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1. परिचय

हमारे दैनिक जीवन में ऊर्जा की अत्यधिक आवश्यकता होती है। घर, कारखाने, वाहन, ट्रेन आदि सभी को ऊर्जा की आपूर्ति की जाती है। यह ऊर्जा मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) से प्राप्त होती है। जीवाश्म ईंधन के मुख्य उदाहरण हैं - कोयला (Coal), पेट्रोलियम (Petroleum) और प्राकृतिक गैस (Natural Gas)। ये ईंधन करोड़ों वर्ष पूर्व मृत पेड़-पौधों एवं जीवों के अवशेषों से बने हैं। जीवाश्म ईंधन एक सीमित (Non-Renewable) संसाधन हैं, अर्थात ये एक बार उपयोग करने के बाद नष्ट हो जाते हैं और पुनः उत्पन्न नहीं हो सकते। इसलिए इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इस अध्याय में हम कोयला और पेट्रोलियम के निर्माण, उनके गुणधर्म, उपयोग एवं संरक्षण के उपायों का अध्ययन करेंगे।

2. कोयला (Coal)

कोयला एक ठोस जीवाश्म ईंधन है, जिसका उपयोग हमारे देश में ऊर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में होता है। कोयला काला एवं कठोर होता है। भारत कोयला उत्पादन में विश्व के प्रमुख देशों में गिना जाता है। झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ भारत के मुख्य कोयला उत्पादक राज्य हैं।

कोयले का निर्माण (Formation of Coal)

कोयला कैसे बना, इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है: करोड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी की सतह पर घने वन थे। भूकंप, भूस्खलन आदि प्राकृतिक कारणों से ये वन मिट्टी के नीचे दब गए। कालांतर में उच्च ताप एवं उच्च दाब की क्रिया से ये पौधे धीरे-धीरे कोयले में परिवर्तित हो गए। मृत पौधों से पीट (Peat) बनता है, फिर धीरे-धीरे यह लिग्नाइट (Lignite) एवं बिटुमिनस कोयला (Bituminous Coal) में बदलता है। अंततः एन्थ्रेसाइट (Anthracite) नामक उच्च गुणवत्ता वाला कोयला बनता है। जिस प्रक्रिया द्वारा मृत वनस्पति कोयले में बदल जाती है, उसे कार्बनीकरण (Carbonization) कहते हैं। कार्बनीकरण के दौरान वनस्पति में कार्बन की मात्रा बढ़ती जाती है।

कोयले के उपयोग:

कोक, कोल टार और कोल गैस (Coke, Coal Tar and Coal Gas)

जब कोयले को वायु की अनुपस्थिति में गर्म किया जाता है, तो यह विभिन्न उत्पाद देता है। इस प्रक्रिया को कोयले का आसवन (Destructive Distillation of Coal) कहते हैं। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित उत्पाद प्राप्त होते हैं:

  1. कोक (Coke): यह लगभग शुद्ध कार्बन है। यह कठोर, झरझरा एवं काला पदार्थ होता है। कोक का उपयोग लोहा तथा इस्पात (Steel) बनाने में होता है।
  2. कोल टार (Coal Tar): यह एक काला, चिपचिपा तरल पदार्थ है जिसमें तेज़ गंध होती है। इसका उपयोग अनेक रंगों, दवाइयों, सुगंध (परफ्यूम), विस्फोटक, नेफ़थलीन बॉल, पेंट तथा स्वीटनिंग एजेंट (सैकरीन) बनाने में होता है। कोल टार बहुत से कार्बनिक यौगिकों का मिश्रण है।
  3. कोल गैस (Coal Gas): यह एक गैसीय ईंधन है जो कोयले के वायु-रहित आसवन से प्राप्त होती है। यह हाइड्रोजन, मेथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि का मिश्रण होती है। इसका उपयोग ईंधन के रूप में होता है। पहले यह शहरों में सड़कों की बत्तियाँ जलाने में उपयोग होती थी।
  4. अमोनियम सल्फेट: कोल टार से अमोनिया जैसे यौगिक भी प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग उर्वरक बनाने में होता है।

