आप कक्षा 7 में विभिन्न प्रकार की संख्याओं जैसे पूर्ण संख्याएँ, प्राकृत संख्याएँ, पूर्णांक तथा भिन्नों के बारे में पढ़ चुके हैं। इस अध्याय में हम परिमेय संख्याओं (Rational Numbers) का विस्तृत अध्ययन करेंगे। गणित की भाषा में वह संख्या जिसे $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सके, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हों तथा $q \neq 0$ हो, परिमेय संख्या कहलाती है। इसे 'Q' से निरूपित करते हैं। उदाहरण के लिए $\frac{2}{3}$, $\frac{-5}{7}$, $0.5$, $0.25$ आदि सभी परिमेय संख्याएँ हैं। इस अध्याय में हम परिमेय संख्याओं के गुणधर्म, संख्या रेखा पर इनका निरूपण और दो परिमेय संख्याओं के बीच की संख्याएँ ज्ञात करने की विधियों का अध्ययन करेंगे।
2. परिमेय संख्याओं की पहचान
कोई भी संख्या जो भिन्न $\frac{p}{q}$ के रूप में व्यक्त होती है और जिसका हर शून्य नहीं होता, वह परिमेय संख्या कहलाती है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:
प्रत्येक प्राकृत संख्या, पूर्ण संख्या और पूर्णांक परिमेय संख्या होती है, क्योंकि इन्हें $q = 1$ वाले हर के साथ $\frac{p}{1}$ के रूप में लिखा जा सकता है।
संख्या शून्य (0) भी एक परिमेय संख्या है, क्योंकि इसे $\frac{0}{1}$ या $\frac{0}{5}$ के रूप में लिखा जा सकता है।
प्रत्येक परिमेय संख्या का गुणात्मक रूप से एक प्रतिलोम होता है, परंतु शून्य का कोई गुणात्मक प्रतिलोम नहीं होता क्योंकि $q \neq 0$ का नियम लागू होता है।
$\frac{1}{0}$ परिभाषित नहीं है, इसलिए शून्य को हर के रूप में नहीं लिया जा सकता।
संख्या रेखा पर परिमेय संख्याएँ
परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए $\frac{3}{4}$ को निरूपित करने के लिए हम 0 और 1 के बीच के अंतराल को 4 बराबर भागों में बाँटते हैं और तीसरे भाग पर बिंदु अंकित करते हैं। इसी प्रकार $\frac{-3}{4}$ को 0 और -1 के बीच में निरूपित किया जाता है। इस प्रकार प्रत्येक परिमेय संख्या संख्या रेखा पर एक अद्वितीय बिंदु द्वारा निरूपित होती है।
3. परिमेय संख्याओं के गुणधर्म
परिमेय संख्याओं पर संक्रियाएँ (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) करते समय कुछ गुणधर्म लागू होते हैं। ये गुणधर्म परिमेय संख्याओं के समुच्चय Q के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
संवृत (Closed) होने का गुणधर्म
दो परिमेय संख्याओं का योग और गुणनफल सदैव परिमेय संख्या होता है। अतः परिमेय संख्याएँ जोड़ और गुणा की संक्रियाओं के लिए संवृत हैं।
दो परिमेय संख्याओं का अंतर भी परिमेय होता है, इसलिए यह भी संवृत गुणधर्म का पालन करता है।
दो परिमेय संख्याओं का भाग सदैव परिमेय संख्या नहीं होता, क्योंकि शून्य से भाग संभव नहीं है। इसलिए भाग की संक्रिया के लिए परिमेय संख्याएँ संवृत नहीं हैं।
क्रमविनिमेय (Commutative) गुणधर्म
$a + b = b + a$ अर्थात परिमेय संख्याओं का जोड़ क्रमविनिमेय है। जैसे $\frac{2}{3} + \frac{1}{4} = \frac{1}{4} + \frac{2}{3}$।
$a \times b = b \times a$ अर्थात गुणा भी क्रमविनिमेय है।
घटाव और भाग क्रमविनिमेय नहीं हैं, क्योंकि $a - b \neq b - a$ तथा $\frac{a}{b} \neq \frac{b}{a}$ होता है।
साहचर्य (Associative) गुणधर्म
$(a + b) + c = a + (b + c)$ अर्थात जोड़ साहचर्य है।
$(a \times b) \times c = a \times (b \times c)$ अर्थात गुणा साहचर्य है।
घटाव और भाग साहचर्य गुणधर्म का पालन नहीं करते।
वितरण (Distributive) गुणधर्म
