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1. परिचय

हम जल का उपयोग पीने, खाना पकाने, सफाई एवं अनेक कार्यों में करते हैं। इस उपयोग के बाद जो जल बचता है, उसे अपशिष्ट जल (Wastewater) या मल जल (Sewage) कहते हैं। इस अपशिष्ट जल में अनेक हानिकारक पदार्थ, रोगाणु एवं रसायन होते हैं। यदि इसका सही उपचार न किया जाए, तो यह जल प्रदूषण एवं बीमारियाँ फैलाता है। इस अध्याय में हम अपशिष्ट जल के स्रोत, मल उपचार संयंत्र की प्रक्रिया, जल प्रदूषण के कारण एवं रोकथाम, तथा साफ-सफाई के नियमों का अध्ययन करेंगे।

2. अपशिष्ट जल (Wastewater)

3. मल जल के स्रोत (Sources of Sewage)

  1. घरेलू जल: रसोई, स्नानघर, शौचालय एवं कपड़े धोने का जल।
  2. औद्योगिक अपशिष्ट: कारखानों का रासायनिक जल।
  3. कृषि अपशिष्ट: खेतों में प्रयुक्त उर्वरक एवं कीटनाशक वाला जल।
  4. वर्षा जल: सड़कों एवं नालियों से बहकर आया जल।

4. मल निकासी तंत्र (Sewage System)

5. मल उपचार संयंत्र की प्रक्रिया (Process in STP)

मल उपचार संयंत्र में अपशिष्ट जल की सफाई निम्नलिखित चरणों में होती है:

  1. निस्पंदन (Filtration): मल जल को मोटे ग्रेट्स (जालियों) से गुजारा जाता है, जिसमें बड़े कचरे (कपड़े, थैले, डिब्बे) फँस जाते हैं।
  2. संसेदन (Sedimentation): जल को टंकी में शांत रखा जाता है, जिसमें भारी ठोस कण नीचे बैठकर अवसाद (Sludge) बनाते हैं। ऊपर साफ़ जल रहता है।
  3. जैविक उपचार: अवसाद (sludge) को सूक्ष्मजीवों की सहायता से विघटित किया जाता है।
  4. जल का सफाई: साफ किया गया जल नदियों या भूमि में छोड़ा जाता है।
  5. क्लोरीनीकरण: कुछ स्थानों पर जल में क्लोरीन मिलाकर रोगाणुओं को नष्ट किया जाता है।

उपचार के बाद प्राप्त साफ़ जल को नदियों, तालाबों में छोड़ा जा सकता है, परंतु यह पीने योग्य नहीं होता।

6. जल प्रदूषण (Water Pollution)

जल में हानिकारक पदार्थों के मिलने से जल की गुणवत्ता बिगड़ने को जल प्रदूषण कहते हैं।

जल प्रदूषण के कारण

  1. अनुपचारित मल जल को नदियों में छोड़ना।
  2. औद्योगिक रसायनों का जल में मिलना।
  3. कीटनाशक एवं उर्वरकों का बहाव।
  4. शवों, स्नान, कपड़े धोने का जल।
  5. ठोस कचरे को जल में फेंकना।

जल प्रदूषण के परिणाम

7. साफ-सफाई एवं नियम (Sanitation and Rules)

8. अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग (Reuse of Wastewater)

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

मल उपचार के चरण

चरण प्रक्रिया
निस्पंदन ग्रेट्स से बड़ा कचरा हटाना
संसेदन ठोस कणों का नीचे बैठना
जैविक उपचार सूक्ष्मजीवों से विघटन
क्लोरीनीकरण रोगाणुओं का नाश

जल प्रदूषण के कारण

कारण प्रभाव
अनुपचारित मल जल बीमारियाँ
औद्योगिक रसायन जलीय जीवों की मृत्यु
कीटनाशक जल विषैला
ठोस कचरा गंदगी एवं रुकावट

माइंड मैप

graph TD A["अपशिष्ट जल की कहानी"] --> B["स्रोत - घरेलू, औद्योगिक, कृषि"] B --> C["मल जल (Sewage)"] C --> D["नालियाँ → मुख्य नाली → STP"] D --> E["उपचार: निस्पंदन → संसेदन → जैविक → क्लोरीनीकरण"] A --> F["जल प्रदूषण"] F --> G["बीमारियाँ, जलीय जीवों की मृत्यु"] A --> H["सफाई नियम - शौचालय, कूड़ेदान"] A --> I["पुनः उपयोग - सिंचाई"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मल उपचार संयंत्र की प्रक्रिया