3. पेट्रोलियम (Petroleum)

पेट्रोलियम शब्द दो शब्दों से बना है - पेट्रा (Petra) जिसका अर्थ है 'चट्टान' और ओलियम (Oleum) जिसका अर्थ है 'तेल'। अतः पेट्रोलियम का शाब्दिक अर्थ है 'चट्टानों से प्राप्त तेल'। पेट्रोलियम एक तरल जीवाश्म ईंधन है। पेट्रोलियम का निर्माण करोड़ों वर्ष पूर्व समुद्री जीवों के मृत अवशेषों के विघटन से हुआ। जब समुद्री जीव मरकर समुद्र के तल पर जमा हो गए और उन पर मिट्टी तथा रेत की परतें जमती गईं, तो उच्च ताप एवं दाब के कारण ये धीरे-धीरे पेट्रोलियम में बदल गए। पेट्रोलियम पृथ्वी की सतह के नीचे चट्टानों के बीच पाया जाता है।

भारत में पेट्रोलियम का प्रथम कुआँ असम (Assam) के डिगबोई (Digboi) में 1867 में खोदा गया था। भारत में पेट्रोलियम के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं - असम, गुजरात, महाराष्ट्र (बॉम्बे हाई) एवं राजस्थान।

पेट्रोलियम का शोधन (Refining of Petroleum)

भूमि से निकलने वाला कच्चा पेट्रोलियम कई पदार्थों का मिश्रण होता है। इसे अलग-अलग भागों में बाँटने की प्रक्रिया को पेट्रोलियम का शोधन (Refining of Petroleum) कहते हैं। शोधन कारखानों (रिफाइनरी) में किया जाता है। विभिन्न घटकों के क्वथनांक (Boiling Points) के आधार पर उन्हें अलग किया जाता है। पेट्रोलियम के विभिन्न घटक एवं उनके उपयोग निम्नलिखित हैं:

पेट्रोलियम के घटक और उपयोग:

घटक उपयोग
पेट्रोल (Petrol) मोटर वाहन, विमान, हल्की मशीनें
डीज़ल (Diesel) भारी वाहन, बस, ट्रक, कृषि मशीनें
केरोसीन (Kerosene) लालटेन, चूल्हा, विमान का ईंधन
स्नेहक तेल (Lubricating Oil) मशीनों में घर्षण कम करने हेतु
पैराफिन मोम (Paraffin Wax) मोमबत्ती, मोम, क्रीम
बिटुमेन (Bitumen) सड़कों पर डामर (पक्की सड़क), जलरोधक
LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) घरेलू ईंधन (रसोई गैस)
नेफ़्था (Naphtha) रासायनिक उद्योग

4. प्राकृतिक गैस (Natural Gas)

प्राकृतिक गैस (Natural Gas) एक महत्वपूर्ण गैसीय जीवाश्म ईंधन है, जो पेट्रोलियम के ऊपर या उसके साथ पाई जाती है। यह मुख्य रूप से मेथेन (Methane) से बनी होती है। प्राकृतिक गैस में कोई गंध नहीं होती। यह स्वच्छ ईंधन है और जलाने पर कम धुआँ उत्पन्न करती है। प्राकृतिक गैस का उपयोग गर्म करने, खाना पकाने तथा बिजली उत्पन्न करने में होता है।

प्राकृतिक गैस को अत्यधिक दाब पर ठंडा करके तरल रूप में बदल दिया जाता है, जिसे सीएनजी (CNG - Compressed Natural Gas) और एलएनजी (LNG - Liquefied Natural Gas) कहते हैं। सीएनजी (संपीडित प्राकृतिक गैस) का उपयोग वाहनों (बस, ट्रक, टैक्सी, कार) में ईंधन के रूप में होता है। CNG पेट्रोल-डीज़ल की तुलना में कम प्रदूषण करती है, इसलिए इसे स्वच्छ ईंधन कहा जाता है। भारत में प्राकृतिक गैस के प्रमुख भंडार कृष्णा-गोदावरी बेसिन, असम, गुजरात एवं मुंबई हाई के निकट हैं।

