विद्युत हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। बल्ब, पंखा, टीवी, फ्रिज - सब विद्युत से चलते हैं। विद्युत के कारण ही हम रात में प्रकाश पाते हैं। विद्युत धारा (Electric Current) आवेश का प्रवाह है। विद्युत धारा के अनेक प्रभाव होते हैं - ऊष्मा प्रभाव (Heating Effect), चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect), रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect)। इस अध्याय में हम विद्युत धारा, परिपथ, ऊष्मा एवं चुंबकीय प्रभाव, तथा विद्युत चुंबक का अध्ययन करेंगे।
2. विद्युत धारा एवं परिपथ (Electric Current and Circuit)
विद्युत धारा: विद्युत आवेश का प्रवाह विद्युत धारा कहलाता है।
विद्युत परिपथ (Electric Circuit): विद्युत धारा का पूरा बंद मार्ग, जिसमें सेल (बैटरी), तार एवं उपकरण जुड़े होते हैं।
परिपथ के मुख्य अवयव:
सेल (Cell): विद्युत ऊर्जा का स्रोत। दो या अधिक सेल मिलकर बैटरी बनाते हैं।
तार (Wires): धारा का संवाहन।
स्विच (Switch): परिपथ को खोलने/बंद करने के लिए।
विद्युत उपकरण: जैसे बल्ब, पंखा।
परिपथ का खुला एवं बंद होना
जब परिपथ पूरा (बंद) होता है, तो धारा प्रवाहित होती है और बल्ब जलता है।
जब परिपथ टूटा (खुला) होता है, तो धारा रुक जाती है और बल्ब नहीं जलता।
परिपथ में अवयव जोड़ने के लिए संधि (junction) बनाई जाती है।
3. विद्युत धारा के ऊष्मा प्रभाव (Heating Effect of Current)
जब विद्युत धारा किसी चालक तार से गुजरती है, तो तार गर्म हो जाता है।
इस प्रभाव को विद्युत धारा का ऊष्मा प्रभाव कहते हैं।
गर्म होने का कारण: तार में इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से टकराव होता है, जिससे ऊष्मा उत्पन्न होती है।
ऊष्मा प्रभाव के उपयोग
विद्युत बल्ब: बल्ब में टंगस्टन के तंतु से धारा गुजरने पर वह गर्म होकर प्रकाश देता है। (टंगस्टन का गलनांक उच्च होता है।)
विद्युत इस्तरी (Electric Iron): कुंडली के गर्म होने से इस्तरी गर्म होती है।
विद्युत गीजर, टोस्टर, हीटर: इनमें कुंडली द्वारा ऊष्मा उत्पन्न होती है।
फ्यूज़ (Fuse): सुरक्षा उपकरण, जो अत्यधिक धारा बहने पर गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ तोड़ देता है।
फ्यूज़ तार (Fuse Wire)
फ्यूज़ तार निम्न गलनांक वाले मिश्रधातु (ताँबा-टिन) का बना होता है।
जब अधिक धारा बहती है, तो फ्यूज़ पिघलकर परिपथ खोल देता है।
इससे विद्युत उपकरण एवं घर सुरक्षित रहते हैं।
4. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effect of Current)
जब विद्युत धारा किसी चालक तार में बहती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
यदि तार को चुंबकीय सुई (कम्पास) के पास रखा जाए, तो सुई विक्षेपित हो जाती है।
यह सिद्ध करता है कि विद्युत धारा तार के चारों ओर चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है।
इस खोज के आधार पर विद्युत चुंबक का निर्माण हुआ।
5. विद्युत चुंबक (Electromagnet)
विद्युत चुंबक एक ऐसा चुंबक है जो विद्युत धारा के प्रवाह से चुंबकीय गुण प्राप्त करता है।
निर्माण: एक नरम लोहे की कील (कोर) के चारों ओर रोधित तार (insulated wire) की कुंडली लपेटी जाती है।
कुंडली में से विद्युत धारा प्रवाहित करने पर लोहे की कील चुंबक बन जाती है।
धारा बंद करने पर चुंबकीय गुण समाप्त हो जाते हैं।
चुंबकीय क्षमता बढ़ाने के लिए फेरों की संख्या बढ़ाई जाती है या धारा अधिक प्रवाहित की जाती है।
विद्युत चुंबक के उपयोग
क्रेन द्वारा भारी लोहे का माल उठाना (स्क्रैप संयंत्र)।
बिजली की घंटी (Electric Bell)।
विद्युत मोटर एवं जनरेटर।
