'द लास्ट बार्गेन' (The Last Bargain) महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध कविता है। यह कविता मूल रूप से बांग्ला में लिखी गई थी और बाद में अंग्रेज़ी में अनुवादित की गई। कविता एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है, जो 'नौकरी' (hire) या 'अनुबंध' (bargain) चाहता है। वह किसी ऐसी चीज़ की तलाश में है जो उसे नौकरी दे या उसके साथ अनुबंध करे। कविता में उसे तीन प्रकार के प्रस्ताव मिलते हैं — एक राजा का, एक लड़की का और एक धनवान का। परंतु इन तीनों प्रस्तावों को वह अस्वीकार कर देता है।
कविता की शुरुआत में एक राजा उस व्यक्ति के पास आता है और कहता है, 'मैं तुम्हें शक्ति दे सकता हूँ, मेरे साथ अनुबंध करो।' लेकिन वह व्यक्ति कहता है कि शक्ति बेकार है, क्योंकि उससे केवल दुख मिलता है। इसके बाद एक सुंदर लड़की उसके पास आती है और कहती है, 'मैं तुम्हें पैसे से नहीं, बल्कि अपनी सुंदरता और मुस्कान से नौकरी देती हूँ।' लेकिन वह व्यक्ति कहता है कि सुंदरता क्षणभंगुर है, इसलिए वह भी उसे स्वीकार नहीं करता।
कविता के अंत में एक बच्चा उस व्यक्ति के पास आता है और खुशी से खेलता है। वह व्यक्ति उस बच्चे के साथ अनुबंध कर लेता है, क्योंकि बच्चे ने उसे कुछ नहीं दिया, बल्कि केवल उसे मुक्त कर दिया। कविता का संदेश यह है कि सच्ची स्वतंत्रता और आनंद शक्ति, सुंदरता या धन में नहीं, बल्कि सादगी, मासूमियत और मुक्ति में होते हैं। 'द लास्ट बार्गेन' (अंतिम अनुबंध) इसी विचार को दर्शाता है — कि जीवन का सबसे मूल्यवान अनुबंध मासूमियत और स्वतंत्रता के साथ होता है।
रवींद्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore, 1861-1941) भारत के महानतम कवियों, दार्शनिकों और विचारकों में से एक थे। वे बांग्ला साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित लेखक थे। उन्होंने 'गीतांजलि' जैसी अद्वितीय काव्य-रचनाएँ लिखीं, जिसके लिए उन्हें 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। वे भारतीय राष्ट्रगान 'जन गण मन' के रचयिता हैं। उनकी कविताएँ प्रकृति, मानवता, स्वतंत्रता और गहन दर्शन से भरपूर हैं। 'द लास्ट बार्गेन' उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक है, जिसमें उन्होंने शक्ति, धन और सुंदरता के मोह से परे सच्ची स्वतंत्रता की खोज को दर्शाया है। उनकी भाषा सरल, प्रतीकात्मक और दार्शनिक है।
कविता की शुरुआत में कवि-वक्ता कहता है कि वह सुबह-सुबह अपने काम पर जा रहा था, तभी उसने सोचा कि उसे किसी के साथ अनुबंध करना है। तभी एक राजा उसके पास आया और कहा कि मैं तुम्हें शक्ति दे सकता हूँ, मेरे साथ अनुबंध करो। लेकिन वक्ता ने शक्ति को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि शक्ति के साथ दुख भी जुड़ा होता है।
इसके बाद एक सुंदर लड़की उसके पास आई। उसका चेहरा सुंदरता से चमक रहा था और उसकी मुस्कान मनमोहक थी। लड़की ने कहा कि वह पैसे से नहीं, बल्कि अपनी मुस्कान से उसे नौकरी देती है। वक्ता ने यह भी अस्वीकार कर दिया, क्योंकि उसने सोचा कि सुंदरता और मुस्कान तो आज हैं, कल नहीं होंगी — वे क्षणभंगुर हैं। इसके बाद एक धनवान व्यक्ति (अमीर) उसके पास आया और सोने-चाँदी का ढेर दिखाकर कहा कि मैं तुम्हें यह सब देता हूँ, मेरे साथ अनुबंध करो। वक्ता ने यह भी अस्वीकार कर दिया, क्योंकि धन भी उसे संतुष्ट नहीं कर सकता।
