🔬
🧬
🔭
🪐
🧪
← डैशबोर्ड पर वापस जाएँ
Font Size:

1. परिचय

मध्यकालीन भारत में समाज केवल जातियों में ही विभाजित नहीं था। वर्ण व्यवस्था के बाहर भी अनेक समुदाय रहते थे, जिन्हें जनजातियाँ (Tribes) कहा जाता था। कुछ समुदाय खानाबदोश (घूम-घूमकर रहने वाले) थे, तो कुछ एक स्थान पर बसे हुए थे। इस अध्याय में हम जनजातियों के जीवन, उनके शासन, खानाबदोशों की भूमिका और एक स्थान पर बसे समुदायों की स्थिति का अध्ययन करेंगे।

जनजातीय समुदाय अपनी अलग-अलग परंपराएँ, भाषाएँ और जीवन-शैली रखते थे। वे प्रायः वनों, पहाड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में रहते थे। इनमें से कुछ शिकारी-संग्राहक थे, कुछ पशुपालक, तो कुछ कृषक। जनजातियाँ वर्ण व्यवस्था से बाहर थीं और इनका अपना प्रशासन होता था।

2. जनजातियाँ: विविध जीवन-शैली

जनजातीय लोग विभिन्न तरीकों से अपना जीवन यापन करते थे। कुछ जनजातियाँ शिकार करती थीं और वनों से जंगली फल, जड़ें और शहद इकट्ठा करती थीं। कुछ जनजातियाँ मछली पकड़ती थीं। कुछ समुदाय पशुपालन करते थे और अपने पशुओं के साथ घूमते थे। कुछ जनजातियाँ खेती करती थीं, जिन्हें 'एक जगह बसे हुए समुदाय' कहा जा सकता है।

जनजातीय समाज में भूमि पर सामूहिक स्वामित्व होता था। जनजाति का नेतृत्व उसके 'मुखिया' या 'सरदार' करता था। कुछ जनजातियों में महिलाएँ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। जनजातीय लोग अपनी जीवन-शैली और रीति-रिवाजों के अनुसार ही अपने विवादों को सुलझाते थे।

3. खानाबदोश समुदाय

खानाबदोश समुदाय एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते थे। इनमें से कुछ पशुपालक थे, जो अपने पशुओं के लिए चरागाहों की तलाश में यात्रा करते थे। कुछ खानाबदोश व्यापार में लगे हुए थे। सबसे प्रसिद्ध खानाबदोश व्यापारी 'बंजारे' थे।

बंजारे गुजराती भाषा बोलते थे और अपने बैलों पर अनाज और अन्य सामान ढोकर व्यापार करते थे। वे विभिन्न क्षेत्रों के बीच सामान पहुँचाते थे। मुग़ल सेना को अनाज और रसद की आपूर्ति में बंजारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बंजारों का व्यापार राष्ट्रीय स्तर का था। इसके अलावा गड़रिये, लोहार और कलाकार जैसे खानाबदोश समुदाय भी थे।

4. गोंड जनजाति

गोंड भारत की प्रमुख जनजातियों में से एक थी। गोंड मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश) के विशाल क्षेत्र 'गोंडवाना' में रहते थे। गोंड कृषि और पशुपालन करते थे। धीरे-धीरे कुछ गोंड सरदार शक्तिशाली बन गए और उन्होंने अपने राज्य स्थापित किए।

गोंड राज्यों में 'गढ़' (मजबूत स्थान/किला) महत्वपूर्ण थे। गोंड राजा अपने अधीन क्षेत्रों का प्रशासन करते थे। गढ़कटंगा एक प्रसिद्ध गोंड राज्य था, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसमें लगभग 52,000 गाँव थे। गढ़कटंगा की प्रसिद्ध शासिका रानी दुर्गावती थीं, जिन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुग़लों से युद्ध किया।

5. अहोम जनजाति

अहोम जनजाति ने असम में अपना शासन स्थापित किया। तेरहवीं शताब्दी में अहोमों ने असम में प्रवेश किया और धीरे-धीरे वहाँ के बड़े क्षेत्र पर अपना अधिकार जमाया। अहोम शासन में 'पाइक' नामक व्यवस्था थी, जिसके अनुसार वयस्क पुरुषों से एक निश्चित समय तक काम लिया जाता था। इससे राज्य को मजदूर उपलब्ध होते थे।

अहोमों ने अपने शासन में नई कृषि तकनीकें अपनाईं और बड़ी-बड़ी नहरें और जलाशय बनाए। अहोमों ने 'बुरंजी' नामक अपने इतिहास के अभिलेख भी लिखे, जिन्हें अहोम इतिहास लेखन माना जाता है। अहोम शासन लगभग छह सौ वर्षों तक चला।

