पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे और जानवर पाए जाते हैं। जिन पेड़-पौधों को मानव ने नहीं लगाया, वे 'प्राकृतिक वनस्पति' (Natural Vegetation) कहलाते हैं। इसी प्रकार प्राकृतिक वातावरण में रहने वाले जानवरों को 'वन्य जीवन' (Wildlife) कहते हैं। इस अध्याय में हम प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार, वितरण और वन्य जीवन के बारे में अध्ययन करेंगे।
प्राकृतिक वनस्पति का विकास जलवायु, मिट्टी और स्थलरूप पर निर्भर करता है। तापमान, वर्षा और मिट्टी के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है।
प्राकृतिक वनस्पति के मुख्य रूप से तीन प्रकार हैं:
इसके अलावा, प्राकृतिक वनस्पति को मौसम, तापमान और वर्षा के आधार पर भी विभिन्न प्रकारों में बाँटा जाता है, जैसे उष्ण कटिबंधीय वन, समशीतोष्ण वन और शंकुधारी वन।
उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में विषुवत रेखा के पास घने वन पाए जाते हैं। इन्हें 'वर्षा वन' (Rainforests) कहते हैं। यहाँ वर्ष भर गर्मी और वर्षा होती है। इन वनों में सदाबहार वृक्ष होते हैं, जो पूरे वर्ष हरे रहते हैं। अमेज़न और कांगो के वन उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन हैं।
इन वनों में बहुत घना वनस्पति आवरण होता है। यहाँ की मिट्टी पोषक तत्वों से कम होती है, क्योंकि पौधे पोषक तत्वों को जल्दी ग्रहण कर लेते हैं। इन वनों में अनेक प्रकार के जानवर, पक्षी और कीड़े रहते हैं। उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन (जिनके पेड़ मौसम के अनुसार पत्ते गिराते हैं) भी पाए जाते हैं।
समशीतोष्ण क्षेत्रों में चार ऋतुएँ होती हैं। यहाँ दो प्रकार के वन पाए जाते हैं:
ध्रुवों के निकट ठंडे क्षेत्रों में 'शंकुधारी वन' (Coniferous Forests) पाए जाते हैं। इन वनों में चीड़, देवदार, स्प्रूस और फर जैसे पेड़ होते हैं, जिनकी पत्तियाँ सुई जैसी होती हैं। इन्हें 'टैगा' (Taiga) भी कहते हैं। शंकुधारी वनों से लकड़ी (टिम्बर) प्राप्त होती है।
भूमध्य सागर के आस-पास के क्षेत्रों में विशेष प्रकार की वनस्पति पाई जाती है, जिसे 'भूमध्यसागरीय वनस्पति' कहते हैं। यहाँ की जलवायु में गर्म, शुष्क गर्मियाँ और हल्की सर्दियाँ होती हैं। इसलिए यहाँ के पेड़-पौधे सूखे को सहन करने वाले होते हैं। नींबू, संतरा, अंगूर और जैतून यहाँ उगाए जाते हैं। यहाँ की झाड़ियाँ कंटीली होती हैं।
विश्व में विभिन्न क्षेत्रों में घास के बड़े-बड़े मैदान पाए जाते हैं। घास के मैदानों को विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाना जाता है:
घास के मैदानों में घास तो प्रचुर मात्रा में होती है, परंतु पेड़ कम होते हैं। इन क्षेत्रों में पशुपालन होता है।
वन्य जीवन (Wildlife) में जंगली जानवर, पक्षी, कीड़े और सरीसृप शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वन्य जीव पाए जाते हैं। उष्ण कटिबंधीय वनों में बंदर, तोता, साँप और कीड़े पाए जाते हैं। अफ्रीका के सवाना में शेर, हाथी, जिराफ़ और ज़ेब्रा रहते हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों में ध्रुवीय भालू और पेंगुइन पाए जाते हैं।
वन्य जीव पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये आहार शृंखला का निर्माण करते हैं और पर्यावरण के संतुलन में सहायता करते हैं। वनों की कटाई और शिकार के कारण अनेक वन्य जीव संकट में हैं। इसलिए वन्य जीवों की रक्षा आवश्यक है।
वनस्पति और वन्य जीवन का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। वनों की कटाई से प्राकृतिक वनस्पति घट रही है और वन्य जीवों का आवास नष्ट हो रहा है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अभयारण्य (Sanctuaries) और राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) बनाए गए हैं।
पेड़-पौधे वायु शुद्ध करते हैं, मिट्टी को बाँधकर रखते हैं और वर्षा लाने में सहायक होते हैं। इसलिए वृक्षारोपण और वन संरक्षण आवश्यक है। हमें शिकार रोकना चाहिए और वन्य जीवों के आवास की रक्षा करनी चाहिए।
| प्रकार | विशेषता |
|---|---|
| वन | घने पेड़, झाड़ियाँ, घास |
| घास के मैदान | प्रमुख रूप से घास |
| झाड़ियाँ | छोटे पौधे, शुष्क क्षेत्र |
| घास का मैदान | क्षेत्र |
|---|---|
| सवाना | अफ्रीका |
| प्रेयरी | उत्तरी अमेरिका |
| स्टेपी | मध्य एशिया |
| वेल्ड | दक्षिण अफ्रीका |
| पंपास | दक्षिण अमेरिका |
| डाउन्स | ऑस्ट्रेलिया |
| वन | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन | विषुवत रेखा के पास | सदाबहार, घने |
| समशीतोष्ण पर्णपाती वन | समशीतोष्ण क्षेत्र | शरद में पत्ते गिरते हैं |
| शंकुधारी वन (टैगा) | ध्रुवों के निकट | चीड़, देवदार |
प्राकृतिक वनस्पति और वन्य जीवन पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के आधार हैं। जलवायु, मिट्टी और स्थलरूप के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की वनस्पति पाई जाती है। उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन, समशीतोष्ण वन, शंकुधारी वन और भूमध्यसागरीय वनस्पति विभिन्न जलवायु के अनुकूल हैं। घास के मैदान सवाना, प्रेयरी, स्टेपी, वेल्ड, पंपास और डाउन्स के नाम से जाने जाते हैं। वन्य जीव आहार शृंखला और पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वनों की कटाई और शिकार के कारण अनेक प्रजातियाँ संकट में हैं। इसलिए अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, वृक्षारोपण और शिकार पर रोक के माध्यम से वनस्पति और वन्य जीवन का संरक्षण आवश्यक है। स्वस्थ वनस्पति और वन्य जीवन ही स्वस्थ पर्यावरण का प्रतीक हैं।