संख्या पद्धति गणित का वह आधारशिला है जिस पर संपूर्ण गणितीय संरचना खड़ी होती है। इस अध्याय में हम प्राकृतिक संख्याएँ, पूर्ण संख्याएँ, पूर्णांक, परिमेय संख्याएँ, अपरिमेय संख्याएँ और वास्तविक संख्याओं की संरचना को समझेंगे। साथ ही वास्तविक संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित करने, उनके बीच में अपरिमेय संख्याओं को स्थापित करने तथा उन पर संक्रियाओं (गुणा, भाग, योग, व्यवकलन) के नियमों का अध्ययन करेंगे। हम घातांकों के नियमों (exponent laws) से भी परिचित होंगे, जिनका उपयोग करके हम $2^{1/2}$, $3^{2/3}$ जैसे भिन्नात्मक घातांक वाले व्यंजकों को सरल करना सीखेंगे।
वे संख्याएँ जो गिनती में प्रयोग होती हैं, प्राकृतिक संख्याएँ कहलाती हैं। इन्हें $N$ द्वारा निरूपित करते हैं। $$N = {1, 2, 3, 4, \dots}$$
प्राकृतिक संख्याओं में शून्य (0) को जोड़ने पर पूर्ण संख्याएँ प्राप्त होती हैं। इन्हें $W$ द्वारा निरूपित करते हैं। $$W = {0, 1, 2, 3, 4, \dots}$$
पूर्ण संख्याओं में ऋणात्मक संख्याओं को जोड़ने पर पूर्णांक प्राप्त होते हैं। इन्हें $Z$ द्वारा निरूपित करते हैं। $$Z = {\dots, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, \dots}$$
वे संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ $p$ और $q$ पूर्णांक हैं तथा $q \neq 0$, परिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। इन्हें $Q$ द्वारा निरूपित करते हैं। उदाहरण: $\frac{2}{3}$, $-\frac{5}{7}$, $0$, $4$ (क्योंकि $4 = \frac{4}{1}$)।
वे संख्याएँ जिन्हें $\frac{p}{q}$ के रूप में नहीं लिखा जा सकता, अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। उदाहरण: $\sqrt{2}$, $\sqrt{3}$, $\sqrt{5}$, $\pi$। अपरिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार अनवसानी तथा अनावर्ती (non-terminating and non-recurring) होता है।
सभी परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ मिलकर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय $R$ बनाती हैं। प्रत्येक वास्तविक संख्या को संख्या रेखा पर एक बिंदु द्वारा निरूपित किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण नियम: यदि किसी परिमेय संख्या $\frac{p}{q}$ के हर $q$ को अभाज्य गुणनखंडों के रूप में केवल $2^m \times 5^n$ के रूप में लिखा जा सके, तो उसका दशमलव प्रसार सांत होगा। अन्यथा यह अनवसानी आवर्ती होगा। जैसे $\frac{1}{8}$ का हर $8 = 2^3$, अतः दशमलव प्रसार सांत है ($0.125$)।
$\sqrt{2}$ को संख्या रेखा पर निरूपित करने के लिए: 1. संख्या रेखा पर $0$ से $1$ तक खंड $OA$ लें। 2. $A$ पर लंब $AB = 1$ इकाई खींचें। 3. $OB = \sqrt{1^2 + 1^2} = \sqrt{2}$ होगा (पाइथागोरस प्रमेय से)। 4. परकार की सहायता से $O$ को केंद्र मानकर $OB$ त्रिज्या का चाप खींचें जो संख्या रेखा को $P$ पर काटेगा। तब $OP = \sqrt{2}$।
इसी विधि को दोहराकर $\sqrt{3}, \sqrt{5}, \sqrt{6}, \dots$ को भी संख्या रेखा पर दर्शाया जा सकता है।
उदाहरण: $0.6\overline{8}$ को $\frac{p}{q}$ रूप में लिखिए। हल: माना $x = 0.688888\dots$ दोनों पक्षों को $10$ से गुणा करने पर, $10x = 6.8888\dots$ घटाने पर, $10x - x = 6.8888\dots - 0.6888\dots = 6.2$ $9x = \frac{62}{10}$, अतः $x = \frac{62}{90} = \frac{31}{45}$।
$a$ और $b$ वास्तविक संख्याएँ हैं तथा $m, n$ परिमेय संख्याएँ हैं: $$a^m \times a^n = a^{m+n}, \quad \frac{a^m}{a^n} = a^{m-n}, \quad (a^m)^n = a^{mn}$$ $$a^0 = 1, \quad a^{-m} = \frac{1}{a^m}, \quad (ab)^m = a^m b^m, \quad \left(\frac{a}{b}\right)^m = \frac{a^m}{b^m}$$
महत्वपूर्ण सूत्र: $$\sqrt[n]{x} = x^{1/n}, \quad \sqrt[n]{x^m} = x^{m/n}$$
किसी अपरिमेय संख्या के हर से मूल चिह्न हटाने की प्रक्रिया को परिमेयकरण कहते हैं। यह संयुग्मी (conjugate) से गुणा करके किया जाता है।
उदाहरण: $\frac{1}{\sqrt{2} + 1}$ को परिमेय कीजिए। $$\frac{1}{\sqrt{2} + 1} \times \frac{\sqrt{2} - 1}{\sqrt{2} - 1} = \frac{\sqrt{2} - 1}{(\sqrt{2})^2 - 1^2} = \frac{\sqrt{2} - 1}{2 - 1} = \sqrt{2} - 1$$
| समुच्चय | प्रतीक | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्राकृतिक संख्याएँ | $N$ | गिनती में प्रयुक्त संख्याएँ | $1, 2, 3, \dots$ |
| पूर्ण संख्याएँ | $W$ | $N \cup {0}$ | $0, 1, 2, 3, \dots$ |
| पूर्णांक | $Z$ | धन, ऋण तथा शून्य | $\dots, -2, -1, 0, 1, 2, \dots$ |
| परिमेय संख्याएँ | $Q$ | $p/q$ जहाँ $q \neq 0$ | $\frac{2}{3}, \frac{-5}{7}$ |
| अपरिमेय संख्याएँ | — | $p/q$ रूप में नहीं लिखी जा सकतीं | $\sqrt{2}, \pi$ |
| वास्तविक संख्याएँ | $R$ | $Q \cup$ अपरिमेय | सभी संख्याएँ |
| दशमलव प्रसार | प्रकार | उदाहरण | $p/q$ रूप? |
|---|---|---|---|
| सांत | परिमेय | $0.75 = \frac{3}{4}$ | हाँ |
| अनवसानी आवर्ती | परिमेय | $0.\overline{3} = \frac{1}{3}$ | हाँ |
| अनवसानी अनावर्ती | अपरिमेय | $0.1010010001\dots$ | नहीं |
संख्या पद्धति पूरे गणित का आधार है। परिमेय और अपरिमेय संख्याओं का ज्ञान, दशमलव प्रसार की पहचान, $p/q$ रूप में बदलने की विधि, परिमेयकरण तथा घातांकों के नियम कक्षा 9 के गणित की नींव हैं। इन्हें अच्छी तरह समझने से बीजगणित, ज्यामिति और वास्तविक जीवन के गणितीय प्रश्नों को हल करने में सहायता मिलती है। नियमित अभ्यास तथा ऊपर दी गई युक्तियों का पालन करके इस अध्याय में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। संख्याओं के बीच संबंधों की यह समझ ही उच्च कक्षाओं में जटिल संख्याओं और फलनों को समझने का मार्ग प्रशस्त करती है।