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1. परिचय

पिछले अध्याय में हमने जाना कि पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। लेकिन प्राणी (जंतु एवं मानव) अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते, वे पौधों या अन्य जंतुओं से भोजन प्राप्त करते हैं। भोजन ग्रहण करने के बाद उसे शरीर के लिए उपयोगी पदार्थों में बदलने की संपूर्ण प्रक्रिया को पोषण (Nutrition) कहते हैं। इस अध्याय में हम मनुष्य तथा कुछ अन्य जंतुओं में होने वाली पोषण की प्रक्रियाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे। इसमें भोजन का ग्रहण, पाचन, अवशोषण, उपयोग तथा अपशिष्टों का निष्कासन सम्मिलित है। पाचन में भोजन जटिल रूप से सरल एवं जल में घुलनशील रूपों में टूटता है, ताकि रक्त द्वारा शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाया जा सके।

2. पोषण की पाँच विधियाँ (Five Steps of Nutrition)

किसी भी जीव में पोषण की संपूर्ण प्रक्रिया को निम्नलिखित पाँच चरणों में विभाजित किया जाता है:

  1. भोजन ग्रहण (Ingestion): भोजन को मुँह द्वारा ग्रहण करना।
  2. पाचन (Digestion): जटिल भोजन का सरल घुलनशील पदार्थों में विघटन।
  3. अवशोषण (Absorption): पचा हुआ भोजन रक्त में अवशोषित होना।
  4. आत्मसात्करण (Assimilation): अवशोषित भोजन का कोशिकाओं द्वारा उपयोग कर वृद्धि व मरम्मत।
  5. उत्सर्जन (Egestion): अपचित एवं अपशिष्ट पदार्थों का शरीर से बाहर निकालना।

3. मनुष्य में पाचन तंत्र (Human Digestive System)

मनुष्य का पाचन तंत्र निम्नलिखित अंगों से मिलकर बना होता है:

मुँह में पाचन (Digestion in the Mouth)

आमाशय में पाचन (Digestion in the Stomach)

छोटी आंत में पाचन (Digestion in the Small Intestine)

बड़ी आंत में (Large Intestine)

4. एंज़ाइम (Enzymes)

एंज़ाइम जैविक उत्प्रेरक हैं जो पाचन की अभिक्रियाओं को तीव्र करते हैं। प्रत्येक एंज़ाइम किसी विशेष पदार्थ पर कार्य करता है:

एंज़ाइम स्रावित स्थान कार्य
लार-एमाइलेज़ लार ग्रंथि स्टार्च → सरल शर्करा
पेप्सिन आमाशय प्रोटीन → पेप्टोन
ट्रिप्सिन अग्न्याशय प्रोटीन → अमीनो अम्ल
लाइपेज़ अग्न्याशय वसा → वसा अम्ल + ग्लिसरॉल

5. शाकाहारी एवं मांसाहारी जंतुओं में पाचन

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

पाचन तंत्र के अंग एवं उनके कार्य

अंग कार्य
मुँह (दाँत, जीभ, लार) भोजन का कटना, चबाना एवं स्टार्च का पाचन
ग्रासनली भोजन का आमाशय तक संवहन
आमाशय HCl एवं पेप्सिन द्वारा प्रोटीन का पाचन
छोटी आंत पोषक तत्वों का अवशोषण (विल्ली)
बड़ी आंत जल का अवशोषण, मल निर्माण
यकृत पित्त रस का स्राव
अग्न्याशय पाचक एंज़ाइमों का स्राव

पोषण के चरण

चरण परिभाषा
भोजन ग्रहण भोजन को मुँह से लेना
पाचन जटिल भोजन का सरल रूप में विघटन
अवशोषण पोषक तत्वों का रक्त में प्रवेश
आत्मसात्करण कोशिकाओं द्वारा पोषक तत्वों का उपयोग
उत्सर्जन अपशिष्ट का निष्कासन

माइंड मैप

graph TD A["प्राणियों में पोषण"] --> B["पाँच चरण: ग्रहण, पाचन, अवशोषण, आत्मसात्करण, उत्सर्जन"] B --> C["मनुष्य में पाचन तंत्र"] C --> D["मुँह - दाँत, जीभ, लार"] C --> E["ग्रासनली"] C --> F["आमाशय - HCl, पेप्सिन"] C --> G["छोटी आंत - विल्ली से अवशोषण"] C --> H["बड़ी आंत - जल अवशोषण"] C --> I["मलद्वार - निष्कासन"] A --> J["सहायक ग्रंथियाँ: यकृत, अग्न्याशय"] A --> K["जुगाली करने वाले प्राणी - रूमेन"] A --> L["अमीबा - स्यूडोपोड"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मानव पाचन तंत्र

