यह पाठ भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का वर्णन करता है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों वाला है, इसलिए उसे त्रिवर्णः ध्वजः (तिरंगा) कहा जाता है। ध्वज में तीन पट्टे होते हैं - सबसे ऊपर केसरिया (भगवा) रंग का, बीच में श्वेत (सफेद) रंग का और सबसे नीचे हरित (हरा) रंग का। श्वेत पट्टे के मध्य में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है। प्रत्येक रंग का अपना विशेष महत्व है - केसरिया त्याग और साहस का प्रतीक है, श्वेत शांति और सत्य का प्रतीक है तथा हरित विकास और समृद्धि का प्रतीक है। अशोक चक्र धर्म चक्र का प्रतीक है जो सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश का गौरव है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।
संस्कृत पाठ: अस्माकं राष्ट्रियध्वजः त्रिवर्णः अस्ति। सः आयताकारः भवति। तस्य दैर्घ्यं चतुर्विंशतिः विकर्षाणि, विस्तारः च षोडश विकर्षाणि भवति।
हिंदी अर्थ: हमारा राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों वाला है। वह आयताकार होता है। उसकी लंबाई चौबीस अंगुल और चौड़ाई सोलह अंगुल होती है। इस प्रकार ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 है।
संस्कृत पाठ: ध्वजे त्रयः पट्टाः सन्ति। उपरिष्टात् केसरवर्णः, मध्ये श्वेतवर्णः, अधः हरितवर्णः पट्टः अस्ति।
हिंदी अर्थ: ध्वज में तीन पट्टे होते हैं। सबसे ऊपर केसरिया रंग का पट्टा, बीच में सफेद रंग का पट्टा और सबसे नीचे हरे रंग का पट्टा होता है।
संस्कृत पाठ: केसरवर्णः त्यागस्य साहसस्य च प्रतीकम्। श्वेतवर्णः शान्तेः सत्यस्य च प्रतीकम्। हरितवर्णः विकासस्य समृद्धेः च प्रतीकम्।
हिंदी अर्थ: केसरिया रंग त्याग और साहस का प्रतीक है। सफेद रंग शांति और सत्य का प्रतीक है। हरा रंग विकास और समृद्धि का प्रतीक है। इस प्रकार तिरंगे के तीनों रंग भारत के आदर्शों को प्रकट करते हैं।
संस्कृत पाठ: श्वेतपट्टस्य मध्ये नीलवर्णम् अशोकचक्रम् अस्ति। तस्य चतुर्विंशतिः आराः सन्ति। अशोकचक्रं धर्मचक्रस्य प्रतीकम् अस्ति।
हिंदी अर्थ: सफेद पट्टे के मध्य में नीले रंग का अशोक चक्र होता है। उसकी चौबीस तीलियाँ (आरे) होती हैं। अशोक चक्र धर्म चक्र का प्रतीक है। यह सदैव गतिशील रहने तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
संस्कृत पाठ: 22 जुलै मासस्य 1947 तमे वर्षे संविधानसभया अस्माकं त्रिवर्णध्वजः राष्ट्रियध्वजत्वेन स्वीकृतः। अस्य रचनाकारः पिङ्गली वेङ्कय्या आसीत्।
हिंदी अर्थ: 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा हमारा तिरंगा ध्वज राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया। इसके रचनाकार पिंगली वेंकय्या थे। इस प्रकार तिरंगा ध्वज हमारी आजादी का प्रतीक बना।
संस्कृत पाठ: ध्वजस्य मर्यादा सर्वथा पालनीया। ध्वजं धारयन्तः जनाः अस्य प्रति आदरं दर्शयेयुः। राष्ट्रियध्वजः अस्माकं गौरवस्य प्रतीकम्।
हिंदी अर्थ: ध्वज की मर्यादा का सर्वथा पालन करना चाहिए। ध्वज को ले जाने वाले लोग उसके प्रति आदर प्रदर्शित करें। राष्ट्रीय ध्वज हमारे गौरव का प्रतीक है। ध्वज को प्रणाम करना हमारा कर्तव्य है।
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | ध्वजः | ध्वजौ | ध्वजाः |
| द्वितीया | ध्वजम् | ध्वजौ | ध्वजान् |
| तृतीया | ध्वजेन | ध्वजाभ्याम् | ध्वजैः |
| चतुर्थी | ध्वजाय | ध्वजाभ्याम् | ध्वजेभ्यः |
| पञ्चमी | ध्वजात् | ध्वजाभ्याम् | ध्वजेभ्यः |
| षष्ठी | ध्वजस्य | ध्वजयोः | ध्वजानाम् |
| सप्तमी | ध्वजे | ध्वजयोः | ध्वजेषु |