6. एक जगह बसे हुए समुदाय

कई समुदाय एक स्थान पर स्थायी रूप से बस गए थे। ये समुदाय कृषि पर निर्भर थे। इनमें से कुछ ने अपनी स्थिति सुधारी और वे शासक वर्ग से जुड़ गए। समय के साथ कुछ ऐसे समुदायों को वर्ण व्यवस्था में स्थान दिया जाने लगा। वे ब्राह्मण या क्षत्रिय कहलाने लगे।

परंतु सभी समुदाय इस सुधार से लाभान्वित नहीं हुए। जनजातीय लोगों और वनवासियों को 'जंगली' कहकर हेय दृष्टि से देखा जाता था। अनेक जनजातीय समुदाय कृषि और अन्य व्यवसाय अपनाने के बाद भी समाज में पूर्ण स्वीकृति नहीं पा सके।

7. वर्ण व्यवस्था और जनजातियाँ

जनजातीय समाज वर्ण व्यवस्था से अलग था। वर्ण व्यवस्था में जातियों को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में बाँटा गया था। जनजातियाँ इस व्यवस्था में शामिल नहीं थीं। धीरे-धीरे कुछ जनजातियाँ हिंदू धर्म की मान्यताओं से प्रभावित हुईं और वर्ण व्यवस्था में स्थान पाने का प्रयास किया।

परंतु इसका अर्थ यह नहीं था कि जनजातीय जीवन-शैली पूरी तरह बदल गई। जनजातियों ने अपनी भाषाएँ, रीति-रिवाज और जीवन-शैली बनाए रखी। आज भी अनेक जनजातीय समुदाय अपनी विशिष्ट पहचान के साथ जीवन व्यतीत करते हैं।

8. जनजातियों का योगदान

जनजातियों ने भारतीय समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने वन संरक्षण में सहायता की, कृषि और पशुपालन में कुशलता दिखाई। बंजारे जैसे खानाबदोश समुदायों ने व्यापार और परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गोंड और अहोम जैसी जनजातियों ने शक्तिशाली राज्य स्थापित किए। जनजातियों की कला, संगीत और नृत्य भारतीय संस्कृति की धरोहर हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: प्रमुख जनजातियाँ और उनके क्षेत्र

जनजाति क्षेत्र विशेषता
गोंड गोंडवाना (मध्य भारत) रानी दुर्गावती, गढ़कटंगा
अहोम असम पाइक व्यवस्था, बुरंजी
बंजारे सभी क्षेत्र (घूमते थे) अनाज व सामान का व्यापार

तालिका 2: जनजातीय जीवन-शैली के प्रकार

जीवन-शैली विवरण
शिकारी-संग्राहक शिकार और वन फल-जड़ें इकट्ठा करना
पशुपालक पशुओं के साथ चरागाहों की तलाश
खानाबदोश व्यापारी एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान ढोना
कृषक एक स्थान पर बसकर खेती

तालिका 3: गोंड और अहोम की तुलना

विशेषता गोंड अहोम
क्षेत्र मध्य भारत (गोंडवाना) असम
शासन व्यवस्था गढ़ (किले) पाइक व्यवस्था
प्रसिद्ध शासक रानी दुर्गावती
अभिलेख बुरंजी

माइंड मैप

graph TD A["जनजातियाँ, खानाबदोश और बसे समुदाय"] --> B["जनजातीय जीवन-शैली"] A --> C["खानाबदोश"] A --> D["गोंड जनजाति"] A --> E["अहोम जनजाति"] A --> F["एक जगह बसे समुदाय"] B --> B1["शिकारी-संग्राहक, पशुपालक, कृषक"] C --> C1["बंजारे: अनाज व सामान का व्यापार"] C --> C2["मुग़ल सेना को रसद आपूर्ति"] D --> D1["गोंडवाना क्षेत्र"] D --> D2["गढ़कटंगा राज्य"] D --> D3["रानी दुर्गावती"] E --> E1["असम"] E --> E2["पाइक व्यवस्था"] E --> E3["बुरंजी (इतिहास अभिलेख)"] F --> F1["कृषि आधारित"] F --> F2["वर्ण व्यवस्था से बाहर"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: जनजातीय जीवन-शैली

