"द हैप्पी प्रिंस" (The Happy Prince) ऑस्कर वाइल्ड द्वारा लिखी गई एक हृदयस्पर्शी कहानी है। यह कहानी एक सुनहरी मूर्ति (प्रतिमा) के बारे में है, जिसे 'हैप्पी प्रिंस' कहा जाता है। यह मूर्ति एक ऊँचे खंभे पर खड़ी थी और उसके शरीर पर बहुमूल्य रत्न (नीलम, माणिक्य) जड़े थे। कहानी में हैप्पी प्रिंस अपनी मूर्ति के माध्यम से शहर के गरीबों की मदद करता है, और एक छोटी चिड़िया (स्वैलो) उसकी मदद करती है। यह कहानी त्याग, प्रेम और मानवता की सेवा का महत्व सिखाती है।
हैप्पी प्रिंस एक सुनहरी मूर्ति थी, जो एक ऊँचे खंभे पर स्थित थी। जब वह जीवित राजकुमार था, तो उसके पास सब कुछ था - सुख, वैभव और आनंद। परंतु उसकी मृत्यु के बाद उसकी मूर्ति को खंभे पर स्थापित किया गया। मूर्ति शहर के दुःख-दर्द को देखकर विचलित हो जाती है और गरीबों की मदद करने का निर्णय लेती है। मूर्ति की आँखों में आँसू भर आते हैं, क्योंकि उसे अब शहर की गरीबी और पीड़ा दिखती है।
कहानी का मुख्य तत्व मूर्ति और स्वैलो (निगल चिड़िया) के बीच का संबंध है। स्वैलो ने अपनी यात्रा के बीच में हैप्पी प्रिंस की मदद करने का निर्णय लिया। उसने मूर्ति के रत्न और सोने को उतारकर गरीबों में वितरित किया। अंत में स्वैलो की मृत्यु और मूर्ति की सुंदरता का नाश हो जाता है, परंतु उनका त्याग और प्रेम सर्वोच्च मूल्य के रूप में स्थापित होता है। यह कहानी दर्शाती है कि सच्ची खुशी दूसरों के दुःख में मदद करने से मिलती है।
हैप्पी प्रिंस की सुनहरी मूर्ति शहर के बीचों-बीच एक ऊँचे खंभे पर खड़ी थी। उसके शरीर पर बहुमूल्य नीलम और माणिक्य जड़े थे। उसकी आँखें नीलम की बनी थीं और उसकी तलवार पर एक माणिक्य था। शहर के लोग मूर्ति को 'हैप्पी प्रिंस' कहते थे, क्योंकि वह बहुत सुंदर थी।
एक रात एक स्वैलो (निगल चिड़िया) शहर में पहुँचा, जो मिस्र की ओर यात्रा कर रहा था। वह थककर हैप्पी प्रिंस की मूर्ति के पास रुक गया। स्वैलो को हैप्पी प्रिंस की आँखों में आँसू दिखाई दिए। मूर्ति ने स्वैलो से कहा कि वह शहर की गरीबी से दुखी है और अपनी मदद करने को कहा।
हैप्पी प्रिंस ने स्वैलो से कहा कि शहर में एक गरीब सीवस्ट्रेस (सिलाई करने वाली महिला) रहती है, जो एक गरीब बच्चे के लिए कपड़ा सिल रही है। मूर्ति ने स्वैलो से अपनी तलवार पर जड़ा माणिक्य उतारकर उस सीवस्ट्रेस को देने को कहा। स्वैलो ने वह माणिक्य सीवस्ट्रेस को दे दिया।
मूर्ति ने स्वैलो से अपनी आँखों में जड़े नीलम उतारकर एक युवा नाटककार को देने को कहा, जो गरीबी के कारण अपना नाटक पूरा नहीं कर पा रहा था। स्वैलो ने नीलम उतारकर नाटककार को दे दिया। इसके बाद मूर्ति अंधी हो गई, परंतु उसके त्याग से नाटककार को सहारा मिला।
मूर्ति ने स्वैलो से अपनी दूसरी आँख का नीलम उतारकर माचिस बेचने वाली एक लड़की को देने को कहा, जो गरीबी के कारण माचिस नहीं बेच पा रही थी। स्वैलो ने नीलम उतारकर लड़की को दे दिया। अब मूर्ति पूरी तरह अंधी हो गई।
मूर्ति ने स्वैलो से अपने पूरे शरीर का सोना उतारकर शहर के गरीबों में वितरित करने को कहा। स्वैलो ने सोने के पत्तों को उतारकर गरीबों में बाँट दिया। इससे शहर के कई गरीबों को मदद मिली और वे खुश हुए। परंतु मूर्ति अब रंगहीन और सुंदरता से रहित हो गई।
स्वैलो सर्दी के कारण बीमार हो गया। उसने मूर्ति से कहा कि वह मिस्र नहीं जा पाएगा। अंत में स्वैलो की मृत्यु मूर्ति के पैरों के पास हो गई। उसी समय मूर्ति का हृदय (सीसे का) भी टूट गया। शहर के मेयर ने मूर्ति की सुंदरता के नाश को देखकर उसे हटाने का आदेश दिया।
जब मूर्ति को हटाया गया, तो उसका सीसे का टूटा हुआ हृदय और स्वैलो की लाश को देखा गया। परमेश्वर ने उन दोनों को (हैप्पी प्रिंस के हृदय और स्वैलो को) स्वर्ग में सबसे मूल्यवान वस्तु माना। यह कहानी सिखाती है कि सच्चा प्रेम और त्याग ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
| पात्र | परिचय | प्रमुख गुण |
|---|---|---|
| हैप्पी प्रिंस (मूर्ति) | सुनहरी मूर्ति, दयालु | त्यागमयी, करुणामयी |
| स्वैलो | निगल चिड़िया | वफादार, समर्पित |
| सीवस्ट्रेस | गरीब महिला | मेहनती |
| युवा नाटककार | गरीब लेखक | प्रतिभाशाली |
| माचिस बेचने वाली लड़की | गरीब लड़की | मेहनती |
| मेयर | शहर का अधिकारी | व्यावहारिक, कलाहीन |
| क्रम | जरूरतमंद | वस्तु |
|---|---|---|
| 1 | सीवस्ट्रेस | तलवार का माणिक्य |
| 2 | युवा नाटककार | आँख का नीलम |
| 3 | माचिस बेचने वाली लड़की | दूसरी आँख का नीलम |
| 4 | शहर के गरीब | पूरे शरीर का सोना |
| प्रतीक | अर्थ |
|---|---|
| सोना और रत्न | बाहरी वैभव |
| मूर्ति | त्याग और करुणा |
| स्वैलो | प्रेम और वफादारी |
| सीसे का हृदय | मानवीय संवेदना |
"द हैप्पी प्रिंस" ऑस्कर वाइल्ड की एक अमर कहानी है, जो त्याग, प्रेम और मानवता की सेवा का सर्वोच्च महत्व सिखाती है। सुनहरी मूर्ति जिसे सब 'हैप्पी' कहते थे, वास्तव में शहर की गरीबी देखकर दुखी थी। उसने अपनी सुंदरता, रत्न और सोना गरीबों में बाँट दिया और अपने प्रेम के कारण स्वैलो ने उसका साथ निभाया। यह कहानी दर्शाती है कि बाहरी वैभव क्षणभंगुर है, परंतु आंतरिक मूल्य - करुणा, त्याग और प्रेम - ही सच्ची संपत्ति हैं। परमेश्वर के लिए भी यही वस्तुएँ सबसे मूल्यवान हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची खुशी दूसरों के दुःख को दूर करने में है।