जिज्ञासा शब्द का अर्थ है जानने की इच्छा। जो व्यक्ति निरंतर प्रश्न पूछता है और ज्ञान प्राप्त करना चाहता है, उसे जिज्ञासु कहते हैं। इस पाठ में एक जिज्ञासु बालिका अनारिका की कथा है। अनारिका को अपने आस-पास की हर चीज़ के बारे में जानने की तीव्र उत्सुकता रहती है। वह अपने माता-पिता तथा गुरुजनों से प्रकृति, पशु-पक्षी, आकाश, सूर्य, तारे आदि के बारे में निरंतर प्रश्न पूछती है। उसकी जिज्ञासा के कारण ही उसे बहुत सारा ज्ञान प्राप्त होता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि जिज्ञासा ही ज्ञान की जननी है। जो व्यक्ति प्रश्न पूछने से नहीं डरता, वही जीवन में आगे बढ़ता है। बालकों में प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति सदैव बनी रहनी चाहिए।
संस्कृत पाठ: अनारिका नाम एका बालिका अति जिज्ञासु आसीत्। सा प्रतिदिनम् अनेकान् प्रश्नान् पृच्छति स्म।
हिंदी अर्थ: अनारिका नाम की एक बालिका अत्यंत जिज्ञासु थी। वह प्रतिदिन अनेक प्रश्न पूछा करती थी। उसके मन में हर विषय को जानने की उत्सुकता थी।
संस्कृत पाठ: एकदा अनारिका अम्बां पृष्टवती - हे मातः! पक्षिणः कथम् उड्डयन्ते? नभः किमर्थं नीलवर्णम् अस्ति?
हिंदी अर्थ: एक दिन अनारिका ने माता से पूछा - हे माता! पक्षी कैसे उड़ते हैं? आकाश नीला क्यों होता है? माता ने उसके प्रश्नों का धैर्यपूर्वक उत्तर दिया और बताया कि पक्षियों के पंख और हल्की हड्डियाँ उन्हें उड़ने में सहायता करती हैं।
संस्कृत पाठ: अनारिका पितरं अपृच्छत् - हे तात! सूर्यः कुतः प्रकाशं प्राप्नोति? चन्द्रः कुत्र प्रतिदिनं वर्धते?
हिंदी अर्थ: अनारिका ने पिता से पूछा - हे पिता! सूर्य को प्रकाश कहाँ से मिलता है? चंद्रमा प्रतिदिन कहाँ बढ़ता है? पिता ने उसे समझाया कि सूर्य अपनी ऊर्जा से स्वयं प्रकाशित होता है और चंद्रमा सूर्य के प्रकाश से चमकता है तथा अपनी स्थिति बदलता रहता है।
संस्कृत पाठ: अनारिका शिक्षिकाम् अपृच्छत् - आचार्या! वृक्षाः कथं वर्धन्ते? पुष्पाणि किमर्थं सुगन्धानि भवन्ति?
हिंदी अर्थ: अनारिका ने शिक्षिका से पूछा - आचार्या! वृक्ष कैसे बढ़ते हैं? फूल सुगंधित क्यों होते हैं? शिक्षिका ने बताया कि वृक्ष जल, सूर्य के प्रकाश और मिट्टी के पोषक तत्वों से बढ़ते हैं और फूलों की सुगंध कीट-पतंगों को आकर्षित करने के लिए होती है।
संस्कृत पाठ: गुरुः अवदत् - हे अनारिके! जिज्ञासा एव ज्ञानस्य जननी। यः प्रश्नान् पृच्छति, सः एव ज्ञानं प्राप्नोति। तव जिज्ञासा एव त्वां विदुषीं करिष्यति।
हिंदी अर्थ: गुरु ने कहा - हे अनारिका! जिज्ञासा ही ज्ञान की जननी है। जो प्रश्न पूछता है, वही ज्ञान प्राप्त करता है। तुम्हारी जिज्ञासा ही तुम्हें विदुषी बनाएगी। इस प्रकार अनारिका की जिज्ञासा उसके ज्ञान का कारण बनी।
संस्कृत पाठ: अनारिका गुरुं अवदत् - गुरो! अहं प्रतिदिनं नवं नवं ज्ञातुम् इच्छामि। कृपया मम प्रश्नानां उत्तराणि ददातु।
हिंदी अर्थ: अनारिका ने गुरु से कहा - गुरुजी! मैं प्रतिदिन नया-नया जानना चाहती हूँ। कृपया मेरे प्रश्नों के उत्तर दीजिए। गुरु ने प्रसन्न होकर उसकी जिज्ञासा की प्रशंसा की और कहा कि इसी जिज्ञासा के कारण ही बालक महान विद्वान बनते हैं।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | अनारिका | अनारिके | अनारिकाः |
| द्वितीया | अनारिकाम् | अनारिके | अनारिकाः |
| तृतीया | अनारिकया | अनारिकाभ्याम् | अनारिकाभिः |
| चतुर्थी | अनारिकायै | अनारिकाभ्याम् | अनारिकाभ्यः |
| पञ्चमी | अनारिकायाः | अनारिकाभ्याम् | अनारिकाभ्यः |
