यह पाठ 'अनारिकायाः जिज्ञासा' कथा का दूसरा भाग है। जिज्ञासा का अर्थ है जानने की उत्सुकता। पहले भाग में हमने देखा था कि अनारिका पक्षियों, आकाश, सूर्य और चंद्रमा के बारे में प्रश्न पूछती है। इस दूसरे भाग में अनारिका की जिज्ञासा और भी आगे बढ़ती है। अब वह पर्यावरण, वृक्षों, जल, ग्रहों और प्रकृति के बारे में प्रश्न पूछती है। वह जानना चाहती है कि वृक्ष हमारे लिए क्यों आवश्यक हैं, जल की रक्षा क्यों करनी चाहिए, ग्रह कैसे घूमते हैं तथा हमें पर्यावरण की रक्षा क्यों करनी चाहिए। उसकी इन जिज्ञासाओं का समाधान उसकी शिक्षिका और गुरुजन करते हैं। इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जिज्ञासा ही ज्ञान का मार्ग है और पर्यावरण तथा प्रकृति के प्रति हमें जागरूक रहना चाहिए।
संस्कृत पाठ: एकदा अनारिका शिक्षिकाम् अपृच्छत् - आचार्या! वृक्षाः किमर्थं आवश्यकाः? शिक्षिका अवदत् - वृक्षाः वायुं शुद्धं कुर्वन्ति, वर्षां आकर्षयन्ति, छायां प्रयच्छन्ति च। अतः वृक्षाः अस्माकं मित्राणि।
हिंदी अर्थ: एक दिन अनारिका ने शिक्षिका से पूछा - आचार्या! वृक्ष क्यों आवश्यक हैं? शिक्षिका ने कहा - वृक्ष वायु को शुद्ध करते हैं, वर्षा को आकर्षित करते हैं और छाया प्रदान करते हैं। इसलिए वृक्ष हमारे मित्र हैं। अनारिका ने यह जानकर निश्चय किया कि वह एक पौधा लगाएगी।
संस्कृत पाठ: अनारिका पितरं अपृच्छत् - हे तात! जलं किमर्थं रक्षणीयम्? पिता अवदत् - जलं विना जीवनं न सम्भवति। कृषिः, भोजनं, स्वास्थ्यं च जलस्य उपरि निर्भरं भवति। अतः जलं रक्षणीयम्।
हिंदी अर्थ: अनारिका ने पिता से पूछा - हे पिता! जल की रक्षा क्यों करनी चाहिए? पिता ने कहा - जल के बिना जीवन संभव नहीं है। खेती, भोजन और स्वास्थ्य जल पर निर्भर करते हैं। इसलिए जल की रक्षा करनी चाहिए। जल को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए।
संस्कृत पाठ: अनारिका अवदत् - आचार्या! ग्रहाः कथं भ्रमन्ति? शिक्षिका अवदत् - ग्रहाः सूर्यस्य चारों ओर नियतमार्गेण भ्रमन्ति। सूर्यः अस्माकं जीवनस्य मुख्यः स्त्रोतः अस्ति।
हिंदी अर्थ: अनारिका ने कहा - आचार्या! ग्रह कैसे घूमते हैं? शिक्षिका ने कहा - ग्रह सूर्य के चारों ओर निश्चित मार्ग (कक्षा) में घूमते हैं। सूर्य हमारे जीवन का मुख्य स्त्रोत है। सूर्य से ही पृथ्वी को प्रकाश और ऊर्जा मिलती है।
संस्कृत पाठ: अनारिका अवदत् - वायुप्रदूषणं कथं निवारणीयम्? गुरुः अवदत् - वृक्षरोपणेन, अधिकं यानप्रयोगं परिहृत्य, शुद्धिः एव निवारणम्। अस्माभिः प्राकृतिकसम्पदां रक्षणीया।
हिंदी अर्थ: अनारिका ने कहा - वायु प्रदूषण को कैसे रोका जाए? गुरु ने कहा - वृक्ष लगाकर, अधिक वाहनों का प्रयोग छोड़कर और सफाई से ही प्रदूषण का निवारण होता है। हमें प्राकृतिक संपदा की रक्षा करनी चाहिए। प्रकृति की रक्षा करना ही मनुष्य की रक्षा है।
संस्कृत पाठ: गुरुः अवदत् - हे अनारिके! यथा सूर्यः अन्धकारं नाशयति, तथा जिज्ञासा अज्ञानं नाशयति। तव जिज्ञासा त्वां सदा ज्ञानपथे नेष्यति।
हिंदी अर्थ: गुरु ने कहा - हे अनारिका! जिस प्रकार सूर्य अंधकार को नष्ट करता है, उसी प्रकार जिज्ञासा अज्ञान को नष्ट करती है। तुम्हारी जिज्ञासा तुम्हें सदैव ज्ञान के मार्ग पर ले जाएगी। गुरु के इन वचनों से अनारिका अत्यंत प्रसन्न हुई।
संस्कृत पाठ: अनारिका अवदत् - अहम् एकं वृक्षं रोपयिष्यामि, जलं रक्षिष्यामि, प्रतिदिनं नवं ज्ञातुं प्रयतिष्ये। एवं मम जिज्ञासा मम जीवनं सार्थकं करिष्यति।
हिंदी अर्थ: अनारिका ने कहा - मैं एक वृक्ष लगाऊँगी, जल की रक्षा करूँगी और प्रतिदिन कुछ नया जानने का प्रयत्न करूँगी। इस प्रकार मेरी जिज्ञासा मेरे जीवन को सार्थक बनाएगी। इस प्रकार अनारिका ने ज्ञान को कर्म से जोड़ा।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | का | के | काः |
