ईमेल (E-mail) का पूर्ण रूप इलेक्ट्रॉनिक मेल (Electronic Mail) है। यह इंटरनेट के माध्यम से संदेश, दस्तावेज़, चित्र और फ़ाइलें भेजने और प्राप्त करने की सेवा है। ईमेल संचार का एक तेज़, सस्ता और विश्वसनीय साधन है। एक ईमेल कुछ ही सेकंड में दुनिया के किसी भी कोने में पहुँच जाता है। ईमेल सेवा के लिए गूगल (जीमेल), याहू (याहू मेल), माइक्रोसॉफ्ट (आउटलुक) जैसे प्रदाता होते हैं। ईमेल के लिए हमें एक ईमेल खाता (Account) बनाना होता है, जिसमें हमें एक यूनीक ईमेल एड्रेस मिलता है। ईमेल ने पारंपरिक डाक पत्र (स्नेल मेल) की तुलना में संचार को अत्यंत सरल और तीव्र बना दिया है।
ईमेल एड्रेस दो मुख्य भागों से बना होता है - यूज़र नेम और डोमेन नाम, जो '@' चिह्न से जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, rahul@example.com में 'rahul' यूज़र नेम है, '@' चिह्न 'एट' को दर्शाता है और 'example.com' डोमेन नाम है। ईमेल एड्रेस में बीच में स्थान (space) नहीं होता और यह सदैव लोअरकेस (छोटे अक्षरों) में लिखा जाता है। '@' चिह्न के बिना ईमेल एड्रेस अधूरा माना जाता है।
ईमेल की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं।
यह प्राप्तकर्ता का ईमेल एड्रेस होता है। यह अनिवार्य भाग है।
इसमें अन्य लोगों का ईमेल एड्रेस लिखा जाता है, जिन्हें संदेश की जानकारी देनी होती है। सभी प्राप्तकर्ता एक-दूसरे के एड्रेस देख सकते हैं।
इसमें भी अन्य लोगों का एड्रेस लिखा जाता है, परंतु बीसीसी में लिखे गए एड्रेस अन्य प्राप्तकर्ताओं को नहीं दिखते। यह गोपनीयता के लिए उपयोगी है।
संदेश का शीर्षक या विषय लिखा जाता है। यह संदेश का सार बताता है।
यहाँ ईमेल का मुख्य टेक्स्ट लिखा जाता है।
इसके द्वारा फ़ाइलें जोड़ी जाती हैं।
संदेश भेजने का बटन।
पहले हम अपने ईमेल खाते में लॉग इन करते हैं। फिर 'कंपोज़' (Compose) या 'नया' (New) बटन पर क्लिक करते हैं। उसके बाद 'टू' में प्राप्तकर्ता का एड्रेस, 'सब्जेक्ट' में विषय और बॉडी में संदेश लिखते हैं। आवश्यकता होने पर संलग्नक जोड़ते हैं। अंत में 'भेजें' (Send) बटन पर क्लिक करते हैं। संदेश भेजे जाने के बाद हमें 'आपका संदेश भेज दिया गया' जैसी सूचना मिलती है।
ईमेल खाता बनाने के लिए हम जीमेल (gmail.com) जैसी वेबसाइट पर जाते हैं और 'साइन इन' तथा 'अकाउंट बनाएँ' विकल्प चुनते हैं। इसमें हमें नाम, जन्म तिथि, मोबाइल नंबर और एक मजबूत पासवर्ड देना होता है। इसके बाद हम अपना यूज़र नेम चुनते हैं। खाता बन जाने के बाद हमें अपना ईमेल एड्रेस प्राप्त होता है। पासवर्ड हमेशा गुप्त रखना चाहिए।
व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे ऐप से तुरंत संदेश भेजे जाते हैं। यह स्मार्टफोन पर काम करता है।
फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसी सेवाओं से हम अपने विचार, चित्र और वीडियो साझा करते हैं।
जूम, गूगल मीट, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे प्लेटफॉर्म से एक साथ कई लोगों से ऑडियो-वीडियो संवाद किया जाता है।
ब्लॉग के माध्यम से लेख प्रकाशित किए जाते हैं और वेबिनार से ऑनलाइन सेमिनार होते हैं।
| भाग | कार्य |
|---|---|
| टू (To) | प्राप्तकर्ता का पता (अनिवार्य) |
| सीसी (CC) | अन्य लोगों को जानकारी |
| बीसीसी (BCC) | गुप्त प्रति, पता छिपा रहता है |
| सब्जेक्ट | संदेश का विषय |
| अटैचमेंट | फ़ाइलें जोड़ना |
| आधार | ईमेल | पारंपरिक डाक |
|---|---|---|
| गति | कुछ सेकंड | कई दिन |
| लागत | लगभग निःशुल्क | पोस्टल शुल्क |
| भंडारण | डिजिटल रूप से संग्रहीत | कागज़ पर |
| संलग्नक | डिजिटल फ़ाइलें | भौतिक वस्तुएँ |
ईमेल आधुनिक संचार का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। यह तेज़, सस्ता और विश्वसनीय है, और इसमें फ़ाइलें संलग्न करने की सुविधा भी है। ईमेल एड्रेस के प्रारूप, टू-सीसी-बीसीसी के उपयोग और संदेश भेजने की प्रक्रिया को समझकर हम इसका सही उपयोग कर सकते हैं। व्हाट्सएप, सोशल नेटवर्किंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे अन्य साधनों ने संचार को और अधिक सुलभ बना दिया है। हालाँकि, ईमेल और अन्य संचार माध्यमों का उपयोग करते समय सुरक्षा और शिष्टाचार (नेटिकेट) का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। अगले अध्याय में हम साइबर सुरक्षा के बारे में विस्तार से सीखेंगे।