"भूकम्पः" कक्षा नौ की संस्कृत पाठ्यपुस्तक शेमुषी का द्वादश पाठ है। भूकम्पः शब्द की रचना है — भू + कम्प। भू का अर्थ है पृथ्वी और कम्प का अर्थ है कांपना। अतः भूकम्प का अर्थ है — पृथ्वी का कांपना अथवा भूकम्प (भूचाल)। पृथ्वी के भीतर होने वाले आन्तरिक परिवर्तनों के कारण धरती कांपती है और इससे भूकम्प उत्पन्न होता है। भूकम्प प्रकृति की एक भयंकर विपत्ति है, जो कभी-कभी अत्यधिक विनाश करती है। भूकम्प के कारण भवन गिर जाते हैं, मनुष्य और पशु घायल हो जाते हैं और जन-धन की अपार हानि होती है।
यह पाठ भूकम्प के कारण, उसके प्रभाव और उससे बचने के उपायों का वर्णन करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग अनेक विशाल प्लेटों (पट्टिकाओं) में विभक्त है। ये प्लेटें सदा धीरे-धीरे गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं अथवा एक-दूसरे पर दबाव डालती हैं, तो पृथ्वी के भीतर ऊर्जा एकत्रित होती है और अचानक मुक्त होने पर भूकम्प उत्पन्न होता है। ज्वालामुखी विस्फोट भी भूकम्प का कारण बन सकता है। भूकम्प की तीव्रता रिक्टर पैमाने द्वारा मापी जाती है।
यह पाठ विद्यार्थियों को भूकम्प से बचाव के उपायों की जानकारी देता है। भूकम्प के समय घबराना नहीं चाहिए। सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए, मजबूत टेबल के नीचे बैठना चाहिए और खुला स्थान पाकर भवन से दूर रहना चाहिए। भूकम्प रोधी भवनों का निर्माण करना चाहिए। इसके साथ ही इस पाठ से भूकम्प, कम्पन, प्लेट, रिक्टर, सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का ज्ञान होता है। प्रकृति की इस विपत्ति का सामना धैर्य और सजगता से करना चाहिए, यही इस पाठ की शिक्षा है।
भूकम्प का अर्थ है पृथ्वी का कांपना। भू + कम्प = भूकम्प। जब पृथ्वी की सतह अचानक कांपने लगती है, तो उसे भूकम्प कहते हैं। यह प्रकृति की प्रचण्ड शक्तियों का प्रतीक है। भूकम्प कुछ क्षणों से लेकर कुछ मिनटों तक रह सकता है। इसके कम्पन से धरती हिलने लगती है और उस पर खड़ी वस्तुएँ गिर जाती हैं।
पृथ्वी का बाहरी भाग अनेक प्लेटों में विभक्त है। ये प्लेटें धीरे-धीरे चलती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे पर दबाव डालती हैं, तो वहाँ ऊर्जा एकत्रित होती है। यह ऊर्जा अचानक मुक्त होती है, जिससे भूमि कांपने लगती है। इसके अतिरिक्त ज्वालामुखी का विस्फोट भी भूकम्प का कारण बन सकता है। भूकम्प का केन्द्र पृथ्वी के भीतर होता है और वहीं से कम्पन चारों ओर फैलता है।
भूकम्प का प्रभाव अत्यन्त विनाशकारी होता है। इससे भवन गिर जाते हैं, सड़कें टूट जाती हैं और पुल नष्ट हो जाते हैं। लोग अपने प्राण और सम्पत्ति खो देते हैं। भूकम्प के कारण नदियों का मार्ग बदल सकता है, पर्वत खिसक सकते हैं और समुद्र में विशाल तरंगें उत्पन्न हो सकती हैं। अतः भूकम्प के प्रति सजग रहना आवश्यक है।
भूकम्प से बचने के लिए हमें सजग रहना चाहिए। भूकम्प रोधी भवनों का निर्माण करना चाहिए। भूकम्प के समय भवन से बाहर खुले स्थान पर जाना चाहिए। यदि भवन में हों, तो मजबूत टेबल या दरवाजे के नीचे बैठ जाना चाहिए और सिर की रक्षा करनी चाहिए। घबराकर भागना नहीं चाहिए। आपातकालीन सामग्री सदा तैयार रखनी चाहिए। इन उपायों से भूकम्प की हानि को कम किया जा सकता है।
भूकम्प जैसी प्राकृतिक विपत्तियों को रोका तो नहीं जा सकता, परन्तु उनके प्रति सजग रहकर उनकी हानि को अवश्य कम किया जा सकता है। विद्यार्थियों को भूकम्प से बचाव के अभ्यास (ड्रिल) में भाग लेना चाहिए और विद्यालय में भूकम्प के समय अपनाए जाने वाले नियमों को जानना चाहिए। भूकम्प के समय खिड़कियों, दर्पणों, अलमारियों और भारी वस्तुओं से दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये गिर सकती हैं। लिफ्ट का प्रयोग नहीं करना चाहिए, वरन् सीढ़ियों से नीचे उतरना चाहिए। भवन से बाहर निकलने के बाद खुले मैदान में जाना चाहिए और विद्युत तारों तथा खम्भों से दूर रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त भूकम्प के पश्चात् शेष कम्पनों (आफ्टरशॉक) से भी सावधान रहना चाहिए। इस प्रकार सजगता और सही जानकारी के द्वारा ही हम भूकम्प का सामना कर सकते हैं।
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| भूकम्पः | भूकम्प, धरती का कांपना |
| कम्पनम् | कांपना |
| प्लेटः | प्लेट, पट्टिका |
| रिक्टरमानम् | रिक्टर पैमाना |
| तीव्रता | तीव्रता, प्रबलता |
| भवनम् | इमारत, मकान |
| विपत्तिः | आपदा, विपत्ति |
| सुरक्षा | रक्षा |
| आपातकालीनः | आपातकालीन |
| विस्फोटः | विस्फोट |
| केन्द्रम् | केन्द्र |
| प्रचण्डः | प्रचण्ड, भयंकर |
| विनाशः | तबाही |
| सजगता | सतर्कता |
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| अर्थ | पृथ्वी का कांपना |
| मुख्य कारण | प्लेटों का टकराना |
| माप का पैमाना | रिक्टर पैमाना |
| अवधि | कुछ क्षण से कुछ मिनट |
| उपाय | विवरण |
|---|---|
| भवनरोधी निर्माण | मजबूत इमारतें |
| खुला स्थान | भवन से दूर जाना |
| टेबल के नीचे | सिर की रक्षा |
| आपातकालीन सामग्री | तैयार रखना |
| सजगता | घबराना नहीं |
भूकम्पः पाठ पृथ्वी के कांपने की प्राकृतिक घटना का वर्णन करता है। प्लेटों के टकराने से उत्पन्न ऊर्जा के मुक्त होने पर भूकम्प आता है, जो अत्यन्त विनाशकारी होता है। रिक्टर पैमाने से इसकी तीव्रता मापी जाती है। भूकम्प के समय घबराकर भागना नहीं चाहिए, वरन् धैर्य और सजगता से सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए। भवनरोधी निर्माण, खुले स्थान पर जाना, टेबल के नीचे बैठना और आपातकालीन तैयारी से भूकम्प की हानि कम की जा सकती है। यह पाठ हमें सिखाता है कि प्रकृति की विपत्तियों का सामना भय से नहीं, धैर्य और सजगता से करना चाहिए।