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1. परिचय

जब विद्युत धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है, तो उसके विभिन्न प्रभाव देखने को मिलते हैं। विद्युत धारा के चार मुख्य प्रभाव होते हैं - तापीय प्रभाव (बल्ब जलना), चुंबकीय प्रभाव (विद्युत चुंबक), रासायनिक प्रभाव (विद्युत अपघटन) एवं शारीरिक प्रभाव (विद्युत झटका)। इस अध्याय में हम विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical Effects of Electric Current) का अध्ययन करेंगे। विद्युत धारा जब कुछ विलयनों से होकर प्रवाहित होती है, तो उनमें रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इस अध्याय में हम सुचालक एवं कुचालक विलयनों, विद्युत अपघटन, विद्युत लेपन तथा विद्युत धारा के विभिन्न रासायनिक अनुप्रयोगों का अध्ययन करेंगे।

2. विलयन की विद्युत चालकता (Conduction of Electricity by Solutions)

कुछ तरल पदार्थ विद्युत के सुचालक होते हैं, जबकि कुछ कुचालक। शुद्ध जल (Distilled Water) विद्युत का कुचालक है, अर्थात शुद्ध जल विद्युत नहीं चलाता। परंतु जब जल में नमक, अम्ल या क्षार घोला जाता है, तो विलयन विद्युत का सुचालक बन जाता है। उदाहरण के लिए, नमक का जलीय विलयन (Salt Solution), नींबू का रस, सिरका, खट्टे फलों का रस विद्युत के सुचालक हैं। जबकि शुद्ध जल, चीनी का विलयन, ग्लूकोज़ का विलयन, शुद्ध तेल एवं शुद्ध अल्कोहल विद्युत के कुचालक हैं।

सुचालक विलयनों के उदाहरण:

कुचालक विलयनों के उदाहरण:

3. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical Effects of Electric Current)

जब विद्युत धारा किसी सुचालक विलयन से प्रवाहित होती है, तो विलयन में रासायनिक अभिक्रिया होती है। विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:

  1. विलयन में बुलबुले बनना: विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विलयन में गैस के बुलबुले उत्पन्न हो सकते हैं।
  2. रंग में परिवर्तन: विलयन का रंग बदल सकता है।
  3. धातु का जमाव: विद्युत अपघटन के समय इलेक्ट्रोड पर धातु की परत जम सकती है।
  4. ताप उत्पन्न होना: विलयन गर्म हो सकता है।

इनमें से जो भी प्रभाव विद्युत धारा द्वारा रासायनिक अभिक्रिया के कारण होते हैं, उन्हें विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव कहते हैं।

4. विद्युत अपघटन (Electrolysis)

जब विद्युत धारा किसी सुचालक विलयन से प्रवाहित होती है, तो विलयन का रासायनिक अपघटन होता है। इस प्रक्रिया को विद्युत अपघटन (Electrolysis) कहते हैं।

विद्युत अपघटन में दो इलेक्ट्रोड (Electrodes) का उपयोग होता है: 1. ऐनोड (Anode): धन आवेशित इलेक्ट्रोड (बैटरी के धन टर्मिनल से जुड़ा)। 2. कैथोड (Cathode): ऋण आवेशित इलेक्ट्रोड (बैटरी के ऋण टर्मिनल से जुड़ा)।

जब विद्युत धारा विलयन से प्रवाहित होती है, तो विलयन के आयन इलेक्ट्रोड की ओर गति करते हैं। धन आयन (Cations) कैथोड की ओर तथा ऋण आयन (Anions) ऐनोड की ओर जाते हैं।

उदाहरण: जल का विद्युत अपघटन

जब जल में थोड़ा अम्ल या क्षार मिलाकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो जल का अपघटन होता है और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस एवं ऐनोड पर ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है। इसी प्रकार, कॉपर सल्फेट विलयन के विद्युत अपघटन में कैथोड पर ताँबा जमा होता है।

5. विद्युत लेपन (Electroplating)

विद्युत लेपन (Electroplating) वह प्रक्रिया है जिसमें विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव द्वारा सस्ती धातु की वस्तुओं पर महँगी धातु की पतली परत चढ़ाई जाती है। विद्युत लेपन से वस्तुओं की सुंदरता बढ़ती है, जंग लगने से रक्षा होती है तथा वस्तुओं की चमक बढ़ती है।

