रेखाएँ और कोण ज्यामिति के वे मूल तत्व हैं जिन पर संपूर्ण ज्यामिति का अध्ययन आधारित है। इस अध्याय में हम कोणों के प्रकार, रेखाओं का प्रतिच्छेदन, संगत कोण, एकांतर कोण, तिर्यक रेखा (transversal) तथा समांतर रेखाओं के गुणों का अध्ययन करेंगे। कोणों के योग संबंधी प्रमेयों जैसे कि एक त्रिभुज के तीनों अंत:कोणों का योग 180° होता है, का भी इसी अध्याय में अध्ययन किया जाता है। कोणों की माप डिग्री (°) में की जाती है।
उदाहरण: $30°$ का पूरक कोण $60°$ है और संपूरक कोण $150°$ है।
जब दो कोणों का एक उभयनिष्ठ शीर्ष, एक उभयनिष्ठ भुजा हो और वे उस भुजा के विपरीत ओर स्थित हों, तो वे आसन्न कोण कहलाते हैं।
यदि दो आसन्न कोण इस प्रकार हैं कि उनकी अभयनिष्ठ भुजा के अन्य दोनों भुजाएँ विपरीत किरणें हों, तो उन कोणों का योग $180°$ होता है। इसे रैखिक युग्म अभिगृहीत कहते हैं। $$\angle 1 + \angle 2 = 180°$$
जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, तो बनने वाले विपरीत कोण शीर्षाभिमुख कोण कहलाते हैं।
प्रमेय 6.1: यदि दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। यदि दो रेखाएँ $AB$ और $CD$ बिंदु $O$ पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो: $$\angle AOC = \angle BOD \quad \text{और} \quad \angle AOD = \angle BOC$$
किसी रेखा को दो या दो से अधिक समांतर रेखाओं को भिन्न-भिन्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करने वाली रेखा को तिर्यक रेखा कहते हैं। तिर्यक रेखा द्वारा बनाए गए कोण: - संगत कोण (Corresponding Angles): समान स्थिति वाले कोण, बराबर होते हैं। - एकांतर अंत:कोण (Alternate Interior Angles): तिर्यक रेखा के विपरीत ओर स्थित, बराबर होते हैं। - एकांतर बाह्य कोण (Alternate Exterior Angles): बराबर होते हैं। - अंत:कोण (Interior Angles): समांतर रेखाओं के बीच स्थित एक ही ओर के कोणों का योग $180°$ होता है।
यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो प्रत्येक संगत कोण युग्म बराबर होता है।
यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो एकांतर अंत:कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है।
यदि एक तिर्यक रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करती है, तो अंत:कोणों के प्रत्येक युग्म का योग $180°$ होता है।
यदि एक तिर्यक रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करती है कि संगत कोणों का कोई युग्म बराबर हो, तो वे दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं। इसके समरूप कथन एकांतर कोणों और अंत:कोणों के लिए भी सत्य हैं।
किसी त्रिभुज के तीनों अंत:कोणों का योग $180°$ होता है। $$\angle A + \angle B + \angle C = 180°$$
यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा बढ़ाई जाए, तो इस प्रकार बना बाह्य कोण दोनों अंत:विपरीत कोणों के योग के बराबर होता है। $$\text{बाह्य कोण} = \angle 1 + \angle 2$$
| कोण | माप | उदाहरण |
|---|---|---|
| न्यून कोण | 0° < θ < 90° | 45° |
| समकोण | 90° | 90° |
| अधिक कोण | 90° < θ < 180° | 135° |
| सरल कोण | 180° | 180° |
| प्रतिवर्ती कोण | 180° < θ < 360° | 300° |
| कोणों का प्रकार | संबंध |
|---|---|
| संगत कोण | बराबर |
| एकांतर अंत:कोण | बराबर |
| एकांतर बाह्य कोण | बराबर |
| एक ही ओर के अंत:कोण | योग 180° |
रेखाएँ और कोण ज्यामिति की नींव हैं। कोणों के प्रकार, रैखिक युग्म, शीर्षाभिमुख कोण, समांतर रेखाओं और तिर्यक रेखा के कोणों के गुण तथा त्रिभुज के कोण योग प्रमेय इस अध्याय के मुख्य विषय हैं। इन अवधारणाओं का गहन ज्ञान त्रिभुज, चतुर्भुज और बहुभुजों के गुणों को समझने में सहायक है। परीक्षा में इस अध्याय से कोण मापन, सिद्ध करने और गणना करने वाले प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। नियमित अभ्यास और आरेख बनाने की आदत से इस अध्याय में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।