$a \times (b + c) = a \times b + a \times c$ तथा $a \times (b - c) = a \times b - a \times c$ होता है। यह गुणन का जोड़ तथा घटाव पर वितरण गुणधर्म है।
$$a(b + c) = ab + ac$$
तत्समक (Identity) अवयव
योज्य तत्समक (Additive Identity): शून्य (0) को योज्य तत्समक कहते हैं, क्योंकि $a + 0 = 0 + a = a$ होता है।
गुणात्मक तत्समक (Multiplicative Identity): संख्या 1 को गुणात्मक तत्समक कहते हैं, क्योंकि $a \times 1 = 1 \times a = a$ होता है।
प्रतिलोम (Inverse) अवयव
योज्य प्रतिलोम: किसी संख्या $a$ का योज्य प्रतिलोम $-a$ होता है, क्योंकि $a + (-a) = 0$ होता है।
गुणात्मक प्रतिलोम (व्युत्क्रम): किसी शून्येतर परिमेय संख्या $\frac{a}{b}$ का गुणात्मक प्रतिलोम $\frac{b}{a}$ होता है, क्योंकि $\frac{a}{b} \times \frac{b}{a} = 1$ होता है।
$$0 + a = a, \qquad 1 \times a = a$$
4. दो परिमेय संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करना
किन्हीं दो दी गई परिमेय संख्याओं के बीच अपरिमित रूप से अनेक परिमेय संख्याएँ विद्यमान होती हैं। इन्हें ज्ञात करने की तीन प्रमुख विधियाँ हैं:
मध्य परिमेय संख्या ज्ञात करना: दो संख्याओं $x$ और $y$ के बीच की एक परिमेय संख्या $\frac{x+y}{2}$ होती है। जैसे $\frac{1}{3}$ और $\frac{1}{2}$ के बीच की संख्या $\frac{1}{3}+\frac{1}{2} = \frac{5}{6}$ का आधा अर्थात $\frac{5}{12}$ है।
समान हर बनाना: दोनों संख्याओं को समान हर वाले रूप में बदलकर बीच की संख्याएँ लिखी जा सकती हैं।
सार्व हर (Common Denominator) विधि: हरों का लघुत्तम समापवर्त्य ज्ञात कर दोनों भिन्नों को बराबर हर में परिवर्तित किया जाता है और फिर अंशों के बीच की संख्याएँ चुनी जाती हैं।
उदाहरण के लिए $\frac{1}{3}$ और $\frac{1}{2}$ के बीच $\frac{1}{3} = \frac{4}{12}$ और $\frac{1}{2} = \frac{6}{12}$, अतः $\frac{5}{12}$ एक ऐसी संख्या है। इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराकर दो संख्याओं के बीच जितनी चाहें उतनी परिमेय संख्याएँ ज्ञात की जा सकती हैं।
5. परिमेय संख्याओं के रूप (Types of Rational Numbers)
धनात्मक परिमेय संख्याएँ: वे परिमेय संख्याएँ जिनमें अंश और हर दोनों समान चिह्न के होते हैं, धनात्मक होती हैं। जैसे $\frac{3}{4}$, $\frac{-2}{-5}$।
ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ: वे परिमेय संख्याएँ जिनमें अंश और हर विपरीत चिह्न के होते हैं, ऋणात्मक होती हैं। जैसे $\frac{-3}{4}$, $\frac{5}{-7}$।
मानक रूप (Standard Form): परिमेय संख्या का मानक रूप वह रूप है जिसमें हर धनात्मक हो तथा अंश और हर के बीच 1 के अतिरिक्त कोई सार्व गुणनखंड न हो। जैसे $\frac{3}{4}$ मानक रूप में है।
त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1: गुणधर्मों का सारांश
गुणधर्म
जोड़
घटाव
गुणा
भाग
संवृतता
हाँ
हाँ
हाँ
नहीं (शून्य से भाग)
क्रमविनिमेय
हाँ
नहीं
हाँ
नहीं
साहचर्य
हाँ
नहीं
हाँ
नहीं
तत्समक
0
-
1
-
प्रतिलोम
$-a$
-
$\frac{1}{a}$
-
वितरण
गुणा का जोड़ पर वितरण: $a(b+c) = ab + ac$
तालिका 2: महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
पद
परिभाषा
उदाहरण
परिमेय संख्या
$\frac{p}{q}$ रूप की संख्या जहाँ $q \neq 0$
$\frac{7}{8}$, $\frac{-3}{5}$
योज्य तत्समक
संख्या जिसे जोड़ने पर संख्या अपरिवर्तित रहे
0
गुणात्मक तत्समक
संख्या जिससे गुणा करने पर संख्या अपरिवर्तित रहे
1
योज्य प्रतिलोम
$a + b = 0$ वाला $b$
$-a$
गुणात्मक प्रतिलोम
$a \times b = 1$ वाला $b$
$\frac{1}{a}$
तालिका 3: संख्या प्रणाली का वर्गीकरण
संख्या का प्रकार
उदाहरण
परिमेय?
प्राकृत संख्याएँ
1, 2, 3, ...
