मानव और पर्यावरण के बीच घनिष्ठ संबंध होता है। यह संबंध 'अन्योन्यक्रिया' (Interaction) कहलाता है। इस अध्याय में हम उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण प्रदेशों में मानव-पर्यावरण अन्योन्यक्रिया का अध्ययन करेंगे। इसमें अमेज़न नदी बेसिन (दक्षिण अमेरिका) और गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन (भारत) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उष्णकटिबंधीय प्रदेश विषुवत रेखा के आस-पास के क्षेत्र हैं, जहाँ गर्म जलवायु और अधिक वर्षा होती है। उपोष्ण प्रदेश इनके पास के क्षेत्र हैं, जहाँ मौसम में भिन्नता अधिक होती है।
अमेज़न विश्व की सबसे बड़ी नदियों में से एक है। इसका बेसिन (नदी और उसकी सहायक नदियों का क्षेत्र) विश्व का सबसे बड़ा नदी बेसिन है। अमेज़न नदी ब्राज़ील, पेरू, इक्वाडोर, बोलीविया और कोलंबिया से होकर बहती है और अटलांटिक महासागर में गिरती है।
अमेज़न बेसिन में विश्व का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय वर्षा वन है। यहाँ वर्ष भर गर्मी और अधिक वर्षा होती है। नदी वर्षा ऋतु में उफान पर आती है और आस-पास के क्षेत्रों में जल भराव होता है। अमेज़न बेसिन को 'दुनिया का फेफड़ा' (Lungs of the World) भी कहा जाता है, क्योंकि यहाँ के वन बहुत अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
अमेज़न वर्षा वन में जीवन की विविधता अत्यधिक है। यहाँ अनेक प्रकार के पेड़, जानवर, पक्षी और कीड़े पाए जाते हैं। नदी में अनेक प्रकार की मछलियाँ और डॉल्फ़िन रहती हैं। वन में टूकन, हरा तोता, मैकाओ जैसे पक्षी और जगुआर, बंदर जैसे जानवर रहते हैं।
अमेज़न बेसिन में रहने वाले कुछ लोग 'विश्वव्यापी समुदाय' (Global community) के साथ संपर्क में नहीं आए हैं। वे शिकार, मछली पकड़ने और वन से उत्पाद इकट्ठा करके जीवन यापन करते हैं। नदी के किनारे बसे लोग वर्षा ऋतु में अपने घर स्टिल्ट्स (लकड़ी के खंभों) पर बनाते हैं, ताकि बाढ़ से बच सकें। अमेज़न बेसिन में कसावा (मैनिओक), पाइनएप्पल और शकरकंद उगाए जाते हैं।
अमेज़न वर्षा वनों की कटाई एक गंभीर समस्या है। वनों को काटकर चरागाह, सोयाबीन के खेत और खनन के लिए भूमि खाली की जा रही है। इससे वनस्पति घट रही है और वन्य जीवों का आवास नष्ट हो रहा है। वनों की कटाई से वायु की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है, क्योंकि ये वन अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
यदि वनों की कटाई इसी गति से जारी रही, तो अमेज़न वनों का बड़ा हिस्सा नष्ट हो सकता है। इसलिए अमेज़न वनों के संरक्षण पर विश्व स्तर पर चर्चा हो रही है।
गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ हिमालय से निकलती हैं और मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इन नदियों के बेसिन को 'गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन' कहते हैं। यह बेसिन भारत, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक फैला हुआ है। यहाँ की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है।
गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन में मानसूनी जलवायु होती है। गर्मियों में मानसून से वर्षा होती है। नदियों के किनारे की उपजाऊ मिट्टी में कृषि अच्छी होती है। यहाँ चावल, गेहूँ, गन्ना और जूट जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन विश्व के सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों में से एक है। नदियों के किनारे घने बसे हुए गाँव और नगर हैं। यहाँ के लोग मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं। चावल इस क्षेत्र की मुख्य फसल है। गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों में मछली पकड़ना भी एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है।
बेसिन के निचले हिस्से में 'सुंदरबन' नामक विशाल मैंग्रोव (Mangrove) क्षेत्र है। सुंदरबन में रॉयल बंगाल टाइगर (बाघ) पाया जाता है। मैंग्रोव वन तटों को तूफानों से बचाते हैं। सुंदरबन विश्व धरोहर स्थल है।
उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण प्रदेशों में मानव और पर्यावरण की अन्योन्यक्रिया कई रूपों में देखी जाती है। मानव ने नदियों के जल का उपयोग सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए किया है। नदियों के किनारे बस्तियाँ और नगर विकसित हुए हैं।
परंतु मानवीय गतिविधियों ने पर्यावरण को भी प्रभावित किया है। वनों की कटाई, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने इन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी को प्रभावित किया है। इसलिए संतुलित विकास आवश्यक है।
उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण प्रदेशों में संतुलित विकास (Sustainable Development) की आवश्यकता है। इसका अर्थ है विकास के साथ-साथ पर्यावरण का संरक्षण। हमें वनों की कटाई रोकनी चाहिए, जल को स्वच्छ रखना चाहिए और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए।
अमेज़न और गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन दोनों ही हमें यह सिखाते हैं कि मानव और पर्यावरण का संबंध घनिष्ठ है। पर्यावरण की सुरक्षा के बिना मानव जीवन और विकास दोनों असंभव हैं।
| विशेषता | अमेज़न बेसिन | गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन |
|---|---|---|
| महाद्वीप | दक्षिण अमेरिका | एशिया |
| जलवायु | गर्म, अधिक वर्षा | मानसूनी |
| मुख्य फसलें | कसावा, शकरकंद | चावल, गेहूँ, गन्ना, जूट |
| प्रसिद्ध जीव | जगुआर, टूकन | रॉयल बंगाल टाइगर |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नदी | अमेज़न (विश्व की बड़ी नदियों में) |
| बेसिन | विश्व का सबसे बड़ा नदी बेसिन |
| वन | विश्व का सबसे बड़ा वर्षा वन |
| उपनाम | दुनिया का फेफड़ा |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| क्षेत्र | भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश |
| मुख्य फसल | चावल |
| सुंदरबन | मैंग्रोव वन, रॉयल बंगाल टाइगर |
| जनसंख्या | उच्च जनसंख्या घनत्व |
मानव और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण प्रदेशों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अमेज़न नदी बेसिन विश्व का सबसे बड़ा नदी बेसिन है, जहाँ विश्व का सबसे बड़ा वर्षा वन है। यहाँ के लोग शिकार, मछली पकड़ने और कृषि से जीवन यापन करते हैं। गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन उपजाऊ मिट्टी और मानसूनी जलवायु के कारण घनी आबादी वाला क्षेत्र है। सुंदरबन के मैंग्रोव वन और रॉयल बंगाल टाइगर इस क्षेत्र की विशेषता हैं। वनों की कटाई और प्रदूषण दोनों बेसिनों के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं। संतुलित विकास से ही मानव और पर्यावरण का सह-अस्तित्व संभव है। यह अध्याय हमें यह सिखाता है कि पर्यावरण की रक्षा किए बिना विकास असंभव है।