ठोस आकृतियाँ (Solid Shapes) वे त्रि-आयामी आकृतियाँ हैं जिनकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई होती है। घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला और पिरामिड ठोस आकृतियों के उदाहरण हैं। इस अध्याय में हम ठोस आकृतियों के दृश्य (Views), उनके जाल (Nets), पृष्ठीय क्षेत्रफल, आयतन और ठोस आकृतियों के विभिन्न दृष्टिकोणों से दिखने वाले रूपों का अध्ययन करेंगे। ठोस आकृतियों की समझ वास्तुकला, इंजीनियरिंग और कला में आवश्यक है। किसी ठोस आकृति को सामने से, ऊपर से और बगल से देखने पर भिन्न दृश्य प्राप्त होते हैं, जिन्हें चित्रण द्वारा दर्शाया जाता है।
किसी ठोस आकृति के मुख्य तीन तत्त्व होते हैं: - फलक (Face): ठोस आकृति की समतल सतहें। - किनारा (Edge): दो फलकों के मिलने की रेखा। - शीर्ष (Vertex): तीन या अधिक किनारों का मिलन बिंदु।
किसी भी बहुफलक (Polyhedron) के लिए: $$\text{फलक} (F) + \text{शीर्ष} (V) - \text{किनारा} (E) = 2$$
उदाहरण के लिए, घन में 6 फलक, 8 शीर्ष और 12 किनारे होते हैं, और $6 + 8 - 12 = 2$ संतुष्ट होता है। यूलर का सूत्र बहुफलकीय आकृतियों के तत्त्वों के बीच संबंध स्थापित करता है।
किसी ठोस आकृति को अलग-अलग दिशाओं से देखने पर अलग-अलग दृश्य प्राप्त होते हैं: - सामने का दृश्य (Front View): आकृति को सामने से देखने पर। - पार्श्व दृश्य (Side View): आकृति को बगल से देखने पर। - ऊपर का दृश्य (Top View): आकृति को ऊपर से देखने पर।
उदाहरण के लिए, एक घन को सामने से, बगल से और ऊपर से देखने पर तीनों दृश्य वर्ग जैसे दिखते हैं। परंतु एक बेलन को ऊपर से देखने पर वृत्त और सामने से देखने पर आयत दिखता है। इन दृश्यों का अध्ययन करके ठोस आकृति की त्रि-आयामी संरचना का अनुमान लगाया जा सकता है।
किसी ठोस आकृति को खोलकर समतल पर बिछाने पर जो चपटी आकृति प्राप्त होती है, उसे उस ठोस आकृति का जाल (Net) कहते हैं। जाल को मोड़कर ठोस आकृति बनाई जा सकती है।
जाल में फलकों की संख्या और व्यवस्था ठोस आकृति के निर्माण को निर्धारित करती है। किसी दिए गए जाल को देखकर पहचानना कि उससे कौन सी ठोस आकृति बनेगी, इस अध्याय का महत्वपूर्ण कौशल है।
ठोस आकृति की सभी सतहों के कुल क्षेत्रफल को कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल कहते हैं।
लंबाई $l$, चौड़ाई $b$, ऊँचाई $h$ वाले घनाभ का: $$\text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 2(lb + bh + hl)$$
भुजा $s$ वाले घन का: $$\text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 6s^2$$
त्रिज्या $r$ और ऊँचाई $h$ वाले बेलन का: $$\text{वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 2\pi rh$$ $$\text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 2\pi r(r + h)$$
किसी ठोस आकृति द्वारा घेरे गए स्थान की माप को आयतन कहते हैं। आयतन की इकाई घन इकाई (घन सेमी, घन मीटर) होती है।
उदाहरण के लिए, 10 सेमी भुजा वाले घन का आयतन $= 10 \times 10 \times 10 = 1000$ घन सेमी। 1 घन मीटर $= 100 \times 100 \times 100 = 1000000$ घन सेमी होता है। दैनिक जीवन में दूध, पानी, तेल आदि की माप के लिए आयतन की अवधारणा उपयोगी है।
ठोस आकृतियों के प्रश्नों में फलक-किनारा-शीर्ष की गणना, यूलर सूत्र का प्रयोग, पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन ज्ञात करना होता है। दृश्यों के प्रश्नों में ठोस आकृति के सामने, बगल और ऊपर के दृश्य की पहचान करनी होती है। जाल के प्रश्नों में दिए गए जाल को पहचानकर बताना होता है कि उससे कौन सी आकृति बनेगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी घनाभ की लंबाई 5 सेमी, चौड़ाई 3 सेमी और ऊँचाई 4 सेमी है, तो आयतन $= 5 \times 3 \times 4 = 60$ घन सेमी और कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल $= 2(15 + 12 + 20) = 94$ वर्ग सेमी होगा। बेलन के प्रश्नों में $\pi$ का उचित मान ($\frac{22}{7}$ या 3.14) चुनना आवश्यक है।
| आकृति | फलक | शीर्ष | किनारे |
|---|---|---|---|
| घन | 6 | 8 | 12 |
| घनाभ | 6 | 8 | 12 |
| त्रिभुजाकार पिरामिड | 4 | 4 | 6 |
| चतुष्फलकीय | 5 | 6 | 9 |
| आकृति | कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल | आयतन |
|---|---|---|
| घनाभ | 2(lb + bh + hl) | l × b × h |
| घन | 6s² | s³ |
| बेलन | 2πr(r + h) | πr²h |
| गोला | 4πr² | (4/3)πr³ |
ठोस आकृतियों का चित्रण हमें त्रि-आयामी संसार को द्वि-आयामी कागज पर दर्शाने की क्षमता देता है। फलक, किनारे, शीर्ष, यूलर सूत्र, जाल, पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन इस अध्याय के मुख्य विषय हैं। इन अवधारणाओं की समझ वास्तुकला, इंजीनियरिंग और कला में अत्यंत उपयोगी है। ठोस आकृतियों की दृढ़ समझ आगे की कक्षाओं में क्षेत्रमिति और त्रि-आयामी ज्यामिति के अध्ययन की नींव रखती है।