Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for जल.
पृथ्वी को 'नीला ग्रह' कहा जाता है, क्योंकि इसकी सतह का अधिकांश भाग जल से ढका है। जल जीवन का आधार है। इस अध्याय में हम जल चक्र, महासागरों, ज्वार-भाटा (Tides), लहरों और महासागरीय धाराओं (Ocean Currents) के बारे में अध्ययन करेंगे। हम यह भी जानेंगे कि जल पृथ्वी पर किस प्रकार वितरित है।
पृथ्वी पर उपलब्ध जल का अधिकांश भाग (लगभग 97 प्रतिशत) महासागरों में लवणीय (खारा) है। केवल लगभग 3 प्रतिशत जल मीठा है, जो हिमनदों, नदियों, झीलों और भूमिगत जल के रूप में पाया जाता है।
पृथ्वी पर जल एक चक्र में घूमता रहता है, जिसे 'जल चक्र' (Hydrological Cycle) कहते हैं। जल चक्र में निम्नलिखित प्रक्रियाएँ शामिल हैं:
इस प्रकार जल लगातार स्थल, जल और वायु के बीच चक्रित होता रहता है।
पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत भाग महासागरों से ढका है। महासागर बड़े जल निकाय हैं, जो महाद्वीपों को घेरे हुए हैं। प्रमुख महासागर हैं:
महासागरों का जल लवणीय होता है। समुद्री जल की लवणता (Salinity) विभिन्न स्थानों पर भिन्न होती है। महासागर जलवायु को प्रभावित करते हैं और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
लहरें जल की सतह पर उत्पन्न होने वाली गतियाँ हैं। लहरें मुख्य रूप से पवनों के कारण उत्पन्न होती हैं। जब पवन जल की सतह पर चलती है, तो जल में तरंगें उत्पन्न होती हैं। लहरों का आकार पवन की गति पर निर्भर करता है।
लहरें तटों को प्रभावित करती हैं। वे तटीय क्षेत्रों में अपरदन और निक्षेपण करती हैं। लहरों की ऊँचाई समुद्र की सतह और गहराई पर निर्भर करती है। भूकंप के कारण भी विशाल लहरें उत्पन्न होती हैं, जिन्हें 'सुनामी' (Tsunami) कहते हैं।
समुद्री जल का नियमित रूप से ऊपर-नीचे होना 'ज्वार-भाटा' कहलाता है। जब जल ऊपर उठता है, तो उसे 'उच्च ज्वार' (High Tide) और जब नीचे जाता है, तो उसे 'निम्न ज्वार' (Low Tide) कहते हैं। ज्वार-भाटा चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण उत्पन्न होते हैं।
ज्वार-भाटा दो प्रकार के होते हैं:
ज्वार-भाटा से ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है (ज्वारीय ऊर्जा)। ज्वार-भाटा मछली पकड़ने और जहाजों के आवागमन को भी प्रभावित करते हैं।
महासागरों में जल की निरंतर बहने वाली धाराओं को 'महासागरीय धाराएँ' (Ocean Currents) कहते हैं। ये धाराएँ एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जल को ले जाती हैं। धाराओं के दो प्रकार हैं:
महासागरीय धाराएँ पवनों, जल के तापमान, लवणता और पृथ्वी के घूर्णन से प्रभावित होती हैं। ये धाराएँ तटीय क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करती हैं।
जल जीवन के लिए अनिवार्य है। मानव जल का उपयोग पीने, खेती, उद्योग और अन्य कार्यों में करता है। परंतु मीठे जल की मात्रा सीमित है, इसलिए जल का संरक्षण आवश्यक है। वर्षा जल संग्रहण (Rainwater Harvesting), नदियों को स्वच्छ रखना और जल का विवेकपूर्ण उपयोग जल संरक्षण के उपाय हैं।
भूमिगत जल भी जल का महत्वपूर्ण स्रोत है, जो कुओं और नलकूपों से प्राप्त होता है। जल का अत्यधिक दोहन और प्रदूषण जल संकट का कारण बन सकता है। इसलिए हमें जल बचाना चाहिए।
महासागर मानव जीवन के लिए अनेक रूपों में महत्वपूर्ण हैं। महासागरों से हमें मछली और अन्य समुद्री जीव मिलते हैं। महासागर व्यापारिक मार्ग हैं, जिनसे विभिन्न देशों के बीच व्यापार होता है। महासागर जलवायु को नियंत्रित करते हैं। ज्वारीय ऊर्जा और लहरों से ऊर्जा भी प्राप्त की जा सकती है। महासागरों के संसाधनों का संरक्षण भी आवश्यक है।
| महासागर | विशेषता |
|---|---|
| प्रशांत महासागर | सबसे बड़ा और गहरा |
| अटलांटिक महासागर | दूसरा सबसे बड़ा |
| हिंद महासागर | तीसरा सबसे बड़ा |
| आर्कटिक महासागर | सबसे छोटा |
| प्रकार | स्थिति | विशेषता |
|---|---|---|
| वसंतीय ज्वार | सूर्य-चंद्रमा-पृथ्वी एक सीध में | सबसे ऊँचा ज्वार |
| नीप ज्वार | समकोण स्थिति | कम ऊँचा ज्वार |
| प्रकार | दिशा | उदाहरण |
|---|---|---|
| गर्म धाराएँ | विषुवत → ध्रुव | गल्फ स्ट्रीम |
| ठंडी धाराएँ | ध्रुव → विषुवत | लैब्राडोर धारा |
graph TD
A["जल"] --> B["जल चक्र"]
A --> C["महासागर"]
A --> D["लहरें"]
A --> E["ज्वार-भाटा"]
A --> F["महासागरीय धाराएँ"]
A --> G["जल संरक्षण"]
B --> B1["वाष्पीकरण, संघनन, वर्षण, संग्रहण"]
C --> C1["प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, आर्कटिक"]
D --> D1["पवनों से लहरें"]
D --> D2["सुनामी: भूकंप से"]
E --> E1["उच्च-निम्न ज्वार"]
E --> E2["वसंतीय और नीप ज्वार"]
F --> F1["गर्म: गल्फ स्ट्रीम"]
F --> F2["ठंडी: लैब्राडोर"]
G --> G1["वर्षा जल संग्रहण"]
G --> G2["जल का विवेकपूर्ण उपयोग"]
जल पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। जल चक्र के माध्यम से जल निरंतर स्थल, जल और वायु के बीच चक्रित होता है। पृथ्वी की सतह का 71 प्रतिशत भाग महासागरों से ढका है। महासागरों का जल लवणीय है और केवल थोड़ा सा जल मीठा है। लहरें पवनों से और ज्वार-भाटा चंद्रमा-सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न होते हैं। महासागरीय धाराएँ जलवायु को प्रभावित करती हैं। ज्वारीय ऊर्जा ऊर्जा का एक नवीकरणीय स्रोत है। मीठे जल की सीमित मात्रा के कारण जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। वर्षा जल संग्रहण और जल का विवेकपूर्ण उपयोग जल संकट को रोकने में सहायक हैं। जल ही जीवन है, इसलिए हमें इसे बचाना चाहिए।