अठारहवीं शताब्दी भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण युग था। इस काल में मुग़ल साम्राज्य कमजोर पड़ने लगा और उसके स्थान पर अनेक नए राजनीतिक गठन उभरे। इनमें नवाबी राज्य (अवध, बंगाल, हैदराबाद), राजपूत राज्य, सिख राज्य, मराठा साम्राज्य और जाट राज्य प्रमुख थे। इस अध्याय में हम इन नए राजनीतिक गठनों के उदय, उनके शासकों और उनकी विशेषताओं का अध्ययन करेंगे।
मुग़ल साम्राज्य का पतन धीरे-धीरे हुआ। औरंगज़ेब की मृत्यु (1707) के बाद उसके उत्तराधिकारी कमजोर थे। इस अवसर का लाभ उठाकर विभिन्न क्षेत्रों में सत्ता ने नए रूप लिए। ये नए राज्य किसी सीमा तक मुग़लों के अधीन तो थे, परंतु वास्तव में स्वतंत्र होते जा रहे थे।
औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद मुग़ल साम्राज्य का ह्रास प्रारंभ हुआ। उसके उत्तराधिकारी कमजोर थे। इस काल में कई कमजोर मुग़ल शासक हुए, जिन्हें 'बादशाह' कहा जाता था। उनमें बहादुर शाह, जहाँदार शाह, फर्रुख़सियर और मुहम्मद शाह ('रंगीला' के नाम से प्रसिद्ध) शामिल थे।
इन कमजोर शासकों के समय में मुग़ल दरबार में वज़ीरों (मुख्यमंत्रियों) और दरबारियों की शक्ति बढ़ गई। विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय शासक अपनी सत्ता सुदृढ़ करने लगे। इस प्रकार मुग़ल केंद्रीय शक्ति कमजोर हुई और नए राजनीतिक गठन उभरे।
अठारहवीं शताब्दी में मुग़ल साम्राज्य के अधीन प्रांतों के गवर्नरों ने अपनी शक्ति बढ़ाकर स्वतंत्र राज्य स्थापित किए। इन्हें 'नवाब' कहा गया।
इन नवाबों ने मुग़ल सम्राट को नाम मात्र का आदर दिया, परंतु वास्तव में वे स्वतंत्र थे। इन राज्यों की अपनी सेनाएँ, प्रशासन और कर व्यवस्था थी।
मराठा साम्राज्य की नींव शिवाजी ने रखी। 1674 में शिवाजी ने रायगढ़ में राज्याभिषेक करवाया और स्वयं को 'छत्रपति' घोषित किया। शिवाजी ने मुग़लों से संघर्ष किया और अपने राज्य की रक्षा की। उसके बाद मराठा शक्ति का विस्तार हुआ।
शिवाजी के बाद मराठा शासन में 'पेशवा' (मुख्यमंत्री) की शक्ति बढ़ी। बालाजी विश्वनाथ पहले पेशवा थे। उसके बाद बाजीराव प्रथम और फिर बालाजी बाजीराव पेशवा बने। पेशवा का पद वंशानुगत हो गया। मराठा साम्राज्य एक 'संघ' (Confederacy) के रूप में फैला। सिंधिया (ग्वालियर), होल्कर (इंदौर), गायकवाड़ (बड़ौदा) और भोंसले (नागपुर) मराठा संघ के प्रमुख घराने थे।
पंजाब में सिख शक्ति का उदय हुआ। दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने 1699 में 'खालसा' की स्थापना की। खालसा सिखों का एक संगठित समुदाय था। गुरु गोबिंद सिंह की मृत्यु के बाद बंदा बहादुर ने सिखों का नेतृत्व किया। उसने मुग़लों के विरुद्ध संघर्ष किया।
