🔬
🧬
🔭
🪐
🧪
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

सभी जीवों को जीवित रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा भोजन के विघटन (Oxidation) से प्राप्त होती है। भोजन के जैविक ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को श्वसन (Respiration) कहते हैं। श्वसन में ऑक्सीजन की सहायता से ग्लूकोज़ का विघटन होकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल एवं ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस अध्याय में हम श्वसन के प्रकार, श्वसन तंत्र के अंग, विभिन्न जीवों में श्वसन की विधियाँ तथा श्वसन की दर को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करेंगे।

2. श्वसन की अभिक्रिया (Process of Respiration)

ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा (ATP)

3. श्वसन के प्रकार (Types of Respiration)

वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration)

अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration)

किण्वन (Fermentation)

4. श्वसन तंत्र (Human Respiratory System)

मनुष्य का श्वसन तंत्र निम्नलिखित अंगों से बना है:

  1. नासिका छिद्र (Nostrils): वायु का प्रवेश द्वार।
  2. नासिका गुहा (Nasal Cavity): वायु को गर्म, आर्द्र एवं शुद्ध करती है।
  3. ग्रसनी (Pharynx): नासिका गुहा से श्वासनली तक।
  4. स्वर यंत्र (Larynx): श्वासनली का ऊपरी भाग, जिसमें स्वरतंत्री होती है।
  5. श्वासनली (Trachea): वायु इस नली से फेफड़ों तक जाती है।
  6. ब्रांकाई (Bronchi): श्वासनली दो शाखाओं में बँटती है, जो फेफड़ों में प्रवेश करती हैं।
  7. फेफड़े (Lungs): वायु का मुख्य आदान-प्रदान स्थान।
  8. पसलियाँ एवं डायाफ्राम (Ribs and Diaphragm): श्वसन की गति में सहायक पेशियाँ।

श्वसन की प्रक्रिया

5. विभिन्न जीवों में श्वसन (Respiration in Different Organisms)

जीव श्वसन अंग विधि
मनुष्य/स्तनधारी फेफड़े वायवीय
मछली गलफड़े जल में घुली ऑक्सीजन
कीट श्वासरंध्र (Spiracle) + श्वासनलिकाएँ वायवीय
केंचुआ आर्द्र त्वचा त्वचीय
पौधे रंध्र, लेंटिसेल गैसीय आदान-प्रदान

6. पौधों में श्वसन (Respiration in Plants)

7. श्वसन की दर (Breathing Rate)

व्यायाम के बाद थकान (Muscle Fatigue)

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

वायवीय बनाम अवायवीय श्वसन

विशेषता वायवीय अवायवीय
ऑक्सीजन आवश्यक अनुपस्थित
ऊर्जा अधिक (38 ATP) कम (2 ATP)
अंतिम उत्पाद CO₂ + जल लैक्टिक अम्ल/अल्कोहल
उदाहरण मनुष्य यीस्ट, पेशियाँ

विभिन्न जीवों के श्वसन अंग

जीव अंग
मछली गलफड़े
कीट श्वासरंध्र
केंचुआ त्वचा
पौधे रंध्र, लेंटिसेल
मनुष्य फेफड़े

माइंड मैप

graph TD A["जीवों में श्वसन"] --> B["ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन → CO2 + जल + ऊर्जा"] A --> C["प्रकार"] C --> D["वायवीय - अधिक ऊर्जा"] C --> E["अवायवीय - कम ऊर्जा, लैक्टिक अम्ल"] A --> F["मनुष्य - फेफड़े, डायाफ्राम"] A --> G["मछली - गलफड़े"] A --> H["कीट - श्वासरंध्र"] A --> I["पौधे - रंध्र, लेंटिसेल"] A --> J["श्वसन दर - व्यायाम पर बढ़ती"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मानव श्वसन तंत्र

मानव श्वसन तंत्र नासिका ग्रसनी स्वर यंत्र श्वासनली बायाँ फेफड़ा दायाँ फेफड़ा डायाफ्राम Golden Rule: वायु का आदान-प्रदान फेफड़ों में होता है; गति डायाफ्राम से नियंत्रित होती है।

