'द डक एंड द कंगारू' (The Duck and the Kangaroo) प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवि एडवर्ड लियर (Edward Lear) द्वारा लिखी गई एक मज़ेदार और हास्यपूर्ण कविता है। एडवर्ड लियर अपनी लिमरिक (limerick) शैली और बेतुकी (nonsense) कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। यह कविता एक बत्तख़ (duck) और एक कंगारू (kangaroo) के बीच की संवादात्मक कहानी है। बत्तख़ कंगारू की पीठ पर बैठकर दुनिया की यात्रा करना चाहती है, और कविता इसी अनुरोध के आसपास घूमती है।
कविता में बत्तख़ कंगारू से कहती है कि वह उसकी पीठ पर बैठकर पूरी दुनिया घूमना चाहती है — चारों तरफ, आगे-पीछे, ऊपर-नीचे। वह कंगारू की छलांगों से प्रभावित है और उसी के साथ यात्रा करना चाहती है। लेकिन कंगारू को एक चिंता है — उसे डर है कि बत्तख़ के गीले पैर उसे बीमार कर देंगे। यह एक मज़ेदार क्षण है, जिसमें कंगारू बत्तख़ की दोस्ती चाहता है, लेकिन अपनी सेहत की भी चिंता करता है।
बत्तख़ इस समस्या का समाधान निकालती है। वह चार जोड़ी ऊनी मोज़े (worsted socks), एक लबादा (cloak) और सर्दी से बचने के लिए एक सिगार खरीदती है। इन तैयारियों के बाद कंगारू सहमत हो जाता है और वे दोनों दुनिया भर की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। कविता का अंत खुशनुमा है — वे डी नदी और जेली बो ली (Jelly Bo Lee) नामक स्थानों की ओर छलांग लगाते हैं। यह कविता मित्रता, सहयोग और समस्या-समाधान का एक सुंदर उदाहरण है।
एडवर्ड लियर (Edward Lear, 1812-1888) एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवि और चित्रकार थे। वे बेतुकी (nonsense) कविताओं और लिमरिक शैली के जनक माने जाते हैं। उनकी कविताएँ हास्य, कल्पना और मज़ेदार चरित्रों से भरपूर होती हैं। उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं — 'ए बुक ऑफ ननसेंस', 'द ओउल एंड द पुसीकैट' आदि। 'द डक एंड द कंगारू' उनकी प्रसिद्ध बेतुकी कविताओं में से एक है। उनकी कविताओं में बोलने वाले जानवर, काल्पनिक स्थान और मज़ेदार घटनाएँ मिलती हैं। उनकी भाषा सरल, लयबद्ध और हास्यपूर्ण होती है।
कविता की शुरुआत में बत्तख़ कंगारू से कहती है कि वह उसकी पीठ पर बैठकर उसकी छलांगों के साथ दुनिया की यात्रा करना चाहती है। वह कहती है कि वह चारों तरफ, ऊपर-नीचे, आगे-पीछे — हर दिशा में उसके साथ यात्रा करना चाहती है। बत्तख़ कंगारू की छलांगों और चंचलता से बहुत प्रभावित है। वह कहती है कि वह कभी ज्यादा दूर तक तैरने के अलावा कहीं नहीं गई, इसलिए वह दुनिया देखना चाहती है।
कंगारू बत्तख़ के अनुरोध का जवाब देता है कि वह भी यात्रा करना चाहता है, लेकिन उसे एक चिंता है। वह कहता है कि बत्तख़ के पैर गीले और ठंडे होते हैं, और उनके संपर्क में आने से उसे सर्दी या बुखार (rheumatic) लग सकता है। यह कंगारू की मज़ेदार चिंता है। बत्तख़ इस समस्या का हल निकालती है — वह चार जोड़ी ऊनी मोज़े खरीदती है, ताकि उसके पैर कंगारू को न छूएँ। इसके अलावा वह एक लबादा खरीदती है जो हवा को रोके और एक सिगार, जिससे उसे सर्दी न लगे।
