हमारे चारों ओर अनेक ठोस आकृतियाँ हैं, जैसे घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला आदि। इन त्रिविमीय (3D) आकृतियों को ठोस आकृतियाँ (Solid Shapes) कहते हैं। इस अध्याय में हम ठोस आकृतियों के फलकों, किनारों और शीर्षों का अध्ययन करेंगे तथा इन्हें द्विविमीय (2D) तल पर किस प्रकार दर्शाया जाता है, यह समझेंगे। किसी ठोस आकृति का द्विविमीय निरूपण उसके आधार पर उसके विभिन्न दृश्यों से संभव है। ठोस आकृतियों का चित्रण वास्तुकला, इंजीनियरिंग और कला में अत्यंत उपयोगी है।
प्रत्येक ठोस आकृति में निम्न अवयव होते हैं:
किसी भी बहुफलक (Polyhedron) में फलकों, शीर्षों और किनारों की संख्या में निम्न संबंध होता है:
$$F + V - E = 2$$
यहाँ $F$ = फलकों की संख्या, $V$ = शीर्षों की संख्या, $E$ = किनारों की संख्या। इस सूत्र की सहायता से किसी एक अवयव की संख्या ज्ञात की जा सकती है।
वह ठोस आकृति जिसके सभी फलक बहुभुज हों, बहुफलक कहलाती है। घन, घनाभ, पिरामिड बहुफलक हैं, जबकि बेलन और शंकु बहुफलक नहीं हैं, क्योंकि इनमें वक्र फलक होते हैं।
किसी ठोस आकृति के फलकों की संख्या उसके विभिन्न दृश्यों (सामने, बगल, ऊपर) से गिनी जा सकती है। द्विविमीय चित्रण में जो फलक दिखते हैं, उन्हें स्पष्ट रेखा से और छिपे फलकों को टूटी रेखा (Dashed Line) से दर्शाया जाता है।
किसी ठोस आकृति को तीन दृश्यों से देखा जा सकता है: - सामने का दृश्य (Front View) - ऊपर का दृश्य (Top View) - पार्श्व दृश्य (Side View)
विभिन्न ठोस आकृतियों के ये दृश्य भिन्न-भिन्न आकारों के होते हैं। उदाहरण के लिए बेलन का सामने का दृश्य आयत, ऊपर का दृश्य वृत्त तथा पार्श्व दृश्य आयत होता है।
किसी ठोस आकृति को त्रिविमीय रूप में दर्शाने के लिए आइसोमेट्रिक चित्रण बनाया जाता है। इसमें आइसोमेट्रिक डॉटेड (Isometric Dot) पृष्ठ पर आकृति खींची जाती है। इसमें ऊँचाई ऊर्ध्वाधर और लंबाई-चौड़ाई क्रमशः $30^\circ$ के झुकाव पर दर्शाई जाती हैं। इससे आकृति का 3D रूप स्पष्ट प्रतीत होता है।
ठोस आकृति को काटकर समतल पर फैलाने से जो द्विविमीय पैटर्न बनता है, उसे उसका जाल या नेट कहते हैं। घन का नेट 6 वर्गों से बनता है, जिन्हें मोड़कर घन बनाया जा सकता है।
किसी घनाभ की लंबाई $l$, चौड़ाई $b$ और ऊँचाई $h$ हो तो:
$$\text{पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 2h(l + b)$$ $$\text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 2(lb + bh + hl)$$ $$\text{आयतन} = l \times b \times h$$
घन (भुजा $a$) के लिए:
$$\text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल} = 6a^2, \qquad \text{आयतन} = a^3$$
इन सूत्रों का विस्तार क्षेत्रमिति अध्याय में होगा।
नेट की सहायता से किसी ठोस आकृति की संरचना को समझा जा सकता है। यदि कोई नेट छह वर्गों से बना हो, तो वह घन का नेट हो सकता है, बशर्ते उसे मोड़ने पर सभी फलक सही स्थान पर मिलें। इसी प्रकार घनाभ के नेट में छह आयताकार फलक होते हैं, जिनमें सम्मुख फलक बराबर होते हैं। बेलन का नेट दो वृत्तों और एक आयत से बनता है। नेट को मोड़कर पहचानना परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करने में सहायक है।
| ठोस आकृति | फलक (F) | शीर्ष (V) | किनारे (E) |
|---|---|---|---|
| घन | 6 | 8 | 12 |
| घनाभ | 6 | 8 | 12 |
| त्रिभुजाकार पिरामिड | 4 | 4 | 6 |
| चतुष्फलक | 4 | 4 | 6 |
| ठोस आकृति | सामने का दृश्य | ऊपर का दृश्य | पार्श्व दृश्य |
|---|---|---|---|
| बेलन | आयत | वृत्त | आयत |
| घन | वर्ग | वर्ग | वर्ग |
| शंकु | त्रिभुज | वृत्त | त्रिभुज |
| गोला | वृत्त | वृत्त | वृत्त |
| आकृति | कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल | आयतन |
|---|---|---|
| घनाभ | 2(lb + bh + hl) | l × b × h |
| घन | 6a² | a³ |
इस अध्याय में हमने ठोस आकृतियों के मूल अवयवों, विभिन्न ठोस आकृतियों की संरचना और यूलर के सूत्र का अध्ययन किया। हमने सीखा कि ठोस आकृतियों को सामने, ऊपर और पार्श्व दृश्यों द्वारा द्विविमीय तल पर प्रदर्शित किया जा सकता है। आइसोमेट्रिक चित्रण और नेट की सहायता से त्रिविमीय आकृतियों को सरलता से समझा जा सकता है। पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन के सूत्रों का विस्तृत अध्ययन अगले अध्याय 'क्षेत्रमिति' में होगा। ठोस आकृतियों की यह समझ हमारे दैनिक जीवन और वास्तुकला में बहुत उपयोगी है।