किसी संख्या को उसके अभाज्य गुणनखंडों के गुणनफल के रूप में लिखना हम कक्षा 6 से करते आ रहे हैं, जैसे $12 = 2 \times 2 \times 3$। इसी प्रकार किसी बीजीय व्यंजक को उसके सरलतम पदों (गुणनखंडों) के गुणनफल के रूप में लिखने की प्रक्रिया को गुणनखंडन (Factorisation) कहते हैं। गुणनखंडन गुणन की व्युत्क्रम संक्रिया है। इस अध्याय में हम बीजीय व्यंजकों के गुणनखंडन की विभिन्न विधियों का अध्ययन करेंगे, जो समीकरणों को हल करने और व्यंजकों को सरल बनाने में अत्यंत उपयोगी हैं।
जब किसी व्यंजक के सभी पदों में एक या अधिक सार्व गुणनखंड हों, तो उन्हें बाहर निकालकर गुणनखंडन किया जाता है।
उदाहरण: $6x^2 + 12x = 6x(x + 2)$
यहाँ 6x दोनों पदों का सार्व गुणनखंड है। ध्यान दें कि गुणनखंडन के बाद गुणा करके पुनः मूल व्यंजक प्राप्त होता है, जो हमारे हल की जाँच है।
जब व्यंजक में चार पद हों, तो पदों का ऐसा समूह बनाया जाता है जिससे प्रत्येक समूह में सार्व गुणनखंड निकल सके।
उदाहरण: $x^2 + ax + bx + ab = x(x + a) + b(x + a) = (x + a)(x + b)$
सर्वसमिकाओं के उपयोग से कुछ व्यंजकों का तुरंत गुणनखंडन किया जा सकता है:
$$a^2 + 2ab + b^2 = (a + b)^2$$ $$a^2 - 2ab + b^2 = (a - b)^2$$ $$a^2 - b^2 = (a + b)(a - b)$$
उदाहरण: $x^2 + 6x + 9 = x^2 + 2(x)(3) + 3^2 = (x + 3)^2$
$ax^2 + bx + c$ रूप के द्विघात व्यंजक का गुणनखंडन मध्य पद को विभाजित करके किया जाता है। इस विधि में ऐसी दो संख्याएँ ढूँढते हैं जिनका योग $b$ (मध्य पद का गुणांक) और गुणनफल $a \times c$ हो।
उदाहरण: $x^2 + 5x + 6$ में $a \times c = 6$ और योग 5 देने वाली संख्याएँ 2 और 3 हैं।
$$x^2 + 5x + 6 = x^2 + 2x + 3x + 6 = x(x + 2) + 3(x + 2) = (x + 2)(x + 3)$$
गुणनखंडन की जाँच गुणा द्वारा की जाती है। गुणनखंडों का गुणनफल मूल व्यंजक के बराबर होना चाहिए। यह हमेशा याद रखें कि गुणनखंडन और गुणा व्युत्क्रम संक्रियाएँ हैं, इसलिए एक की जाँच दूसरे से होती है।
$$(x + 2)(x + 3) = x^2 + 5x + 6$$
गुणनखंडन का एक महत्वपूर्ण अनुप्रयोग बीजीय व्यंजकों का विभाजन है। विभाजन में अंश और हर के गुणनखंड करके सार्व गुणनखंडों को काटा जाता है।
उदाहरण: $\frac{x^2 - 4}{x - 2} = \frac{(x + 2)(x - 2)}{(x - 2)} = x + 2$
इस प्रकार गुणनखंडन से भिन्नों और व्यंजकों का सरलीकरण सरल हो जाता है। विभाजन करते समय यह ध्यान रखें कि हर शून्य न हो।
गुणनखंडन के मुख्य अनुप्रयोग:
गुणनखंडन में दक्षता प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विधि का पर्याप्त अभ्यास करना चाहिए। सार्व गुणनखंड विधि में पहले सभी पदों के गुणांकों का सार्व गुणनखंड और सार्व अक्षर गुणनखंड दोनों ज्ञात किए जाते हैं। उदाहरण के लिए $12x^3y + 18x^2y^2$ में सार्व गुणनखंड $6x^2y$ है, अतः व्यंजक $6x^2y(2x + 3y)$ के रूप में लिखा जाएगा।
