जीवों के शरीर में विभिन्न पदार्थों (ऑक्सीजन, पोषक तत्व, जल, हार्मोन तथा अपशिष्ट पदार्थ) का एक स्थान से दूसरे स्थान तक संवहन होता है। इस प्रक्रिया को परिवहन (Transportation) कहते हैं। मनुष्य में परिवहन का मुख्य माध्यम रक्त (Blood) है, जो हृदय द्वारा रक्त वाहिकाओं में पंप होता है। पौधों में जल एवं पोषक तत्वों का संवहन संवहन ऊतक (जाइलम एवं फ्लोएम) द्वारा होता है। इस अध्याय में हम रक्त, हृदय, रक्त वाहिकाएँ, उत्सर्जन तथा पौधों में परिवहन का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
2. रक्त (Blood)
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जो पूरे शरीर में घूमता है। यह द्रव्य रक्त प्लाज्मा एवं उसमें तैरने वाली कोशिकाओं से बना होता है।
रक्त के घटक
प्लाज्मा (Plasma): रक्त का तरल भाग। इसमें जल, प्रोटीन, लवण, हार्मोन तथा पोषक तत्व होते हैं। पोषक तत्वों एवं अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन प्लाज्मा से होता है।
लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs): इनमें हीमोग्लोबिन होता है, जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है। ये ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर की कोशिकाओं तक पहुँचाती हैं।
श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs): ये रोगों से शरीर की रक्षा करती हैं, रोगाणुओं को नष्ट करती हैं।
रक्त पट्टिकाएँ (Platelets): ये रक्त का थक्का बनाकर घाव से रक्त स्राव रोकती हैं।
रक्त का कार्य
ऑक्सीजन एवं पोषक तत्वों का संवहन
कार्बन डाइऑक्साइड जैसे अपशिष्टों का निष्कासन
रोगों से सुरक्षा (WBCs)
शरीर के ताप का नियंत्रण
3. रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels)
रक्त तीन प्रकार की वाहिकाओं में बहता है:
धमनियाँ (Arteries): ये रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। इनमें रक्त उच्च दाब पर बहता है, इसलिए इनकी दीवारें मोटी एवं लचीली होती हैं। धमनियों में वाल्व नहीं होते।
शिराएँ (Veins): ये रक्त को शरीर के अंगों से वापस हृदय की ओर लाती हैं। इनमें रक्त निम्न दाब पर बहता है और वाल्व होते हैं, जो रक्त को वापस लौटने से रोकते हैं।
केशिकाएँ (Capillaries): धमनियों और शिराओं को जोड़ने वाली अत्यंत सूक्ष्म वाहिकाएँ, जहाँ कोशिकाओं तथा रक्त के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान होता है।
4. हृदय (Heart)
हृदय एक पेशीय अंग है जो रक्त को पंप करता है। यह छाती गुहा में स्थित है।
हृदय की संरचना
हृदय में चार कक्ष होते हैं: दो आलिंद (Atria) (ऊपर) तथा दो निलय (Ventricles) (नीचे)।
दायाँ आलिंद: शिराओं से ऑक्सीजन-रहित (कार्बन डाइऑक्साइड युक्त) रक्त प्राप्त करता है।
दायाँ निलय: ऑक्सीजन-रहित रक्त फेफड़ों में भेजता है।
बायाँ आलिंद: फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त करता है।
बायाँ निलय: ऑक्सीजन युक्त रक्त पूरे शरीर में पंप करता है।
हृदय की धड़कन
हृदय निरंतर रक्त को पंप करता रहता है।
एक मिनट में हृदय की धड़कनों की संख्या हृदय स्पंदन दर (Pulse Rate) कहलाती है।
सामान्य हृदय स्पंदन दर लगभग 72 बार प्रति मिनट होती है।
व्यायाम से हृदय स्पंदन दर बढ़ जाती है।
5. उत्सर्जन (Excretion)
शरीर में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, CO₂) को बाहर निकालने की प्रक्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
मनुष्य में अपशिष्ट जल को यूरिया कहते हैं।
वृक्क (Kidneys): यूरिया को रक्त से छानकर मूत्र बनाते हैं। मानव में दो वृक्क होते हैं।
मूत्रवाहिनी (Ureters): वृक्क से मूत्र को मूत्राशय (Urinary bladder) तक पहुँचाती हैं।
मूत्रमार्ग (Urethra): मूत्राशय से मूत्र बाहर निकलता है।
वृक्क के अतिरिक्त त्वचा (पसीने के रूप में) एवं फेफड़े (CO₂ के रूप में) भी उत्सर्जन करते हैं।
