Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for पदार्थ: धातु और अधातु.
हमारे चारों ओर मौजूद सभी पदार्थ विभिन्न तत्वों से बने होते हैं। इन तत्वों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बाँटा गया है - धातु (Metals) और अधातु (Non-Metals)। कुछ तत्व ऐसे भी हैं जो धातुओं एवं अधातुओं दोनों के गुणधर्म दर्शाते हैं, इन्हें उपधातु (Metalloids) कहते हैं, जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम, आर्सेनिक। हमारे दैनिक जीवन में धातुएँ और अधातुएँ दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोहा, ताँबा, एल्युमिनियम, सोना, चाँदी आदि धातुओं के उदाहरण हैं, जबकि सल्फर, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस आदि अधातुओं के उदाहरण हैं। इस अध्याय में हम धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों का अध्ययन करेंगे तथा देखेंगे कि इनके उपयोग किस प्रकार हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं।
धातुओं की कुछ विशेष भौतिक विशेषताएँ होती हैं जो उन्हें अधातुओं से अलग बनाती हैं:
सामान्यतः धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस होती हैं, हालाँकि पारा (Mercury) एक अपवाद है जो कमरे के ताप पर तरल अवस्था में पाया जाता है। पारा ही एकमात्र धातु है जो तरल रूप में होती है।
| गुणधर्म | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| चमक | होती है | नहीं होती (हीरा/आयोडीन अपवाद) |
| घातवर्धनीयता | होती है | नहीं होती |
| तन्यता | होती है | नहीं होती |
| विद्युत चालकता | सुचालक | कुचालक (ग्रेफाइट अपवाद) |
| ध्वनिकता | होती है | नहीं होती |
| अवस्था | ठोस (पारा तरल) | ठोस/तरल/गैस |
| कठोरता | कठोर | भंगुर |
धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर धातु ऑक्साइड बनाती हैं। उदाहरण: जब मैग्नीशियम को वायु में जलाया जाता है, तो यह तेज चमक के साथ जलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है। $$2Mg + O_2 \rightarrow 2MgO$$ धातु ऑक्साइड जल में घुलकर क्षार बनाते हैं, जो लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। अधातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अधातु ऑक्साइड बनाती हैं। अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं और जल में घुलकर अम्ल बनाते हैं, जो नीले लिटमस को लाल करते हैं। उदाहरण: सल्फर जलने पर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है। $$S + O_2 \rightarrow SO_2$$
कुछ धातुएँ जल से अभिक्रिया करती हैं। सोडियम एवं पोटैशियम जैसी धातुएँ ठंडे जल से हिंसक अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। कैल्शियम जल से कम हिंसक अभिक्रिया करता है। मैग्नीशियम गर्म जल से अभिक्रिया करता है। लोहा, जिंक आदि धातुएँ भाप से अभिक्रिया करती हैं। अधातुएँ सामान्यतः जल के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं।
अनेक धातुएँ अम्लों के साथ अभिक्रिया कर लवण बनाती हैं और हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। उदाहरण: $$Zn + 2HCl \rightarrow ZnCl_2 + H_2$$ अधातुएँ अम्लों के साथ ऐसी अभिक्रिया नहीं करतीं। मुक्त हाइड्रोजन गैस को जलती हुई माचिस की तीली पास लाने पर 'पॉप' की ध्वनि से पहचाना जाता है।
अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है। उदाहरण: आयरन सल्फेट विलयन में डूबा हुआ जिंक उसमें से लोहे को विस्थापित कर देता है। जब जिंक की छड़ को कॉपर सल्फेट विलयन में डुबोते हैं, तो नीले रंग का कॉपर सल्फेट विलयन रंगहीन हो जाता है और उसमें लाल रंग का ताँबा जमा हो जाता है, क्योंकि जिंक ताँबे से अधिक अभिक्रियाशील है।
धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के आधार पर एक क्रम में रखा जा सकता है, जिसे अभिक्रियाशीलता श्रेणी कहते हैं। अधिक अभिक्रियाशील धातुएँ जैसे पोटैशियम (K), सोडियम (Na), कैल्शियम (Ca) शीर्ष पर होती हैं, जबकि कम अभिक्रियाशील धातुएँ जैसे सोना (Au), चाँदी (Ag) नीचे होती हैं। अधिक अभिक्रियाशील धातु कम अभिक्रियाशील धातु को विस्थापित करती है।
कुछ धातुओं पर नमी, अम्ल एवं वायु के संपर्क में आने पर अवांछित रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। जब धातुएँ नम वायु अथवा जल के संपर्क में आती हैं, तो वे वायु तथा नमी से अभिक्रिया करके अपना चमकीला स्वरूप खो देती हैं। यह प्रक्रिया संक्षारण (Corrosion) कहलाती है।
जंग (Rust): लोहे पर नमी एवं ऑक्सीजन के संपर्क में आने से लाल-भूरे रंग का पदार्थ बनता है जिसे जंग (Rust) कहते हैं। जंग लगना एक प्रकार का संक्षारण ही है। जंग लगने पर लोहे की धातु धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। चाँदी के संपर्क में हाइड्रोजन सल्फाइड होने पर काला परत बन जाता है। ताँबे की सतह पर कॉपर कार्बोनेट की हरे रंग की परत जम जाती है।
जंग लगने की रोकथाम (Prevention of Rusting): - पेंट का लेप लगाना। - जिंक द्वारा गैल्वेनाइज़ेशन करना। - तेल या ग्रीस लगाना। - धातु पर क्रोमियम/निकल की परत चढ़ाना। - जंग रोधी पेंट का उपयोग करना।
| गुणधर्म | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| चमक | होती है | नहीं (हीरा, आयोडीन अपवाद) |
| घातवर्धनीयता | हाँ | नहीं |
| तन्यता | हाँ | नहीं |
| ऊष्मा/विद्युत चालकता | सुचालक | कुचालक (ग्रेफाइट अपवाद) |
| ध्वनिकता | हाँ | नहीं |
| अवस्था | ठोस (पारा तरल) | ठोस/तरल/गैस |
| अभिक्रिया | परिणाम | प्रकृति |
|---|---|---|
| धातु + ऑक्सीजन | धातु ऑक्साइड | क्षारीय (लाल लिटमस को नीला) |
| अधातु + ऑक्सीजन | अधातु ऑक्साइड | अम्लीय (नीला लिटमस को लाल) |
| धातु | उपयोग |
|---|---|
| लोहा | भवन निर्माण, रेल पटरी |
| एल्युमिनियम | बर्तन, विद्युत तार |
| ताँबा | विद्युत केबल, सिक्के |
| जिंक | गैल्वेनाइज़ेशन |
| टंगस्टन | बल्ब का फिलामेंट |
graph TD
A["पदार्थ: धातु और अधातु"] --> B["धातु"]
B --> B1["चमक, घातवर्धनीय, तन्य, सुचालक, ध्वनिक"]
B --> B2["पारा तरल धातु"]
B --> B3["क्षारीय ऑक्साइड"]
B --> B4["अम्ल से H2 गैस"]
A --> C["अधातु"]
C --> C1["भंगुर, कुचालक, कोई चमक नहीं"]
C --> C2["ब्रोमीन तरल अधातु"]
C --> C3["अम्लीय ऑक्साइड"]
C --> C4["ग्रेफाइट अपवाद"]
A --> D["रासायनिक गुण"]
D --> D1["ऑक्सीजन अभिक्रिया"]
D --> D2["जल अभिक्रिया"]
D --> D3["अम्ल अभिक्रिया"]
D --> D4["विस्थापन अभिक्रिया"]
A --> E["संक्षारण"]
E --> E1["जंग लगना (लोहा)"]
E --> E2["रोकथाम: पेंट, गैल्वेनाइज़ेशन"]
इस अध्याय में हमने सीखा कि पदार्थ धातु एवं अधातु के रूप में वर्गीकृत होते हैं। धातुएँ चमकीली, घातवर्धनीय, तन्य, ध्वनिक एवं ऊष्मा-विद्युत की सुचालक होती हैं, जबकि अधातुएँ भंगुर, कुचालक एवं गैस/ठोस रूप में पाई जाती हैं। पारा तरल धातु और ब्रोमीन तरल अधातु हैं। रासायनिक दृष्टि से धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं, जबकि अधातुएँ अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं। धातुएँ अम्लों से हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। अभिक्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर की धातु नीचे की धातु को उसके लवण से विस्थापित करती है। धातुओं एवं अधातुओं के उपयोग हमारे दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लोहे पर जंग लगना संक्षारण का उदाहरण है, जिसे पेंट, गैल्वेनाइज़ेशन आदि विधियों से रोका जा सकता है। इस प्रकार धातुओं एवं अधातुओं का ज्ञान विज्ञान एवं तकनीकी के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी है।