सभी तैयारियों के बाद कंगारू खुश होकर बत्तख़ को अपनी पीठ पर बैठने देता है। वे दोनों दुनिया भर में घूमने निकल पड़ते हैं। वे डी नदी (Dee) और जेली बो ली (Jelly Bo Lee) नामक स्थानों की ओर छलांग लगाते हैं। कविता का अंत यह बताता है कि वे पूरे साल तीन बार आसपास घूमते हैं। यह कविता मित्रता, सहयोग और समस्या के समाधान का एक हास्यपूर्ण चित्रण है — जहाँ दो अलग-अलग जीव एक साथ यात्रा करके आनंद लेते हैं। बत्तख़ की दृढ़ता और कंगारू की सहमति मिलकर एक सुखद यात्रा बनाती है।
इस कविता का मूलभाव मित्रता, सहयोग और आपसी समझ है। बत्तख़ और कंगारू दो अलग-अलग प्राणी हैं — एक पानी का है, दूसरा ज़मीन का। फिर भी वे मित्रता करते हैं और साथ मिलकर यात्रा करते हैं। बत्तख़ की जिज्ञासा और दृढ़ता, तथा कंगारू की सहमति मिलकर दर्शाती हैं कि जहाँ मित्रता होती है, वहाँ असंभव भी संभव हो जाता है। कविता में दोनों के बीच समस्या (गीले पैर) का समाधान भी सहयोग से निकाला जाता है।
कविता का संदेश यह है कि हमें दुनिया घूमनी चाहिए, नई चीज़ें देखनी चाहिए और नए अनुभव लेने चाहिए। जिज्ञासा और खोज की भावना जीवन को रोचक बनाती है। साथ ही, कविता यह भी सिखाती है कि किसी कार्य में आने वाली बाधाओं को हमें हल निकालकर दूर करना चाहिए — जैसे बत्तख़ ने मोज़े और लबादा खरीदकर कंगारू की चिंता का समाधान किया। मित्रता में आपसी समझ और एक-दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। यह कविता हास्य के माध्यम से ये सुंदर पाठ सिखाती है।
कविता के अंशों का विश्लेषण: - पहला अंश: बत्तख़ का अनुरोध — 'मुझे अपनी पीठ पर बैठाओ, दुनिया घूमें।' - दूसरा अंश: कंगारू की चिंता — 'तुम्हारे गीले पैरों से मुझे बीमारी होगी।' - तीसरा अंश: बत्तख़ का समाधान — 'चार जोड़ी ऊनी मोज़े, लबादा और सिगार।' - चौथा अंश: यात्रा की शुरुआत — 'डी नदी और जेली बो ली की ओर।'
| पात्र | चाहत | चिंता/समाधान |
|---|---|---|
| बत्तख़ | दुनिया की यात्रा | समाधान: मोज़े, लबादा, सिगार |
| कंगारू | यात्रा करना | चिंता: गीले पैरों से बीमारी |
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| कवि | एडवर्ड लियर |
| मूलभाव | मित्रता, सहयोग, खोज की भावना |
| शैली | हास्यपूर्ण, बेतुकी (nonsense) |
| बत्तख़ का उपाय | चार जोड़ी ऊनी मोज़े, लबादा, सिगार |
'द डक एंड द कंगारू' एडवर्ड लियर की एक हास्यपूर्ण और मज़ेदार कविता है, जो दो अलग-अलग प्राणियों — बत्तख़ और कंगारू — के बीच मित्रता और सहयोग की कहानी बताती है। बत्तख़ कंगारू की पीठ पर बैठकर दुनिया की यात्रा करना चाहती है। कंगारू को बत्तख़ के गीले पैरों से बीमारी का डर है, इसलिए बत्तख़ चार जोड़ी ऊनी मोज़े, एक लबादा और एक सिगार खरीदकर समस्या का समाधान निकालती है। तब कंगारू सहमत होता है और वे डी नदी तथा जेली बो ली की ओर यात्रा पर निकल पड़ते हैं। कविता का संदेश यह है कि मित्रता और आपसी समझ से हर बाधा दूर होती है। जिज्ञासा और खोज की भावना जीवन को रोचक बनाती है। यह कविता हास्य, कल्पना और मानवीयकरण से भरपूर है, जो एडवर्ड लियर की बेतुकी शैली का सुंदर उदाहरण है।