6. पौधों में परिवहन (Transportation in Plants)
पौधों में जल एवं पोषक तत्वों का संवहन संवहन ऊतक द्वारा होता है:
जाइलम (Xylem): जल और खनिज लवणों का जड़ों से पत्तियों तक ऊपर की ओर संवहन जाइलम द्वारा होता है।
फ्लोएम (Phloem): पत्तियों में बने भोजन (ग्लूकोज़) का पौधे के अन्य भागों तक संवहन फ्लोएम द्वारा होता है। भोजन का संवहन दोनों दिशाओं (ऊपर-नीचे) में हो सकता है।
वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)
पत्तियों के रंध्रों से जल का वाष्प के रूप में बाहर निकलना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है।
वाष्पोत्सर्जन के कारण जाइलम में जल का चूषण (खिंचाव) होता है, जिससे जल जड़ों से ऊपर पत्तियों तक पहुँचता है।
यह पौधों के ताप को नियंत्रित रखता है।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
रक्त के घटक एवं कार्य
घटक
कार्य
प्लाज्मा
पोषक तत्वों एवं अपशिष्टों का संवहन
RBCs
ऑक्सीजन का परिवहन (हीमोग्लोबिन)
WBCs
रोगों से रक्षा
प्लेटलेट्स
रक्त का थक्का बनाना
धमनी बनाम शिरा
विशेषता
धमनी
शिरा
दिशा
हृदय से अंगों तक
अंगों से हृदय तक
दाब
उच्च
निम्न
वाल्व
अनुपस्थित
उपस्थित
दीवार
मोटी
पतली
माइंड मैप
graph TD
A["परिवहन"] --> B["मनुष्य में"]
B --> C["रक्त - प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स"]
B --> D["हृदय - 4 कक्ष, 72 बार/मिनट"]
B --> E["वाहिकाएँ - धमनी, शिरा, केशिका"]
B --> F["उत्सर्जन - वृक्क, मूत्र"]
A --> G["पौधों में"]
G --> H["जाइलम - जल ऊपर की ओर"]
G --> I["फ्लोएम - भोजन दोनों दिशाओं में"]
G --> J["वाष्पोत्सर्जन - रंध्रों से"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
मानव हृदय की संरचना
पौधों में जाइलम एवं फ्लोएम
सामान्य गलतियाँ
धमनी में रक्त हृदय की ओर बहता है मानना: धमनियाँ रक्त को हृदय से बाहर अंगों तक ले जाती हैं; शिराएँ हृदय की ओर लाती हैं।
WBCs का कार्य ऑक्सीजन परिवहन मानना: ऑक्सीजन परिवहन RBCs का कार्य है, WBCs रोगों से रक्षा करती हैं।
हृदय के कक्षों की संख्या गलत बताना: हृदय में चार कक्ष होते हैं - 2 आलिंद और 2 निलय।
जाइलम में भोजन संवहन मानना: जाइलम जल/खनिज का संवहन करता है, भोजन का संवहन फ्लोएम द्वारा होता है।
वाष्पोत्सर्जन को केवल जल की हानि मानना: वाष्पोत्सर्जन जाइलम में जल के खिंचाव में सहायक है और ताप नियंत्रित करता है।
वृक्क का कार्य न समझना: वृक्क यूरिया को रक्त से छानकर मूत्र बनाते हैं; यह उत्सर्जन का मुख्य अंग है।
धमनियों में वाल्व होते हैं मानना: शिराओं में वाल्व होते हैं, धमनियों में नहीं।
परीक्षा युक्तियाँ
रक्त के घटक (प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स) एवं उनके कार्य लिखें।
धमनी और शिरा का अंतर सारणी के रूप में लिखें।
हृदय के चार कक्षों तथा रक्त के प्रवाह की दिशा समझाएँ।
वृक्क की क्रिया (रक्त से मूत्र निर्माण) का वर्णन करें।
जाइलम और फ्लोएम का अंतर तथा संवहन की दिशा बताएँ।
वाष्पोत्सर्जन की भूमिका (जल खिंचाव, ताप नियंत्रण) लिखें।
हृदय स्पंदन दर (72/मिनट) एवं व्यायाम का प्रभाव लिखें।
निष्कर्ष
परिवहन जीवों की आंतरिक प्रणाली का आधार है। मनुष्य में रक्त, हृदय एवं रक्त वाहिकाएँ ऑक्सीजन, पोषक तत्वों तथा अपशिष्टों का संवहन करती हैं। रक्त में प्लाज्मा, लाल एवं श्वेत रक्त कोशिकाएँ तथा प्लेटलेट्स होते हैं, प्रत्येक का विशिष्ट कार्य है। हृदय के चार कक्ष रक्त को पंप करते हैं, तथा धमनियाँ-शिराएँ इसकी दिशा निर्धारित करती हैं। अपशिष्टों का निष्कासन वृक्कों द्वारा मूत्र के रूप में होता है। पौधों में जाइलम जल और फ्लोएम भोजन का संवहन करते हैं, तथा वाष्पोत्सर्जन जल के खिंचाव में सहायक है। इस प्रकार परिवहन प्रणाली संपूर्ण जीव को जीवित एवं सक्रिय रखती है।