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1. परिचय

यह पाठ पञ्चतन्त्र की एक प्रसिद्ध कथा है। पञ्चतन्त्र संस्कृत की नीति कथाओं का महान ग्रंथ है जिसे विष्णु शर्मा ने राजकुमारों की शिक्षा के लिए रचा था। इस पाठ में 'सिंह और शशक' (शेर और खरगोश) की कथा के माध्यम से यह शिक्षा दी गई है कि बुद्धि ही सबसे बड़ा बल है और जिसकी बुद्धि दुर्बुद्धि (बुरी बुद्धि) होती है, उसका अंत अवश्य नाश होता है। दुर्बुद्धि शब्द दो शब्दों से बना है - दुः (बुरा) और बुद्धि। 'दुर्बुद्धिः विनश्यति' का अर्थ है - दुर्बुद्धि वाला मनुष्य (जीव) विनष्ट हो जाता है। इस कथा में छोटा एवं दुर्बल खरगोश अपनी बुद्धि के बल पर विशाल एवं शक्तिशाली सिंह को परास्त करता है। इससे सिद्ध होता है कि बल की अपेक्षा बुद्धि कहीं अधिक शक्तिशाली होती है।

2. पाठ का अर्थ / हिंदी अनुवाद

कथा का प्रारंभ

संस्कृत पाठ: एकस्मिन् वने करालनामा सिंहः प्रतिवसति स्म। सः सदा बलात् मृगान् अखादत्।

हिंदी अर्थ: किसी एक वन में कराल नाम का एक सिंह रहता था। वह सदा बलपूर्वक हिरणों (पशुओं) को मारकर खा जाता था।

पशुओं की योजना

संस्कृत पाठ: एकदा सर्वे पशवः मिलित्वा अचिन्तयन् - वयम् अस्य सिंहस्य भयेन दुःखेन जीवामः। अतः एकः पशुः प्रतिदिनं भोजनरूपेण अस्य समीपं गच्छेत्।

हिंदी अर्थ: एक दिन सभी पशु मिलकर सोचने लगे - हम सब इस सिंह के भय से दुःखी होकर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसलिए प्रतिदिन एक पशु भोजन के रूप में इसके पास जाया करे। इस प्रकार पशुओं ने एक समझौता किया कि प्रतिदिन एक-एक पशु बारी-बारी से सिंह के पास भोजन बनकर जाएगा।

शशक का चुनाव

संस्कृत पाठ: एकस्मिन् दिने सर्वेषां शशकानां वारः आगतः। एकः शशकः धीरे धीरे सिंहस्य समीपम् अगच्छत्।

हिंदी अर्थ: एक दिन सभी खरगोशों की बारी आई। एक खरगोश धीरे-धीरे चलते हुए सिंह के पास गया। वह समझौते के अनुसार जा रहा था परन्तु उसके मन में सिंह को मारने की योजना थी।

शशक की चतुराई

संस्कृत पाठ: सिंहः क्रुद्धः सन् अवदत् - हे शशक! त्वं विलम्बेन किमर्थम् आगतः?

हिंदी अर्थ: सिंह क्रोधित होकर बोला - हे खरगोश! तुम विलंब से क्यों आए हो?

संस्कृत पाठ: शशकः अवदत् - हे राजन्! मार्गे अन्यः सिंहः मां अवारयत्। सः एव वनस्य स्वामी अहम् अस्मि इति अवदत्।

हिंदी अर्थ: खरगोश ने कहा - हे राजन्! मार्ग में दूसरा एक सिंह मुझे रोक रहा था। उसने कहा कि वही इस वन का स्वामी है। इसी कारण मुझे विलंब हुआ।

सिंह का क्रोध

संस्कृत पाठ: एतत् श्रुत्वा सिंहः अत्यन्तं क्रुद्धः अभवत्। सः अवदत् - हे शशक! तं सिंहं मम समीपम् आनय।

हिंदी अर्थ: यह सुनकर सिंह अत्यधिक क्रोधित हो गया। उसने कहा - हे खरगोश! उस सिंह को मेरे पास लाओ। मैं उसे दण्ड दूँगा।

कुएँ की योजना

संस्कृत पाठ: शशकः सिंहम् एकस्मिन् कूपस्य समीपम् अवारयत्। सिंहः कूपे स्वस्य प्रतिबिम्बं दृष्ट्वा स्वयमेव एव अहम् कूपे पतितवान्।

हिंदी अर्थ: खरगोश सिंह को एक कुएँ के पास ले गया। सिंह ने कुएँ में अपना प्रतिबिम्ब (छाया) देखा। उसे लगा कि दूसरा सिंह कुएँ में है। वह क्रोध में दहाड़ा, कुएँ में कूद गया और मर गया। इस प्रकार दुर्बुद्धि सिंह का नाश हो गया।

