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संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक — Study Notes

Comprehensive theory, key formulas, diagrams, and memory aids for संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक.

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1. परिचय

मनुष्य हमेशा से वस्त्र, रस्सी, दरी आदि बनाने के लिए रेशों (Fibres) का उपयोग करता रहा है। प्राचीन काल में मनुष्य वस्त्र बनाने के लिए प्राकृतिक रेशों जैसे ऊन, कपास, रेशम आदि का उपयोग करता था। जब जनसंख्या बढ़ी, तो प्राकृतिक रेशों की माँग बढ़ी, लेकिन इनकी पूर्ति अपर्याप्त थी। इसी समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा कृत्रिम रेशों का निर्माण किया। रासायनिक प्रक्रिया द्वारा प्रयोगशाला या कारखानों में बनाए गए रेशों को संश्लेषित रेशे (Synthetic Fibres) कहते हैं। संश्लेषित रेशे मानव निर्मित होते हैं। सबसे पहला संश्लेषित रेशा नायलॉन (Nylon) था, जो 1931 में बनाया गया था।

संश्लेषित रेशे छोटी रासायनिक इकाइयों से बने होते हैं जिन्हें मोनोमर (Monomers) कहते हैं। अनेक मोनोमर आपस में जुड़कर एक बड़ा अणु (पॉलिमर) बनाते हैं। इस प्रक्रिया को बहुलीकरण (Polymerization) कहते हैं। इस अध्याय में हम संश्लेषित रेशों के प्रकार, प्लास्टिक के गुणधर्म तथा इनके पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन करेंगे।

2. पॉलिमर की अवधारणा (Concept of Polymer)

पॉलिमर (Polymer) शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है - पॉली (Poly) अर्थात अनेक और मर (Mer) अर्थात इकाई। अतः पॉलिमर का अर्थ है अनेक इकाइयों से बना बड़ा अणु। छोटी रासायनिक इकाइयों को मोनोमर (Monomers) कहते हैं। जब बहुत सारे मोनोमर आपस में रासायनिक बंधों द्वारा जुड़कर एक विशाल अणु बनाते हैं, तो उसे पॉलिमर कहते हैं। मोनोमरों के आपस में जुड़ने की प्रक्रिया को बहुलीकरण (Polymerization) कहते हैं।

पॉलिमर प्राकृतिक भी होते हैं और संश्लेषित भी। प्राकृतिक पॉलिमर के उदाहरण हैं - कपास (सेल्यूलोज़), ऊन (प्रोटीन), रेशम, स्टार्च, प्रोटीन आदि। संश्लेषित पॉलिमर के उदाहरण हैं - नायलॉन, पॉलिएस्टर, पॉलीएथिलीन, टेरीलीन आदि। किसी भी संश्लेषित रेशे या प्लास्टिक का आधार पॉलिमर ही होता है।

3. संश्लेषित रेशों के प्रकार (Types of Synthetic Fibres)

संश्लेषित रेशों के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

(क) रेयॉन (Rayon)

रेयॉन को कृत्रिम रेशम (Artificial Silk) भी कहा जाता है। यह लकड़ी का गूदा (Wood Pulp) यानी सेल्यूलोज़ से बनाया जाता है। लकड़ी का गूदा प्राकृतिक स्रोत होता है, इसलिए रेयॉन एक अर्ध-संश्लेषित रेशा है। रेयॉन को उपयुक्त रसायनों द्वारा उपचारित करके बनाया जाता है। रेयॉन में रेशम के समान चमक होती है, इसलिए इसे वस्त्र उद्योग में कृत्रिम रेशम कहते हैं। रेयॉन का उपयोग साड़ियाँ, टायर की रस्सी, बेल्ट, कालीन, अस्पताल में धुंध पट्टी, टूथब्रश आदि बनाने में किया जाता है।

(ख) नायलॉन (Nylon)

नायलॉन पहला संश्लेषित रेशा था, जिसका निर्माण 1931 में हुआ। यह कोयला, जल एवं वायु से प्राप्त कच्चे माल से बनाया जाता है। नायलॉन में उच्च शक्ति एवं लोच होती है। नायलॉन रेशे बहुत मजबूत होते हैं, घर्षण प्रतिरोधी होते हैं, रसायनों के प्रति प्रतिरोधी होते हैं और धोने पर सिकुड़ते नहीं हैं। नायलॉन का उपयोग वस्त्र, मोज़े, रस्सी (नायलॉन रस्सी), मछली पकड़ने के जाल, पैराशूट, ब्रश, टायर की रस्सी आदि बनाने में किया जाता है। नायलॉन रस्सी प्राकृतिक रेशों की रस्सी की तुलना में अधिक मजबूत एवं टिकाऊ होती है।