मानव पाचन तंत्र के अंग मुँह + लार ग्रंथियाँ ग्रासनली आमाशय (जठर रस) छोटी आंत (विल्ली द्वारा अवशोषण) बड़ी आंत Golden Rule: पोषक तत्वों का मुख्य अवशोषण छोटी आंत की विल्ली से होता है।

अमीबा में पोषण

अमीबा में पोषण की विधि खाद्य रिक्तिका नाभिक स्यूडोपोड स्यूडोपोड भोजन स्यूडोपोड से घिरकर खाद्य रिक्तिका में पचता है स्वर्ण नियम: अमीबा का पोषण सबसे सरल होता है; इसमें कोई विशेष अंग नहीं होते।

सामान्य गलतियाँ

  1. पेप्सिन को कार्बोहाइड्रेट पचाने वाला मानना: पेप्सिन केवल प्रोटीन का पाचन करता है; कार्बोहाइड्रेट का पाचन लार-एमाइलेज़ से होता है।
  2. पित्त को एंज़ाइम मानना: पित्त एक रस है जो वसा का पायसीकरण करता है, यह कोई एंज़ाइम नहीं है।
  3. विल्ली का स्थान बड़ी आंत में बताना: विल्ली छोटी आंत की दीवार पर होती हैं, बड़ी आंत में नहीं।
  4. उत्सर्जन और पाचन को एक ही मानना: उत्सर्जन (Egestion) अपचित मल का निष्कासन है, जबकि शरीर के अपशिष्ट निष्कासन को उत्सर्जन कहते हैं।
  5. अमीबा का पाचन मुँह में बताना: अमीबा में मुँह नहीं होता, भोजन स्यूडोपोड से ग्रहण होकर खाद्य रिक्तिका में पचता है।
  6. HCl के कार्य को न समझना: HCl भोजन को अम्लीय बनाता है और रोगाणुओं को मारता है, यह प्रोटीन को सीधे नहीं तोड़ता।
  7. आत्मसात्करण एवं अवशोषण में भ्रम: अवशोषण रक्त में प्रवेश है, जबकि आत्मसात्करण कोशिकाओं द्वारा उपयोग है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. पोषण के पाँच चरणों को क्रम से लिखने का अभ्यास करें।
  2. लार-एमाइलेज़, पेप्सिन, ट्रिप्सिन, लाइपेज़ के कार्यों को याद रखें।
  3. यकृत और अग्न्याशय के स्राव (पित्त व अग्नाशय रस) को अलग-अलग लिखें।
  4. विल्ली की संरचना एवं कार्य का वर्णन करें, क्योंकि यह अवशोषण का प्रमुख स्थल है।
  5. जुगाली करने वाले प्राणियों के रूमेन एवं जुगाली की प्रक्रिया समझाएँ।
  6. अमीबा में पोषण की सरलता की तुलना मनुष्य से करें।
  7. पाचन तंत्र का क्रम: मुँह → ग्रासनली → आमाशय → छोटी आंत → बड़ी आंत → मलद्वार लिखें।

निष्कर्ष

प्राणियों में पोषण एक संगठित प्रक्रिया है जिसमें भोजन ग्रहण से लेकर अपशिष्ट निष्कासन तक के सभी चरण नियमित रूप से संपन्न होते हैं। मनुष्य में पाचन तंत्र के विभिन्न अंग एवं सहायक ग्रंथियाँ मिलकर जटिल भोजन को सरल रूपों में बदलती हैं, जिन्हें कोशिकाएँ उपयोग करती हैं। छोटी आंत की विल्ली अवशोषण का मुख्य स्थान है। जुगाली करने वाले जंतु सेल्यूलोज़ के पाचन में विशिष्टता रखते हैं, जबकि अमीबा पोषण की सबसे सरल विधि दर्शाता है। इस प्रकार पोषण ही वह प्रक्रिया है जिससे जीवों को ऊर्जा प्राप्त होती है और जीवन निरंतर चलता रहता है।