'अमृतं संस्कृतम्' का अर्थ है - संस्कृत अमृत है। अमृत वह दिव्य द्रव्य है जिसे पीने से अमरत्व प्राप्त होता है। संस्कृत भाषा को अमृत के समान क्यों कहा गया है, यह इस पाठ का मुख्य विषय है। संस्कृत संसार की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसे देवभाषा, देवनगरी भाषा और वेदों की भाषा कहा जाता है। हमारे धर्मग्रंथ वेद, उपनिषद्, रामायण, महाभारत आदि संस्कृत में ही रचित हैं। संस्कृत व्याकरण अत्यंत वैज्ञानिक और शुद्ध है। पाणिनि ने अपने ग्रंथ 'अष्टाध्यायी' में संस्कृत व्याकरण को सूत्रबद्ध किया। संस्कृत भाषा का ज्ञान अमृत के समान अमूल्य है, क्योंकि यह कभी पुराना नहीं होता और सदैव ज्ञानवर्धक रहती है। यह पाठ हमें संस्कृत भाषा के गौरव और महत्व का परिचय देता है।
संस्कृत पाठ: संस्कृतं विश्वस्य प्राचीनतमासु भाषासु एका अस्ति। अस्मिन् भाषायां वेदाः, उपनिषदः, रामायणम्, महाभारतम् इत्यादयः महान्तः ग्रन्थाः लिखिताः सन्ति।
हिंदी अर्थ: संस्कृत संसार की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। इसी भाषा में वेद, उपनिषद्, रामायण, महाभारत आदि महान ग्रंथ लिखे गए हैं। संस्कृत की यह प्राचीनता ही इसे अमृत के समान मूल्यवान बनाती है, क्योंकि यह सहस्रों वर्षों से ज्ञान का स्त्रोत बनी हुई है।
संस्कृत पाठ: संस्कृतं देवानां भाषा इति कथ्यते। अतः एषा देवभाषा इति प्रसिद्धा। देववाणी संस्कृतं सदा पवित्रा अस्ति।
हिंदी अर्थ: संस्कृत को देवताओं की भाषा कहा जाता है। इसलिए यह देवभाषा नाम से प्रसिद्ध है। देववाणी संस्कृत सदा पवित्र है। हमारे सभी धार्मिक अनुष्ठानों, मंत्रों और प्रार्थनाओं की भाषा संस्कृत ही है।
संस्कृत पाठ: महर्षिः पाणिनिः संस्कृतव्याकरणस्य नियमान् 'अष्टाध्यायी' नामके ग्रन्थे सूत्ररूपेण लिखितवान्। संस्कृतव्याकरणं सुव्यवस्थितं वैज्ञानिकं च अस्ति।
हिंदी अर्थ: महर्षि पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण के नियमों को 'अष्टाध्यायी' नामक ग्रंथ में सूत्रों के रूप में लिखा। संस्कृत व्याकरण सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक है। इसकी शुद्धता के कारण संस्कृत में वाक्यों का अर्थ सटीक और स्पष्ट होता है।
संस्कृत पाठ: अद्यतने युगे संस्कृतं संगणकविज्ञानस्य कृते अपि अत्यन्तं उपयुक्ता भाषा मन्यते। तस्याः संरचना सुव्यवस्थिता अस्ति।
हिंदी अर्थ: आधुनिक युग में संस्कृत को कंप्यूटर विज्ञान के लिए भी अत्यंत उपयुक्त भाषा माना जाता है। इसकी संरचना सुव्यवस्थित है। संस्कृत की नियमबद्ध व्याकरणिक संरचना के कारण इसे संगणक (कंप्यूटर) के लिए सर्वोत्तम भाषा कहा गया है।
संस्कृत पाठ: यथा अमृतं जीवनं न वर्धयति, तथा संस्कृतज्ञानं कदापि न पुरातनं भवति। संस्कृतम् अविनाशि ज्ञानभाण्डारम् अस्ति। अतः संस्कृतं अमृतम् इव श्रेष्ठम्।
हिंदी अर्थ: जिस प्रकार अमृत जीवन को (अमरत्व) देता है, उसी प्रकार संस्कृत का ज्ञान कभी पुराना नहीं होता। संस्कृत अविनाशी ज्ञानभंडार है। इसलिए संस्कृत अमृत के समान श्रेष्ठ है। संस्कृत के ज्ञान का कोई अंत नहीं है - जितना पढ़ो, उतना ही अधिक मिलता है।
संस्कृत पाठ: अस्माभिः संस्कृताध्ययनं आवश्यकम्। संस्कृताध्ययनेन अस्माकं प्राचीनसंस्कृतिः ज्ञातुं शक्या। संस्कृतज्ञानं विना अस्माकं मूलानि न ज्ञायन्ते।
हिंदी अर्थ: हमें संस्कृत का अध्ययन करना आवश्यक है। संस्कृत के अध्ययन से हम अपनी प्राचीन संस्कृति को जान सकते हैं। संस्कृत के ज्ञान के बिना हमारे मूल (जड़ों) का ज्ञान नहीं होता। इस प्रकार संस्कृत का अध्ययन हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | भाषा | भाषे | भाषाः |
| द्वितीया | भाषाम् | भाषे | भाषाः |
| तृतीया | भाषया | भाषाभ्याम् | भाषाभिः |