विद्युत लेपन की प्रक्रिया:

  1. जिस वस्तु पर लेपन करना है (जैसे लोहे की वस्तु) उसे कैथोड बनाया जाता है।
  2. जिस धातु का लेपन करना है (जैसे चाँदी, सोना, निकल, क्रोमियम) की पट्टी को ऐनोड बनाया जाता है।
  3. दोनों इलेक्ट्रोड को उपयुक्त विलयन (इलेक्ट्रोलाइट) में डुबोया जाता है।
  4. विद्युत धारा प्रवाहित करने पर विलयन के धातु आयन कैथोड पर जमा हो जाते हैं, जिससे वस्तु पर धातु की परत चढ़ जाती है।

विद्युत लेपन के अनुप्रयोग:

6. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के अन्य अनुप्रयोग

  1. धातु निष्कर्षण: विद्युत अपघटन द्वारा धातुओं को उनके अयस्कों से अलग किया जाता है।
  2. धातु परिष्करण (Refining): अशुद्ध धातुओं को विद्युत अपघटन द्वारा शुद्ध किया जाता है।
  3. कचरे के जल में मिलावट: कचरे का जल (Waste Water) विद्युत धारा प्रवाहित करने पर अशुद्धियाँ अलग हो सकती हैं। जिन क्षेत्रों में भूमिगत जल में लवणों की मात्रा अधिक होती है, वहाँ मृदा की चालकता बदलती है।

7. विद्युत धारा एवं कुचालक विलयन की जाँच (Testing Conduction of Solutions)

किसी विलयन की विद्युत चालकता जाँचने के लिए एक सरल परिपथ बनाया जाता है, जिसमें बैटरी, बल्ब तथा दो धातु की छड़ें (इलेक्ट्रोड) होती हैं। जब इलेक्ट्रोडों को विलयन में डुबोया जाता है, तो यदि विलयन सुचालक है तो परिपथ पूर्ण होता है और बल्ब जल उठता है। यदि विलयन कुचालक है, तो परिपथ पूर्ण नहीं होता और बल्ब नहीं जलता। कभी-कभी बल्ब की रोशनी बहुत मंद होती है, जो कम चालकता को दर्शाती है। ऐसे में बल्ब के स्थान पर LED (लाइट एमिटिंग डायोड) का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि LED बहुत कम धारा पर भी जलती है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: सुचालक एवं कुचालक विलयन

सुचालक विलयन कुचालक विलयन
नमक का जलीय विलयन शुद्ध (आसुत) जल
नींबू का रस चीनी का विलयन
सिरका ग्लूकोज़ का विलयन
अम्ल/क्षार विलयन शुद्ध तेल

तालिका 2: विद्युत लेपन के उदाहरण

लेपित धातु वस्तु उद्देश्य
क्रोमियम वाहन के पुर्जे चमक एवं जंग सुरक्षा
टिन लोहे के खाद्य डिब्बे जंग से बचाव
चाँदी/सोना आभूषण सुंदरता
निकल चम्मच, घंटी चमक
जिंक लोहे की चादरें जंग सुरक्षा (गैल्वेनाइज़ेशन)

तालिका 3: इलेक्ट्रोड

इलेक्ट्रोड आवेश क्रिया
ऐनोड धन ऋण आयन इस ओर
कैथोड ऋण धन आयन इस ओर

माइंड मैप

graph TD A["विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव"] --> B["चालकता"] B --> B1["सुचालक विलयन: नमक, नींबू"] B --> B2["कुचालक: शुद्ध जल, चीनी"] A --> C["विद्युत अपघटन"] C --> C1["ऐनोड, कैथोड"] C --> C2["आयनों का संचलन"] A --> D["विद्युत लेपन"] D --> D1["क्रोमियम, निकल, टिन लेपन"] A --> E["प्रभाव"] E --> E1["बुलबुले, रंग परिवर्तन, जमाव"] A --> F["अनुप्रयोग"] F --> F1["धातु निष्कर्षण, परिष्करण"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: विद्युत अपघटन की प्रक्रिया

विद्युत अपघटन बैटरी (विद्युत स्रोत) ऐनोड (धन) कैथोड (ऋण) सुचालक विलयन (इलेक्ट्रोलाइट) ऋण आयन (-) → ऐनोड की ओर धन आयन (+) → कैथोड की ओर कैथोड पर धातु की परत जमती है स्वर्ण नियम धन आयन कैथोड पर एवं धातु कैथोड पर जमती है

