Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for दहन और ज्वाला.
हम अपने दैनिक जीवन में अनेक पदार्थों को जलते हुए देखते हैं। लकड़ी, कोयला, गैस, मोमबत्ती, कागज़ आदि जलते हैं, जबकि लोहा, पत्थर, जल आदि नहीं जलते। जलने की प्रक्रिया वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी पदार्थ का वायु (ऑक्सीजन) की उपस्थिति में जलकर ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करना दहन (Combustion) कहलाता है। दहन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction) है, क्योंकि इस प्रक्रिया में ऊष्मा निकलती है। दहन में शामिल पदार्थ को ज्वलनशील पदार्थ (Combustible Substance) और जो पदार्थ नहीं जलते उन्हें अज्वलनशील पदार्थ (Non-Combustible Substance) कहते हैं। इस अध्याय में हम दहन की परिस्थितियों, दहन के प्रकार, ज्वाला की संरचना तथा अग्नि सुरक्षा के उपायों का अध्ययन करेंगे।
किसी पदार्थ के जलने के लिए निम्नलिखित तीन आवश्यक परिस्थितियाँ होनी चाहिए:
इन तीनों परिस्थितियों को सामूहिक रूप से दहन का त्रिकोण (Fire Triangle) कहा जाता है। इनमें से किसी एक परिस्थिति को हटाने पर दहन रुक जाता है। जिस सबसे कम ताप पर कोई पदार्थ जलना प्रारंभ करता है, उसे उसका प्रज्वलन ताप (Ignition Temperature) कहते हैं। पदार्थों के प्रज्वलन ताप अलग-अलग होते हैं। कागज़ का प्रज्वलन ताप कम होता है, इसलिए यह जल्दी जलता है, जबकि लकड़ी का प्रज्वलन ताप अधिक होता है।
ऐसा दहन जिसमें पदार्थ बहुत कम समय में ऊष्मा एवं प्रकाश के साथ जल जाता है, तेज़ दहन कहलाता है। उदाहरण - कागज़, लकड़ी, मोमबत्ती का जलना, गैस स्टोव पर गैस का जलना आदि।
जब दहन बहुत तेज़ गति से होता है और बड़ी मात्रा में गैस, ऊष्मा एवं ध्वनि उत्पन्न होती है, तो उसे विस्फोटन कहते हैं। उदाहरण - पटाखों का जलना, गैस सिलिंडर का फटना, पेट्रोल की टंकी का विस्फोट।
ऐसा दहन जो बाहरी स्रोत (आग, चिंगारी) के बिना ही पदार्थ के अपने आप जलने से होता है, सहज दहन कहलाता है। उदाहरण - सफेद फॉस्फोरस का कमरे के ताप पर जलना।
वह दहन जिसमें बहुत बड़ी मात्रा में गैसें तेजी से निकलती हैं, विस्फोटक दहन कहलाता है। इसमें बहुत अधिक ऊष्मा और ध्वनि उत्पन्न होती है।
जलते हुए पदार्थ से निकलने वाली चमकती हुई गैस को ज्वाला (Flame) कहते हैं। सभी ज्वलनशील पदार्थ ज्वाला के साथ नहीं जलते। वाष्पशील पदार्थ (जो गैसीय रूप में जलते हैं) ही ज्वाला उत्पन्न करते हैं। मोमबत्ती, गैस, केरोसीन आदि वाष्पशील हैं, इसलिए इनसे ज्वाला उत्पन्न होती है। जबकि लकड़ी, कोयला, मैग्नीशियम आदि ठोस पदार्थ ज्वाला उत्पन्न नहीं करते या बहुत कम ज्वाला उत्पन्न करते हैं, क्योंकि ये वाष्पशील नहीं होते।
मोमबत्ती की ज्वाला का अध्ययन करने पर उसमें तीन क्षेत्र दिखाई देते हैं:
ज्वाला का सबसे अधिक ताप वाला क्षेत्र बाह्यतम (नीला) क्षेत्र होता है, क्योंकि यहाँ पूर्ण दहन होता है। जबकि अंतरतम (काला) क्षेत्र सबसे कम ताप वाला होता है।
वे पदार्थ जिन्हें जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जाती है, ईंधन (Fuels) कहलाते हैं। लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, केरोसीन, गैस आदि ईंधन के उदाहरण हैं।
किसी ईंधन के एक किलोग्राम पदार्थ के पूर्ण दहन से उत्पन्न होने वाली ऊष्मा की मात्रा को उसका उष्मीय मान (Calorific Value) या कैलोरी मान कहते हैं। इसकी इकाई किलोजूल प्रति किलोग्राम (kJ/kg) होती है। उच्च उष्मीय मान वाला ईंधन अच्छा माना जाता है।
