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1. परिचय

'समवायो हि दुर्जयः' का अर्थ है - समवाय (एकता, मिलन) वास्तव में अजेय (दुर्जय) होता है। 'समवाय' का अर्थ है एकत्र होना, एकता, संगठन और 'दुर्जयः' का अर्थ है जिसे जीतना कठिन हो, अजेय। यह पाठ पञ्चतन्त्र की एक प्रसिद्ध कथा पर आधारित है जो एकता की शक्ति को दर्शाती है। कथा में कपोत (कबूतरों) का एक झुंड शिकारी के जाल में फँस जाता है। प्रत्येक कपोत अकेले भागने का प्रयास करता है, परन्तु सफल नहीं होता। तब उनका नेता कहता है कि सभी एक साथ मिलकर उड़ें। सभी कपोत मिलकर एक साथ उड़ते हैं और जाल सहित उड़ जाते हैं। इस प्रकार एकता से वे शिकारी के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। इस कथा से शिक्षा मिलती है कि एकता में ही शक्ति है। अकेला व्यक्ति कमजोर होता है, परन्तु एकत्र होकर वह कठिन से कठिन कार्य भी कर सकता है।

2. पाठ का अर्थ / हिंदी अनुवाद

कपोतों का जाल में फँसना

संस्कृत पाठ: एकस्मिन् वने कपोतानां वृन्दम् आसीत्। एकदा शिकारिणा कृतम् एकं जालं ते न पश्यन्ति स्म। ते सर्वे जाले बद्धाः अभवन्।

हिंदी अर्थ: किसी एक वन में कबूतरों का एक झुंड रहता था। एक दिन शिकारी द्वारा बिछाया गया एक जाल उन्हें दिखाई नहीं दिया। वे सब जाल में फँस गए। प्रत्येक कपोत अकेले भागने का प्रयास करने लगा, परन्तु कोई नहीं बच पाया।

नेता का उपदेश

संस्कृत पाठ: तदा कपोतानां नेता अवदत् - हे मित्राणि! अकेलेन केनापि जालात् मुक्तिः न सम्भवति। समवायेन एव अस्माकं मुक्तिः भविष्यति। सर्वे मिलित्वा उड्डयाम।

हिंदी अर्थ: तब कबूतरों के नेता ने कहा - हे मित्रों! अकेले किसी के द्वारा जाल से मुक्ति संभव नहीं है। एकता (समवाय) से ही हमारी मुक्ति होगी। हम सब मिलकर उड़ें। नेता ने सभी से एक साथ उड़ने का आह्वान किया।

एकता से मुक्ति

संस्कृत पाठ: सर्वे कपोताः सम्मिलिताः सन्तः सह उड्डयितुम् आरब्धवन्तः। ते जालेन सह उदड्डयन्। शिकारी आश्चर्यचकितः अभवत्। एवं समवायेन ते मुक्ताः अभवन्।

हिंदी अर्थ: सभी कबूतर मिलकर एक साथ उड़ने लगे। वे जाल के साथ ही ऊपर उड़ गए। शिकारी आश्चर्यचकित रह गया। इस प्रकार एकता (समवाय) के बल पर वे सब मुक्त हो गए। शिकारी केवल खाली जाल के बिना ही निराश रह गया।

मूषक की सहायता

संस्कृत पाठ: ते कपोताः मूषकस्य मित्रस्य गृहं गतवन्तः। मूषकः तेषां जालं कर्तयित्वा सर्वान् मुक्तान् अकरोत्।

हिंदी अर्थ: वे कबूतर अपने मित्र चूहे के घर गए। चूहे ने उनका जाल काटकर सबको मुक्त कर दिया। इस प्रकार परस्पर सहायता से भी सभी मित्र सुरक्षित रहे। यहाँ भी मित्रों की एकता ही कार्य में आई।

एकता की शक्ति

संस्कृत पाठ: समवायो हि दुर्जयः। एकः बहुभ्यः दुर्बलः भवति। परन्तु सम्मिलिताः बहवः केनापि न जेतुं शक्याः।

हिंदी अर्थ: एकता वास्तव में अजेय है। एक व्यक्ति कई लोगों से (अकेला होने के कारण) दुर्बल होता है। परन्तु एकत्र (संगठित) हुए अनेक लोग किसी से भी जीते नहीं जा सकते। यही पाठ का मूल संदेश है - समवायो हि दुर्जयः।

