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1. परिचय

हमारे चारों ओर ऐसे जीव पाए जाते हैं जिन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते। इन अत्यंत सूक्ष्म जीवों को सूक्ष्मजीव (Microorganisms) कहा जाता है। इन्हें सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की सहायता से ही देखा जा सकता है। सूक्ष्मजीवों का अध्ययन करने वाली विज्ञान की शाखा को सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) कहते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव जीवित प्राणियों पर परजीवी के रूप में पनपते हैं और उन्हें हानि पहुँचाते हैं। सूक्ष्मजीव वायु, मृदा, जल तथा हमारे शरीर के अंदर भी पाए जाते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव हमारे लिए लाभदायक (मित्र) होते हैं, तो कुछ हानिकारक (शत्रु) होते हैं। यही कारण है कि इस अध्याय का नाम "सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु" रखा गया है।

सूक्ष्मजीवों के कुछ प्रकार बहुत उपयोगी होते हैं, जैसे रोगजनक जीवाणुओं से बचाव के लिए एंटीबायोटिक्स का निर्माण करने वाले फफूँद (मोल्ड)। वहीं, कुछ सूक्ष्मजीव जैसे विषाणु एवं कुछ जीवाणु विभिन्न बीमारियाँ उत्पन्न करते हैं। इस अध्याय में हम सूक्ष्मजीवों के प्रकार, उनके उपयोग, हानिकारक प्रभाव तथा खाद्य पदार्थों के संरक्षण के तरीकों का अध्ययन करेंगे।

2. सूक्ष्मजीवों के प्रकार (Types of Microorganisms)

सूक्ष्मजीवों को चार प्रमुख श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  1. जीवाणु (Bacteria): ये एककोशिकीय सूक्ष्मजीव हैं। जीवाणु विभिन्न आकारों के होते हैं, जैसे गोलाकार (कोकस), छड़ के आकार (बेसिलस), सर्पिलाकार (स्पिरिलम) आदि। इनकी उत्पत्ति विभाजन द्वारा होती है। कुछ जीवाणु लाभदायक हैं तो कुछ हानिकारक।
  2. कवक/फफूँद (Fungi): ये बहुकोशिकीय या एककोशिकीय हो सकते हैं। रोटी या फलों पर उगने वाला फफूँद, यीस्ट आदि कवक के उदाहरण हैं। यीस्ट (Yeast) एक एककोशिकीय कवक है।
  3. प्रोटोज़ोआ (Protozoa): ये एककोशिकीय सूक्ष्मजीव हैं जो मुख्यतः जल में पाए जाते हैं। अमीबा, पैरामीशियम आदि प्रोटोज़ोआ के उदाहरण हैं। कुछ प्रोटोज़ोआ रोग उत्पन्न करते हैं, जैसे प्लाज़्मोडियम मलेरिया फैलाता है।
  4. कुछ शैवाल (Some Algae): हरे रंग के एककोशिकीय सूक्ष्मजीवों को शैवाल कहते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन बनाते हैं। जल में उगने वाले हरे रंग के तंतुओं के रूप में दिखाई देते हैं।

इसके अतिरिक्त एक विशेष प्रकार के सूक्ष्मजीव होते हैं जिन्हें विषाणु (Viruses) कहते हैं। विषाणुओं को सामान्य सूक्ष्मदर्शी से नहीं देखा जा सकता; इन्हें देखने के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope) की आवश्यकता होती है। विषाणु केवल जीवित कोशिकाओं के अंदर ही प्रजनन कर सकते हैं। विषाणु को जीव और निर्जीव दोनों माना जाता है। सामान्य सर्दी-जुकाम, इन्फ्लूएंजा (फ्लू), चिकनपॉक्स, पोलियो, COVID-19 जैसी बीमारियाँ विषाणुओं द्वारा फैलती हैं।

सूक्ष्मजीवों का वर्गीकरण-तालिका

सूक्ष्मजीव विशेषता उदाहरण
जीवाणु एककोशिकीय, विभिन्न आकार लैक्टोबेसिलस, स्ट्रेप्टोकोकस
कवक (फफूँद) एक/बहुकोशिकीय, पोषकों पर उगते हैं यीस्ट, पेनिसिलियम
प्रोटोज़ोआ एककोशिकीय, जल में पाए जाते हैं अमीबा, प्लाज़्मोडियम
शैवाल हरे, प्रकाश संश्लेषण करते हैं स्पाइरोगाइरा
विषाणु कोशिकाओं के अंदर ही प्रजनन इन्फ्लूएंजा विषाणु

