'दिस इज़ जोडीज़ फॉन' (This is Jody's Fawn) एक सुंदर और भावनात्मक कहानी है, जो अमेरिकी लेखिका मार्जोरी किन्नन रॉलिंग्स (Marjorie Kinnan Rawlings) द्वारा लिखी गई है। यह कहानी एक छोटे लड़के जोड़ी (Jody) के बारे में है, जो एक अनाथ हिरण के बच्चे (fawn) को अपनाने के लिए दृढ़ संकल्पित होता है। कहानी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, करुणा और जानवरों के प्रति प्रेम का अद्भुत चित्रण है।
कहानी की पृष्ठभूमि यह है कि जोड़ी के पिता बैक्सटर को एक रैटलस्नेक (साँप) ने काट लिया था। उनकी जान बचाने के लिए एक हिरणी (doe) की कलेजी (liver) का उपयोग किया गया था, जो साँप के ज़हर को चूस लेती है। लेकिन इसके बाद वह हिरणी मर जाती है, और उसका छोटा बच्चा (fawn) अनाथ हो जाता है। जोड़ी को इस बात का गहरा दुख होता है कि उसके परिवार ने उस हिरणी की कलेजी का उपयोग करके उसके बच्चे को अनाथ कर दिया। वह चाहता है कि उस अनाथ बच्चे की देखभाल की जाए।
कहानी का मुख्य भाग तब शुरू होता है जब जोड़ी अपने पिता से उस हिरण के बच्चे को ढूँढने और उसे घर लाने की अनुमति माँगता है। उसका पिता बैक्सटर, जो अभी भी साँप के ज़हर से कमज़ोर है, उसे अनुमति देता है। जोड़ी अपने मित्र मिल-व्हील के साथ जंगल में जाता है और उस अनाथ हिरण के बच्चे को ढूँढकर लाता है। कहानी का अंत बहुत मार्मिक है जब जोड़ी उस बच्चे को दूध पिलाता है और उसे अपने प्यार से स्वीकार करता है। यह कहानी करुणा, ज़िम्मेदारी और प्रकृति के प्रति मानवीय संवेदना की सुंदर अभिव्यक्ति है।
मार्जोरी किन्नन रॉलिंग्स (Marjorie Kinnan Rawlings, 1896-1953) एक प्रसिद्ध अमेरिकी लेखिका थीं। वे अपनी कहानियों में फ्लोरिडा के जंगलों और वहाँ के लोगों के जीवन का सजीव चित्रण करती थीं। उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक 'द येयरलिंग' (The Yearling) है, जिसे पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 'दिस इज़ जोडीज़ फॉन' इसी पुस्तक का एक अंश है। उनकी लेखन-शैली में प्रकृति का गहरा प्रेम, सरल भाषा और मानवीय भावनाओं का सजीव चित्रण मिलता है। वे जानवरों और प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता के लिए जानी जाती हैं।
कहानी की शुरुआत में जोड़ी अपने पिता बैक्सटर के साथ घर पर है। उसके पिता एक रैटलस्नेक के काटने से उबर रहे हैं। उनकी जान बचाने के लिए एक हिरणी की कलेजी का उपयोग किया गया था, जो साँप के ज़हर को सोख लेती है, लेकिन उस हिरणी की मृत्यु हो गई। जोड़ी इस बात को लेकर परेशान है कि उस हिरणी का छोटा बच्चा अब अनाथ हो गया है और उसे भूख लग सकती है। वह अपने पिता से कहता है कि हिरणी की कलेजी का उपयोग करने के कारण हम उसके बच्चे के लिए ज़िम्मेदार हैं।
जोड़ी के पिता उसकी संवेदनशीलता और तर्क को समझते हैं। वे उसे अनुमति देते हैं कि वह हिरण के बच्चे को ढूँढकर घर ला सकता है। जोड़ी खुश होकर अपने पड़ोसी और मित्र मिल-व्हील के साथ जंगल जाता है। जंगल में उन्हें हिरण के बच्चे की खोज करनी होती है। रास्ते में वे एक बड़ा हिरण भी देखते हैं, जिससे वे डरते हैं। अंततः वे उस अनाथ हिरण के बच्चे को एक झाड़ी के पास खड़ा पाते हैं। बच्चा कमज़ोर और भूखा है। जोड़ी उसे प्यार से पकड़कर घर लाता है।
