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1. परिचय

निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry) वह विधा है जिसमें बीजगणित और ज्यामिति का संयोजन होता है। फ्रांसीसी गणितज्ञ रेने डेसकार्टेस (René Descartes) ने इस क्षेत्र की नींव रखी, इसलिए इसे डेसकार्टेसीय तल (Cartesian Plane) भी कहा जाता है। इस अध्याय में हम समतल में किसी बिंदु की स्थिति निर्धारित करना सीखेंगे। किसी बिंदु की स्थिति दो संख्याओं के क्रमित युग्म (x, y) द्वारा निर्धारित होती है, जहाँ x को भुज (Abscissa) और y को कोटि (Ordinate) कहते हैं।

2. निर्देशांक अक्ष (Coordinate Axes)

एक समतल में दो परस्पर लंबवत रेखाएँ खींचने पर ये एक दूसरे को एक बिंदु पर काटती हैं। इन्हें निर्देशांक अक्ष कहते हैं। - क्षैतिज (horizontal) रेखा को X-अक्ष (X-axis) कहते हैं। - ऊर्ध्वाधर (vertical) रेखा को Y-अक्ष (Y-axis) कहते हैं। - दोनों अक्षों का प्रतिच्छेद बिंदु मूल बिंदु (Origin) कहलाता है, जिसे $O$ द्वारा निरूपित करते हैं। इसके निर्देशांक $(0, 0)$ होते हैं।

चार चतुर्थांश (Four Quadrants)

दोनों अक्ष समतल को चार भागों में विभाजित करते हैं, जिन्हें चतुर्थांश (Quadrants) कहते हैं:

चतुर्थांश X का चिह्न Y का चिह्न उदाहरण
प्रथम चतुर्थांश + + (3, 4)
द्वितीय चतुर्थांश + (−3, 4)
तृतीय चतुर्थांश (−3, −4)
चतुर्थ चतुर्थांश + (3, −4)

3. किसी बिंदु के निर्देशांक (Coordinates of a Point)

किसी बिंदु $P$ की स्थिति $(x, y)$ के रूप में लिखी जाती है, जहाँ: - $x$ = मूल बिंदु से $P$ की X-अक्ष के समांतर दूरी (भुज)। - $y$ = मूल बिंदु से $P$ की Y-अक्ष के समांतर दूरी (कोटि)।

क्रमित युग्म में पहला पद हमेशा $x$-निर्देशांक होता है। $(x, y)$ में $x$ और $y$ के क्रम को बदलने से बिंदु बदल जाता है, इसीलिए इसे क्रमित युग्म (Ordered Pair) कहते हैं। उदाहरण के लिए, $(3, 4)$ और $(4, 3)$ अलग-अलग बिंदु हैं।

4. विशेष बिंदुओं के निर्देशांक

X-अक्ष से दूरी और Y-अक्ष से दूरी

किसी बिंदु $P(x, y)$ की: - X-अक्ष से दूरी = $|y|$ (कोटि का निरपेक्ष मान) - Y-अक्ष से दूरी = $|x|$ (भुज का निरपेक्ष मान)

उदाहरण: बिंदु $(4, -3)$ की X-अक्ष से दूरी 3 इकाई और Y-अक्ष से दूरी 4 इकाई है।

5. बिंदु आलेखित करने की विधि (Plotting a Point)

किसी बिंदु $P(x, y)$ को आलेखित करने के लिए: 1. X-अक्ष पर मूल बिंदु से $x$ इकाई की दूरी पर एक बिंदु अंकित करें। 2. उस बिंदु से X-अक्ष पर लंब खींचें। 3. इस लंब पर $y$ इकाई की दूरी तय करके बिंदु अंकित करें। 4. यही बिंदु $P(x, y)$ है।

6. बिंदुओं को जोड़कर आकृति बनाना

विभिन्न बिंदुओं को उचित क्रम में जोड़कर विभिन्न ज्यामितीय आकृतियाँ (त्रिभुज, आयत, वर्ग) प्राप्त की जा सकती हैं।

उदाहरण: बिंदु $A(1, 1)$, $B(1, 4)$, $C(4, 4)$, $D(4, 1)$ को जोड़ने पर एक वर्ग प्राप्त होता है, जिसकी प्रत्येक भुजा 3 इकाई है।

त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: चतुर्थांशों में चिह्न

चतुर्थांश निर्देशांक चिह्न (x, y) प्रतिनिधि बिंदु
प्रथम चतुर्थांश (+, +) (5, 2)
द्वितीय चतुर्थांश (−, +) (−5, 2)
तृतीय चतुर्थांश (−, −) (−5, −2)
चतुर्थ चतुर्थांश (+, −) (5, −2)