सहयोग का महत्व

संस्कृत पाठ: परस्परं साहाय्येन एव सर्वं कार्यं सिध्यति। समवायेन लघवः अपि महान्तं कार्यं कर्तुं शक्नुवन्ति। अतः सर्वदा एकतां पालयेम।

हिंदी अर्थ: परस्पर सहायता से ही सभी कार्य सिद्ध होते हैं। एकता से छोटे जीव भी बड़ा कार्य कर सकते हैं। अतः हमें सदैव एकता का पालन करना चाहिए। छोटे-छोटे कबूतरों ने भी एकता से बड़ा कार्य किया।

3. व्याकरण (शब्द रूप, धातु)

शब्द रूप - पुल्लिंग (बालक की तरह) - कपोतः

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा कपोतः कपोतौ कपोताः
द्वितीया कपोतम् कपोतौ कपोतान्
तृतीया कपोतेन कपोताभ्याम् कपोतैः
चतुर्थी कपोताय कपोताभ्याम् कपोतेभ्यः
पञ्चमी कपोतात् कपोताभ्याम् कपोतेभ्यः
षष्ठी कपोतस्य कपोतयोः कपोतानाम्
सप्तमी कपोते कपोतयोः कपोतेषु
सम्बोधन हे कपोत हे कपोतौ हे कपोताः

शब्द रूप - नपुंसकलिंग (फल की तरह) - जालम्

विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथमा जालम् जाले जालानि
द्वितीया जालम् जाले जालानि
तृतीया जालेन जालाभ्याम् जालैः
चतुर्थी जालाय जालाभ्याम् जालेभ्यः
पञ्चमी जालात् जालाभ्याम् जालेभ्यः
षष्ठी जालस्य जालयोः जालानाम्
सप्तमी जाले जालयोः जालेषु
सम्बोधन हे जाल हे जाले हे जालानि

धातु रूप - उड्डी (उड़ना) लट् लकार

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष उड्डयते उड्डयेते उड्डयन्ते
मध्यम पुरुष उड्डयसे उड्डयेथे उड्डयध्वे
उत्तम पुरुष उड्डये उड्डयावहे उड्डयामहे

4. शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ संस्कृत शब्द हिंदी अर्थ
समवायः एकता, संगठन दुर्जयः अजेय, जीतने में कठिन
कपोताः कबूतर वृन्दम् झुंड, समूह
शिकारी शिकारी जालम् जाल
बद्धाः बँधे हुए नेता नेता
मुक्तिः मुक्ति, छुटकारा सम्भवति संभव है
मिलित्वा मिलकर उड्डयितुम् उड़ने के लिए
आरब्धवन्तः आरंभ किया था उदड्डयन् ऊपर उड़ गए
आश्चर्यचकितः आश्चर्य से भरा मूषकः चूहा
गृहम् घर कर्तयित्वा काटकर
मुक्तान् मुक्त किए अकरोत् किया
एकः एक दुर्बलः कमजोर
सम्मिलिताः मिले हुए शक्याः जीते जाने योग्य
साहाय्येन सहायता से सिध्यति सिद्ध होता है
लघवः छोटे महान्तम् बड़ा
शक्नुवन्ति कर सकते हैं पालयेम पालन करें

5. विशेष बिंदु

इस पाठ की कथा पञ्चतन्त्र से ली गई है। कथा में कबूतरों का झुंड जाल में फँस जाता है। अकेला-अकेला कोई नहीं बच पाता, परन्तु नेता की प्रेरणा से सभी मिलकर उड़ते हैं और जाल सहित भाग निकलते हैं। इसके बाद मूषक (चूहा) मित्र जाल काटकर उन्हें मुक्त करता है। इससे स्पष्ट होता है कि एकता से छोटे-से-छोटे जीव भी विपत्ति को पार कर सकते हैं। 'समवायो हि दुर्जयः' अर्थात् एकता अजेय है - यही पाठ का मूल मंत्र है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1 - कथा की मुख्य घटनाएँ

क्रम घटना
1 वन में कबूतरों का झुंड रहता था
2 शिकारी ने जाल बिछाया
3 सभी कपोत जाल में फँस गए
4 नेता ने एकता की प्रेरणा दी
5 सभी मिलकर जाल सहित उड़ गए
6 मूषक मित्र ने जाल काटा, सब मुक्त हुए

