"द लॉस्ट चाइल्ड" (The Lost Child) मुल्कराज आनंद द्वारा लिखी गई एक भावुक और मार्मिक कहानी है। यह कहानी एक छोटे बच्चे की है, जो अपने माता-पिता के साथ एक मेले (वसंतोत्सव) में जाता है। वहाँ की चमक-दमक और खिलौनों से मोहित होकर बच्चा अपने माता-पिता से भटक जाता है। कहानी में बच्चे की खोई हुई सुरक्षा और माँ-बाप के प्रति उसके प्रेम को सजीव रूप से प्रस्तुत किया गया है।
कहानी में बच्चा मेले की राह में जाते समय मिठाई, खिलौने, गुलाब के फूल, बंगाल की रोशनी (जगमगाते प्रकाश) और तरह-तरह की वस्तुओं को देखकर अपने माता-पिता से उन्हें दिलाने की ज़िद करता है। परंतु उसके माता-पिता उसे खरीदने से मना कर देते हैं। बच्चे की हर ज़िद के साथ उसकी इच्छाएँ बढ़ती जाती हैं, परंतु माता-पिता उसे समझाते रहते हैं।
कहानी का मुख्य मोड़ तब आता है जब भीड़ की चपेट में आकर बच्चा अपने माता-पिता से बिछड़ जाता है। वह मेले में अकेला रह जाता है और डर के कारण रोने लगता है। तभी एक अजनबी उसे रोते हुए देखता है और उसकी मदद करने की कोशिश करता है। अजनबी उसे मिठाई, खिलौने, फूल और रोशनी दिलाने की पेशकश करता है, परंतु बच्चा अब किसी चीज़ में रुचि नहीं लेता, केवल अपने माता-पिता को पाना चाहता है। कहानी का यह अंत हृदय को छू जाता है, क्योंकि बच्चे के लिए माँ-बाप ही सबसे बड़ी खुशी हैं।
बच्चा अपने माता-पिता के साथ वसंतोत्सव (वसंत का मेला) देखने जाता है। रास्ते में वह तरह-तरह के लोगों को देखता है। वहाँ गाँव के लोग, दुकानदार और कलाकार थे। बच्चा उत्साह से भरा हुआ था और मेले की ओर जल्दी पहुँचना चाहता था।
बच्चा मेले में पहुँचकर मिठाई की दुकान के सामने खड़ा हो जाता है। वह बूँदी के लड्डू, जलेबी, रसगुल्ला जैसी मिठाइयों को देखकर ललचा जाता है। वह अपनी माँ से मिठाई खरीदने की ज़िद करता है। परंतु माँ उसे मना कर देती है, क्योंकि उसका पेट खराब हो जाएगा।
बच्चा आगे बढ़कर खिलौनों की दुकान के सामने रुक जाता है। वहाँ लकड़ी के खिलौने, रंग-बिरंगे गुब्बारे और कलपुर्जों वाले खिलौने थे। बच्चा खिलौने लेने की ज़िद करता है, परंतु उसके माता-पिता उसे समझाते हैं कि वे पहले मेले में घूमेंगे, फिर खिलौने लेंगे।
बच्चा आगे बढ़कर गुलाब के फूलों की दुकान और बंगाल की रोशनी (जगमगाते प्रकाश) वाले स्थान पर रुक जाता है। वह फूलों और रोशनी से मोहित हो जाता है। वह अपने माता-पिता से इन्हें देखने और लेने की ज़िद करता है। परंतु माता-पिता उसे लेकर आगे बढ़ जाते हैं।
मेले की भीड़ में बच्चा अपने माता-पिता से बिछड़ जाता है। जब उसे पता चलता है कि वह अकेला है, तो वह डर जाता है और चिल्लाकर रोने लगता है। वह अपने माता-पिता को खोजने की कोशिश करता है, परंतु उसे वे कहीं नहीं दिखते।
एक अजनबी बच्चे को रोते हुए देखता है और उसके पास आता है। वह बच्चे को सांत्वना देता है और उसे मिठाई, खिलौने, फूल और रोशनी दिलाने की पेशकश करता है। परंतु बच्चा अब किसी चीज़ में रुचि नहीं लेता। वह केवल अपने माता-पिता को पाना चाहता है और रोता रहता है।
कहानी का अंत बच्चे के माता-पिता के प्रति प्रेम को दर्शाता है। बच्चे के लिए मिठाई, खिलौने, फूल और रोशनी से अधिक महत्वपूर्ण उसके माता-पिता हैं। कहानी यह संदेश देती है कि बच्चे की सबसे बड़ी खुशी उसके माता-पिता के साथ रहना है।
| पात्र | परिचय | प्रमुख गुण |
|---|---|---|
| बच्चा | कहानी का मुख्य पात्र | जिज्ञासु, चंचल, माँ-बाप से प्रेम |
| बच्चे की माँ | देखभाल करने वाली | स्नेहमयी, चिंतित |
| बच्चे के पिता | परिवार का मुखिया | सख्त पर प्रेमी |
| अजनबी | बच्चे की मदद करने वाला | दयालु, सहानुभूतिपूर्ण |
| क्रम | घटना |
|---|---|
| 1 | माता-पिता के साथ मेले जाना |
| 2 | मिठाई की ज़िद |
| 3 | खिलौनों की ज़िद |
| 4 | फूल और रोशनी देखना |
| 5 | भीड़ में बिछड़ना |
| 6 | अजनबी की मदद |
| 7 | केवल माता-पिता की चाह |
| इच्छा | माता-पिता की प्रतिक्रिया |
|---|---|
| मिठाई | मना किया (पेट खराब होगा) |
| खिलौने | बाद में लेने को कहा |
| गुलाब के फूल | नहीं लिए |
| बंगाल की रोशनी | आगे बढ़ गए |
"द लॉस्ट चाइल्ड" एक ऐसी कहानी है जो बच्चे के मनोविज्ञान और माता-पिता के प्रति उसके गहरे प्रेम को मार्मिक रूप से प्रस्तुत करती है। मेले की चमक-दमक और इच्छाओं के बीच खोया हुआ बच्चा अंततः यह सिद्ध करता है कि उसके लिए मिठाई, खिलौने, फूल और रोशनी से अधिक महत्वपूर्ण उसके माता-पिता हैं। कहानी हमें सिखाती है कि भौतिक वस्तुएँ क्षणिक सुख देती हैं, जबकि परिवार का प्रेम ही सच्चा और स्थायी आनंद है। यह कहानी माता-पिता को भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति सचेत करती है कि भीड़-भाड़ में बच्चों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।