घर पहुँचकर जोड़ी के पिता बैक्सटर खुश होते हैं। उनकी माँ (जोड़ी की माँ) को शुरू में संकोच होता है, परंतु वह मान जाती है। जोड़ी दूध गर्म करता है और उसे एक छोटे बर्तन में डालकर हिरण के बच्चे को पिलाता है। बच्चा पहले झिझकता है, फिर जोर से दूध पीने लगता है। जब बच्चा दूध पीकर चाटता है, तो जोड़ी का दिल खुशी से भर जाता है। कहानी का शीर्षक 'दिस इज़ जोडीज़ फॉन' इसी प्रसंग से जुड़ा है — जब जोड़ी उस बच्चे को अपना बच्चा घोषित करता है। इस प्रकार कहानी करुणा, ज़िम्मेदारी और प्रकृति के प्रति प्रेम का मार्मिक चित्रण करती है।
इस कहानी का मूलभाव करुणा, ज़िम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता है। कहानी दर्शाती है कि जोड़ी अपने परिवार द्वारा हिरणी की कलेजी के उपयोग को उसके बच्चे के अनाथ होने से जोड़ता है और उसके प्रति ज़िम्मेदारी महसूस करता है। यह बताता है कि मनुष्य के कर्मों के परिणामों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। जोड़ी का हिरण के बच्चे के प्रति प्रेम दर्शाता है कि बच्चों में प्रकृति और जानवरों के प्रति सहज करुणा होती है।
पाठ का संदेश यह है कि हमें प्रकृति और उसके प्राणियों के प्रति दयालु और ज़िम्मेदार होना चाहिए। जोड़ी अपने पिता से कहता है कि "हमने उस हिरणी की कलेजी ली, इसलिए उसके बच्चे की देखभाल करना हमारा कर्तव्य है।" यह ज़िम्मेदारी की भावना ही इस कहानी की आत्मा है। साथ ही, कहानी पिता-पुत्र के प्रेम और समझ को भी दर्शाती है, जहाँ बैक्सटर जोड़ी की भावनाओं को समझकर उसे अनुमति देता है। यह कहानी हमें सिखाती है कि दया और करुणा सबसे बड़े गुण हैं, और जो लोग हम पर एहसान करते हैं, उनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।
| घटना क्रम | विवरण |
|---|---|
| 1 | साँप ने बैक्सटर को काटा |
| 2 | हिरणी की कलेजी से जान बची, हिरणी मरी |
| 3 | जोड़ी ने अनाथ बच्चे की देखभाल की ज़िम्मेदारी उठाई |
| 4 | जोड़ी और मिल-व्हील जंगल गए |
| 5 | बच्चा मिला और घर लाया गया |
| 6 | जोड़ी ने दूध पिलाया |
| पात्र | भूमिका |
|---|---|
| जोड़ी | संवेदनशील लड़का, अनाथ बच्चे का रक्षक |
| बैक्सटर | पिता, साँप के काटने से उबर रहे |
| मिल-व्हील | मित्र, खोज में मदद |
| हिरणी | साँप के ज़हर को सोखकर मरी |
'दिस इज़ जोडीज़ फॉन' मार्जोरी किन्नन रॉलिंग्स की एक संवेदनशील और भावनात्मक कहानी है, जो करुणा और ज़िम्मेदारी की भावना को अद्भुत रूप से चित्रित करती है। जोड़ी अपने पिता के इलाज में प्रयुक्त हिरणी की कलेजी को उसके अनाथ बच्चे की दुर्दशा से जोड़ता है और उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी उठाता है। वह पिता की अनुमति लेकर मिल-व्हील के साथ जंगल जाता है, बच्चे को ढूँढता है और घर लाकर दूध पिलाता है। कहानी का शीर्षक 'दिस इज़ जोडीज़ फॉन' इसी स्वीकृति और प्रेम का प्रतीक है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जो जीव हमारे कर्मों से प्रभावित होते हैं, उनके प्रति हमारी ज़िम्मेदारी बनती है। करुणा, दया और कृतज्ञता ही मानवता के सबसे बड़े गुण हैं, और बच्चों की सहज संवेदनशीलता प्रकृति के प्रति प्रेम की प्रेरणा देती है।