प्रकृति में अनेक प्राकृतिक परिघटनाएँ (Natural Phenomena) घटित होती हैं, जैसे आकाशीय बिजली (Lightning), भूकंप (Earthquake), तूफ़ान (Storm) आदि। इनमें से कुछ घटनाएँ जीवन एवं संपत्ति के लिए हानिकारक सिद्ध होती हैं। आकाशीय बिजली एवं भूकंप अत्यंत विनाशकारी हो सकते हैं। इस अध्याय में हम इन प्राकृतिक परिघटनाओं के कारणों एवं उनसे बचाव के उपायों का अध्ययन करेंगे। इन परिघटनाओं को समझने के लिए विद्युत आवेश, विद्युत विभव, भूकंप की तीव्रता एवं परिमाण जैसी अवधारणाओं का ज्ञान आवश्यक है।
आकाशीय बिजली (Lightning) एक प्राकृतिक विद्युत घटना है। जब आकाश में बादल आपस में रगड़ते हैं, तो उनमें विद्युत आवेश उत्पन्न होता है। यह प्रक्रिया तूफ़ान (Thunderstorm) के दौरान होती है। बादलों में धन आवेश एवं ऋण आवेश अलग-अलग हो जाते हैं। जब विभिन्न आवेशित बादल पास आते हैं या बादल धरती के पास आता है, तो विद्युत निर्वहन (Electric Discharge) होता है। यही विद्युत निर्वहन बिजली (Lightning) के रूप में दिखाई देता है। बिजली के कारण बड़ी मात्रा में ऊष्मा एवं प्रकाश उत्पन्न होता है। बिजली गिरने पर हमें गरज (Thunder) भी सुनाई देती है।
बिजली चालक पदार्थों से होकर आसानी से गुजरती है। धातुएँ बिजली की सुचालक होती हैं। बादलों में बिजली का स्राव वायु के माध्यम से होता है।
विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं - धन आवेश (Positive Charge) एवं ऋण आवेश (Negative Charge)। जब कोई वस्तु रगड़ी जाती है, तो वह विद्युत आवेश प्राप्त कर लेती है। इस प्रकार उत्पन्न होने वाले आवेश को विद्युत स्थैतिक आवेश (Electrostatic Charge) कहते हैं। समान आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि असमान आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। यही विद्युत आवेश की प्रकृति है।
उदाहरण: रेशमी कपड़े पर रगड़ा गया काँच की छड़ धन आवेशित हो जाती है। ऊनी कपड़े पर रगड़ा गया इबोनाइट छड़ ऋण आवेशित हो जाता है। रगड़े हुए प्लास्टिक की कंघी कागज़ के टुकड़ों को आकर्षित करती है।
बादलों में विद्युत आवेश कैसे उत्पन्न होता है, इसका निम्नलिखित कारण है: - तूफ़ान के दौरान हवा तेज़ी से ऊपर-नीचे चलती है, जिससे बादलों में पानी की बूंदें एवं बर्फ के कण आपस में रगड़ते हैं। - रगड़ने से बादलों के कुछ भाग धन आवेशित एवं कुछ ऋण आवेशित हो जाते हैं। - बादल के भीतर तथा बादल एवं पृथ्वी के बीच विद्युत विभव का अंतर बढ़ता जाता है। - जब विभवांतर अत्यधिक बढ़ जाता है, तो वायु के माध्यम से विद्युत निर्वहन होता है, जो बिजली की चमक के रूप में दिखाई देता है।
बिजली से होने वाली हानि से भवनों की रक्षा के लिए तड़ित चालक (Lightning Conductor) लगाया जाता है। यह भवन के शीर्ष पर लगी धातु की छड़ होती है, जो मोटे तार द्वारा पृथ्वी से जुड़ी होती है। बिजली गिरने पर विद्युत धारा तड़ित चालक द्वारा सुरक्षित रूप से पृथ्वी में प्रवाहित हो जाती है, जिससे भवन की रक्षा होती है।
भूकंप (Earthquake) पृथ्वी की सतह का अचानक एवं हिंसक कंपन है। पृथ्वी की आंतरिक परत में होने वाली अचानक गति के कारण भूकंप उत्पन्न होता है। पृथ्वी के अंदर टेक्टॉनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) होती हैं, जो निरंतर गति करती रहती हैं। जब ये प्लेट्स टकराती हैं या आपस में रगड़ती हैं, तो भूकंप उत्पन्न होता है।
भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह के नीचे होता है, जिसे केंद्र (Focus) कहते हैं। केंद्र के ठीक ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित बिंदु को अधिकेंद्र (Epicentre) कहते हैं। भूकंप की तीव्रता का मापन रिक्टर पैमाना (Richter Scale) द्वारा किया जाता है। भूकंप की प्रबलता को परिमाण (Magnitude) कहते हैं। भूकंप की गति का अध्ययन करने वाला वैज्ञानिक यंत्र सिस्मोग्राफ (Seismograph) है। भूकंप विज्ञान को भूकंप विज्ञान (Seismology) कहते हैं।
भारत को भूकंप की दृष्टि से कई जोखिम क्षेत्रों (Seismic Zones) में बाँटा गया है।
तड़ित चालक के अतिरिक्त, विद्युत सुरक्षा के लिए अनेक उपाय किए जाते हैं: - घरों में फ्यूज़ (Fuse) का उपयोग होता है, जो अधिक धारा बहने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है। - अर्थिंग (Earthing) विद्युत उपकरणों को सुरक्षित रखती है। - बिजली के तारों का सही इन्सुलेशन होना चाहिए।
| आवेश प्रकार | गुण |
|---|---|
| समान आवेश | एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं |
| असमान आवेश | एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं |
| धन आवेश | रेशम से रगड़ी काँच की छड़ |
| ऋण आवेश | ऊन से रगड़ी इबोनाइट छड़ |
| परिघटना | कारण | बचाव |
|---|---|---|
| आकाशीय बिजली | बादलों में विद्युत निर्वहन | घर के अंदर रहना, तड़ित चालक |
| भूकंप | टेक्टॉनिक प्लेटों की गति | मज़बूत मेज़ के नीचे छिपना |
| उपकरण/पैमाना | उपयोग |
|---|---|
| सिस्मोग्राफ | भूकंप की गति का अध्ययन |
| रिक्टर पैमाना | तीव्रता का मापन |
| केंद्र | भूकंप उत्पत्ति का स्थान |
| अधिकेंद्र | सतह पर केंद्र के ठीक ऊपर |
इस अध्याय में हमने सीखा कि आकाशीय बिजली एवं भूकंप दो महत्वपूर्ण प्राकृतिक परिघटनाएँ हैं। विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं - धन एवं ऋण। समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि असमान आवेश आकर्षित करते हैं। तूफ़ान के दौरान बादलों में विद्युत आवेश उत्पन्न होने से विद्युत निर्वहन होता है, जो बिजली के रूप में दिखता है। बिजली से बचाव के लिए तड़ित चालक एवं सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं। भूकंप पृथ्वी की टेक्टॉनिक प्लेटों की गति के कारण उत्पन्न होता है। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने से मापी जाती है और सिस्मोग्राफ से इसकी गति का अध्ययन होता है। केंद्र भूमि के अंदर तथा अधिकेंद्र सतह पर होता है। भूकंप एवं बिजली के समय उचित सुरक्षा उपाय अपनाकर हम हानियों से अपनी रक्षा कर सकते हैं। प्राकृतिक परिघटनाओं की वैज्ञानिक समझ हमें उनसे सुरक्षित रहने में सहायक है।