| चतुर्थी | भाषायै | भाषाभ्याम् | भाषाभ्यः |
| पञ्चमी | भाषायाः | भाषाभ्याम् | भाषाभ्यः |
| षष्ठी | भाषायाः | भाषयोः | भाषाणाम् |
| सप्तमी | भाषायाम् | भाषयोः | भाषासु |
| सम्बोधन | हे भाषे | हे भाषे | हे भाषाः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | ग्रन्थः | ग्रन्थौ | ग्रन्थाः |
| द्वितीया | ग्रन्थम् | ग्रन्थौ | ग्रन्थान् |
| तृतीया | ग्रन्थेन | ग्रन्थाभ्याम् | ग्रन्थैः |
| चतुर्थी | ग्रन्थाय | ग्रन्थाभ्याम् | ग्रन्थेभ्यः |
| पञ्चमी | ग्रन्थात् | ग्रन्थाभ्याम् | ग्रन्थेभ्यः |
| षष्ठी | ग्रन्थस्य | ग्रन्थयोः | ग्रन्थानाम् |
| सप्तमी | ग्रन्थे | ग्रन्थयोः | ग्रन्थेषु |
| सम्बोधन | हे ग्रन्थ | हे ग्रन्थौ | हे ग्रन्थाः |
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | जानाति | जानीतः | जानन्ति |
| मध्यम पुरुष | जानासि | जानीथः | जानीथ |
| उत्तम पुरुष | जानामि | जानीवः | जानीमः |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| अमृतम् | अमृत, अमरता देने वाला | प्राचीनतमासु | सबसे प्राचीन |
| वेदाः | वेद | उपनिषदः | उपनिषद् |
| महान्तः | महान | ग्रन्थाः | ग्रंथ |
| देवानाम् | देवताओं का | देवभाषा | देवताओं की भाषा |
| देववाणी | देवों की वाणी | पवित्रा | पवित्र |
| महर्षिः | महर्षि | पाणिनिः | पाणिनि |
| अष्टाध्यायी | व्याकरण ग्रंथ | सूत्ररूपेण | सूत्रों के रूप में |
| वैज्ञानिकम् | वैज्ञानिक | सुव्यवस्थितम् | सुव्यवस्थित |
| संगणकविज्ञानस्य | कंप्यूटर विज्ञान का | उपयुक्ता | उपयुक्त |
| संरचना | संरचना | अविनाशि | अविनाशी |
| ज्ञानभाण्डारम् | ज्ञान का भंडार | श्रेष्ठम् | श्रेष्ठ |
| आवश्यकम् | आवश्यक | संस्कृतिः | संस्कृति |
| मूलानि | जड़ें | ज्ञातुम् | जानने के लिए |
| लिखितवान् | लिखा था | कथ्यते | कहा जाता है |
| मन्यते | माना जाता है | वर्धयति | बढ़ाता है |
संस्कृत को अमृत कहने के पीछे अनेक कारण हैं। सबसे पहले यह संसार की सबसे प्राचीन भाषा है जिसमें वेदों जैसे महान ग्रंथ रचे गए। दूसरे, इसे देवभाषा कहा जाता है। तीसरे, पाणिनि के अष्टाध्यायी व्याकरण के कारण यह अत्यंत वैज्ञानिक और शुद्ध भाषा है। चौथे, आधुनिक युग में संगणक (कंप्यूटर) विज्ञान के लिए इसे सर्वोत्तम भाषा माना गया है। इन्हीं विशेषताओं के कारण संस्कृत को अमृत के समान श्रेष्ठ कहा गया है।
| क्रम | कारण |
|---|---|
| 1 | विश्व की सबसे प्राचीन भाषा |
| 2 | देवभाषा - देवताओं की भाषा |
| 3 | वेदों और महान ग्रंथों की भाषा |
| 4 | पाणिनि का वैज्ञानिक व्याकरण |
| 5 | संगणक विज्ञान के लिए उपयुक्त |
| ग्रंथ | प्रकार |
|---|---|
| वेद | धर्मग्रंथ |
| उपनिषद् | दार्शनिक ग्रंथ |
| रामायण | महाकाव्य |
| महाभारत | महाकाव्य |
| अष्टाध्यायी | व्याकरण ग्रंथ |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| व्याकरणकार | पाणिनि |
| व्याकरण ग्रंथ | अष्टाध्यायी |
| संगणक के लिए | सर्वोत्तम भाषा |
| स्वभाव | अविनाशी ज्ञानभंडार |
अमृतं संस्कृतम् पाठ हमें बताता है कि संस्कृत भाषा अमृत के समान अमूल्य और श्रेष्ठ है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसमें वेदों जैसे महान ग्रंथ रचित हैं। इसे देवभाषा कहा जाता है और पाणिनि के वैज्ञानिक व्याकरण के कारण यह सुव्यवस्थित तथा शुद्ध है। आधुनिक युग में भी संगणक विज्ञान के लिए संस्कृत को सर्वोत्तम भाषा माना गया है। संस्कृत का ज्ञान कभी पुराना नहीं होता, इसलिए यह अविनाशी ज्ञानभंडार है। हमें संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि इससे हम अपनी प्राचीन संस्कृति और मूल्यों से जुड़ते हैं। संस्कृत हमारी सांस्कृतिक विरासत की जड़ है, जिसे सदैव संजोकर रखना चाहिए।