3. सूक्ष्मजीव हमारे मित्र (Microorganisms as Friends)

सूक्ष्मजीव अनेक प्रकार से हमारे लिए लाभदायक हैं। उनके लाभ निम्नलिखित हैं:

(क) खाद्य पदार्थों का निर्माण (Food Items)

(ख) एंटीबायोटिक्स (Antibiotics)

कुछ सूक्ष्मजीव रोगों से लड़ने वाले पदार्थ उत्पन्न करते हैं जिन्हें एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) कहते हैं। एंटीबायोटिक्स ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट या नियंत्रित करते हैं। एलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन (Penicillin) की खोज की, जो पेनिसिलियम नामक फफूँद से प्राप्त होती है। यह प्रथम एंटीबायोटिक है। एंटीबायोटिक्स केवल जीवाणु संबंधी रोगों पर असर करते हैं।

(ग) वैक्सीन (Vaccines)

हानिकारक सूक्ष्मजीवों (रोगजनकों) को कमजोर या निष्क्रिय करके तैयार किए गए पदार्थ को वैक्सीन (Vaccine) कहते हैं। जब वैक्सीन किसी व्यक्ति को दी जाती है, तो उसके शरीर में रोग से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) विकसित हो जाती है। टीके (Vaccination) के कारण ही टीबी, टिटनेस, पोलियो, खसरा, चिकनपॉक्स जैसे रोगों पर नियंत्रण संभव हो सका है। इस प्रकार सूक्ष्मजीव रोगों से बचाव में भी हमारे मित्र हैं।

(घ) कृषि में उपयोग (Agriculture)

(ङ) अन्य उपयोग

4. सूक्ष्मजीव हमारे शत्रु (Microorganisms as Enemies)

कुछ सूक्ष्मजीव हमारे लिए हानिकारक होते हैं क्योंकि वे विभिन्न रोग उत्पन्न करते हैं। रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को रोगजनक (Pathogens) कहते हैं। ये तीन प्रकार के हो सकते हैं:

  1. संचारी/संक्रामक रोग (Communicable Diseases): ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वायु, जल, भोजन या सीधे संपर्क द्वारा फैलते हैं। इन रोगों के वाहक (कारक) सूक्ष्मजीव होते हैं। उदाहरण: सामान्य सर्दी, इन्फ्लूएंजा, मलेरिया, टीबी (तपेदिक), डेंगू, कोविड-19।
  2. गैर-संचारी रोग (Non-Communicable Diseases): ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते। जैसे हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर। ये सूक्ष्मजीवों से नहीं बल्कि अन्य कारणों से होते हैं।
  3. कीटों/जंतुओं में रोग (Diseases in Animals and Insects): कुछ रोग जानवरों में भी फैलते हैं, जैसे पशुओं में खुरपका-मुँहपका (Foot and Mouth) रोग, मुर्गियों में हैजा आदि।

रोगों की तालिका

रोग रोगजनक प्रकार
हैजा जीवाणु संचारी
तपेदिक (टीबी) जीवाणु संचारी
मलेरिया प्रोटोज़ोआ (प्लाज़्मोडियम) संचारी
सामान्य सर्दी विषाणु संचारी
दाद (Ringworm) कवक (फफूँद) संचारी
पोलियो विषाणु संचारी

रोग फैलाने वाले वाहक (Disease Carriers)

मलेरिया मादा एनोफिलीज़ मच्छर (Female Anopheles mosquito) के काटने से फैलता है। डेंगू एडीज़ मच्छर (Aedes mosquito) से फैलता है। मच्छरों के अतिरिक्त मक्खियाँ भी भोजन पर बैठकर रोगजनक सूक्ष्मजीवों को फैला सकती हैं। इसलिए मच्छरदानी का उपयोग करना, साफ-सफाई रखना और मक्खियों से खाद्य पदार्थों की रक्षा करना आवश्यक है।

फसलों के रोग (Plant Diseases)