5. कुछ प्राकृतिक संसाधन और जीवाश्म ईंधन (Natural Resources)

पृथ्वी पर प्राप्त होने वाले संसाधन दो प्रकार के होते हैं:

  1. नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources): ऐसे संसाधन जिन्हें बार-बार उपयोग किया जा सकता है और जो पुनः उत्पन्न होते रहते हैं। उदाहरण - सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, वन, मृदा आदि।
  2. अनवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resources): ऐसे संसाधन जिनकी मात्रा सीमित है और एक बार उपयोग करने के बाद समाप्त हो जाते हैं। जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) अनवीकरणीय संसाधन हैं।

जीवाश्म ईंधन बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं, इसलिए इन्हें नवीकरणीय नहीं माना जा सकता। इसलिए जीवाश्म ईंधन का संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है।

6. जीवाश्म ईंधनों का संरक्षण (Conservation of Fossil Fuels)

जीवाश्म ईंधन सीमित हैं, इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। संरक्षण के कुछ उपाय: - वाहनों में सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना। - अनावश्यक रूप से लाइट एवं उपकरणों का उपयोग नहीं करना। - बिजली का सदुपयोग करना। - सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग बढ़ाना। - पेट्रोल-डीज़ल की बचत करना। - CNG जैसे स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देना। - वाहनों का नियमित रखरखाव करना ताकि ईंधन की खपत कम हो।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: कोयले के आसवन से प्राप्त उत्पाद

उत्पाद प्रकृति उपयोग
कोक लगभग शुद्ध कार्बन इस्पात निर्माण
कोल टार काला चिपचिपा तरल रंग, दवाइयाँ, नेफ़्थलीन
कोल गैस गैसीय ईंधन ईंधन, पहले सड़क बत्तियाँ
अमोनिया कोल टार से उर्वरक

तालिका 2: पेट्रोलियम के घटक

घटक उपयोग
पेट्रोल मोटर वाहन, विमान
डीज़ल भारी वाहन, कृषि मशीनें
केरोसीन लालटेन, चूल्हा
बिटुमेन सड़क निर्माण
पैराफिन मोम मोमबत्ती
LPG घरेलू रसोई गैस
स्नेहक तेल मशीनों में घर्षण कम करना

तालिका 3: नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय संसाधन

प्रकार परिभाषा उदाहरण
नवीकरणीय पुनः उत्पन्न होते रहते हैं सौर ऊर्जा, पवन, जल
अनवीकरणीय सीमित, समाप्त हो जाते हैं कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस

माइंड मैप

graph TD A["कोयला और पेट्रोलियम"] --> B["जीवाश्म ईंधन"] B --> B1["कोयला"] B --> B2["पेट्रोलियम"] B --> B3["प्राकृतिक गैस"] A --> C["कोयला"] C --> C1["कार्बनीकरण प्रक्रिया"] C --> C2["कोक, कोल टार, कोल गैस"] A --> D["पेट्रोलियम"] D --> D1["शोधन प्रक्रिया"] D --> D2["पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन, LPG"] A --> E["प्राकृतिक गैस"] E --> E1["मेथेन, CNG, LNG"] A --> F["संरक्षण"] F --> F1["अनवीकरणीय संसाधन"] F --> F2["सार्वजनिक परिवहन, वैकल्पिक ऊर्जा"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: कोयले के निर्माण की प्रक्रिया

कोयले के निर्माण की प्रक्रिया मृत वनस्पति दबी पेड़-पौधे पीट (Peat) प्रारंभिक अवस्था लिग्नाइट नरम कोयला उच्च ताप एवं दाब (कार्बनीकरण) बिटुमिनस कोयला मध्यम गुणवत्ता एन्थ्रेसाइट उच्च गुणवत्ता वाला कोयला कार्बनीकरण = वनस्पति के कोयले में बदलने की प्रक्रिया कोयले में कार्बन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ती जाती है स्वर्ण नियम कार्बनीकरण में ताप-दाब बढ़ने से कार्बन की मात्रा बढ़ती है