हाँ
पूर्ण संख्याएँ
0, 1, 2, ...
हाँ
पूर्णांक
..., -2, -1, 0, 1, 2, ...
हाँ
भिन्न
$\frac{2}{3}$, $\frac{7}{9}$
हाँ
दशमलव संख्याएँ
0.5, 3.25
हाँ (सांत या आवर्ती)
माइंड मैप
graph TD
A["परिमेय संख्याएँ (Q)"] --> B["परिभाषा: p/q जहाँ q ≠ 0"]
A --> C["गुणधर्म"]
C --> C1["संवृतता"]
C --> C2["क्रमविनिमेय"]
C --> C3["साहचर्य"]
C --> C4["वितरण"]
C --> C5["तत्समक: 0 और 1"]
C --> C6["प्रतिलोम"]
A --> D["संख्या रेखा पर निरूपण"]
A --> E["दो संख्याओं के बीच संख्याएँ ज्ञात करना"]
E --> E1["मध्य संख्या (x+y)/2"]
E --> E2["सार्व हर विधि"]
महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
सामान्य गलतियाँ
शून्य को हर में रखना: कई विद्यार्थी $\frac{5}{0}$ को परिमेय संख्या मान लेते हैं, परंतु परिमेय संख्या में हर सदैव शून्येतर होना चाहिए।
गुणात्मक प्रतिलोम में चिह्न बदलना: गुणात्मक प्रतिलोम में केवल अंश और हर की स्थिति बदलती है, चिह्न नहीं। जैसे $\frac{-2}{3}$ का गुणात्मक प्रतिलोम $\frac{-3}{2}$ है, $\frac{3}{2}$ नहीं।
योज्य और गुणात्मक प्रतिलोम में भ्रम: योज्य प्रतिलोम में चिह्न बदलता है (जैसे $a$ का $-a$), जबकि गुणात्मक प्रतिलोम में अंश-हर पलटते हैं।
सरलतम रूप में परिवर्तित न करना: परिमेय संख्या को हमेशा मानक (सरलतम) रूप में व्यक्त करना चाहिए, जैसे $\frac{4}{8}$ को $\frac{1}{2}$।
गलत ऋण चिह्न रखना: $\frac{-3}{4}$ और $\frac{3}{-4}$ दोनों समान मान हैं, परंतु $\frac{-3}{4}$ और $\frac{3}{4}$ समान नहीं हैं।
मध्य संख्या की गणना में त्रुटि: दो संख्याओं $x$ और $y$ के बीच की संख्या $\frac{x+y}{2}$ होती है, न कि $\frac{x-y}{2}$।
वितरण गुणधर्म का गलत प्रयोग: $a \times (b + c) = a \times b + a \times c$ होता है, परंतु $a + (b \times c) = (a + b) \times (a + c)$ गलत है।
परीक्षा युक्तियाँ
किसी संख्या के योज्य प्रतिलोम और गुणात्मक प्रतिलोम के बीच अंतर समझें: योज्य में चिह्न बदलता है, गुणात्मक में अंश-हर पलटते हैं।
'बीच में परिमेय संख्या ज्ञात करें' वाले प्रश्नों में पहले दोनों भिन्नों के हर समान कर लें।
परिमेय संख्या की पहचान करते समय हरेशा जाँचें कि हर शून्य नहीं है।
मानक रूप में उत्तर दें; अंश-हर का सार्व गुणनखंड अवश्य निकालें।
परिमेय संख्याओं की तुलना करते समय हर समान करके अंशों की तुलना करें, बड़ा अंश बड़ी संख्या है।
तीन-चार गुणधर्मों के नाम और सूत्र याद रखें, परीक्षा में इन्हीं के उदाहरण पूछे जाते हैं।
दो परिमेय संख्याओं के बीच अपरिमित संख्याएँ होती हैं; यदि एक ही संख्या चाहिए तो मध्य संख्या सूत्र $\frac{x+y}{2}$ का उपयोग करें।
निष्कर्ष
परिमेय संख्याएँ संख्या प्रणाली की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिन्हें $\frac{p}{q}$ रूप में व्यक्त किया जाता है। इस अध्याय में हमने परिमेय संख्याओं के विभिन्न गुणधर्मों, संख्या रेखा पर उनके निरूपण तथा दो संख्याओं के बीच परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने की विधियों को सीखा। गुणधर्मों की समझ भविष्य के बीजगणितीय अध्यायों का आधार बनती है, इसलिए संवृतता, क्रमविनिमेय, साहचर्य, वितरण, तत्समक और प्रतिलोम की अवधारणाएँ रटने के बजाय उदाहरणों से समझना आवश्यक है। अगले अध्याय में हम एक चर वाले रैखिक समीकरणों का अध्ययन करेंगे, जहाँ इन्हीं गुणधर्मों का उपयोग किया जाएगा।