संस्कृत पाठ: दुर्बुद्धिः विनश्यति।

हिंदी अर्थ: दुर्बुद्धि (बुरी बुद्धि वाला) विनष्ट हो जाता है।

3. व्याकरण (शब्द रूप, धातु)

शब्द रूप - पुल्लिंग (बालक की तरह) - सिंहः

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा सिंहः सिंहौ सिंहाः
द्वितीया सिंहम् सिंहौ सिंहान्
तृतीया सिंहेन सिंहाभ्याम् सिंहैः
चतुर्थी सिंहाय सिंहाभ्याम् सिंहेभ्यः
पञ्चमी सिंहात् सिंहाभ्याम् सिंहेभ्यः
षष्ठी सिंहस्य सिंहयोः सिंहानाम्
सप्तमी सिंहे सिंहयोः सिंहेषु
सम्बोधन हे सिंह हे सिंहौ हे सिंहाः

धातु रूप - गम् (जाना) लट् लकार

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष गच्छति गच्छतः गच्छन्ति
मध्यम पुरुष गच्छसि गच्छथः गच्छथ
उत्तम पुरुष गच्छामि गच्छावः गच्छामः

धातु रूप - वद् (बोलना) लट् लकार

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष वदति वदतः वदन्ति
मध्यम पुरुष वदसि वदथः वदथ
उत्तम पुरुष वदामि वदावः वदामः

4. शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
कराल भयंकर सिंहः शेर
प्रतिवसति रहता है मृगान् हिरणों को
अखादत् खा जाता था पशवः पशु
मिलित्वा मिलकर अचिन्तयन् सोचा
भयेन भय से दुःखेन दुःख से
भोजनरूपेण भोजन के रूप में समीपम् पास
गच्छेत् जाए वारः बारी
शशकः खरगोश धीरे धीरे धीरे-धीरे
अगच्छत् गया क्रुद्धः क्रोधित
अवदत् बोला विलम्बेन विलंब से
मार्गे रास्ते में अवारयत् रोका
श्रुत्वा सुनकर कूपः कुआँ
प्रतिबिम्बम् छाया, परावर्तित रूप दृष्ट्वा देखकर
पतितवान् गिरा दुर्बुद्धिः बुरी बुद्धि
विनश्यति नष्ट हो जाता है स्वामी मालिक

5. विशेष बिंदु

कथा में सिंह का नाम 'कराल' है। पशुओं ने समझौता किया कि प्रतिदिन एक पशु भोजन बनकर सिंह के पास जाएगा। जब खरगोश की बारी आई तो उसने अपनी बुद्धि से सिंह को कुएँ में झोंक दिया। इस कथा का शीर्षक पाठ के अंतिम वाक्य 'दुर्बुद्धिः विनश्यति' से लिया गया है। खरगोश छोटा था परन्तु उसकी बुद्धि तीव्र थी। सिंह बड़ा था परन्तु उसकी बुद्धि दुर्बुद्धि थी। अतः सिंह का नाश हुआ। इससे हमें यह सीख मिलती है कि शारीरिक बल की अपेक्षा बुद्धि का बल सदैव श्रेष्ठ होता है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1 - कथा के प्रमुख पात्र

पात्र प्रकृति कथा में भूमिका
कराल सिंह बलवान, दुर्बुद्धि वन के पशुओं को खाता था, अंततः नष्ट हुआ
शशक दुर्बल, बुद्धिमान योजना बनाकर सिंह को कुएँ में झोंका
अन्य पशु भयभीत समझौता किया, प्रतिदिन एक पशु भेजते थे

तालिका 2 - कथा की प्रमुख घटनाएँ क्रम से

क्रम घटना
1 कराल सिंह वन में रहता था, पशुओं को खाता था
2 पशुओं ने समझौता किया - प्रतिदिन एक पशु सिंह के पास जाएगा
3 खरगोश की बारी आई, वह जानबूझकर विलंब से पहुँचा
4 शशक ने मार्ग में दूसरे सिंह की बात कही
5 सिंह क्रोधित हुआ, शशक उसे कुएँ के पास ले गया
6 सिंह ने कुएँ में अपना प्रतिबिम्ब देखा और कूदकर मर गया

तालिका 3 - क्रियापद रूप

रूप धातु लकार पुरुष वचन
अगच्छत् गम् लङ् (भूत) प्रथम एकवचन
अवदत् वद् लङ् (भूत) प्रथम एकवचन
अखादत् खाद् लङ् (भूत) प्रथम एकवचन
दृष्ट्वा दृश् क्त्वा प्रत्यय - -
श्रुत्वा श्रु क्त्वा प्रत्यय - -