तालिका 2 - पात्र और भूमिका

पात्र भूमिका
कपोत नेता एकता का संदेश दिया
कपोत (झुंड) मिलकर उड़े, मुक्त हुए
शिकारी जाल बिछाने वाला, आश्चर्यचकित
मूषक मित्र, जाल काटकर मुक्त किया

तालिका 3 - मुख्य शब्द

शब्द अर्थ
समवायः एकता
दुर्जयः अजेय
जालम् जाल
मूषकः चूहा
वृन्दम् झुंड

माइंड मैप

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महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

कपोत कथा - एकता की शक्ति कपोत झुंड जाल में फँसना नेता का उपदेश मिलकर उड़ना जाल सहित ऊपर उड़ान शिकारी आश्चर्यचकित मूषक मित्र की सहायता जाल काटकर सबको मुक्त किया समवायो हि दुर्जयः स्वर्ण नियम - एकता में ही शक्ति है, एकता अजेय है।
अकेला बनाम एकत्र अकेला कपोत जाल में अकेला भागने में असमर्थ दुर्बल परिणाम: मुक्ति असंभव एकत्र कपोत सब मिलकर जाल सहित उड़ान संगठित शक्ति परिणाम: विजय बनाम कथा से सीख 1. संगठित शक्ति ही सच्ची शक्ति है 2. नेता की प्रेरणा से एकता संभव 3. छोटे जीव भी एकता से बड़े कार्य करते हैं Golden Rule समवायेन लघवः अपि महान्तं कार्यं कर्तुं शक्नुवन्ति।

सामान्य गलतियाँ

  1. 'समवाय' का अर्थ 'समवेत' या 'युद्ध' लिख दिया जाता है; सही अर्थ 'एकता, संगठन' है।
  2. 'दुर्जयः' का अर्थ 'जीतने वाला' लिखना गलत है; सही अर्थ 'अजेय, जिसे जीतना कठिन हो' है।
  3. 'कपोत' का अर्थ 'मोर' या 'तोता' लिख दिया जाता है; सही अर्थ 'कबूतर' है।
  4. 'मूषक' का अर्थ 'बंदर' लिखा जाता है; सही अर्थ 'चूहा' है।
  5. 'वृन्दम्' का अर्थ 'वृंदावन' समझ लिया जाता है; सही अर्थ 'झुंड, समूह' है।
  6. 'उदड्डयन्' का अर्थ 'उतर गए' लिखा जाता है जबकि इसका अर्थ 'ऊपर उड़ गए' है।
  7. 'कर्तयित्वा' का अर्थ 'बनाकर' लिखा जाता है; सही अर्थ 'काटकर' है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. कथा को घटना क्रम में याद रखें - जाल, नेता का उपदेश, एक साथ उड़ान, मूषक की सहायता, मुक्ति।
  2. 'समवायो हि दुर्जयः' का भावार्थ लिखने का अभ्यास करें - यही पाठ का मूल है।
  3. 'कपोतः' (पुल्लिंग) और 'जालम्' (नपुंसकलिंग) शब्द रूप लिखकर अभ्यास करें।
  4. उड्डी धातु के रूपों (उड्डयते, उड्डयन्ते) को आत्मनेपद के रूप में पहचानें।
  5. 'मिलित्वा' (क्त्वा प्रत्यय), 'कर्तयित्वा' (क्त्वा) जैसे प्रत्यय रूपों को ध्यान से देखें।
  6. शब्दार्थ में 'वृन्दम्', 'मूषकः', 'समवायः' जैसे शब्दों को विशेष रूप से रटें।
  7. कथा का नैतिक संदेश (एकता में बल) को अपने शब्दों में लिखने की तैयारी करें।

निष्कर्ष

समवायो हि दुर्जयः पाठ पञ्चतन्त्र की कपोत कथा के माध्यम से एकता की शक्ति सिखाता है। जाल में फँसे कबूतर अकेले तो मुक्त नहीं हो पाते, परन्तु नेता की प्रेरणा से सभी मिलकर उड़ते हैं और जाल सहित विपत्ति को पार कर जाते हैं। मूषक मित्र की सहायता से उनकी मुक्ति पूर्ण होती है। इससे सिद्ध होता है कि समवाय (एकता) अजेय (दुर्जय) है। अकेला व्यक्ति दुर्बल होता है, परन्तु संगठित समूह को कोई नहीं जीत सकता। हमें अपने जीवन में सदैव एकता और परस्पर सहयोग का पालन करना चाहिए, क्योंकि एकता ही सबसे बड़ा बल है।