बंदा बहादुर के बाद सिख समुदाय 'मिसल' नामक समूहों में संगठित हुआ। इन मिसलों ने मिलकर पंजाब में अपनी सत्ता स्थापित की। अंततः रणजीत सिंह ने विभिन्न मिसलों को एक करके पंजाब में एक शक्तिशाली सिख राज्य स्थापित किया। रणजीत सिंह ने लाहौर में राजधानी बनाई।
उत्तर भारत में जाट किसानों ने भी अपनी सत्ता स्थापित की। जाटों ने मुग़लों के विरुद्ध विद्रोह किया। 1722 में चूरामन ने जाट राज्य की नींव रखी। जाटों की राजधानी भरतपुर थी। बाद में सूरज मल ने जाट राज्य को मजबूत किया। जाट राज्य कृषि पर आधारित था।
जाटों ने अपने राज्य में किसानों की स्थिति सुधारने का प्रयास किया। उन्होंने किले और महल बनवाए। जाट राज्य अठारहवीं शताब्दी में उत्तर भारत की महत्वपूर्ण शक्ति बन गया।
राजपूत शासकों ने भी मुग़लों की कमजोरी का लाभ उठाकर अपने राज्यों को मजबूत किया। राजपूत राज्यों में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर आदि शामिल थे। इन राज्यों के शासकों ने मुग़ल साम्राज्य से दूरी बनाई और अपनी स्वतंत्र सत्ता सुदृढ़ की।
कुछ राजपूत शासक मुग़लों के प्रति वफादार रहे, जबकि कुछ ने स्वतंत्रता प्राप्त की। सवाई जय सिंह (जयपुर) ने ज्योतिष और वास्तुकला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उसने जयपुर नगर का निर्माण कराया।
अठारहवीं शताब्दी के नए राजनीतिक गठनों की प्रमुख विशेषताएँ थीं:
इन गठनों ने मुग़ल साम्राज्य की तरह विशाल साम्राज्य तो नहीं बनाया, परंतु क्षेत्रीय स्तर पर शासन को व्यवस्थित किया। इन राज्यों में अनेक बाद में ब्रिटिश सत्ता से संघर्ष करते रहे।
| राज्य | संस्थापक | राजधानी |
|---|---|---|
| अवध | सआदत ख़ाँ (1722) | लखनऊ |
| बंगाल | मुर्शिद क़ुली ख़ाँ | मुर्शिदाबाद |
| हैदराबाद | निज़ाम-उल-मुल्क आसफ़ जाह (1724) | हैदराबाद |
| घराना | क्षेत्र |
|---|---|
| सिंधिया | ग्वालियर |
| होल्कर | इंदौर |
| गायकवाड़ | बड़ौदा |
| भोंसले | नागपुर |
| राज्य/समुदाय | संस्थापक/नेता | राजधानी |
|---|---|---|
| सिख राज्य | रणजीत सिंह | लाहौर |
| जाट राज्य | चूरामन (1722) | भरतपुर |
| राजपूत राज्य | सवाई जय सिंह | जयपुर |
अठारहवीं शताब्दी भारतीय इतिहास का परिवर्तनकारी युग था। मुग़ल साम्राज्य के ह्रास ने विभिन्न क्षेत्रों में नए राजनीतिक गठनों को जन्म दिया। अवध, बंगाल और हैदराबाद के नवाबों ने स्वतंत्र राज्य स्थापित किए। मराठा साम्राज्य शिवाजी से प्रारंभ होकर पेशवाओं के नेतृत्व में विस्तारित हुआ। सिख शक्ति खालसा और मिसलों के माध्यम से पंजाब में सुदृढ़ हुई और रणजीत सिंह के नेतृत्व में शिखर पर पहुँची। जाटों ने भरतपुर में अपना राज्य बनाया, जबकि राजपूत शासकों ने अपनी सत्ता मजबूत की। इन नए गठनों ने क्षेत्रीय स्तर पर शासन को व्यवस्थित किया और बाद में ब्रिटिश सत्ता से संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह युग भारतीय इतिहास में राजनीतिक विविधता और क्षेत्रीय विकास का प्रतीक है।