मल उपचार संयंत्र की प्रक्रिया 1. निस्पंदन ग्रेट्स से बड़ा कचरा (थैले, डिब्बे) हटाना 2. संसेदन ठोस कण नीचे बैठकर अवसाद (Sludge) बनना 3. जैविक सूक्ष्मजीवों से विघटन 4. क्लोरीनीकरण क्लोरीन मिलाने से रोगाणु नष्ट होते हैं साफ़ जल नदियों में छोड़ा जाता है (पीने योग्य नहीं) Golden Rule: उपचारित जल नदियों में छोड़ा जा सकता है, परंतु पीने योग्य नहीं होता।

साफ-सफाई के नियम

साफ-सफाई के नियम शौचालय का उपयोग घरों में शौचालय बनाना खुले शौच से बचना कूड़ेदान कूड़ा कूड़ेदान में डालना नालियों में नहीं फेंकना पेयजल की सुरक्षा जल को उबालकर पीना जल को ढककर रखना आसपास की सफाई मच्छरों से बचाव जल-जनित रोगों की रोकथाम स्वर्ण नियम: साफ-सफाई ही जल-जनित रोगों से बचाव का सबसे अच्छा उपाय है।

सामान्य गलतियाँ

  1. उपचारित जल को पीने योग्य मानना: उपचार संयंत्र का साफ़ जल नदियों में छोड़ा जाता है, यह पीने योग्य नहीं होता।
  2. मल जल को केवल घरेलू जल मानना: मल जल में औद्योगिक एवं कृषि अपशिष्ट भी शामिल होते हैं।
  3. निस्पंदन को अंतिम चरण मानना: निस्पंदन पहला चरण है; उसके बाद संसेदन, जैविक उपचार एवं क्लोरीनीकरण होते हैं।
  4. संसेदन में सूक्ष्मजीवों की भूमिका न समझना: संसेदन में ठोस कण बैठते हैं, विघटन जैविक उपचार में होता है।
  5. मैनहोल का कार्य न बताना: मैनहोल नालियों की सफाई के लिए बने ढक्कन वाले छिद्र हैं।
  6. नाली में कूड़ा डालना गलत नहीं मानना: नालियों में कूड़ा डालने से नाला-जाम होता है और गंदगी फैलती है।
  7. क्लोरीन का कार्य न समझना: क्लोरीन रोगाणुओं को नष्ट करता है, यह जल की गंध दूर करने मात्र के लिए नहीं है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. मल उपचार के चरण क्रम से लिखें (निस्पंदन → संसेदन → जैविक उपचार → क्लोरीनीकरण)।
  2. अपशिष्ट जल के स्रोत - घरेलू, औद्योगिक, कृषि सूचीबद्ध करें।
  3. जल-जनित रोगों (हैजा, पीलिया, टाइफाइड) के नाम लिखें।
  4. जल प्रदूषण के कारण एवं परिणाम समझाएँ।
  5. साफ-सफाई के नियम तथा शौचालय के महत्व पर लिखें।
  6. अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग (सिंचाई) का उल्लेख करें।
  7. मैनहोल एवं नाली-जाम की अवधारणा समझाएँ।

निष्कर्ष

अपशिष्ट जल की कहानी हमें सिखाती है कि हमारे उपयोग के बाद जो जल निकलता है, उसमें अनेक हानिकारक पदार्थ होते हैं। मल जल को नालियों द्वारा मल उपचार संयंत्र तक पहुँचाकर निस्पंदन, संसेदन, जैविक उपचार एवं क्लोरीनीकरण द्वारा साफ़ किया जाता है। अनुपचारित मल जल को नदियों में छोड़ने से जल प्रदूषण होता है, जिससे हैजा, पीलिया, टाइफाइड जैसी बीमारियाँ फैलती हैं। साफ-सफाई के नियमों का पालन - शौचालय का उपयोग, कूड़ेदान, पेयजल की सुरक्षा - जल-जनित रोगों की रोकथाम का आधार है। इस प्रकार अपशिष्ट जल का सही प्रबंधन ही स्वच्छ वातावरण एवं स्वस्थ जीवन की कुंजी है।