"शब्दरूपाणि" कक्षा नौ की संस्कृत पाठ्यपुस्तक शेमुषी का सप्तदश पाठ है। शब्दरूपाणि का अर्थ है — शब्दों के रूप। संस्कृत भाषा में शब्दों के रूप लिङ्ग, वचन और विभक्ति के अनुसार बदलते हैं। जिस रूप में शब्द का मूल रूप होता है, उसे प्रातिपदिक कहते हैं। प्रातिपदिक से विभक्तियाँ जोड़कर शब्द के विभिन्न रूप बनते हैं। संस्कृत में छह विभक्तियाँ और सम्बोधन होते हैं, तथा प्रत्येक विभक्ति में तीन वचन होते हैं। अतः प्रत्येक नाम के लगभग इक्कीस रूप होते हैं। इन रूपों का ज्ञान संस्कृत वाक्य-रचना के लिए आवश्यक है।
संस्कृत में शब्दों का वर्गीकरण उनके अन्तिम वर्ण और लिङ्ग के आधार पर होता है। अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्द — राम, बालक, देव, वृक्ष। अकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द — बाला, लता। अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द — फल, जल, पुस्तक। इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द — मति, बुद्धि। ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द — नदी, भारती। उकारान्त पुल्लिङ्ग शब्द — गुरु, भानु। ऋकारान्त शब्द — पितृ, मातृ। इन सबके रूप अलग-अलग नियमों से बनते हैं।
यह पाठ विद्यार्थियों को शब्द रूपों के नियमों से परिचित कराता है। संस्कृत में वाक्य बनाते समय कर्ता, कर्म आदि के अनुसार शब्दों के रूप बदलने पड़ते हैं। उदाहरण के लिए — "रामः फलं खादति" में रामः प्रथमा विभक्ति है, जबकि "रामं पश्य" में रामं द्वितीया विभक्ति है। इस प्रकार शब्द रूपों का सही ज्ञान ही शुद्ध वाक्य-रचना का आधार है। इसीलिए विद्यार्थियों को राम, बाला, फल, मति, नदी, गुरु आदि शब्दों के रूप तीनों वचनों में कण्ठस्थ करने चाहिए।
अकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों के रूप समान होते हैं। राम शब्द के रूप — एकवचन में रामः, रामम्, रामेण, रामाय, रामात्, रामस्य, रामे, हे राम। द्विवचन में रामौ, रामौ, रामाभ्याम्, रामाभ्याम्, रामाभ्याम्, रामयोः, रामयोः, हे रामौ। बहुवचन में रामाः, रामान्, रामैः, रामेभ्यः, रामेभ्यः, रामाणाम्, रामेषु, हे रामाः। इसी प्रकार बालक, देव, वृक्ष, गुरुकुल जैसे शब्दों के रूप बनते हैं।
आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों में बाला, लता, कन्या आदि आते हैं। बाला शब्द के रूप — एकवचन में बाला, बालाम्, बालया, बालायै, बालायाः, बालायाः, बालायाम्, हे बाले। द्विवचन में बाले, बाले, बालाभ्याम्, बालाभ्याम्, बालाभ्याम्, बालयोः, बालयोः, हे बाले। बहुवचन में बालाः, बालाः, बालाभिः, बालाभ्यः, बालाभ्यः, बालानाम्, बालासु, हे बालाः।
अकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्दों में फल, जल, पुस्तक, भवन आदि आते हैं। फल शब्द के रूप — एकवचन में फलम्, फलम्, फलेन, फलाय, फलात्, फलस्य, फले, हे फल। द्विवचन में फले, फले, फलाभ्याम्, फलाभ्याम्, फलाभ्याम्, फलयोः, फलयोः, हे फले। बहुवचन में फलानि, फलानि, फलैः, फलेभ्यः, फलेभ्यः, फलानाम्, फलेषु, हे फलानि।
इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों में मति, बुद्धि, शान्ति आदि आते हैं। मति शब्द के रूप — मतिः, मतिम्, मत्या, मत्यै, मत्याः, मत्याः, मत्याम्, हे मते। द्विवचन में मती, मती, मतिभ्याम्, मतिभ्याम्, मतिभ्याम्, मत्योः, मत्योः, हे मती। बहुवचन में मतयः, मतीः, मतिभिः, मतिभ्यः, मतिभ्यः, मतीनाम्, मतिषु, हे मतयः। ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्दों में नदी, भारती आदि आते हैं। नदी शब्द के रूप — नदी, नदीम्, नद्या, नद्यै, नद्याः, नद्याः, नद्याम्, हे नदि।
उकारान्त पुल्लिङ्ग शब्दों में गुरु, भानु, वायु आदि आते हैं। गुरु शब्द के रूप — गुरुः, गुरुम्, गुरुणा, गुरवे, गुरोः, गुरोः, गुरौ, हे गुरो। ऋकारान्त शब्दों में पितृ और मातृ आते हैं। पितृ शब्द के रूप — पिता, पितरम्, पित्रा, पित्रे, पितुः, पितुः, पितरि, हे पितः।
सर्वनाम तद् शब्द के तीनों लिङ्गों में रूप होते हैं। पुल्लिङ्ग में — सः, तम्, तेन, तस्मै, तस्मात्, तस्य, तस्मिन्। द्विवचन में तौ, तौ, ताभ्याम्, ताभ्याम्, ताभ्याम्, तयोः, तयोः। बहुवचन में ते, तान्, तैः, तेभ्यः, तेभ्यः, तेषाम्, तेषु। स्त्रीलिङ्ग में — सा, ताम्, तया, तस्यै, तस्याः, तस्याः, तस्याम्। नपुंसकलिङ्ग में — तत्, तत्, तेन, तस्मै, तस्मात्, तस्य, तस्मिन्।
अस्मद् (मैं) शब्द के रूप — अहम्, माम्, मया, मह्यम्, मत्, मम, मयि। द्विवचन में आवाम्, आवाम्, आवाभ्याम्, आवाभ्याम्, आवाभ्याम्, आवयोः, आवयोः। बहुवचन में वयम्, अस्मान्, अस्माभिः, अस्मभ्यम्, अस्मत्, अस्माकम्, अस्मासु। युष्मद् (तुम) शब्द के रूप — त्वम्, त्वाम्, त्वया, तुभ्यम्, त्वत्, तव, त्वयि। बहुवचन में यूयम्, युष्मान्, युष्माभिः, युष्मभ्यम्, युष्मत्, युष्माकम्, युष्मासु।
| संस्कृत शब्द | हिंदी अर्थ |
|---|---|
| शब्दरूपाणि | शब्दों के रूप |
| प्रातिपदिकम् | शब्द का मूल रूप |
| विभक्तिः | विभक्ति |
| लिङ्गम् | लिंग |
| वचनम् | वचन |
| पुल्लिङ्गम् | पुल्लिंग |
| स्त्रीलिङ्गम् | स्त्रीलिंग |
| नपुंसकलिङ्गम् | नपुंसकलिंग |
| सर्वनाम | सर्वनाम |
| एकवचनम् | एकवचन |
| द्विवचनम् | द्विवचन |
| बहुवचनम् | बहुवचन |
| सम्बोधनम् | पुकारना |
| अन्तिमः वर्णः | अंतिम अक्षर |
| शब्द का भेद | लिङ्ग | उदाहरण |
|---|---|---|
| अकारान्त | पुल्लिङ्ग | राम, बालक, देव |
| आकारान्त | स्त्रीलिङ्ग | बाला, लता |
| अकारान्त | नपुंसक | फल, जल, पुस्तक |
| इकारान्त | स्त्रीलिङ्ग | मति, बुद्धि |
| ईकारान्त | स्त्रीलिङ्ग | नदी, भारती |
| उकारान्त | पुल्लिङ्ग | गुरु, भानु |
| ऋकारान्त | पुल्लिङ्ग | पितृ |
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः |
| द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
| तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
| षष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् |
| सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु |
शब्दरूपाणि पाठ संस्कृत भाषा के नामों (संज्ञाओं) के रूपों का ज्ञान कराता है। संस्कृत में शब्दों के रूप लिङ्ग, वचन और विभक्ति के अनुसार बदलते हैं। अकारान्त, आकारान्त, इकारान्त, ईकारान्त, उकारान्त और ऋकारान्त शब्दों के रूप अलग-अलग नियमों से बनते हैं। सर्वनाम शब्दों के भी विशेष रूप होते हैं। शब्द रूपों का ज्ञान ही शुद्ध संस्कृत वाक्य-रचना का आधार है। विद्यार्थियों को प्रमुख शब्दों के रूप तीनों वचनों में कण्ठस्थ करने चाहिए। नियमित अभ्यास से ही शब्द रूपों में निपुणता आती है। इस प्रकार यह पाठ संस्कृत अध्ययन की नींव प्रस्तुत करता है।