माइंड मैप

graph TD A["दुर्बुद्धिः विनश्यति"] --> B["कराल सिंह वन में रहता था"] A --> C["पशुओं की समस्या"] A --> D["समझौता: प्रतिदिन एक पशु भोजन"] A --> E["शशक की बारी"] A --> F["शशक की योजना"] F --> G["मार्ग में दूसरा सिंह बताया"] F --> H["सिंह को कुएँ के पास ले गया"] H --> I["प्रतिबिम्ब देखकर कूदा, मर गया"] A --> J["शिक्षा: बुद्धि बल से बड़ी है"] A --> K["व्याकरण: शब्द रूप सिंह, धातु गम् वद्"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

सिंह और शशक की कथा - घटना क्रम सिंह वन में रहता पशु भयभीत समझौता शशक की बारी विलंब से पहुँचना दूसरे सिंह का बहाना सिंह क्रोधित उस सिंह को लाओ कुएँ के पास जाना प्रतिबिम्ब दिखाना सिंह कुएँ में कूदा, मर गया स्वर्ण नियम बुद्धि ही सबसे बड़ा बल है; दुर्बुद्धि का अंत विनाश है।
बुद्धि बल बनाम शारीरिक बल शारीरिक बल सिंह - कराल विशाल शरीर परन्तु दुर्बुद्धि परिणाम: विनाश बुद्धि का बल शशक - खरगोश छोटा शरीर परन्तु सुबुद्धि परिणाम: विजय बनाम कथा की शिक्षा 1. बुद्धि सबसे बड़ी शक्ति है 2. बल का अहंकार विनाश लाता है 3. धैर्य और योजना से विजय मिलती है Golden Rule दुर्बुद्धिः विनश्यति - जिसकी बुद्धि बुरी होती है, वह नष्ट हो जाता है।

सामान्य गलतियाँ

  1. छात्र सिंह का नाम 'कराल' के स्थान पर भ्रमित होकर 'कपोत' या 'यज्ञदत्त' लिख देते हैं।
  2. 'शशक' का अर्थ 'साँप' या 'हाथी' लिख दिया जाता है; इसका सही अर्थ 'खरगोश' है।
  3. 'अवदत्' को वर्तमान काल (लट् लकार) मान लेते हैं जबकि यह भूतकाल (लङ् लकार) का रूप है।
  4. 'कूप' का अर्थ 'तालाब' लिखते हैं जबकि सही अर्थ 'कुआँ' है।
  5. 'प्रतिबिम्बम्' का अर्थ 'प्रतिशोध' लिखना गलत है; इसका अर्थ 'छाया / प्रतिच्छाया' है।
  6. कथा में शशक ने सिंह को 'मार्ग में दूसरा सिंह' बताया, परन्तु कई छात्र लिखते हैं कि उसने 'हाथी' बताया।
  7. 'विनश्यति' शब्द का अनुवाद 'देखता है' करना गलत है; सही अर्थ है 'नष्ट हो जाता है'।
  8. समझौते के नियम को लिखते समय यह भूल होती है कि 'प्रतिदिन एक पशु' सिंह के पास जाता था, न कि सभी पशु एक साथ।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. कथा को घटना क्रम में याद करें - प्रारंभ, समझौता, शशक की बारी, विलंब, क्रोध, कुआँ, अंत।
  2. 'रिक्त स्थान की पूर्ति' में संज्ञाएँ लिखते समय विभक्ति का ध्यान रखें, जैसे 'सिंहः ... अखादत्' में मृगान् (द्वितीया बहुवचन)।
  3. भूतकाल के रूप (अगच्छत्, अवदत्, अखादत्) में अ- उपसर्ग की पहचान करें - यह लङ् लकार का चिह्न है।
  4. शब्दार्थ के प्रश्न में शब्द और अर्थ दोनों पक्ष लिखें; केवल अर्थ लिखने से अंक कटते हैं।
  5. 'दुर्बुद्धिः विनश्यति' का भावार्थ अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  6. कथा में आए क्रियापदों को धातु, लकार, पुरुष, वचन के साथ पहचानें, यह व्याकरण प्रश्नों में सहायक होगा।
  7. चित्र वर्णन प्रश्नों के लिए सिंह, खरगोश और कुएँ की घटना को दृश्य रूप में कल्पना करके पढ़ें।

निष्कर्ष

'दुर्बुद्धिः विनश्यति' पाठ पञ्चतन्त्र की उस क्लासिक कथा पर आधारित है जिसमें बुद्धिमान खरगोश अपनी चतुराई से भयंकर सिंह का अंत कर देता है। इस कथा से हमें सीख मिलती है कि शारीरिक बल क्षणभंगुर है, परन्तु बुद्धि का बल स्थायी और श्रेष्ठ है। अपनी बुद्धि का सही और सदुपयोग करने वाला व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी विजय प्राप्त कर लेता है। साथ ही यह भी सीख मिलती है कि दुराचारी, अहंकारी और दुर्बुद्धि व्यक्ति का अंत सदैव विनाश ही होता है। हमें अपनी बुद्धि को सदैव सुबुद्धि (अच्छी बुद्धि) बनाकर रखना चाहिए।