| सम्बोधन | हे ध्वज | हे ध्वजौ | हे ध्वजाः |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | चक्रम् | चक्रे | चक्राणि |
| द्वितीया | चक्रम् | चक्रे | चक्राणि |
| तृतीया | चक्रेण | चक्राभ्याम् | चक्रैः |
| चतुर्थी | चक्राय | चक्राभ्याम् | चक्रेभ्यः |
| पञ्चमी | चक्रात् | चक्राभ्याम् | चक्रेभ्यः |
| षष्ठी | चक्रस्य | चक्रयोः | चक्राणाम् |
| सप्तमी | चक्रे | चक्रयोः | चक्रेषु |
| सम्बोधन | हे चक्र | हे चक्रे | हे चक्राणि |
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | भवति | भवतः | भवन्ति |
| मध्यम पुरुष | भवसि | भवथः | भवथ |
| उत्तम पुरुष | भवामि | भवावः | भवामः |
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ | संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|---|
| राष्ट्रियध्वजः | राष्ट्रीय ध्वज | त्रिवर्णः | तीन रंगों वाला |
| आयताकारः | आयताकार | दैर्घ्यम् | लंबाई |
| विस्तारः | चौड़ाई | पट्टः | पट्टा |
| केसरवर्णः | केसरिया रंग | श्वेतवर्णः | सफेद रंग |
| हरितवर्णः | हरा रंग | उपरिष्टात् | ऊपर |
| मध्ये | बीच में | अधः | नीचे |
| त्यागस्य | त्याग का | साहसस्य | साहस का |
| प्रतीकम् | प्रतीक | शान्तेः | शांति का |
| सत्यस्य | सत्य का | विकासस्य | विकास का |
| समृद्धेः | समृद्धि का | नीलवर्णम् | नीले रंग का |
| अशोकचक्रम् | अशोक चक्र | चतुर्विंशतिः | चौबीस |
| आराः | तीलियाँ | धर्मचक्रस्य | धर्म चक्र का |
| संविधानसभया | संविधान सभा द्वारा | स्वीकृतः | स्वीकार किया गया |
| रचनाकारः | रचना करने वाला | मर्यादा | मर्यादा |
| पालनीया | पालन करने योग्य | आदरम् | आदर |
| गौरवस्य | गौरव का | स्वातन्त्र्यस्य | स्वतंत्रता का |
तिरंगे ध्वज के तीन रंगों का विशेष महत्व है। सबसे ऊपर का केसरिया रंग साहस और त्याग का प्रतीक है। बीच का सफेद रंग शांति और सत्य का प्रतीक है। नीचे का हरा रंग विकास और समृद्धि का प्रतीक है। सफेद पट्टे के बीच में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र धर्म चक्र का प्रतीक है जिसमें चौबीस तीलियाँ होती हैं। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इस ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। इसके रचनाकार पिंगली वेंकय्या थे। हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज की मर्यादा का पालन करना चाहिए।
| पट्टा | रंग | प्रतीक |
|---|---|---|
| ऊपर | केसरिया (भगवा) | त्याग और साहस |
| मध्य | श्वेत (सफेद) | शांति और सत्य |
| नीचे | हरित (हरा) | विकास और समृद्धि |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | श्वेत पट्टे का मध्य |
| रंग | गहरा नीला |
| तीलियों की संख्या | 24 |
| महत्व | धर्म चक्र का प्रतीक |
| संदेश | सदैव आगे बढ़ना |
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| स्वीकृति दिन | 22 जुलाई 1947 |
| स्वीकृति संस्था | संविधान सभा |
| रचनाकार | पिंगली वेंकय्या |
| आकार | आयताकार |
| लंबाई-चौड़ाई अनुपात | 3:2 |
त्रिवर्णः ध्वजः पाठ भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का विस्तृत परिचय देता है। तिरंगे के तीन रंग - केसरिया, श्वेत और हरित - क्रमशः त्याग-साहस, शांति-सत्य और विकास-समृद्धि का प्रतीक हैं। बीच का अशोक चक्र धर्म चक्र का प्रतीक है जो 24 तीलियों वाला है। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा स्वीकृत यह ध्वज हमारी स्वतंत्रता, गौरव और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज की मर्यादा का पालन करना चाहिए और उसका आदर करना चाहिए। तिरंगा हमें देशभक्ति और राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता है।