जनजातीय जीवन-शैली शिकारी-संग्राहक शिकार वन फल, जड़ें, शहद मछली पकड़ना पशुपालक पशुओं के साथ घूमना चरागाहों की तलाश दूध और ऊन खानाबदोश व्यापारी बैलों पर सामान अनाज, रसद बंजारे कृषक एक स्थान पर बसना खेती करना स्थायी बस्तियाँ जनजातीय समाज की विशेषताएँ भूमि पर सामूहिक स्वामित्व मुखिया/सरदार का नेतृत्व वर्ण व्यवस्था से बाहर गोंड: गोंडवाना, गढ़कटंगा, रानी दुर्गावती अहोम: असम, पाइक व्यवस्था, बुरंजी बंजारे: मुग़ल सेना को रसद आपूर्ति जनजातियाँ भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं स्वर्ण नियम: जनजातियाँ वर्ण व्यवस्था से बाहर अपनी जीवन-शैली में रहती थीं।

आरेख 2: गोंड और अहोम राज्य

गोंड और अहोम राज्य गोंड राज्य क्षेत्र: गोंडवाना (मध्य भारत) गढ़: मजबूत स्थान/किले गढ़कटंगा: प्रसिद्ध राज्य लगभग 52,000 गाँव रानी दुर्गावती: प्रसिद्ध शासिका मुग़लों से युद्ध गोंड सरदार शक्तिशाली होकर राजा बने अहोम राज्य क्षेत्र: असम 13वीं शताब्दी में आगमन पाइक व्यवस्था: वयस्क पुरुषों से काम नहरें और जलाशय बनाए बुरंजी: इतिहास अभिलेख शासन लगभग छह सौ वर्ष अहोमों ने कृषि तकनीकें अपनाईं एक जगह बसे समुदाय कृषि पर आधारित स्थायी बस्तियाँ कुछ समुदायों ने अपनी स्थिति सुधारी, ब्राह्मण/क्षत्रिय कहलाए वनवासियों को 'जंगली' कहकर हेय दृष्टि से देखा जाता था Golden Rule: गोंड के गढ़ और अहोम की पाइक व्यवस्था याद रखें।

सामान्य गलतियाँ

  1. गोंड और अहोम का क्षेत्र: गोंड मध्य भारत (गोंडवाना) में रहते थे, जबकि अहोम असम में। दोनों के क्षेत्रों को न मिलाएँ।
  2. बंजारों की भाषा: बंजारे गुजराती भाषा बोलते थे, न कि हिंदी या बंगाली।
  3. रानी दुर्गावती: रानी दुर्गावती गढ़कटंगा (गोंड राज्य) की शासिका थीं, न कि अहोम राज्य की।
  4. पाइक व्यवस्था: पाइक व्यवस्था अहोम शासन से जुड़ी थी, जिसमें वयस्क पुरुषों से एक निश्चित समय तक काम लिया जाता था।
  5. जनजातियों का वर्ण व्यवस्था से संबंध: सभी जनजातियाँ वर्ण व्यवस्था से बाहर थीं; उन्हें ब्राह्मण-क्षत्रिय व्यवस्था में नहीं रखा जा सकता।
  6. 'जंगली' शब्द का अर्थ: 'जंगली' शब्द वनवासियों की सामाजिक स्थिति दर्शाता था, यह उनकी वास्तविक सरलता का सूचक नहीं था।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रमुख जनजातियों (गोंड, अहोम, बंजारे) के क्षेत्र और विशेषताएँ रटें।
  2. गढ़कटंगा, रानी दुर्गावती, पाइक व्यवस्था और बुरंजी जैसी प्रमुख अवधारणाएँ स्पष्ट रखें।
  3. जनजातीय जीवन-शैली के प्रकार (शिकारी, पशुपालक, व्यापारी, कृषक) बता सकें।
  4. खानाबदोशों और बसे हुए समुदायों के बीच अंतर समझें।
  5. बंजारों की मुग़ल सेना में भूमिका का वर्णन लिख सकें।
  6. जनजातियों के समाज में योगदान पर चर्चा करने का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

मध्यकालीन भारत में जनजातियाँ, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय मिलकर समाज की विविधता का निर्माण करते थे। जनजातियाँ वर्ण व्यवस्था के बाहर रहती थीं और अपनी अलग जीवन-शैली, परंपराएँ और प्रशासन रखती थीं। बंजारे जैसे खानाबदोश व्यापारी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। गोंडों ने गोंडवाना में शक्तिशाली राज्य बनाए, जिनकी प्रसिद्ध शासिका रानी दुर्गावती थीं। अहोमों ने असम में लगभग छह सौ वर्षों तक शासन किया। इन समुदायों ने भारतीय संस्कृति, कृषि, व्यापार और कला में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अध्याय से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय इतिहास केवल राजाओं और राज्यों का नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों और उनके जीवन का इतिहास है।