| द्वितीया | काम् | के | काः |
| तृतीया | कया | काभ्याम् | काभिः |
| चतुर्थी | कस्यै | काभ्याम् | काभ्यः |
| पञ्चमी | कस्याः | काभ्याम् | काभ्यः |
| षष्ठी | कस्याः | कयोः | कासाम् |
| सप्तमी | कस्याम् | कयोः | कासु |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | जलम् | जले | जलानि |
| द्वितीया | जलम् | जले | जलानि |
| तृतीया | जलेन | जलाभ्याम् | जलैः |
| चतुर्थी | जलाय | जलाभ्याम् | जलेभ्यः |
| पञ्चमी | जलात् | जलाभ्याम् | जलेभ्यः |
| षष्ठी | जलस्य | जलयोः | जलानाम् |
| सप्तमी | जले | जलयोः | जलेषु |
| सम्बोधन | हे जल | हे जले | हे जलानि |
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | रक्षिष्यति | रक्षिष्यतः | रक्षिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | रक्षिष्यसि | रक्षिष्यथः | रक्षिष्यथ |
| उत्तम पुरुष | रक्षिष्यामि | रक्षिष्यावः | रक्षिष्यामः |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| आवश्यकाः | आवश्यक | वायुम् | वायु को |
| शुद्धम् | शुद्ध | कुर्वन्ति | करते हैं |
| आकर्षयन्ति | आकर्षित करते हैं | छायाम् | छाया |
| प्रयच्छन्ति | प्रदान करते हैं | रक्षणीयम् | रक्षा करने योग्य |
| जीवनम् | जीवन | सम्भवति | संभव है |
| कृषिः | खेती | स्वास्थ्यम् | स्वास्थ्य |
| निर्भरम् | निर्भर | ग्रहाः | ग्रह |
| भ्रमन्ति | घूमते हैं | नियतमार्गेण | निश्चित मार्ग से |
| स्त्रोतः | स्त्रोत | प्रदूषणम् | प्रदूषण |
| निवारणीयम् | रोकने योग्य | वृक्षरोपणेन | वृक्ष लगाने से |
| परिहृत्य | छोड़कर | प्राकृतिकसम्पदाम् | प्राकृतिक संपदा |
| अन्धकारम् | अंधकार | नाशयति | नष्ट करता है |
| अज्ञानम् | अज्ञान | नेष्यति | ले जाएगी |
| रोपयिष्यामि | लगाऊँगा/गी | प्रयतिष्ये | प्रयत्न करूँगा/गी |
| सार्थकम् | सार्थक | करिष्यति | करेगा/गी |
इस भाग में अनारिका की जिज्ञासा प्रकृति और पर्यावरण तक बढ़ जाती है। वह वृक्षों के महत्व, जल की रक्षा, ग्रहों के भ्रमण और वायु प्रदूषण के निवारण के बारे में प्रश्न पूछती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनारिका केवल प्रश्न पूछकर नहीं रुकती, बल्कि वह संकल्प करती है कि वह एक वृक्ष लगाएगी, जल बचाएगी और निरंतर ज्ञान अर्जन करेगी। इससे स्पष्ट होता है कि ज्ञान को कर्म में बदलना ही सच्ची शिक्षा है। गुरु का वचन 'जिज्ञासा अज्ञानं नाशयति' इस पाठ का मूल संदेश है।
| प्रश्न | उत्तरदाता |
|---|---|
| वृक्ष क्यों आवश्यक हैं? | शिक्षिका |
| जल की रक्षा क्यों करें? | पिता |
| ग्रह कैसे घूमते हैं? | शिक्षिका |
| वायु प्रदूषण कैसे रोकें? | गुरु |
| क्रम | लाभ |
|---|---|
| 1 | वायु को शुद्ध करते हैं |
| 2 | वर्षा को आकर्षित करते हैं |
| 3 | छाया प्रदान करते हैं |
| 4 | हमारे मित्र हैं |
| संकल्प | अर्थ |
|---|---|
| वृक्ष रोपण | एक वृक्ष लगाऊँगी |
| जल रक्षण | जल की रक्षा करूँगी |
| ज्ञान अर्जन | प्रतिदिन नया जानूँगी |
अनारिकायाः जिज्ञासा के दूसरे भाग में अनारिका की जिज्ञासा प्रकृति और पर्यावरण तक फैल जाती है। वह वृक्षों, जल, ग्रहों और प्रदूषण के बारे में प्रश्न पूछती है और उत्तरों से ज्ञान प्राप्त करती है। इस पाठ की सबसे बड़ी शिक्षा यह है कि ज्ञान को केवल संग्रह नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे कर्म में बदलना चाहिए। अनारिका संकल्प करती है कि वह वृक्ष लगाएगी, जल बचाएगी और निरंतर सीखती रहेगी। गुरु के वचन 'जिज्ञासा अज्ञानं नाशयति' से स्पष्ट है कि जिज्ञासा ही अज्ञान के अंधकार को मिटाती है। हमें भी अनारिका की तरह जिज्ञासु बनना चाहिए और अपने ज्ञान को समाज तथा प्रकृति के कल्याण में लगाना चाहिए।