आग बुझाने के लिए अग्नि शामक यंत्र का उपयोग होता है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड गैस दाब में भरी होती है। जब यह गैस आग पर छोड़ी जाती है, तो यह ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक देती है और आग बुझ जाती है। CO2 जलती हुई वस्तुओं के ताप को भी कम करती है। CO2 जल पर तैरती है, इसलिए यह तेल एवं विद्युत उपकरणों की आग बुझाने में भी उपयोगी है।
जब किसी ईंधन का दहन पर्याप्त ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, तो इसे पूर्ण दहन कहते हैं। पूर्ण दहन में कार्बन डाइऑक्साइड एवं जल वाष्प बनते हैं और पूरी ऊष्मा निकलती है।
जब ऑक्सीजन की कमी के कारण ईंधन का पूर्ण दहन नहीं होता, तो इसे अपूर्ण दहन कहते हैं। अपूर्ण दहन में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बनती है, जो अत्यंत जहरीली गैस है। CO को साइलेंट किलर (Silent Killer) भी कहा जाता है क्योंकि यह रंगहीन एवं गंधहीन होती है। कमरे में बंद दरवाज़ों के साथ लकड़ी/कोयले का चूल्हा जलाने पर अपूर्ण दहन से CO बनती है, जो प्राणघातक हो सकती है।
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| तेज़ दहन | शीघ्र जलना | कागज़, गैस स्टोव |
| सहज दहन | बाहरी स्रोत के बिना | सफेद फॉस्फोरस |
| विस्फोटन | बहुत तेज़, ध्वनि के साथ | पटाखे |
| विस्फोटक दहन | बड़ी मात्रा में गैस | बम विस्फोट |
| क्षेत्र | रंग | ताप | दहन |
|---|---|---|---|
| अंतरतम | काला | सबसे कम | अपूर्ण |
| मध्य | पीला/चमकीला | मध्यम | अपूर्ण, कार्बन कण |
| बाह्यतम | नीला | सबसे अधिक | पूर्ण |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| उष्मीय मान | अधिक होना चाहिए |
| प्रज्वलन ताप | उचित होना चाहिए |
| धुआँ | कम निकलना चाहिए |
| राख | कम छोड़ना चाहिए |
| सुरक्षा | उपयोग सुरक्षित होना चाहिए |
graph TD
A["दहन और ज्वाला"] --> B["दहन की परिस्थितियाँ"]
B --> B1["ज्वलनशील पदार्थ"]
B --> B2["ऑक्सीजन"]
B --> B3["प्रज्वलन ताप"]
A --> C["दहन के प्रकार"]
C --> C1["तेज़ दहन"]
C --> C2["सहज दहन"]
C --> C3["विस्फोटन"]
C --> C4["विस्फोटक दहन"]
A --> D["ज्वाला"]
D --> D1["अंतरतम (काला)"]
D --> D2["मध्य (पीला)"]
D --> D3["बाह्यतम (नीला)"]
A --> E["ईंधन"]
E --> E1["उष्मीय मान (kJ/kg)"]
E --> E2["अच्छे ईंधन की विशेषताएँ"]
A --> F["अग्नि सुरक्षा"]
F --> F1["अग्नि शामक (CO2)"]
F --> F2["बालू, जल"]
A --> G["अपूर्ण दहन"]
G --> G1["कार्बन मोनोऑक्साइड (जहरीली)"]
इस अध्याय में हमने सीखा कि किसी पदार्थ का वायु में जलकर ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न करना दहन कहलाता है। दहन के लिए ज्वलनशील पदार्थ, ऑक्सीजन एवं प्रज्वलन ताप तीनों आवश्यक हैं। दहन तेज़, सहज, विस्फोटन एवं विस्फोटक प्रकार का हो सकता है। ज्वाला केवल वाष्पशील पदार्थों से उत्पन्न होती है। मोमबत्ती की ज्वाला में तीन क्षेत्र होते हैं - अंतरतम (काला), मध्य (पीला) और बाह्यतम (नीला), जिसमें बाह्यतम क्षेत्र सबसे अधिक ताप वाला होता है। ईंधन वे पदार्थ हैं जिन्हें जलाकर ऊष्मा प्राप्त की जाती है, और उनकी दक्षता उष्मीय मान से मापी जाती है। आग बुझाने के लिए अग्नि शामक यंत्र (CO2) का उपयोग होता है। अपूर्ण दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है जो जहरीली है। दहन एवं अग्नि सुरक्षा का ज्ञान हमें आग से होने वाली हानियों से बचाने में सहायक है।