrt{9 + 16} = \sqrt{25} = 5$ सेमी।
समद्विबाहु त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सामने के कोण बराबर होते हैं। यदि समद्विबाहु त्रिभुज का शीर्ष कोण $80°$ है, तो प्रत्येक आधार कोण $= \frac{180° - 80°}{2} = 50°$ होगा। समबाहु त्रिभुज में प्रत्येक कोण $60°$ होता है। त्रिभुज के किसी शीर्ष से विपरीत भुजा पर खींची गई लंबवत रेखा को शीर्षलंब (Altitude) कहते हैं, और शीर्ष से विपरीत भुजा के मध्य बिंदु तक खींची गई रेखा माध्यिका (Median) कहलाती है। इन गुणों के प्रयोग से अज्ञात कोण और भुजाएँ ज्ञात की जाती हैं।
| प्रकार | आधार | विशेषता |
|---|---|---|
| समबाहु | भुजाएँ | तीनों भुजाएँ व कोण (60°) बराबर |
| समद्विबाहु | भुजाएँ | दो भुजाएँ बराबर, आधार कोण बराबर |
| विषमबाहु | भुजाएँ | तीनों भुजाएँ भिन्न |
| न्यूनकोण | कोण | सभी कोण < 90° |
| समकोण | कोण | एक कोण = 90° |
| अधिक कोण | कोण | एक कोण > 90° |
| गुण | कथन | सूत्र |
|---|---|---|
| कोणों का योग | तीनों कोणों का योग 180° | A + B + C = 180° |
| बाह्य कोण | विपरीत अंत: कोणों के योग के बराबर | ext = A + B |
| त्रिभुज असमिका | दो भुजाओं का योग > तीसरी भुजा | a + b > c |
| पाइथागोरस | कर्ण² = लंब² + आधार² | c² = a² + b² |
त्रिभुज ज्यामिति की सबसे महत्वपूर्ण आकृति है। इस अध्याय में हमने त्रिभुजों के प्रकार, कोणों का योग 180°, बाह्य कोण गुण, त्रिभुज असमिका और पाइथागोरस प्रमेय का अध्ययन किया। ये गुण न केवल गणितीय समस्याओं को हल करने में, बल्कि वास्तविक जीवन की संरचनाओं और मापन में भी उपयोगी हैं। इन गुणों की गहरी समझ सर्वांगसमता, प्रायोगिक ज्यामिति और परिमाप-क्षेत्रफल जैसे आगे के अध्यायों की नींव रखती है।