दैनिक जीवन में हमें दो राशियों की तुलना करनी पड़ती है, जैसे दो वस्तुओं के मूल्य, दो कक्षाओं में छात्रों की संख्या, या किसी नगर की जनसंख्या में वृद्धि। इस अध्याय में हम राशियों की तुलना के लिए अनुपात (Ratio), प्रतिशत (Percentage), ब्याज (Interest) और बट्टा (Discount) जैसी अवधारणाओं का अध्ययन करेंगे। इनमें से प्रतिशत की अवधारणा सबसे अधिक उपयोगी है, क्योंकि यह विभिन्न आकारों की राशियों की तुलना को आसान बनाती है। बाजार में मिलने वाले मूल्यवर्धन, बट्टा और ब्याज के लेन-देन को समझने के लिए इस अध्याय का ज्ञान आवश्यक है।
दो समान राशियों की तुलना उनके अनुपात द्वारा की जाती है। $a$ और $b$ का अनुपात $a : b$ लिखा जाता है। अनुपात को हमेशा सरलतम रूप में व्यक्त करना चाहिए। उदाहरण के लिए 40 रुपये और 60 रुपये का अनुपात $40 : 60 = 2 : 3$ होता है।
प्रतिशत का अर्थ है 'प्रति सौ' (Per Cent)। किसी राशि को 100 के भाग में व्यक्त करना ही प्रतिशत है। प्रतिशत को % चिह्न से दर्शाया जाता है। किसी भिन्न को प्रतिशत में बदलने के लिए उसे 100 से गुणा किया जाता है।
$$\frac{1}{5} = \frac{1}{5} \times 100\% = 20\%$$
प्रतिशत को भिन्न या दशमलव में बदलने के लिए 100 से भाग दिया जाता है:
$$45\% = \frac{45}{100} = 0.45$$
$$\text{प्रतिशत वृद्धि} = \frac{\text{वृद्धि की मात्रा}}{\text{प्रारंभिक मान}} \times 100\%$$ $$\text{प्रतिशत कमी} = \frac{\text{कमी की मात्रा}}{\text{प्रारंभिक मान}} \times 100\%$$
व्यापार के क्षेत्र में माल खरीदने के मूल्य को क्रय मूल्य (Cost Price, CP) और बेचने के मूल्य को विक्रय मूल्य (Selling Price, SP) कहते हैं।
$$\text{लाभ} = SP - CP, \qquad \text{हानि} = CP - SP$$ $$\text{लाभ प्रतिशत} = \frac{\text{लाभ}}{CP} \times 100\%, \qquad \text{हानि प्रतिशत} = \frac{\text{हानि}}{CP} \times 100\%$$
एक दुकानदार ने 500 रुपये में एक वस्तु खरीदी और 600 रुपये में बेच दी। लाभ = 600 - 500 = 100 रुपये। लाभ प्रतिशत = $\frac{100}{500} \times 100\% = 20\%$।
अंकित मूल्य (Marked Price, MP) पर दी जाने वाली छूट को बट्टा कहते हैं।
$$\text{बट्टा} = MP \times \frac{\text{बट्टा प्रतिशत}}{100}$$ $$\text{विक्रय मूल्य} = MP - \text{बट्टा}$$
खरीददारी पर लगने वाला कर (जैसे GST) अंकित मूल्य के प्रतिशत के रूप में जोड़ा जाता है। कर सहित विक्रय मूल्य = अंकित मूल्य + कर। कर सदैव अंकित मूल्य या विक्रय मूल्य के प्रतिशत के रूप में लिया जाता है।
किसी राशि को उधार लेने पर दिए जाने वाले अतिरिक्त धन को ब्याज कहते हैं।
$$SI = \frac{P \times R \times T}{100}$$
यहाँ $P$ = मूलधन, $R$ = दर (वार्षिक प्रतिशत), $T$ = समय (वर्ष)।
$$\text{मिश्रधन} = P + SI$$
5000 रुपये का 2 वर्ष के लिए 8% वार्षिक दर से साधारण ब्याज = $\frac{5000 \times 8 \times 2}{100} = 800$ रुपये। मिश्रधन = 5000 + 800 = 5800 रुपये।
जनसंख्या, वस्तु के मूल्य आदि में होने वाली वृद्धि को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। यदि किसी नगर की जनसंख्या प्रति वर्ष $r\%$ बढ़ती है, तो $n$ वर्ष बाद जनसंख्या:
$$P' = P \left(1 + \frac{r}{100}\right)^n$$
इसी प्रकार यदि कोई वस्तु का मूल्य प्रति वर्ष $r\%$ घटता है, तो $n$ वर्ष बाद मूल्य:
$$P' = P \left(1 - \frac{r}{100}\right)^n$$
यह सूत्र जनसंख्या वृद्धि, मूल्य वृद्धि और वस्तु के अवमूल्यन जैसी समस्याओं को हल करने में उपयोगी है।
प्रतिशत का उपयोग परीक्षा के अंक, क्रिकेट के रन, बैंक के ब्याज, बाजार के भाव और जनगणना जैसी अनेक स्थितियों में होता है। यदि किसी परीक्षा में कुल 200 अंक हैं और एक विद्यार्थी 160 अंक प्राप्त करता है, तो उसके प्रतिशत अंक (160/200) × 100 = 80% होंगे। इसी प्रकार किसी कक्षा में 80 में से 68 विद्यार्थी उपस्थित हैं, तो उपस्थिति का प्रतिशत (68/80) × 100 = 85% होगा। प्रतिशत की इन गणनाओं का दैनिक जीवन में निरंतर उपयोग होता है, इसलिए भिन्न, दशमलव और प्रतिशत के परस्पर रूपांतरण में दक्षता प्राप्त करना आवश्यक है।
| भिन्न | प्रतिशत | दशमलव |
|---|---|---|
| 1/2 | 50% | 0.5 |
| 1/4 | 25% | 0.25 |
| 1/5 | 20% | 0.2 |
| 1/10 | 10% | 0.1 |
| 3/4 | 75% | 0.75 |
| 2/5 | 40% | 0.4 |
| अवधारणा | सूत्र |
|---|---|
| लाभ | SP - CP |
| हानि | CP - SP |
| लाभ प्रतिशत | (लाभ/CP) × 100 |
| हानि प्रतिशत | (हानि/CP) × 100 |
| बट्टा | MP × बट्टा%/100 |
| साधारण ब्याज | (P × R × T)/100 |
| मिश्रधन | P + SI |
| पद | अर्थ |
|---|---|
| क्रय मूल्य (CP) | खरीदने का मूल्य |
| विक्रय मूल्य (SP) | बेचने का मूल्य |
| अंकित मूल्य (MP) | छूट से पहले का मूल्य |
| मूलधन (P) | उधार ली गई राशि |
| मिश्रधन | मूलधन + ब्याज |
इस अध्याय में हमने राशियों की तुलना की विभिन्न विधियों का अध्ययन किया। अनुपात और प्रतिशत द्वारा राशियों की तुलना, लाभ-हानि और बट्टे के द्वारा व्यापारिक गणनाएँ, तथा साधारण ब्याज और जनसंख्या वृद्धि के सूत्रों से दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान सीखा। ये अवधारणाएँ बाजार, बैंक और रोजमर्रा की गणनाओं में अत्यंत उपयोगी हैं। प्रतिशत को भिन्न और दशमलव में बदलने की क्षमता तथा सभी सूत्रों का सही प्रयोग परीक्षा में अच्छे अंक दिलाता है। अभ्यास द्वारा इन गणनाओं को तीव्र करें।