(ग) पॉलिएस्टर (Polyester)

पॉलिएस्टर एक प्रकार का संश्लेषित रेशा है जो बहुत से एस्टर इकाइयों से बना होता है। एस्टर उस पदार्थ को कहते हैं जो अम्ल और अल्कोहल की अभिक्रिया से बनता है। पॉलिएस्टर रेशा बहुत मजबूत, झुर्रियाँ प्रतिरोधी होता है तथा जल्दी सूख जाता है। यह रेशा धोने पर अपना आकार नहीं खोता। पॉलिएस्टर का उपयोग शर्ट, ट्राउज़र, साड़ी, वस्त्र, नेपकिन, रिबन आदि बनाने में होता है। टेरीलीन (Terylene) पॉलिएस्टर रेशे का एक प्रसिद्ध उदाहरण है। टेरिकॉट (Teri-Cot) पॉलिएस्टर और कपास का मिश्रण है, जबकि टेरिवूल (Teri-Wool) पॉलिएस्टर और ऊन का मिश्रण है।

(घ) ऐक्रेलिक (Acrylic)

ऐक्रेलिक एक संश्लेषित रेशा है जो दिखने में और स्पर्श में ऊन (Wool) के समान लगता है। इसलिए इसे कृत्रिम ऊन (Artificial Wool) भी कहते हैं। ऐक्रेलिक का उपयोग स्वेटर, शॉल, कंबल, कालीन, ट्रैक सूट आदि बनाने में किया जाता है। ऐक्रेलिक रेशा ऊन से हल्का एवं मजबूत होता है।

संश्लेषित रेशों के लाभ:

4. प्लास्टिक (Plastics)

प्लास्टिक भी एक प्रकार का पॉलिमर है। प्लास्टिक को मनचाहे आकार में ढाला जा सकता है। जब प्लास्टिक को गर्म किया जाता है, तो यह नरम हो जाता है और किसी भी आकार में ढाला जा सकता है। इस क्षमता के कारण ही इसे प्लास्टिक नाम दिया गया है, क्योंकि 'प्लास्टिक' का अर्थ है 'ढाला जा सकने वाला'। प्लास्टिक का उपयोग बाल्टी, खिलौने, मग, बोतल, हैंडल, झालर आदि अनगिनत वस्तुओं को बनाने में होता है।

प्लास्टिक के गुणधर्म (Properties of Plastics):

प्लास्टिक के प्रकार (Types of Plastics):

  1. थर्मोप्लास्टिक (Thermoplastics): ऐसे प्लास्टिक जिन्हें बार-बार गर्म करके ठंडा करने पर दोबारा मनचाहे आकार में ढाला जा सकता है, थर्मोप्लास्टिक कहलाते हैं। उदाहरण - पॉलीथीन (Polythene), पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC)। इन्हें पुनः प्रयोग किया जा सकता है। साइकिल, बाल्टी, पाइप आदि थर्मोप्लास्टिक से बने होते हैं।
  2. थर्मोसेटिंग प्लास्टिक (Thermosetting Plastics): ऐसे प्लास्टिक जिन्हें गर्म करके आकार देने के बाद दोबारा पिघलाकर नया आकार नहीं दिया जा सकता, थर्मोसेटिंग प्लास्टिक कहलाते हैं। एक बार ढालने के बाद ये स्थायी आकार ग्रहण कर लेते हैं। उदाहरण - बैकेलाइट (Bakelite), मेलामाइन (Melamine)।

प्लास्टिक के प्रमुख उपयोग:

5. प्लास्टिक और पर्यावरण (Plastics and the Environment)

