Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for गृहं शून्यं सुतां विना.
'गृहं शून्यं सुतां विना' एक भावपूर्ण कविता है। इसका अर्थ है — 'बेटी के बिना घर खाली (सूना) हो जाता है।' इस कविता में एक पिता की मनोदशा का वर्णन है, जब उसकी प्यारी बेटी विवाह के बाद अपने ससुराल चली जाती है। बेटी के जाने के बाद घर के प्रत्येक कोने में उसकी कमी खलती है। घर में बेटी के होने से जो उल्लास, मधुरता और जीवंतता होती है, वह उसके जाने के बाद समाप्त हो जाती है।
यह कविता हमें बताती है कि बेटी किसी भी परिवार का सौभाग्य होती है। उसकी मधुर वाणी, स्नेह और सेवा-भाव घर को प्रकाश से भर देते हैं। भारतीय संस्कृति में बेटी को लक्ष्मी के समान पूजनीय माना गया है। कन्यादान को सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना जाता है। यह कविता पिता की आँखों के आँसुओं और उसके हृदय की गहरी भावनाओं को सुंदर शब्दों में प्रकट करती है।
गृहं शून्यं सुतां विना।
हिंदी अर्थ — बेटी के बिना घर सूना (खाली) हो जाता है। बेटी के चले जाने पर घर में जीवंतता नहीं रहती।
बेटी जब विदा होकर अपने ससुराल जाने लगी, तो पिता की आँखें भर आईं। उसे वे सारे दिन याद आए जब बेटी घर में गुनगुनाती थी, खेलती-कूदती थी और अपने मीठे वचनों से सबका मन मोह लेती थी। पिता ने सोचा — जो घर बेटी की मधुर वाणी से गूँजता रहता था, वही घर अब उसके बिना सूना हो जाएगा। सुतां विना गृहं शून्यम् — बेटी के बिना घर खाली।
बेटी केवल घर की सजावट नहीं थी, वह तो घर का प्रकाश थी। वह माता-पिता की सेवा करती थी, छोटों से स्नेह करती थी और बड़ों का आदर करती थी। उसके मधुर आचरण से घर में शांति और समृद्धि बनी रहती थी। पिता सोचते हैं — ऐसी गुणवती सुता का वियोग असह्य है। किंतु बेटी के विवाह का संकल्प तो पूरा करना ही था।
पिता ने विदाई के समय बेटी को आशीर्वाद दिया — हे पुत्री! तुम्हारा नया जीवन मंगलमय हो। जिस प्रकार तुमने हमारे घर को प्रकाश से भरा, उसी प्रकार अपने नए घर को भी सुख-समृद्धि से भर देना। कन्यादान ही सबसे बड़ा पुण्य है। बेटी की विदाई पर घर सूना लगता है, किंतु उसकी सुखद स्मृतियाँ सदा हृदय में बनी रहती हैं।
इस कविता से यह शिक्षा मिलती है —
| शब्द | अर्थ | शब्द | अर्थ |
|---|---|---|---|
| सुता | बेटी | दुहिता | बेटी |
| गृहम् | घर | शून्यम् | खाली, सूना |
| विना | बिना | कन्यादानम् | कन्यादान |
| विदा | विदाई | नेत्रम् | आँख |
| अश्रु | आँसू | स्नेहः | स्नेह, प्रेम |
| मङ्गलम् | मंगल, शुभ | वत्सला | स्नेह करने वाली |
| पुण्यम् | पुण्य | आचरणम् | आचरण |
| वियोगः | वियोग | स्मृतिः | स्मृति, याद |
| समृद्धिः | समृद्धि | प्रकाशः | प्रकाश |
| आशीर्वादः | आशीर्वाद | सौभाग्यम् | सौभाग्य |
| भावना | कविता में अभिव्यक्ति |
|---|---|
| स्नेह | बेटी के प्रति गहरा प्रेम |
| वियोग | बेटी के जाने पर दुःख |
| स्मृति | बेटी के साथ बिताए पलों की याद |
| आशीर्वाद | बेटी के नए जीवन के लिए मंगल कामना |
| पुण्य-भाव | कन्यादान का पुण्य अनुभव |
| धातु | अर्थ | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|---|
| दा | देना | ददाति | दत्तः | ददति |
| गम् | जाना | गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति |
| रुद् | रोना | रोदिति | रुदितः | रोदन्ति |
| सेव् | सेवा करना | सेवते | सेवेते | सेवन्ते |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सुता | सुते | सुताः |
| द्वितीया | सुताम् | सुते | सुताः |
| तृतीया | सुतया | सुताभ्याम् | सुताभिः |
| पञ्चमी | सुतायाः | सुताभ्याम् | सुताभ्यः |
| सप्तमी | सुतायाम् | सुतयोः | सुतासु |
graph TD
A["गृहं शून्यं सुतां विना"] --> B["अर्थ - बेटी के बिना घर सूना"]
A --> C["पिता की भावनाएँ"]
C --> D["स्नेह और प्रेम"]
C --> E["वियोग का दुःख"]
C --> F["बेटी की स्मृतियाँ"]
A --> G["बेटी के गुण"]
G --> H["मधुर वाणी"]
G --> I["सेवा-भाव"]
G --> J["माता-पिता का आदर"]
A --> K["कन्यादान का पुण्य"]
K --> L["आशीर्वाद और मंगल कामना"]
A --> M["शिक्षा - बेटी परिवार का सौभाग्य है"]
D --> M
H --> M
'गृहं शून्यं सुतां विना' कविता पिता के हृदय की पवित्र भावनाओं का सुंदर चित्रण है। बेटी के विवाह के बाद घर सूना लगना स्वाभाविक है, क्योंकि बेटी घर का प्रकाश और उल्लास होती है। यह कविता भारतीय संस्कृति में बेटी के सम्मान और कन्यादान के पुण्य का महत्व दर्शाती है। बेटी केवल घर की सदस्य नहीं, बल्कि परिवार का सौभाग्य है। विद्यार्थियों को इस पाठ से बेटियों का सम्मान करना सीखना चाहिए। स्नेह और स्मृतियाँ ही वियोग के दुःख को सहने की शक्ति देती हैं — यही कविता का गहरा संदेश है।