पृथ्वी जिस पर हम रहते हैं, वह बाहर से गोल दिखती है, परंतु अंदर से इसकी संरचना अत्यंत जटिल है। पृथ्वी का आंतरिक भाग विभिन्न परतों से बना है। यह अध्याय हमें पृथ्वी की आंतरिक संरचना, चट्टानों के प्रकार और उनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में बताता है। हम यह भी जानेंगे कि चट्टानें किस प्रकार बनती हैं और उनका हमारे जीवन में क्या महत्व है।
पृथ्वी का आंतरिक भाग बहुत गर्म है। वैज्ञानिकों ने विभिन्न विधियों से पृथ्वी के अंदर के बारे में जानकारी प्राप्त की है। भूकंपीय तरंगों (Seismic waves) के अध्ययन से पृथ्वी की आंतरिक संरचना का पता चलता है।
पृथ्वी की आंतरिक संरचना को तीन मुख्य परतों में बाँटा जा सकता है:
भूपर्पटी (Crust): यह पृथ्वी की सबसे बाहरी और सबसे पतली परत है। इसकी मोटाई लगभग 5 से 100 किलोमीटर तक होती है। महाद्वीपों के नीचे यह अधिक मोटी और महासागरों के नीचे पतली होती है। भूपर्पटी मुख्य रूप से ग्रेनाइट और बेसाल्ट चट्टानों से बनी है।
मेंटल (Mantle): भूपर्पटी के नीचे मेंटल होता है। यह भूपर्पटी से अधिक मोटा है और इसकी मोटाई लगभग 2900 किलोमीटर है। मेंटल में पिघला हुआ गर्म पदार्थ 'मैग्मा' (Magma) होता है।
कोर (Core): पृथ्वी का सबसे भीतरी भाग कोर कहलाता है। कोर में मुख्य रूप से निकेल और लोहा (Iron) होता है, इसलिए इसे 'निफे' (Nife) भी कहा जाता है। कोर का तापमान अत्यधिक उच्च होता है। कोर पृथ्वी का सबसे गर्म भाग है।
पृथ्वी के अंदर की जानकारी प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका भूकंपीय तरंगों का अध्ययन है। भूकंप के समय उत्पन्न होने वाली तरंगें पृथ्वी के अंदर से गुजरती हैं। वैज्ञानिक इन तरंगों की गति और मार्ग का अध्ययन करके पृथ्वी की परतों की जानकारी प्राप्त करते हैं।
वैज्ञानिकों ने गहरे कुएँ खोदकर और खदानों से भी पृथ्वी की आंतरिक परतों की जानकारी प्राप्त की है। परंतु सबसे गहरा कुआँ भी पृथ्वी की भूपर्पटी से आगे नहीं जा पाता। इसलिए भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के अंदर के अध्ययन का प्रमुख माध्यम हैं।
पृथ्वी की सतह चट्टानों से बनी है। चट्टानें खनिजों का संग्रह हैं। चट्टानों के आधार पर पृथ्वी की भूपर्पटी का निर्माण होता है। चट्टानों को तीन मुख्य प्रकारों में बाँटा गया है:
आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks): ये चट्टानें पिघले हुए मैग्मा या लावा के ठंडा होने से बनती हैं। जब मैग्मा पृथ्वी के अंदर ठंडा होता है, तो आग्नेय चट्टानें बनती हैं। जब ज्वालामुखी से निकला लावा सतह पर ठंडा होता है, तो भी ये बनती हैं। ग्रेनाइट और बेसाल्ट आग्नेय चट्टानें हैं।
अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks): ये चट्टानें चट्टानों के टुकड़ों (अवसाद) के जमाव और दबाव से बनती हैं। नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी और रेत समय के साथ जमकर दबती हैं और चट्टानों में बदल जाती हैं। बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और शेल अवसादी चट्टानें हैं।
कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks): ये चट्टानें ताप और दबाव के प्रभाव से बनती हैं। जब आग्नेय या अवसादी चट्टानें अत्यधिक ताप और दबाव में आती हैं, तो उनका रूप बदल जाता है। संगमरमर (चूना पत्थर से), क्वार्टजाइट (बलुआ पत्थर से), स्लेट (शेल से) और ग्रेफाइट (कोयले से) कायांतरित चट्टानें हैं।
चट्टानें एक चक्र में बदलती रहती हैं, जिसे 'चट्टान चक्र' (Rock Cycle) कहते हैं। इस चक्र में एक प्रकार की चट्टान दूसरे प्रकार में परिवर्तित होती है। उदाहरण के लिए, आग्नेय चट्टानों के टूटने से अवसादी चट्टानें बनती हैं। जब अवसादी चट्टानें ताप और दबाव में आती हैं, तो वे कायांतरित चट्टानें बन जाती हैं।
यह चक्र निरंतर चलता रहता है। पृथ्वी की गतिशील प्रक्रियाओं (जैसे ज्वालामुखी, अपरदन, ताप) के कारण चट्टानें अपना रूप बदलती रहती हैं। इस प्रकार चट्टान चक्र पृथ्वी की सतह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में सहायक है।
चट्टानों का हमारे जीवन में बहुत महत्व है:
प्राकृतिक संसाधनों के रूप में चट्टानें हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।
चट्टानों में अनेक खनिज पाए जाते हैं। खनिज चट्टानों में पाए जाने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। कुछ खनिज धातुएँ हैं (जैसे लोहा, सोना, ताँबा), तो कुछ अधातु (जैसे कोयला, चूना पत्थर)। खनिजों का उपयोग उद्योगों, भवन निर्माण और आभूषणों में होता है।
खनिज संसाधन सीमित हैं और इनका निर्माण बहुत धीमी प्रक्रिया से होता है। इसलिए खनिजों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। खनन के माध्यम से हम इन खनिजों को पृथ्वी से निकालते हैं।
| परत | विवरण | प्रमुख तत्व |
|---|---|---|
| भूपर्पटी (Crust) | सबसे बाहरी पतली परत | ग्रेनाइट, बेसाल्ट |
| मेंटल (Mantle) | मोटी परत, ~2900 किमी | मैग्मा |
| कोर (Core) | सबसे भीतरी भाग | निकेल और लोहा (निफे) |
| प्रकार | निर्माण प्रक्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| आग्नेय | मैग्मा/लावा के ठंडा होने से | ग्रेनाइट, बेसाल्ट |
| अवसादी | अवसाद के जमाव-दबाव से | बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, शेल |
| कायांतरित | ताप-दबाव से | संगमरमर, क्वार्टजाइट, स्लेट |
| मूल चट्टान | कायांतरित चट्टान |
|---|---|
| चूना पत्थर | संगमरमर |
| बलुआ पत्थर | क्वार्टजाइट |
| शेल | स्लेट |
| कोयला | ग्रेफाइट |
पृथ्वी का आंतरिक भाग तीन मुख्य परतों - भूपर्पटी, मेंटल और कोर - से बना है। भूपर्पटी सबसे बाहरी परत है, जिसमें हम रहते हैं। मेंटल में गर्म मैग्मा होता है और कोर निकेल-लोहे से बना है। पृथ्वी की सतह चट्टानों से बनी है, जो तीन प्रकार की होती हैं - आग्नेय, अवसादी और कायांतरित। चट्टान चक्र में चट्टानें एक रूप से दूसरे रूप में बदलती रहती हैं। चट्टानों से हमें खनिज, ईंधन और धातुएँ मिलती हैं, जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं। पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन भूगोल की नींव है और यह हमें पृथ्वी की गतिशील प्रक्रियाओं (ज्वालामुखी, भूकंप, अपरदन) को समझने में मदद करता है।