आरेख 2: विद्युत लेपन

विद्युत लेपन (Electroplating) बैटरी ऐनोड (चाँदी की पट्टी) कैथोड (वस्तु) चाँदी का विलयन (इलेक्ट्रोलाइट) विद्युत धारा से विलयन के चाँदी आयन कैथोड (वस्तु) पर जमा होते हैं वस्तु पर चाँदी की पतली परत चढ़ जाती है Golden Rule विद्युत लेपन से सस्ती वस्तु पर महँगी धातु चढ़ाई जाती है

सामान्य गलतियाँ

  1. शुद्ध जल को सुचालक मानना: शुद्ध (आसुत) जल विद्युत का कुचालक है। जल में नमक/अम्ल घोलने पर ही विलयन सुचालक बनता है।
  2. ऐनोड एवं कैथोड की पहचान: ऐनोड धन इलेक्ट्रोड है और कैथोड ऋण इलेक्ट्रोड है। धातु का जमाव कैथोड (ऋण) पर होता है, ऐनोड पर नहीं।
  3. विद्युत लेपन की दिशा: विद्युत लेपन में वस्तु को कैथोड बनाया जाता है और लेपन वाली धातु को ऐनोड। छात्र इसे उल्टा कर देते हैं।
  4. चीनी एवं ग्लूकोज़ के विलयन को सुचालक मानना: चीनी का विलयन एवं ग्लूकोज़ का विलयन विद्युत के कुचालक होते हैं, क्योंकि इनमें आयन नहीं बनते।
  5. LED बनाम बल्ब: बहुत कम धारा पर बल्ब नहीं जलता, इसलिए कम चालकता जाँचने के लिए LED का उपयोग किया जाता है।
  6. विद्युत अपघटन बनाम विद्युत लेपन: विद्युत अपघटन में विलयन का अपघटन होता है, जबकि विद्युत लेपन में वस्तु पर धातु की परत चढ़ाई जाती है। दोनों भिन्न प्रक्रियाएँ हैं।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. सुचालक एवं कुचालक विलयनों की सूची याद करें (नमक-सुचालक, चीनी-कुचालक, शुद्ध जल-कुचालक)।
  2. विद्युत अपघटन की परिभाषा, ऐनोड/कैथोड की अवधारणा एवं आयनों की गति दिशा याद करें।
  3. विद्युत लेपन की प्रक्रिया एवं इसके अनुप्रयोग (क्रोमियम, निकल, टिन, चाँदी, सोना, जिंक) को तैयार रखें।
  4. विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव के चार परिणाम (बुलबुले, रंग, जमाव, ताप) याद करें।
  5. विलयन की चालकता जाँचने के लिए बनाए गए परिपथ तथा LED के उपयोग को समझें।
  6. धातु निष्कर्षण एवं परिष्करण में विद्युत अपघटन की भूमिका लिखने का अभ्यास करें।

निष्कर्ष

इस अध्याय में हमने सीखा कि विद्युत धारा के कुछ विलयनों से प्रवाहित होने पर रासायनिक प्रभाव होते हैं। सुचालक विलयनों में नमक का जलीय विलयन, नींबू का रस एवं सिरका शामिल हैं, जबकि शुद्ध जल, चीनी एवं ग्लूकोज़ का विलयन कुचालक हैं। विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव से विलयन में बुलबुले, रंग परिवर्तन, धातु का जमाव एवं ताप उत्पन्न हो सकता है। विद्युत अपघटन में विलयन का रासायनिक अपघटन होता है, जिसमें धन आयन कैथोड की ओर तथा ऋण आयन ऐनोड की ओर गति करते हैं। विद्युत लेपन में सस्ती वस्तुओं पर क्रोमियम, निकल, टिन, चाँदी या सोने जैसी धातुओं की पतली परत चढ़ाई जाती है, जिससे वस्तुएँ सुंदर एवं जंग प्रतिरोधी बनती हैं। विद्युत अपघटन का उपयोग धातुओं के निष्कर्षण एवं परिष्करण में भी होता है। विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव का ज्ञान उद्योग एवं दैनिक जीवन में अत्यंत उपयोगी है।