टेलीफोन रिसीवर।
चिकित्सा में MRI मशीन।
6. विद्युत घंटी (Electric Bell)
विद्युत चुंबक का एक महत्वपूर्ण उपयोग विद्युत घंटी है।
घंटी में कुंडली, लोहे की कील (कोर), आर्मेचर (हथौड़ा), स्प्रिंग एवं घंटे का गुंबद होता है।
स्विच दबाने पर धारा बहती है, विद्युत चुंबक आर्मेचर को खींचता है, आर्मेचर घंटे से टकराकर ध्वनि उत्पन्न करता है, फिर परिपथ टूट जाता है और प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है।
7. विद्युत सुरक्षा (Electrical Safety)
बिजली के तारों की सही मोटाई एवं अच्छा रोधन होना चाहिए।
घरों में फ्यूज़ लगाना चाहिए।
भूसंपर्क (Earthing) आवश्यक है।
गीले हाथों से विद्युत उपकरण नहीं छूने चाहिए।
टूटे तारों की मरम्मत बिजली बंद करके करनी चाहिए।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
विद्युत धारा के प्रभाव
प्रभाव
परिणाम
उपयोग
ऊष्मा प्रभाव
तार गर्म होना
बल्ब, इस्तरी, फ्यूज़
चुंबकीय प्रभाव
चुंबकीय क्षेत्र
विद्युत चुंबक, घंटी
रासायनिक प्रभाव
रासायनिक अभिक्रिया
विद्युत अपघटन
विद्युत चुंबक निर्माण के अवयव
अवयव
भूमिका
नरम लोहे की कील
कोर (Core)
रोधित तार की कुंडली
धारा प्रवाहन
विद्युत धारा
चुंबकीय गुण
माइंड मैप
graph TD
A["विद्युत धारा"] --> B["परिपथ - सेल, तार, स्विच, बल्ब"]
A --> C["ऊष्मा प्रभाव"]
C --> D["बल्ब, इस्तरी, गीजर, फ्यूज़"]
A --> E["चुंबकीय प्रभाव"]
E --> F["विद्युत चुंबक"]
F --> G["क्रेन, घंटी, मोटर"]
A --> H["विद्युत घंटी - चुंबक + आर्मेचर"]
A --> I["सुरक्षा - फ्यूज़, भूसंपर्क"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
विद्युत चुंबक
विद्युत परिपथ
सामान्य गलतियाँ
फ्यूज़ तार को उच्च गलनांक वाला मानना: फ्यूज़ तार निम्न गलनांक वाला होता है, ताकि अधिक धारा पर पिघल सके।
विद्युत चुंबक को स्थायी चुंबक मानना: विद्युत चुंबक धारा बंद होते ही चुंबकीय गुण खो देता है।
बल्ब के तंतु का पदार्थ गलत बताना: बल्ब का तंतु टंगस्टन का होता है, जिसका गलनांक बहुत ऊँचा होता है।
खुले परिपथ में धारा प्रवाह मानना: खुले परिपथ में धारा नहीं बहती, बल्ब नहीं जलता।
ऊष्मा प्रभाव और चुंबकीय प्रभाव में भ्रम: धारा से तार गर्म होना ऊष्मा प्रभाव, चुंबकीय क्षेत्र बनना चुंबकीय प्रभाव है।
सेल और बैटरी को समान मानना: एक सेल होती है, दो या अधिक सेल मिलकर बैटरी बनाती हैं।
विद्युत घंटी की क्रिया न समझना: घंटी में चुंबक आर्मेचर को खींचता है, जो घंटे से टकराकर ध्वनि करता है।
परीक्षा युक्तियाँ
परिपथ के अवयव (सेल, तार, स्विच, बल्ब) की भूमिका लिखें।
ऊष्मा प्रभाव के उपयोग - बल्ब, इस्तरी, गीजर, फ्यूज़ बताएँ।
फ्यूज़ की कार्यप्रणाली (निम्न गलनांक, परिपथ खोलना) समझाएँ।
विद्युत चुंबक का निर्माण एवं उपयोग वर्णित करें।
चुंबकीय प्रभाव को कम्पास सुई के विक्षेपण से सिद्ध करें।
विद्युत घंटी की क्रिया के चरण लिखें।
विद्युत सुरक्षा उपाय (फ्यूज़, भूसंपर्क, गीले हाथ) सूचीबद्ध करें।
निष्कर्ष
विद्युत धारा विद्युत आवेश का प्रवाह है, जो पूर्ण परिपथ में ही प्रवाहित होती है। विद्युत धारा के तीन मुख्य प्रभाव हैं - ऊष्मा, चुंबकीय एवं रासायनिक। ऊष्मा प्रभाव का उपयोग बल्ब, इस्तरी, गीजर तथा फ्यूज़ में होता है। चुंबकीय प्रभाव से विद्युत चुंबक बनता है, जिसका उपयोग क्रेन, विद्युत घंटी, मोटर आदि में होता है। विद्युत सुरक्षा के लिए फ्यूज़ एवं भूसंपर्क अनिवार्य हैं। विद्युत चुंबक स्थायी नहीं होता - धारा बंद होते ही उसका चुंबकीय गुण समाप्त हो जाता है। विद्युत धारा की इन अवधारणाओं की समझ आधुनिक जीवन की ऊर्जा आवश्यकताओं का आधार है।