फसलों एवं पौधों में भी सूक्ष्मजीवों से रोग उत्पन्न होते हैं, जिनसे फसल की उपज घटती है और खाद्यान्न की कमी होती है। उदाहरणार्थ, चावल के पौधों में विषाणु रोग, गेहूँ में कवक रोग (पर्ण कुंचक), आलू और टमाटर में विषाणु/कवक रोग। ये रोग पादप विज्ञानियों के अनुसंधान से नियंत्रित किए जाते हैं।

5. खाद्य पदार्थों का संरक्षण (Food Preservation)

सूक्ष्मजीव भोजन को खराब कर देते हैं। खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजीवों से बचाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को खाद्य संरक्षण (Food Preservation) कहते हैं। खाद्य संरक्षण की विभिन्न विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. रासायनिक परिरक्षक (Chemical Preservatives): सोडियम बेंज़ोएट, सोडियम नाइट्राइट जैसे रसायन सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकते हैं। इनका उपयोग अचार, जैम, जेली आदि में किया जाता है।
  2. पाश्चुरीकरण (Pasteurization): दूध को 70°C तक गर्म करके तेजी से ठंडा करने की प्रक्रिया को पाश्चुरीकरण कहते हैं। इस विधि का नाम वैज्ञानिक लुई पाश्चर (Louis Pasteur) के नाम पर रखा गया है। इससे दूध में मौजूद रोगजनक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं।
  3. नमक द्वारा संरक्षण: नमक सूक्ष्मजीवों से जल को सोख लेता है, जिससे वे नष्ट हो जाते हैं। इस विधि से अचार, नमकीन मांस एवं मछली आदि को संरक्षित किया जाता है।
  4. शर्करा द्वारा संरक्षण: जैम, जेली और स्क्वैश में शर्करा की अधिक मात्रा होती है, जो सूक्ष्मजीवों के विकास को रोकती है।
  5. ताप द्वारा संरक्षण: भोजन को उच्च ताप पर पकाकर वायुरोधी डिब्बों में बंद करके संरक्षित किया जाता है। जैसे बिस्किट, पापड़ आदि।
  6. निम्न ताप द्वारा (कूलिंग): रेफ्रिजरेटर में कम ताप पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि धीमी हो जाती है, इसलिए खाद्य पदार्थ लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। फ्रीज़र में भोजन और अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
  7. निर्जलन द्वारा (Drying): धूप में सुखाने या निर्जलीकरण से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक जल की कमी हो जाती है। मछली, फल, सब्ज़ियाँ आदि को सुखाकर संरक्षित किया जाता है।

6. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle)

वायुमंडल में नाइट्रोजन लगभग 78 प्रतिशत मात्रा में विद्यमान है। नाइट्रोजन सभी जीवों के शरीर का आवश्यक घटक है, क्योंकि यह प्रोटीन एवं न्यूक्लिक अम्ल का मुख्य तत्व है। सूक्ष्मजीव नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वायुमंडलीय नाइट्रोजन का पौधों में उपयोग मुख्य रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) द्वारा होता है। मृदा में उपस्थित सूक्ष्मजीव जैसे क्लोस्ट्रीडियम एवं एज़ोटोबैक्टर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करते हैं। इसके बाद नाइट्रिफ़ाइंग जीवाणु अमोनिया को नाइट्रेट में बदलते हैं, जिसे पौधे सोखते हैं। जब पौधे और जंतु मरते हैं, तो डीकंपोज़र (अपघटक) सूक्ष्मजीव उनके शरीर में मौजूद नाइट्रोजनयुक्त पदार्थों को विघटित कर मृदा में अमोनिया लौटाते हैं। इसके बाद डीनाइट्रीफ़ाइंग जीवाणु मृदा में उपस्थित नाइट्रेट का अपघटन कर उसे वायुमंडलीय नाइट्रोजन में बदल देते हैं। इस प्रकार वायुमंडल, मृदा एवं जीवों के बीच नाइट्रोजन का संचार निरंतर चलता रहता है, जिसे नाइट्रोजन चक्र कहते हैं।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले रोग