| षष्ठी | अनारिकायाः | अनारिकयोः | अनारिकाणाम् |
| सप्तमी | अनारिकायाम् | अनारिकयोः | अनारिकासु |
| सम्बोधन | हे अनारिके | हे अनारिके | हे अनारिकाः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कः | कौ | के |
| द्वितीया | कम् | कौ | कान् |
| तृतीया | केन | काभ्याम् | कैः |
| चतुर्थी | कस्मै | काभ्याम् | केभ्यः |
| पञ्चमी | कस्मात् | काभ्याम् | केभ्यः |
| षष्ठी | कस्य | कयोः | केषाम् |
| सप्तमी | कस्मिन् | कयोः | केषु |
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | पृच्छति | पृच्छतः | पृच्छन्ति |
| मध्यम पुरुष | पृच्छसि | पृच्छथः | पृच्छथ |
| उत्तम पुरुष | पृच्छामि | पृच्छावः | पृच्छामः |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| अनारिका | बालिका का नाम | जिज्ञासुः | जानने की इच्छा रखने वाली |
| बालिका | बालिका, कन्या | प्रश्नान् | प्रश्नों को |
| पृच्छति | पूछती है | उड्डयन्ते | उड़ते हैं |
| नभः | आकाश | नीलवर्णम् | नीला रंग |
| किमर्थम् | क्यों | कथम् | कैसे |
| अम्बा | माता | पृष्टवती | पूछा था |
| तातः | पिता | प्रकाशम् | प्रकाश |
| प्राप्नोति | प्राप्त करता है | वर्धते | बढ़ता है |
| वृक्षाः | वृक्ष | वर्धन्ते | बढ़ते हैं |
| पुष्पाणि | फूल | सुगन्धानि | सुगंधित |
| शिक्षिका | शिक्षिका | आचार्या | आचार्या |
| गुरुः | गुरु | ज्ञानस्य | ज्ञान का |
| जननी | माता, जन्म देने वाली | विदुषीम् | विदुषी बनाएगी |
| इच्छामि | चाहती हूँ | कृपया | कृपया |
| उत्तराणि | उत्तर | ददातु | दीजिए |
| नवम् | नया | प्रसन्नः | प्रसन्न |
अनारिका की जिज्ञासा का उद्देश्य केवल प्रश्न पूछना नहीं है, बल्कि वह प्रत्येक उत्तर को ध्यान से सुनती और समझती है। उसके प्रश्न प्रकृति से संबंधित हैं - पक्षी कैसे उड़ते हैं, सूर्य कहाँ से प्रकाश पाता है, वृक्ष कैसे बढ़ते हैं आदि। इस पाठ में प्रश्नवाचक शब्दों - कथम्, किमर्थम्, कुतः, कुत्र - का प्रयोग विशेष रूप से किया गया है। गुरु के वचन 'जिज्ञासा एव ज्ञानस्य जननी' इस पाठ का मूल संदेश है।
| प्रश्न | किससे पूछा |
|---|---|
| पक्षी कैसे उड़ते हैं? | माता से |
| आकाश नीला क्यों है? | माता से |
| सूर्य को प्रकाश कहाँ से मिलता है? | पिता से |
| चंद्रमा कहाँ बढ़ता है? | पिता से |
| वृक्ष कैसे बढ़ते हैं? | शिक्षिका से |
| फूल सुगंधित क्यों होते हैं? | शिक्षिका से |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| कथम् | कैसे |
| किमर्थम् | क्यों |
| कुतः | कहाँ से |
| कुत्र | कहाँ |
| कदा | कब |
| कः | कौन |
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| अनारिका | जिज्ञासु बालिका |
| अम्बा (माता) | प्रश्नों के उत्तर देती हैं |
| तातः (पिता) | सूर्य-चंद्रमा पर जानकारी देते हैं |
| शिक्षिका / आचार्या | वृक्ष-पुष्पों की जानकारी देती हैं |
| गुरुः | जिज्ञासा का महत्व बताते हैं |
अनारिकायाः जिज्ञासा पाठ हमें बताता है कि जिज्ञासा ही ज्ञान की जननी है। अनारिका जैसी जिज्ञासु बालिका अपने प्रश्नों के माध्यम से निरंतर नया ज्ञान अर्जित करती है। माता, पिता और गुरु उसकी जिज्ञासा का सम्मान करते हुए उसके प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रश्न पूछना लज्जा की बात नहीं, बल्कि ज्ञान अर्जन का सर्वोत्तम मार्ग है। हमें भी अनारिका की तरह जिज्ञासु बनना चाहिए और अपने जीवन में निरंतर कुछ नया सीखते रहना चाहिए। जो व्यक्ति प्रश्न पूछने से नहीं डरता, वही जीवन में सफल और विद्वान बनता है।