प्लास्टिक का सबसे बड़ा दोष यह है कि यह अपघटनीय (Biodegradable) नहीं होता। जैव-अपघटनीय पदार्थ वे होते हैं जिन्हें सूक्ष्मजीव (जीवाणु, कवक) विघटित कर सकते हैं। प्लास्टिक सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित नहीं होता, इसलिए यह पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक यथावत रहता है। इससे प्लास्टिक प्रदूषण (Plastic Pollution) होता है। प्लास्टिक कचरे को जलाने पर अत्यंत हानिकारक गैसें उत्सर्जित होती हैं, जो वायु प्रदूषण फैलाती हैं और मनुष्य के लिए हानिकारक होती हैं। पॉलीथीन बैगों के कारण जल निकासी व्यवस्था अवरुद्ध हो जाती है। प्लास्टिक कचरा जानवरों के आहार में मिलकर उन्हें हानि पहुँचा सकता है। मृदा में प्लास्टिक का अपघटन न होने से मृदा की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ता है।

प्लास्टिक के अपशिष्ट प्रबंधन के उपाय:

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: संश्लेषित रेशों के प्रकार

रेशा कच्चा माल/विशेषता मुख्य उपयोग
रेयॉन लकड़ी का गूदा (सेल्यूलोज़), अर्ध-संश्लेषित वस्त्र, कृत्रिम रेशम, टायर रस्सी
नायलॉन कोयला, जल, वायु; प्रथम संश्लेषित रेशा (1931) पैराशूट, रस्सी, मोज़े, मछली जाल
पॉलिएस्टर एस्टर इकाइयाँ शर्ट, टेरीलीन, टेरिकॉट
ऐक्रेलिक कृत्रिम ऊन स्वेटर, शॉल, कंबल

तालिका 2: थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग प्लास्टिक

विशेषता थर्मोप्लास्टिक थर्मोसेटिंग प्लास्टिक
गर्म करने पर पिघलकर नया आकार ले सकते हैं नहीं पिघलते, स्थायी आकार
पुनः प्रयोग किया जा सकता है नहीं किया जा सकता
उदाहरण पॉलीथीन, PVC बैकेलाइट, मेलामाइन
उपयोग बाल्टी, पाइप स्विच, रसोई बर्तन

तालिका 3: प्राकृतिक एवं संश्लेषित रेशे

रेशे स्रोत उदाहरण
प्राकृतिक रेशे पौधे/जंतु कपास, ऊन, रेशम, जूट
संश्लेषित रेशे रासायनिक प्रक्रिया नायलॉन, रेयॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रेलिक

माइंड मैप

graph TD
    A["संश्लेषित रेशे और प्लास्टिक"] --> B["पॉलिमर"]
    B --> B1["मोनोमर + बहुलीकरण"]
    A --> C["संश्लेषित रेशे"]
    C --> C1["रेयॉन: कृत्रिम रेशम"]
    C --> C2["नायलॉन: 1931, प्रथम"]
    C --> C3["पॉलिएस्टर: टेरीलीन"]
    C --> C4["ऐक्रेलिक: कृत्रिम ऊन"]
    A --> D["प्लास्टिक"]
    D --> D1["थर्मोप्लास्टिक: पॉलीथीन, PVC"]
    D --> D2["थर्मोसेटिंग: बैकेलाइट, मेलामाइन"]
    A --> E["गुणधर्म"]
    E --> E1["विद्युत रोधक, संक्षारण प्रतिरोधी"]
    E --> E2["हल्के, टिकाऊ"]
    A --> F["पर्यावरणीय प्रभाव"]
    F --> F1["अपघटनीय नहीं"]
    F --> F2["प्लास्टिक प्रदूषण"]
    F --> F3["पुनः चक्रण, पुनः उपयोग"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: संश्लेषित रेशों के प्रकार

संश्लेषित रेशों के प्रकार संश्लेषित रेशे रेयॉन कृत्रिम रेशम, लकड़ी का गूदा नायलॉन 1931, सबसे मजबूत पॉलिएस्टर टेरीलीन, झुर्रियाँ प्रतिरोधी उपयोग: साड़ी, टायर रस्सी, धुंध पट्टी उपयोग: पैराशूट, मोज़े, मछली जाल ऐक्रेलिक = कृत्रिम ऊन स्वेटर, शॉल, कंबल बनाने में स्वर्ण नियम प्रत्येक रेशे को उसके उपयोग के साथ याद रखें

आरेख 2: प्लास्टिक के प्रकार

प्लास्टिक के प्रकार थर्मोप्लास्टिक थर्मोसेटिंग प्लास्टिक बार-बार गर्म करके नया आकार दिया जा सकता है (पुनः प्रयोग) एक बार ढालने के बाद स्थायी आकार, पुनः प्रयोग नहीं पॉलीथीन बैग, रैपर PVC पाइप, बाल्टी बैकेलाइट स्विच, सॉकेट मेलामाइन रसोई बर्तन पर्यावरणीय चेतावनी प्लास्टिक अपघटनीय नहीं है, पुनः चक्रण/पुनः उपयोग करें Golden Rule प्लास्टिक का कम-से-कम उपयोग करें और पुनः चक्रण करें