रोग रोगजनक सूक्ष्मजीव संचरण का माध्यम
हैजा जीवाणु दूषित जल/भोजन
टीबी (तपेदिक) जीवाणु वायु
मलेरिया प्रोटोज़ोआ (प्लाज़्मोडियम) मादा एनोफिलीज़ मच्छर
सामान्य सर्दी विषाणु वायु/संपर्क
डेंगू विषाणु एडीज़ मच्छर
दाद (Ringworm) कवक संपर्क

तालिका 2: खाद्य संरक्षण की विधियाँ

विधि प्रयुक्त सामग्री/तकनीक उदाहरण
रासायनिक परिरक्षक सोडियम बेंज़ोएट अचार, जैम
पाश्चुरीकरण 70°C तक गर्म करना दूध
नमक नमक की अधिक मात्रा अचार, नमकीन मछली
शर्करा शर्करा की अधिक मात्रा जैम, जेली, स्क्वैश
निम्न ताप रेफ्रिजरेटर/फ्रीज़र सब्ज़ियाँ, मांस
निर्जलन धूप में सुखाना सूखी मछली, पापड़

तालिका 3: मित्र एवं शत्रु सूक्ष्मजीव

क्षेत्र मित्र सूक्ष्मजीव शत्रु सूक्ष्मजीव
खाद्य लैक्टोबेसिलस (दही), यीस्ट (ब्रेड) रोगजनक जीवाणु
चिकित्सा पेनिसिलिन बनाने वाला पेनिसिलियम मलेरिया फैलाने वाला प्लाज़्मोडियम
कृषि राइज़ोबियम (नाइट्रोजन स्थिरीकरण) फसलों के रोगजनक
पर्यावरण अपघटक सूक्ष्मजीव जल प्रदूषण फैलाने वाले जीवाणु

माइंड मैप

graph TD A["सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु"] --> B["प्रकार"] B --> B1["जीवाणु"] B --> B2["कवक (फफूँद)"] B --> B3["प्रोटोज़ोआ"] B --> B4["शैवाल"] B --> B5["विषाणु"] A --> C["मित्र (लाभ)"] C --> C1["दही, ब्रेड, किण्वन"] C --> C2["एंटीबायोटिक्स (पेनिसिलिन)"] C --> C3["वैक्सीन"] C --> C4["नाइट्रोजन स्थिरीकरण"] C --> C5["सीवेज उपचार, बायोगैस"] A --> D["शत्रु (हानि)"] D --> D1["रोगजनक - हैजा, टीबी, मलेरिया"] D --> D2["भोजन खराब करना"] D --> D3["फसलों के रोग"] A --> E["खाद्य संरक्षण"] E --> E1["नमक, शर्करा, ताप"] E --> E2["पाश्चुरीकरण, रासायनिक परिरक्षक"] A --> F["नाइट्रोजन चक्र"] F --> F1["स्थिरीकरण, नाइट्रीकरण, डीनाइट्रीकरण"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: नाइट्रोजन चक्र

नाइट्रोजन चक्र वायुमंडलीय नाइट्रोजन (78%) नाइट्रोजन स्थिरीकरण मृदा नाइट्रेट (राइज़ोबियम, एज़ोटोबैक्टर) पौधों द्वारा अवशोषण पौधों में प्रोटीन भोजन श्रृंखला जंतुओं में प्रोटीन मृत्यु/मल-मूत्र अमोनिया (अपघटन) डीनाइट्रीकरण स्वर्ण नियम सूक्ष्मजीव नाइट्रोजन चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

आरेख 2: सूक्ष्मजीवों के प्रकार

सूक्ष्मजीवों के प्रकार जीवाणु एककोशिकीय कवक यीस्ट, फफूँद प्रोटोज़ोआ अमीबा विषाणु इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से उदाहरण: लैक्टोबेसिलस (दही), राइज़ोबियम (नाइट्रोजन स्थिरीकरण) जीवाणु विभिन्न आकारों के होते हैं - गोल, छड़, सर्पिल उदाहरण: पेनिसिलियम से पेनिसिलिन एंटीबायोटिक बनती है रोटी पर उगने वाला फफूँद भी कवक है उदाहरण: प्लाज़्मोडियम मलेरिया रोग फैलाता है प्रोटोज़ोआ मुख्यतः जल में पाए जाते हैं उदाहरण: इन्फ्लूएंजा, सर्दी, पोलियो, कोविड-19 केवल जीवित कोशिकाओं में प्रजनन करते हैं Golden Rule प्रत्येक सूक्ष्मजीव समूह को उसके उदाहरण के साथ याद रखें