समूहीकरण की विधि में पदों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि प्रत्येक समूह से एक सार्व गुणनखंड निकल सके। उदाहरण के लिए $xy - 3y + 2x - 6$ को $y(x - 3) + 2(x - 3)$ लिखकर $(x - 3)(y + 2)$ में परिवर्तित किया जाता है। यदि पहले समूह से सार्व गुणनखंड न निकले, तो पदों के क्रम को बदलकर पुनः प्रयास करना चाहिए।
सर्वसमिकाओं द्वारा गुणनखंडन में पूर्ण वर्ग और वर्गों के अंतर की पहचान महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए $16x^2 + 24x + 9$ को $(4x)^2 + 2(4x)(3) + 3^2$ के रूप में पहचानकर $(4x + 3)^2$ लिखा जाता है। इसी प्रकार $49a^2 - 36b^2 = (7a)^2 - (6b)^2 = (7a + 6b)(7a - 6b)$ होता है।
बीजीय भिन्नों के विभाजन में पहले अंश और हर दोनों का गुणनखंडन करके सार्व गुणनखंडों को निरस्त किया जाता है। जैसे $\frac{x^2 - 9}{x^2 + 6x + 9} = \frac{(x + 3)(x - 3)}{(x + 3)^2} = \frac{x - 3}{x + 3}$। इस प्रकार गुणनखंडन से जटिल व्यंजक सरलतम रूप में परिवर्तित हो जाते हैं।
गुणनखंडन का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह समीकरणों को हल करने का आधार तैयार करता है। उदाहरण के लिए यदि $x^2 - 25 = 0$ दिया हो, तो गुणनखंडन से $(x + 5)(x - 5) = 0$ प्राप्त होता है, जिससे $x = 5$ या $x = -5$ मिलता है। इसी प्रकार $x^2 + 7x + 12 = 0$ का गुणनखंडन $(x + 3)(x + 4) = 0$ करने पर $x = -3$ या $x = -4$ प्राप्त होता है। इस प्रकार गुणनखंडन के बिना द्विघात समीकरणों को हल करना संभव नहीं होता।
अतः गुणनखंडन की प्रत्येक विधि में पूर्ण अभ्यास आवश्यक है। सार्व गुणनखंड की पहचान, समूहीकरण में पदों का सही संयोजन, सर्वसमिकाओं की पहचान और मध्य पद विभाजन में संख्याओं का सही चयन, ये सभी कौशल नियमित अभ्यास से ही विकसित होते हैं।
| विधि | कब प्रयोग करें | उदाहरण |
|---|---|---|
| सार्व गुणनखंड | सभी पदों में सार्व कारक | 6x² + 12x = 6x(x + 2) |
| समूहीकरण | चार पद | x² + ax + bx + ab |
| सर्वसमिका | पूर्ण वर्ग या अंतर | x² - 9 = (x+3)(x-3) |
| मध्य पद विभाजन | द्विघात व्यंजक | x² + 5x + 6 |
| व्यंजक | गुणनखंड |
|---|---|
| a² + 2ab + b² | (a + b)² |
| a² - 2ab + b² | (a - b)² |
| a² - b² | (a + b)(a - b) |
| x² + (a+b)x + ab | (x + a)(x + b) |
| व्यंजक | गुणनखंड |
|---|---|
| 4x + 8 | 4(x + 2) |
| x² - 25 | (x + 5)(x - 5) |
| x² + 10x + 25 | (x + 5)² |
| 2x² + 7x + 3 | (2x + 1)(x + 3) |
इस अध्याय में हमने बीजीय व्यंजकों के गुणनखंडन की चार प्रमुख विधियों का अध्ययन किया: सार्व गुणनखंड, समूहीकरण, सर्वसमिकाएँ और मध्य पद का विभाजन। गुणनखंडन गुणन की व्युत्क्रम संक्रिया है, इसलिए गुणा करके उत्तर की जाँच हमेशा की जा सकती है। सर्वसमिकाओं का प्रयोग गुणनखंडन को अत्यधिक सरल बनाता है। गुणनखंडन का ज्ञान समीकरणों को हल करने, भिन्नों को सरल करने और व्यंजकों की गणना में अत्यंत उपयोगी है। विभिन्न विधियों का नियमित अभ्यास करके गुणनखंडन में दक्षता प्राप्त की जा सकती है।