वायवीय एवं अवायवीय श्वसन

वायवीय बनाम अवायवीय श्वसन वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोज़ पूर्ण विघटन अधिक ऊर्जा (38 ATP) उत्पाद: CO₂ + जल उदाहरण: मनुष्य, स्तनधारी, पौधे दौड़ने में अधिक ऊर्जा अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन के बिना ग्लूकोज़ का अपूर्ण विघटन कम ऊर्जा (2 ATP) उत्पाद: लैक्टिक अम्ल या अल्कोहल + CO₂ उदाहरण: यीस्ट, पेशियाँ व्यायाम में लैक्टिक अम्ल स्वर्ण नियम: ऑक्सीजन की उपस्थिति में अधिक ऊर्जा, अनुपस्थिति में कम ऊर्जा मिलती है।

सामान्य गलतियाँ

  1. श्वसन को साँस लेने तक सीमित मानना: श्वसन कोशिका स्तर पर होने वाली ऊर्जा-उत्पादन प्रक्रिया है, साँस लेना केवल उसका एक भाग है।
  2. पौधे दिन में केवल प्रकाश संश्लेषण करते हैं मानना: पौधे दिन-रात सदैव श्वसन करते हैं; प्रकाश संश्लेषण केवल दिन में।
  3. यीस्ट के श्वसन को वायवीय मानना: यीस्ट में किण्वन (अवायवीय) होता है, जिससे एल्कोहल व CO₂ बनती है।
  4. मछली का ऑक्सीजन वायु से लेना: मछली गलफड़ों द्वारा जल में घुली ऑक्सीजन ग्रहण करती है।
  5. केंचुए के श्वसन अंग को फेफड़े मानना: केंचुआ अपनी आर्द्र त्वचा से ऑक्सीजन लेता है।
  6. श्वसन दर हमेशा स्थिर मानना: व्यायाम, दौड़ने से श्वसन दर बढ़ती है।
  7. अवायवीय श्वसन के उत्पाद को केवल CO₂ मानना: अवायवीय श्वसन में लैक्टिक अम्ल या एल्कोहल बनता है, जो पेशियों में दर्द का कारण है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. श्वसन की समीकरण लिखें: ग्लूकोज़ + O₂ → CO₂ + जल + ऊर्जा।
  2. वायवीय और अवायवीय श्वसन का अंतर सारणी के रूप में लिखें।
  3. मानव श्वसन तंत्र के अंगों का क्रम लिखें (नासिका → ग्रसनी → स्वरयंत्र → श्वासनली → ब्रांकाई → फेफड़े)।
  4. डायाफ्राम की भूमिका प्रश्वसन/निःश्वसन में समझाएँ।
  5. विभिन्न जीवों के श्वसन अंगों की तालिका याद रखें।
  6. लैक्टिक अम्ल एवं पेशी थकान का संबंध बताएँ।
  7. पौधों में रंध्र एवं लेंटिसेल की भूमिका लिखें।

निष्कर्ष

श्वसन एक आधारभूत जैविक प्रक्रिया है जिसमें भोजन का ऑक्सीकरण होकर ऊर्जा (ATP) उत्पन्न होती है। वायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की उपस्थिति में अधिक ऊर्जा मिलती है, जबकि अवायवीय श्वसन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में कम ऊर्जा तथा लैक्टिक अम्ल या एल्कोहल बनता है। मनुष्य में फेफड़े और डायाफ्राम श्वसन की गति नियंत्रित करते हैं, मछली गलफड़ों, कीट श्वासरंध्रों तथा केंचुआ त्वचा से श्वसन करते हैं। पौधों में रंध्र एवं लेंटिसेल गैसों के आदान-प्रदान के द्वार हैं। श्वसन दर व्यायाम से बढ़ती है। इस प्रकार श्वसन सभी जीवों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली सार्वभौमिक प्रक्रिया है।