आरेख 2: पेट्रोलियम के घटक

पेट्रोलियम के प्रमुख घटक कच्चा पेट्रोलियम (शोधन द्वारा अलग किया जाता है) पेट्रोल मोटर वाहन, विमान डीज़ल भारी वाहन, बस, ट्रक केरोसीन लालटेन, चूल्हा LPG रसोई गैस बिटुमेन - सड़क निर्माण (पक्की सड़कों का डामर) पैराफिन मोम - मोमबत्ती स्नेहक तेल - घर्षण कम करना Golden Rule प्रत्येक घटक का उपयोग अवश्य याद रखें

सामान्य गलतियाँ

  1. कोयले के निर्माण को जीवों से जोड़ना: कोयला मृत पौधों (वनस्पति) से बनता है, जबकि पेट्रोलियम समुद्री जीवों के अवशेषों से बनता है। दोनों के निर्माण स्रोत अलग हैं।
  2. कार्बनीकरण को सामान्य जलन समझना: कार्बनीकरण वायु की अनुपस्थिति में वनस्पति का कोयले में परिवर्तन है, न कि सामान्य दहन। दहन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है।
  3. कोक एवं कोल टार के उपयोग में भ्रम: कोक इस्पात निर्माण में उपयोग होता है, जबकि कोल टार रंग, दवाइयाँ एवं नेफ़्थलीन बॉल बनाने में।
  4. डिगबोई का स्थान भूलना: भारत का प्रथम पेट्रोलियम कुआँ असम के डिगबोई में 1867 में खोदा गया था।
  5. CNG को पेट्रोलियम से प्राप्त गैस समझना: CNG (संपीडित प्राकृतिक गैस) प्राकृतिक गैस से प्राप्त होती है, जो मुख्य रूप से मेथेन है, न कि पेट्रोलियम का घटक।
  6. जीवाश्म ईंधन को नवीकरणीय मानना: जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय हैं क्योंकि इन्हें बनने में करोड़ों वर्ष लगते हैं और इनकी मात्रा सीमित है।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. कोयले के आसवन (विनाशकारी आसवन) से प्राप्त होने वाले उत्पाद - कोक, कोल टार, कोल गैस - के उपयोगों को तालिका रूप में याद करें।
  2. पेट्रोलियम के घटकों (पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन, LPG, बिटुमेन, पैराफिन मोम) और उनके उपयोगों को ध्यानपूर्वक याद करें।
  3. नवीकरणीय एवं अनवीकरणीय संसाधनों की परिभाषा एवं उदाहरण तैयार रखें।
  4. CNG को स्वच्छ ईंधन क्यों कहा जाता है, यह समझें (कम प्रदूषण, मेथेन मुख्य घटक)।
  5. कार्बनीकरण और शोधन की प्रक्रियाओं को परिभाषित करना सीखें।
  6. भारत के मुख्य कोयला एवं पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्रों की जानकारी रखें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि कोयला और पेट्रोलियम जीवाश्म ईंधन हैं जो करोड़ों वर्ष पूर्व मृत वनस्पति एवं जीवों के अवशेषों से बने हैं। कोयला कार्बनीकरण प्रक्रिया से बनता है और इसके विनाशकारी आसवन से कोक, कोल टार एवं कोल गैस प्राप्त होते हैं। पेट्रोलियम समुद्री जीवों से बनता है और इसके शोधन से पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन, LPG, बिटुमेन आदि घटक प्राप्त होते हैं। प्राकृतिक गैस मेथेन से बनी होती है और CNG के रूप में वाहनों में प्रयुक्त होती है। ये सभी ईंधन अनवीकरणीय संसाधन हैं, इसलिए इनका विवेकपूर्ण उपयोग तथा संरक्षण आवश्यक है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा जैसे वैकल्पिक एवं स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाकर हम जीवाश्म ईंधनों पर हमारी निर्भरता कम कर सकते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इन संसाधनों को संरक्षित कर सकते हैं।