सामान्य गलतियाँ

  1. रेयॉन को पूर्ण रूप से संश्लेषित मानना: रेयॉन लकड़ी के गूदे (सेल्यूलोज़) से बनता है, जो प्राकृतिक स्रोत है। इसलिए रेयॉन एक अर्ध-संश्लेषित रेशा है, पूर्णतः संश्लेषित नहीं।
  2. थर्मोप्लास्टिक और थर्मोसेटिंग को उलझाना: थर्मोप्लास्टिक (पॉलीथीन, PVC) बार-बार पिघलाकर ढाला जा सकता है, जबकि थर्मोसेटिंग (बैकेलाइट, मेलामाइन) एक बार ढालने के बाद पुनः पिघल नहीं सकता।
  3. ऐक्रेलिक को असली ऊन समझना: ऐक्रेलिक दिखने में ऊन जैसा लगता है, लेकिन यह संश्लेषित रेशा है, प्राकृतिक नहीं। इसे कृत्रिम ऊन कहते हैं।
  4. नायलॉन के निर्माण वर्ष को भूलना: नायलॉन पहला संश्लेषित रेशा था जो 1931 में बनाया गया। इसे कोयला, जल एवं वायु से बनाया जाता है।
  5. प्लास्टिक को अपघटनीय समझना: प्लास्टिक जैव-अपघटनीय नहीं है। यह सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में रहता है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण होता है।
  6. बैकेलाइट का उपयोग भूलना: बैकेलाइट विद्युत का कुचालक होने के कारण विद्युत स्विच, सॉकेट आदि बनाने में प्रयुक्त होता है, जबकि मेलामाइन ऊष्मा प्रतिरोधी होने के कारण रसोई के बर्तनों में।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. पॉलिमर, मोनोमर एवं बहुलीकरण की परिभाषाएँ स्पष्ट रूप से याद करें, ये मौलिक अवधारणाएँ प्रश्नों में आती हैं।
  2. चार प्रमुख संश्लेषित रेशों (रेयॉन, नायलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रेलिक) के स्रोत एवं उपयोगों की तालिका बनाकर याद करें।
  3. थर्मोप्लास्टिक एवं थर्मोसेटिंग प्लास्टिक के अंतर को उदाहरणों सहित लिखें।
  4. प्लास्टिक की प्रमुख विशेषताओं में विद्युत रोधक गुण एवं संक्षारण प्रतिरोध को विशेष रूप से याद रखें।
  5. टेरीलीन, टेरिकॉट, टेरिवूल जैसे मिश्रित रेशों की संरचना को समझें।
  6. पर्यावरण अनुकूल अभ्यास (Reduce, Reuse, Recycle) के नारे पर ध्यान दें, जो अनुच्छेद प्रश्नों में आ सकता है।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि संश्लेषित रेशे रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा मानव निर्मित होते हैं। पॉलिमर अनेक मोनोमर इकाइयों के बहुलीकरण से बनते हैं। संश्लेषित रेशों के मुख्य प्रकार रेयॉन, नायलॉन, पॉलिएस्टर और ऐक्रेलिक हैं। रेयॉन कृत्रिम रेशम, नायलॉन सबसे मजबूत रेशा, पॉलिएस्टर झुर्रियाँ प्रतिरोधी और ऐक्रेलिक कृत्रिम ऊन कहलाता है। प्लास्टिक भी एक पॉलिमर है जिसे मनचाहे आकार में ढाला जा सकता है। थर्मोप्लास्टिक को पुनः ढाला जा सकता है, जबकि थर्मोसेटिंग प्लास्टिक स्थायी आकार ग्रहण करता है। बैकेलाइट विद्युत रोधक होने के कारण बिजली के उपकरणों में और मेलामाइन ऊष्मा प्रतिरोधी होने के कारण रसोई के बर्तनों में उपयोग होता है। प्लास्टिक अपघटनीय नहीं होने के कारण पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है, इसलिए हमें प्लास्टिक का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए तथा पुनः चक्रण एवं पुनः उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

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