कविता के अंत में एक बच्चा उसके पास आया। बच्चा तट पर (समुद्र के किनारे) खेल रहा था। बच्चे ने उसे कुछ भी नहीं दिया, केवल उसके साथ खेला। उसी क्षण वक्ता ने फैसला किया कि वह बच्चे के साथ अनुबंध करेगा। उसने सोचा कि बच्चे के साथ का अनुबंध उसे पूरी स्वतंत्रता देता है। इस प्रकार कविता यह सिखाती है कि सच्चा आनंद और स्वतंत्रता शक्ति, धन या सुंदरता में नहीं, बल्कि मासूमियत और सादगी में है। 'द लास्ट बार्गेन' यानी अंतिम और सच्चा अनुबंध मासूमियत के साथ होता है।
इस कविता का मूलभाव शक्ति, धन और सुंदरता के भौतिक मोह से परे सच्ची स्वतंत्रता की खोज है। राजा शक्ति का, लड़की सुंदरता का और अमीर व्यक्ति धन का प्रतीक है। वक्ता इन तीनों को इसलिए अस्वीकार करता है क्योंकि वे स्थायी नहीं हैं और दुख के साथ आते हैं। शक्ति घमंड और संघर्ष लाती है, सुंदरता क्षणभंगुर है, और धन संतोष नहीं देता। ये तीनों वक्ता को बंधन में बाँधते हैं।
कविता का संदेश यह है कि सच्ची स्वतंत्रता और आनंद मासूमियत, सादगी और प्रेम में निहित है। बच्चा किसी भी भौतिक वस्तु का प्रतीक नहीं है; वह शुद्ध, मासूम और मुक्त है। बच्चे के साथ हुआ अनुबंध वक्ता को बंधन से मुक्त करता है। कविता यह भी सिखाती है कि जीवन में सबसे मूल्यवान चीज़ें वस्तुएँ नहीं, बल्कि रिश्ते, प्रेम और स्वतंत्रता हैं। हमें भौतिक सुखों के पीछे नहीं भागना चाहिए, बल्कि आंतरिक शांति और मुक्ति की खोज करनी चाहिए। यह कविता टैगोर के दार्शनिक विचारों का सुंदर उदाहरण है।
कविता के अंशों का विश्लेषण: - पहला अंश: राजा की शक्ति का प्रस्ताव — 'मैं तुम्हें शक्ति दे सकता हूँ।' — शक्ति अस्वीकृत। - दूसरा अंश: लड़की की सुंदरता का प्रस्ताव — 'मेरी मुस्कान से नौकरी।' — सुंदरता अस्वीकृत। - तीसरा अंश: अमीर का धन का प्रस्ताव — 'सोने-चाँदी का ढेर।' — धन अस्वीकृत। - अंतिम अंश: बच्चे के साथ अनुबंध — 'बच्चे ने मुझे कुछ नहीं दिया, केवल मुक्त किया।'
| प्रस्तावक | प्रस्ताव | वक्ता का उत्तर |
|---|---|---|
| राजा | शक्ति | अस्वीकृत (शक्ति से दुख) |
| लड़की | सुंदरता और मुस्कान | अस्वीकृत (क्षणभंगुर) |
| अमीर | सोने-चाँदी का धन | अस्वीकृत (संतोष नहीं) |
| बच्चा | कुछ नहीं, केवल खेल | स्वीकृत (स्वतंत्रता) |
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| कवि | रवींद्रनाथ टैगोर |
| मूलभाव | भौतिक मोह से परे स्वतंत्रता |
| संदेश | सादगी और मासूमियत में सच्चा सुख |
| बच्चा किसका प्रतीक | मासूमियत और स्वतंत्रता |
'द लास्ट बार्गेन' रवींद्रनाथ टैगोर की एक दार्शनिक और प्रतीकात्मक कविता है, जो सच्ची स्वतंत्रता की खोज का सुंदर चित्रण करती है। वक्ता शक्ति (राजा), सुंदरता (लड़की) और धन (अमीर) के तीनों भौतिक प्रस्तावों को अस्वीकार कर देता है, क्योंकि ये सभी क्षणभंगुर हैं और बंधन लाते हैं। अंत में वह एक मासूम बच्चे के साथ अनुबंध करता है, जिसने उसे कुछ नहीं दिया बल्कि मुक्त कर दिया। कविता का संदेश यह है कि सच्चा सुख और स्वतंत्रता भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि सादगी, मासूमियत, प्रेम और आंतरिक शांति में निहित हैं। टैगोर की सरल परंतु गहरी भाषा, प्रतीकात्मकता और दार्शनिक चिंतन इस कविता को अद्वितीय बनाते हैं। यह कविता हमें भौतिक मोह से ऊपर उठकर जीवन के सच्चे मूल्यों की खोज करने की प्रेरणा देती है।