सामान्य गलतियाँ

  1. विषाणु को कोशिका के बाहर प्रजनन करने योग्य मानना: विषाणु केवल जीवित कोशिकाओं के अंदर ही प्रजनन कर सकते हैं। इन्हें जीव और निर्जीव दोनों माना जाता है, लेकिन इन्हें सामान्य सूक्ष्मदर्शी से नहीं देखा जा सकता।
  2. मलेरिया के वाहक को भूलना: मलेरिया मादा एनोफिलीज़ मच्छर के काटने से फैलता है, न कि सीधे वायु से। कई छात्र इसे वायु जनित रोग समझ लेते हैं।
  3. एंटीबायोटिक को सभी रोगों की दवा मानना: एंटीबायोटिक्स केवल जीवाणु रोगों पर प्रभावी होते हैं, विषाणु जनित रोगों (जैसे सर्दी, फ्लू) पर इनका कोई प्रभाव नहीं होता।
  4. पाश्चुरीकरण और उबालने में अंतर: पाश्चुरीकरण में दूध को 70°C तक गर्म करके तेजी से ठंडा किया जाता है, जबकि उबालने में ताप अधिक होता है। दोनों को समान न समझें।
  5. किण्वन और विघटन में भ्रम: किण्वन में सूक्ष्मजीव शर्करा को अल्कोहल एवं CO2 में बदलते हैं (लाभदायक), जबकि विघटन में जटिल पदार्थ सरल पदार्थों में टूटते हैं। दोनों अलग प्रक्रियाएँ हैं।
  6. नाइट्रोजन चक्र के चरणों को उलझाना: नाइट्रोजन स्थिरीकरण (N2→NH3), नाइट्रीकरण (NH3→नाइट्रेट) और डीनाइट्रीकरण (नाइट्रेट→N2) तीनों अलग-अलग चरण हैं, जिन्हें क्रम से समझना चाहिए।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. सूक्ष्मजीवों के प्रकार (जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ, शैवाल, विषाणु) एवं उनके उदाहरणों की तालिका याद करें।
  2. रोग और उनके रोगजनकों (जीवाणु/विषाणु/प्रोटोज़ोआ/कवक) के मेल को ध्यान से पढ़ें, यह प्रश्नों में बार-बार आता है।
  3. खाद्य संरक्षण की विधियों को उनके उदाहरणों के साथ याद रखें, जैसे नमक-अचार, शर्करा-जैम, पाश्चुरीकरण-दूध।
  4. एलेक्ज़ेंडर फ्लेमिंग और पेनिसिलिन का संबंध तथा लुई पाश्चर और पाश्चुरीकरण का संबंध अवश्य याद रखें।
  5. नाइट्रोजन चक्र के प्रत्येक चरण में कौन सा जीवाणु कार्य करता है, इसे स्पष्ट रूप से याद करें।
  6. लाभदायक सूक्ष्मजीवों (लैक्टोबेसिलस, राइज़ोबियम, यीस्ट) के कार्यों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये परीक्षा में प्रायः पूछे जाते हैं।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि सूक्ष्मजीव हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं। ये वायु, मृदा, जल एवं हमारे शरीर में पाए जाते हैं। सूक्ष्मजीवों के पाँच मुख्य प्रकार हैं - जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ, शैवाल एवं विषाणु। ये हमारे मित्र भी हैं और शत्रु भी। दही, ब्रेड, इदली-डोसा, पनीर आदि बनाने में सूक्ष्मजीव सहायक हैं। एंटीबायोटिक्स एवं वैक्सीन के निर्माण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि में नाइट्रोजन स्थिरीकरण तथा सीवेज उपचार में भी ये उपयोगी हैं। दूसरी ओर, ये विभिन्न रोग उत्पन्न कर हमारे शत्रु भी बनते हैं। खाद्य पदार्थों को संरक्षित करने के लिए नमक, शर्करा, ताप, पाश्चुरीकरण एवं रासायनिक परिरक्षकों का उपयोग किया जाता है। नाइट्रोजन चक्र में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखती है। इस प्रकार सूक्ष्मजीवों का संतुलित उपयोग ही मानव कल्याण का मार्ग है।