मरुस्थल वे क्षेत्र हैं जहाँ बहुत कम वर्षा होती है और वहाँ की जलवायु शुष्क होती है। मरुस्थलों में मानव और पर्यावरण की अनोखी अन्योन्यक्रिया देखने को मिलती है। इस अध्याय में हम दो प्रकार के मरुस्थलों - गर्म मरुस्थल (सहारा) और ठंडा मरुस्थल (लद्दाख) - का अध्ययन करेंगे। हम जानेंगे कि इन कठिन परिस्थितियों में मानव किस प्रकार जीवन यापन करता है।
मरुस्थलों की सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी है। गर्म मरुस्थलों में अधिक गर्मी और कम वर्षा होती है, जबकि ठंडे मरुस्थलों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी होती है। इन परिस्थितियों में मानव ने अपने जीवन को पर्यावरण के अनुसार ढाल लिया है।
मरुस्थल मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
दोनों प्रकार के मरुस्थलों में वर्षा बहुत कम होती है, इसलिए वनस्पति सीमित होती है और जीवन की परिस्थितियाँ कठोर होती हैं।
सहारा विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल है। यह अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है। सहारा उत्तरी अफ्रीका में अटलांटिक महासागर से लेकर लाल सागर तक फैला हुआ है। इसमें लीबिया, नाइजर, मिस्र जैसे देश शामिल हैं। सहारा मरुस्थल का क्षेत्रफल अफ्रीका महाद्वीप का लगभग एक चौथाई है।
सहारा में अत्यधिक गर्मी और बहुत कम वर्षा होती है। यहाँ वर्षा सामान्यतः 25 सेंटीमीटर से भी कम होती है। सहारा में विशाल बालू के टीले (Sand Dunes), चट्टानी मैदान और पठार हैं। यहाँ 'ओएसिस' (Oasis) नामक स्थान मिलते हैं, जहाँ भूमिगत जल मिलता है और खजूर के पेड़ उगते हैं। ओएसिस में बस्तियाँ बसी होती हैं।
सहारा मरुस्थल में रहने वाले लोगों ने कठोर जलवायु के अनुसार अपना जीवन ढाला है। यहाँ खानाबदोश समुदाय रहते हैं, जिन्हें 'बद्दू' (Bedouins) कहा जाता है। बद्दू जनजाति के लोग ऊँट, बकरी और भेड़ पालते हैं। ये अपने पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं। ऊँट को 'रेगिस्तान का जहाज़' (Ship of the Desert) कहा जाता है, क्योंकि यह रेत के मैदानों में आसानी से चल सकता है।
सहारा में 'तुआरेग' (Tuaregs) नामक एक अन्य प्रसिद्ध समुदाय भी रहता है, जो ऊँट पालते हैं और व्यापार करते हैं। कुछ लोग ओएसिस में खेती करते हैं, जहाँ खजूर उगाए जाते हैं। सहारा में पानी की कमी के कारण लोगों को पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करना पड़ता है।
सहारा मरुस्थल में हाल के वर्षों में बड़े परिवर्तन हुए हैं। यहाँ तेल और गैस के भंडार पाए गए हैं, जिनकी खुदाई की जा रही है। कई देशों ने सहारा में खनिज संसाधनों का विकास किया है। पर्यटन भी विकसित हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार मिला है।
परंतु इन गतिविधियों ने पर्यावरण को भी प्रभावित किया है। अब सहारा में भी मानव और पर्यावरण के बीच नए प्रकार के संबंध विकसित हो रहे हैं।