तालिका 2: अक्षों पर बिंदु

स्थिति निर्देशांक उदाहरण
X-अक्ष पर (x, 0) (3, 0)
Y-अक्ष पर (0, y) (0, -4)
मूल बिंदु पर (0, 0) (0, 0)
X-अक्ष की धनात्मक दिशा (+, 0) (7, 0)

माइंड मैप

graph TD A["निर्देशांक ज्यामिति"] --> B["निर्देशांक अक्ष"] B --> C["X-अक्ष (क्षैतिज)"] B --> D["Y-अक्ष (ऊर्ध्वाधर)"] B --> E["मूल बिंदु O(0,0)"] A --> F["बिंदु (x, y)"] F --> G["x = भुज"] F --> H["y = कोटि"] A --> I["चार चतुर्थांश"] I --> J["(+,+), (−,+), (−,−), (+,−)"] A --> K["बिंदु आलेखित करना"]

महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

आरेख 1: कार्तीय तल और चार चतुर्थांश

कार्तीय तल: चार चतुर्थांश X Y O द्वितीय (−,+) प्रथम (+,+) चतुर्थ (+,−) तृतीय (−,−) (3, 2) (−3, 2) Golden Rule: चतुर्थांशों का क्रम ACW: (+,+)→(−,+)→(−,−)→(+,−)

आरेख 2: बिंदु (4, 3) आलेखित करना

बिंदु P(4, 3) आलेखित करना X Y O 1 2 3 4 P(4, 3) 3 (कोटि) 4 (भुज) स्वर्ण नियम: पहले भुज (X), फिर कोटि (Y) Golden Rule: Always (x, y) क्रम में

सामान्य गलतियाँ

  1. क्रमित युग्म $(x, y)$ में भुज और कोटि के क्रम को बदल देना; $(3, 4)$ और $(4, 3)$ अलग बिंदु हैं।
  2. X-अक्ष पर बिंदु की कोटि को $0$ के स्थान पर भुज को $0$ मान लेना; X-अक्ष पर $(x, 0)$ होता है।
  3. चतुर्थांशों में चिह्नों को भ्रमित करना, विशेषकर तृतीय और चतुर्थ चतुर्थांश में।
  4. मूल बिंदु से दूरी मापते समय निरपेक्ष मान न लेना; दूरी सदैव धनात्मक होती है।
  5. बिंदु आलेखित करते समय पहले Y-अक्ष की दूरी और फिर X-अक्ष की दूरी लेना, जबकि क्रम (x, y) है।
  6. द्वितीय चतुर्थांश में भुज को धनात्मक मान लेना; वहाँ भुज ऋणात्मक और कोटि धनात्मक होती है।
  7. अक्षों पर बिंदुओं को किसी चतुर्थांश का सदस्य मान लेना; अक्षों पर स्थित बिंदु किसी भी चतुर्थांश में नहीं होते।

परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक चतुर्थांश के चिह्नों का एक निश्चित क्रम याद रखें: (+, +), (−, +), (−, −), (+, −)।
  2. "X-अक्ष से दूरी" पूछने पर कोटि का निरपेक्ष मान और "Y-अक्ष से दूरी" पूछने पर भुज का निरपेक्ष मान लें।
  3. यदि दो बिंदुओं के निर्देशांक समान दिए हों तो वे एक ही बिंदु होते हैं, यह कथन परीक्षा में बहुधा पूछा जाता है।
  4. किसी आकृति (जैसे वर्ग) के शीर्ष ज्ञात करने के प्रश्न में सभी बिंदुओं को आलेखित करके देखें।
  5. बिंदु आलेखित करते समय ग्राफ पेपर पर X और Y अक्ष को साफ-साफ खींचें और पैमाना सही रखें।
  6. याद रखें कि X-अक्ष पर स्थित बिंदु (x, 0) के रूप में और Y-अक्ष पर स्थित बिंदु (0, y) के रूप में होते हैं।

निष्कर्ष

निर्देशांक ज्यामिति बीजगणित और ज्यामिति के बीच का सेतु है। भुज, कोटि, मूल बिंदु, अक्ष और चतुर्थांशों की अवधारणाएँ किसी बिंदु की स्थिति को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करने की विधि प्रदान करती हैं। यह अध्याय आगे की कक्षाओं में सरल रेखाओं, वक्रों तथा उनके समीकरणों को समझने का आधार है। बिंदुओं को आलेखित करने के कौशल से विद्यार्थी विभिन्न ज्यामितीय आकृतियों की संरचना और उनके गुणों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। यह अध्याय वास्तविक जीवन में स्थान निर्धारण, नक्शे और ग्राफ बनाने में भी प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी है।