हम अपने दैनिक जीवन में अनेक कार्य करते हैं जैसे धक्का देना, खींचना, उठाना, मारना आदि। इन सभी क्रियाओं में हम एक प्रकार का प्रभाव लगाते हैं, जिसे बल (Force) कहते हैं। किसी वस्तु की अवस्था को बदलने, उसे गति प्रदान करने, गति को रोकने या उसकी दिशा बदलने के लिए लगाए गए धक्के या खिंचाव को बल कहते हैं। बल एक सदिश राशि (Vector Quantity) है, जिसमें परिमाण एवं दिशा दोनों होते हैं। बल की SI इकाई न्यूटन (Newton, N) है। जब बल किसी क्षेत्रफल पर लगाया जाता है, तो दाब (Pressure) उत्पन्न होता है। इस अध्याय में हम बल के प्रभाव, प्रकार एवं दाब की अवधारणा का अध्ययन करेंगे।
बल के निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं:
गतिमान वस्तुओं को रोकने के लिए भी बल की आवश्यकता होती है। जब हम साइकिल चलाते हैं और ब्रेक लगाते हैं, तो बल से साइकिल रुक जाती है। गतिमान वस्तु को रोकने या स्थिर वस्तु को चलाने में बल ही सहायक होता है।
बल मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
वे बल जो वस्तुओं के सीधे संपर्क में आने पर लगते हैं, संपर्क बल कहलाते हैं। संपर्क बल के उदाहरण: 1. घर्षण बल (Frictional Force): जब दो सतहें आपस में संपर्क में होती हैं और एक सतह दूसरी पर फिसलती है, तो गति का विरोध करने वाला बल लगता है, जिसे घर्षण बल कहते हैं। घर्षण बल हमेशा गति के विपरीत दिशा में लगता है। 2. पेशीय बल (Muscular Force): मनुष्य एवं पशुओं द्वारा अपनी मांसपेशियों के द्वारा लगाया जाने वाला बल पेशीय बल कहलाता है। रस्सी खींचना, उठाना आदि पेशीय बल के उदाहरण हैं। 3. वायु बल (Force due to air): वायु चलने पर वस्तुओं पर बल लगाती है। जब तेज़ हवा चलती है, तो यह वृक्षों एवं वस्तुओं पर बल लगाकर उन्हें झुका देती है।
वे बल जो वस्तुओं के सीधे संपर्क में आए बिना लगते हैं, असंपर्क बल कहलाते हैं। असंपर्क बल के उदाहरण: 1. गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force): पृथ्वी अपने केंद्र की ओर वस्तुओं को आकर्षित करती है। इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। वस्तुओं के ऊपर फेंकने पर पृथ्वी की ओर गिरने का कारण यही बल है। यह बल संपर्क के बिना लगता है, इसलिए यह असंपर्क बल है। 2. चुंबकीय बल (Magnetic Force): चुंबक लोहे को बिना संपर्क के ही अपनी ओर आकर्षित करता है। यह चुंबकीय बल है। 3. विद्युत स्थैतिक बल (Electrostatic Force): रगड़े हुए प्लास्टिक की कंघी कागज़ के टुकड़ों को बिना संपर्क के आकर्षित करती है। यह विद्युत स्थैतिक बल है।
जब बल किसी क्षेत्रफल (Area) पर लगाया जाता है, तो उस क्षेत्रफल पर लगने वाले बल की मात्रा को दाब (Pressure) कहते हैं। दाब की परिभाषा निम्नलिखित है:
दाब = बल / क्षेत्रफल
अर्थात दाब क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यदि बल समान रहे तो क्षेत्रफल घटाने पर दाब बढ़ जाता है और क्षेत्रफल बढ़ाने पर दाब घट जाता है।
दाब की SI इकाई पास्कल (Pascal, Pa) है। 1 पास्कल = 1 न्यूटन प्रति वर्ग मीटर (1 Pa = 1 N/m²)।
तरल भी अपनी दीवारों एवं तल पर दाब डालते हैं। तरलों द्वारा डाला गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित होता है। पानी के अंदर जाने पर जल का दाब गहराई के साथ बढ़ता है। बाँध (Dam) नीचे की ओर चौड़े बनाए जाते हैं, क्योंकि जल का दाब गहराई के साथ बढ़ता है। तरल का दाब उसकी गहराई एवं घनत्व पर निर्भर करता है।
पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडल में मौजूद वायु हमारे चारों ओर तथा हमारे ऊपर दाब डालती है। इस दाब को वायुमंडलीय दाब (Atmospheric Pressure) कहते हैं। हमें वायुमंडलीय दाब का अनुभव नहीं होता क्योंकि हमारे शरीर के अंदर भी वायु होती है जो संतुलन बनाए रखती है। वायुमंडलीय दाब का मापन बैरोमीटर (Barometer) द्वारा किया जाता है। तरल पदार्थ वायुमंडलीय दाब के कारण किसी पात्र से बाहर नहीं गिरते, जैसे पानी भरा हुआ प्याला।
जब तरल पदार्थ पर किसी एक बिंदु पर दाब डाला जाता है, तो यह दाब तरल के सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित होता है। इस सिद्धांत का उपयोग हाइड्रोलिक लिफ्ट (Hydraulic Lift) एवं हाइड्रोलिक ब्रेक जैसी मशीनों में किया जाता है। पास्कल का सिद्धांत कहता है कि किसी बंद पात्र में रखे तरल पर लगाया गया दाब सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित होता है।
| प्रकार | संपर्क आवश्यक? | उदाहरण |
|---|---|---|
| घर्षण बल | हाँ | फिसलती सतहें |
| पेशीय बल | हाँ | रस्सी खींचना |
| गुरुत्वाकर्षण बल | नहीं | वस्तु का नीचे गिरना |
| चुंबकीय बल | नहीं | चुंबक-लोहा |
| विद्युत स्थैतिक बल | नहीं | कंघी-कागज़ |
| उदाहरण | क्षेत्रफल | दाब प्रभाव |
|---|---|---|
| पिन की नोक | कम | दाब अधिक |
| ट्रैक्टर के पहिये | अधिक | दाब कम |
| चाकू की धार | कम | दाब अधिक |
| स्की | अधिक | दाब कम |
| राशि | SI इकाई | प्रतीक |
|---|---|---|
| बल | न्यूटन | N |
| दाब | पास्कल | Pa |
इस अध्याय में हमने सीखा कि बल वस्तु पर लगाया गया धक्का या खिंचाव है जो उसकी गति की अवस्था, दिशा, चाल, आकार या आकृति को बदल सकता है। बल की SI इकाई न्यूटन है। बल संपर्क (घर्षण, पेशीय) अथवा असंपर्क (गुरुत्वाकर्षण, चुंबकीय, विद्युत स्थैतिक) हो सकता है। जब बल किसी क्षेत्रफल पर लगता है, तो दाब उत्पन्न होता है। दाब = बल ÷ क्षेत्रफल, इसकी SI इकाई पास्कल है। क्षेत्रफल कम होने पर दाब बढ़ता है, इसलिए पिन एवं चाकू की नोक नुकीली होती है, जबकि ट्रैक्टर के पहिये चौड़े होते हैं ताकि दाब कम रहे। तरलों एवं वायुमंडल द्वारा भी दाब डाला जाता है। वायुमंडलीय दाब का मापन बैरोमीटर से होता है। बल एवं दाब की अवधारणा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग के अनेक क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी है।