लद्दाख भारत का ठंडा मरुस्थल है, जो हिमालय की ऊँची घाटियों में स्थित है। लद्दाख में कारगिल, लेह और पड़ोसी क्षेत्र शामिल हैं। यहाँ की ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 3000 मीटर से अधिक है। लद्दाख में बहुत कम वर्षा होती है और सर्दियों में भारी हिमपात होता है।
लद्दाख की जलवायु अत्यंत कठोर है। यहाँ गर्मियाँ कम होती हैं, जबकि सर्दियाँ लंबी और अत्यंत ठंडी होती हैं। तापमान सर्दियों में शून्य से काफी नीचे चला जाता है। यही कारण है कि लद्दाख को 'ठंडा मरुस्थल' (Cold Desert) कहा जाता है।
लद्दाख में रहने वाले लोग कठोर जलवायु में जीवन यापन करते हैं। लद्दाख की जनसंख्या कम है और यहाँ के लोग मुख्य रूप से पशुपालन और कृषि पर निर्भर हैं। यहाँ जौ, आलू और मटर जैसी फसलें उगाई जाती हैं। गर्मियों में पहाड़ों की ढलानों पर पशुओं को चराया जाता है।
लद्दाख में 'चांगथांग' (Changthang) नामक पठार है, जहाँ याक और भेड़ें पाली जाती हैं। यहाँ पाली जाने वाली चांगथांगी बकरी और भेड़ों से 'पश्मीना' (Pashmina) ऊन प्राप्त होती है, जो अत्यंत मुलायम और कीमती होती है। पश्मीना शॉल विश्व प्रसिद्ध हैं। लद्दाख में गर्मियों में मेले और त्योहार भी मनाए जाते हैं, जिनमें घूमने वाले व्यापारी हिस्सा लेते हैं।
लद्दाख में पर्यटन का विकास हो रहा है। यहाँ के अद्भुत परिदृश्य, ऊँचे दर्रे और बौद्ध मठ (गोम्पा) पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। हाल के वर्षों में लेह के लिए सड़क मार्ग और हवाई मार्ग बेहतर हुए हैं, जिससे पर्यटन बढ़ा है।
पर्यटन से लद्दाख के लोगों को रोज़गार मिला है, परंतु इससे पर्यावरण पर भी दबाव बढ़ा है। इसलिए पर्यटन का संतुलित विकास आवश्यक है।
| विशेषता | सहारा (गर्म) | लद्दाख (ठंडा) |
|---|---|---|
| स्थान | अफ्रीका | भारत (हिमालय) |
| वर्षा | 25 सेमी से कम | बहुत कम, हिमपात |
| तापमान | अधिक गर्म | अत्यंत ठंडा |
| वनस्पति | बालू टीले, ओएसिस | पहाड़ी चरागाह |
| समुदाय | विशेषता |
|---|---|
| बद्दू | खानाबदोश, ऊँट-बकरी-भेड़ पालन |
| तुआरेग | ऊँट पालन और व्यापार |
| विशेषता | सहारा | लद्दाख |
|---|---|---|
| उपनाम/प्रसिद्ध | ऊँट = रेगिस्तान का जहाज़ | पश्मीना ऊन, याक |
| मुख्य फसल | खजूर (ओएसिस में) | जौ, आलू, मटर |
मरुस्थल पृथ्वी के वे क्षेत्र हैं जहाँ वर्षा अत्यंत कम होती है और जीवन की परिस्थितियाँ कठोर होती हैं। गर्म मरुस्थल (सहारा) में अधिक गर्मी और कम वर्षा होती है, जबकि ठंडा मरुस्थल (लद्दाख) में कड़ाके की ठंड और हिमपात होता है। सहारा में बद्दू और तुआरेग जैसे खानाबदोश समुदाय ऊँट पालकर जीवन यापन करते हैं। ओएसिस में खजूर उगते हैं। लद्दाख में जौ, आलू और मटर उगाए जाते हैं और चांगथांग में याक व भेड़ें पाली जाती हैं। लद्दाख की पश्मीना ऊन विश्व प्रसिद्ध है। मरुस्थलों में मानव ने पर्यावरण के अनुसार अपने जीवन को ढाला है, जो मानव-पर्यावरण अन्योन्यक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण है। पर्यटन और खनन ने इन क्षेत्रों में नए अवसर दिए हैं, परंतु संतुलित विकास की आवश्यकता बनी हुई है।