ज्यामिति के इस अध्याय में हम रूलर, पेंसिल, परकार और चाँदे (Protractor) की सहायता से विभिन्न चतुर्भुजों और बहुभुजों की रचना करना सीखेंगे। प्रायोगिक ज्यामिति (Practical Geometry) वह विधि है जिसमें दी गई मापों के आधार पर निश्चित नियमों का पालन करते हुए आकृतियाँ खींची जाती हैं। चतुर्भुज की रचना के लिए उसके कुछ विशिष्ट अवयवों की जानकारी आवश्यक होती है। यदि रचना के लिए पर्याप्त जानकारी दी जाए, तो आकृति अद्वितीय (Unique) बनती है; यदि जानकारी कम हो, तो आकृति बनाना संभव नहीं होता। इस अध्याय में हम चतुर्भुजों की रचना की विभिन्न स्थितियों का अध्ययन करेंगे।
चतुर्भुज की रचना के लिए निम्न उपकरणों का उपयोग होता है:
रचना करते समय हमेशा रेखाओं को हल्के रंग से बनाना चाहिए और आवश्यक बिंदुओं को स्पष्ट रूप से अंकित करना चाहिए। प्रत्येक रचना के चरण लिखते हुए बनाना परीक्षा में महत्वपूर्ण है।
चतुर्भुज की रचना निम्नलिखित चार स्थितियों में संभव होती है:
जब चारों भुजाओं की लंबाई और एक विकर्ण की लंबाई दी हो, तो हम इस विकर्ण को चतुर्भुज को दो त्रिभुजों में विभाजित करने वाला मानकर रचना करते हैं। सबसे पहले विकर्ण खींचते हैं, फिर इसके दोनों सिरों से दी गई भुजाओं की लंबाई की चाप (Arc) काटते हैं।
जब चारों भुजाएँ और एक कोण दिया हो, तो उस कोण के शीर्ष से रचना आरंभ करते हैं। चाँदे की सहायता से दिया गया कोण बनाकर दोनों भुजाओं की लंबाई काटते हैं, फिर शेष दो भुजाओं की चापें काटकर चौथा शीर्ष ज्ञात करते हैं।
इस स्थिति में ज्ञात भुजाओं में से एक पर रचना आरंभ करते हैं। उस भुजा के दोनों सिरों पर दिए गए आसन्न कोण चाँदे से बनाते हैं, फिर शेष भुजाओं की लंबाई काटते हैं।
इस स्थिति में किसी भी भुजा से प्रारंभ करके विकर्णों की चापें काटते हुए शेष शीर्ष ज्ञात किए जाते हैं।
त्रिभुज की रचना तब संभव है जब हमें ज्ञात हो: - तीनों भुजाएँ (SSS नियम) - दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण (SAS नियम) - दो कोण और उनके बीच की भुजा (ASA नियम) - समकोण त्रिभुज में कर्ण और एक भुजा (RHS नियम)
आइए एक उदाहरण के द्वारा चतुर्भुज की रचना का पूरा तरीका समझते हैं। माना ABCD एक चतुर्भुज है जिसमें AB = 5 सेमी, BC = 4 सेमी, CD = 4.5 सेमी, AD = 3 सेमी और विकर्ण AC = 6 सेमी दिया है।
चरण 1: रेखा खंड AC = 6 सेमी खींचें। चरण 2: A को केंद्र मानकर 5 सेमी की चाप और C को केंद्र मानकर 4 सेमी की चाप काटें; प्रतिच्छेदन बिंदु B होगा। चरण 3: AB और BC को मिलाएँ। चरण 4: A को केंद्र मानकर 3 सेमी की चाप और C को केंद्र मानकर 4.5 सेमी की चाप काटें; प्रतिच्छेदन बिंदु D होगा। चरण 5: AD और CD को मिलाकर चतुर्भुज ABCD पूर्ण करें।
इस प्रकार चतुर्भुज ABCD की रचना पूर्ण होती है। ध्यान दें कि विकर्ण AC चतुर्भुज को दो त्रिभुजों ABC और ADC में विभाजित करता है, और प्रत्येक त्रिभुज की रचना SSS नियम से संभव है।
| स्थिति | दी गई जानकारी | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 4 भुजाएँ + 1 विकर्ण | विकर्ण को आधार बनाकर दो त्रिभुज |
| 2 | 4 भुजाएँ + 1 कोण | कोण से आरंभ करें |
| 3 | 3 भुजाएँ + 2 आसन्न कोण | भुजा पर कोण बनाकर |
| 4 | 3 भुजाएँ + 2 विकर्ण | विकर्णों की चापें काटकर |
| नियम | आवश्यक जानकारी | उदाहरण |
|---|---|---|
| SSS | तीनों भुजाएँ | AB, BC, CA |
| SAS | दो भुजाएँ + बीच का कोण | AB, BC, ∠B |
| ASA | दो कोण + बीच की भुजा | ∠A, AB, ∠B |
| RHS | कर्ण + एक भुजा (समकोण) | AC, BC |
| उपकरण | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| रूलर | सरल रेखा खींचना, लंबाई मापना |
| परकार | चाप काटना, वृत्त बनाना |
| चाँदा | कोण की माप व रचना |
| सेट स्क्वायर | समांतर और लंब रेखाएँ |
प्रायोगिक ज्यामिति में हमने सीखा कि रूलर, परकार और चाँदे की सहायता से चतुर्भुजों और त्रिभुजों की रचना किस प्रकार की जाती है। चतुर्भुज की रचना की चार प्रमुख स्थितियाँ होती हैं, जिनमें से किसी भी स्थिति में रचना का क्रम निश्चित रहता है: पहले आधार रेखा, फिर चापें और प्रतिच्छेदन बिंदु, और अंत में भुजाओं का संयोजन। रचना के नियमों का क्रमबद्ध पालन तथा चरणों का लिखित विवरण परीक्षा में पूर्ण अंक दिलाने में सहायक होते हैं। यह अध्याय ज्यामिति की नींव को और मजबूत करता है और आगे के अध्यायों में क्षेत्रमिति तथा ठोस आकृतियों के अध्ययन का आधार तैयार करता है।